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भारत में मेडिकल कॉलेज शुरू करना अब आसान? NMC ने नियम बदले, चेयरमैन ने खुद बताया

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नई दिल्ली, भारत में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव हुआ है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने अपने नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किया है, जिससे भारत में मेडिकल कॉलेज खोलना आसान और अधिक लचीला हो गया है। यह बदलाव लाखों छात्रों, अभिभावकों, निजी और सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थाओं तथा शिक्षा क्षेत्र के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि अब केवल नॉन‑प्रॉफिट कंपनियाँ ही नहीं, बल्कि प्रॉफिट‑आधारित कंपनियाँ भी भारत में मेडिकल कॉलेज स्थापित कर सकेंगी — वो भी Public Private Partnership (PPP) मोड के तहत। इस फैसले का ऐलान NMC के चेयरमैन डॉ. अभिजात चंद्रकांत सेठ (Abhijat Chandrakant Sheth) ने खुद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया।

NMC और भारतीय चिकित्सा शिक्षा

भारत में मेडिकल शिक्षा की स्थापना और संचालन का अधिकार नेशनल मेडिकल कमीशन एक्ट, 2019 के तहत आता है। NMC की स्थापना का मुख्य उद्देश्य था कि देश में उच्च गुणवत्ता की चिकित्सा शिक्षा, नैतिक मानकों के साथ उपलब्ध हो तथा डॉक्टरों की आपूर्ति बढ़े, जिससे देश की स्वास्थ्य सेवा मजबूत हो। चिकित्सकीय शिक्षा को NMC पहले से ही सुधार रहा है — जैसे NEET UG/PG के ज़रिये प्रवेश प्रक्रिया, सीटों की संख्या बढ़ाना, और गुणवत्ता मानदंड बनाना।

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आधे दर्जन से अधिक सालों में भारत ने मेडिकल सीटों और कॉलेजों की संख्या में आश्चर्यजनक वृद्धि देखी है। उदाहरण के लिये, 2024‑25 के लिए NMC ने 10,650 नई MBBS सीटों और 41 मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी, जिससे देश में कुल सीटें बढ़कर लगभग 1,37,600 हो गईं।

लेकिन इन उपलब्धियों के बावज़ूद, मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की प्रक्रिया पहले थोड़ी सख्त और जटिल मानी जाती थी — विशेष रूप से केवल Section‑8 नॉन‑प्रॉफिट कंपनियाँ ही ऐसा कर सकती थीं।

अब नियम क्या बदल गए हैं?

NMC ने हाल ही में बोर्ड बैठक में यह निर्णय लिया कि अब सिर्फ़ नॉन‑प्रॉफिट (Section‑8) कंपनियों को ही मेडिकल कॉलेज खोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अब प्रॉफिट‑आधारित कंपनियों को भी अनुमति दी जाती है, खासकर PPP (Public Private Partnership) मोड में।

Public Private Partnership (PPP) मॉडल का मतलब यह है कि सरकारी विभाग और निजी कंपनियाँ मिलकर एक मेडिकल कॉलेज स्थापित और संचालित कर सकती हैं। इसके तहत निजी क्षेत्र निवेश, प्रबंधन क्षमता और विशेषज्ञता लाता है, जबकि सरकारी भागीदार भूमि, अस्पताल संसाधन, और स्वास्थ्य सेवा नेटवर्क उपलब्ध कराता है।

यह बदलाव NMC चेयरमैन डॉ. अभिजात चंद्रकांत सेठ ने Dr. NTR University of Health Sciences (विजयवाड़ा) में प्रेस कॉन्फ़्रेंस में घोषित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले वाला नियम हटाया गया है ताकि दोनों प्रकार की कंपनियाँ चिकित्सा शिक्षा के विस्तार में भाग ले सकें।

नए नियम के प्रमुख बिंदु

अब केवल नॉन‑प्रॉफिट सेक्शन‑8 कंपनियाँ नहीं, बल्कि प्रॉफिट‑आधारित कंपनियाँ भी मेडिकल कॉलेज खोल सकती हैं।
PPपी मॉडल के ज़रिये सरकारी और निजी साझेदारी के तहत कॉलेज स्थापित करना संभव होगा।
NMC ने पुराने नियम को पूरी तरह हटाया — जिससे नियम अब अधिक लचीले और व्यवसाय‑अनुकूल हैं।
Standard Operating Procedures (SOPs) और एक्रेडिटेशन फ्रेमवर्क के ज़रिये गुणवत्ता को सुनिश्चित करने का प्रावधान जारी रखा गया है।
यह बदलाव राज्य सरकारों के सहयोग से लागू होगा और राज्यों को वित्त, भूमि और अस्पताल संसाधन देने में भागीदार बनाया जा सकता है।

NMC चेयरमैन का बयान

NMC चेयरमैन डॉ. अभिजात चंद्रकांत सेठ ने कहा:

“पहले केवल Section‑8 नॉन‑प्रॉफिट कंपनियों को मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की अनुमति थी, लेकिन अब हमने अपने नियमों को हटाकर प्रॉफिट‑आधारित कंपनियों को भी ऐसा करने की राह खोल दी है। हमारा मानना है कि सरकारी और निजी साझेदारी से संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकता है और गुणवत्ता वाली चिकित्सा शिक्षा अधिक लोगों तक पहुँच सकती है।”

उन्होंने आगे यह भी कहा कि PPP मॉडल पहले से कुछ राज्यों में सफल रहा है, जैसे गुजरात में जहाँ इसका उपयोग अस्पतालों को मेडिकल शिक्षा संस्थानों में बदलने के लिये किया जा रहा है।

PPP मॉडल — विस्तृत समझ

PPP क्या है?

Public Private Partnership या PPP दरअसल एक साझेदारी मॉडल है जिसमें सरकारी और निजी दोनों पक्ष मिलकर कोई परियोजना या संस्था चलाते हैं। भारत में यह मॉडल पहले से ही सड़क, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, और कुछ स्वास्थ्य परियोजनाओं में सफल रहा है।

मेडिकल शिक्षा में UIP रूप से इसका उपयोग इसलिए सुझाया जा रहा है क्योंकि:

सरकारी संसाधन (जैसे अस्पताल, चिकित्सक स्टाफ, भूमि) निजी निवेश के साथ जुड़ सकते हैं।
निजी निवेश बुनियादी ढांचा, तकनीक, और डिज़ाइन को विस्तार दे सकता है।
सरकारी अस्पतालों में पढ़ाई और सेवा दोनों का लाभ मिल सकता है — मरीजों को सब्सिडाइज़्ड या मुफ्त इलाज मिलना भी संभव है।
राज्यों द्वारा संसाधन नियंत्रण के कारण निगरानी और गुणवत्ता को सुनिश्चित रखना आसान होगा।

भारत की भौगोलिक विविधता को ध्यान में रखते हुए यह मॉडल ग्रामीण व दूरदराज़ क्षेत्रों में शिक्षा और सेवा दोनों को मजबूत कर सकता है — जहाँ सरकारी संसाधन अकेले सीमित रहते हैं।

बदलाव के संभावित सकारात्मक प्रभाव

सीटों और कॉलेजों में वृद्धि

Mediकल कॉलेजों की संख्या में काफी वृद्धि जारी है। पहले से NMC ने कई नए कॉलेजों और सीटों को मंजूरी दी है, जैसे 10,650 नई MBBS सीटें व 41 नई कॉलेजें
अब अगर प्रॉफिट‑आधारित कंपनियाँ भी प्रवेश करेंगी, तो देश भर में कॉलेजों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है

संसाधनों का बेहतर उपयोग

PPP मॉडल से सरकारी अस्पतालों के संसाधनों (जैसे बड़े अस्पताल बुनियादी ढाँचा) का अधिकतम उपयोग पढ़ाई के लिये किया जा सकेगा। यह ओवरहेड लागत को कम करेगा और शिक्षा‑सेवा संयोजन को मजबूती देगा।

स्वास्थ्य सेवा की पहुंच में सुधार

राज्यों के साथ साझेदारी से यह व्यवस्था ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों तक पहुंच सकती है जहां पहले कॉलेज स्थापित करना कठिन था। सरकारी स्वास्थ्य नेटवर्क, निजी निवेश के साथ बड़े स्तर पर काम करेगा, जिससे सेवा और शिक्षा दोनों में सुधार होगा।

 गुणवत्ता और मानक

NMC ने यह भी कहा है कि चाहे कॉलेज नॉन‑प्रॉफिट हो या प्रॉफिट‑आधारित — गुणवत्ता मानकों और प्रशिक्षण‑रूपरेखा पर कोई समझौता नहीं होगा। इसके लिये स्वतंत्र SOPs और एक्रेडिटेशन प्रक्रियाएँ लागू की जाएँगी।

संभावित आलोचना और चुनौतियाँ

बेशक बदलाव सकारात्मक है, लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियाँ और प्रश्न भी सामने आए हैं:

क्या प्रॉफिट‑आधारित कंपनियों के शामिल होने से फीसों में वृद्धि होगी?
क्या गुणवत्ता मानकों का सख़्ती से पालन होगा?
ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में संसाधन विभाजन कितना न्यायसंगत होगा?
क्या यह बदलाव गरीब व मध्यम वर्गीय छात्रों के लिये किफ़ायती बनेगा?

विशेषज्ञों का कहना है कि निगरानी तंत्र, स्पष्ट गुणवत्ता मानक, और राज्य‑सरकार की सक्रिय भागीदारी ही इन चुनौतियों को सुलझा सकती है।

छात्रों और अभिभावकों के लिये क्या मायने?

इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ छात्रों को मिलेगा — खासकर उन लोगों को जो NEET UG/PG परीक्षा के ज़रिये मेडिकल शिक्षात्राएँ हासिल करना चाहते हैं।

फायदे:
ज्यादा सीटें और कॉलेज विकल्प।
सरकार‑निजी साझेदारी से शिक्षा का स्‍तर उच्च होने की संभावना।
ग्रामीण व दूरदराज़ इलाकों में मेडिकल कॉलेज खोलने की राह आसान।
सरकारी अस्पताल नेटवर्क के कारण क्लिनिकल अनुभव का अवसर कहीं अधिक मिलेगा

ध्यान देने योग्य बातें:
फीस संरचना, सीट आरक्षण और क़्वालिटी नियंत्रण नीति के अनुसार तय होंगे।
छात्रों को सही संसाधन, सलाह, और कॉलेज का चुनाव समझदारी से करना होगा।

आज का यह निर्णय भारतीय चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र के लिये एक नया अध्याय खोलता है। जहाँ परंपरागत नियम केवल नॉन‑प्रॉफिट आंकड़ों तक सीमित थे, वहीं अब प्रॉफिट‑आधारित कंपनियाँ और PPP मॉडल मिलकर देश के डॉक्टरों की अगली पीढ़ी को तैयार करेंगे।

यह बदलाव शिक्षा, संसाधन, गुणवत्ता और सेवा के दृष्टिकोण से एक मिश्रित अवसर और चुनौती दोनों प्रदान करता है। यह देखने वाली बात होगी कि छात्रों, अभिभावकों, सरकारी भागीदारों और चिकित्सा शिक्षा संस्थाओं के लिये इसका दीर्घकालिक प्रभाव क्या होगा।

एक बात स्पष्ट है — भारत अब विश्व‑स्तरीय चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराने और डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम आगे बढ़ा रहा है

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