
“RRB, रेलवे, बिहार सरकार समेत 40 से अधिक विभागों के नाम से ‘सरकारी नौकरी’ का झांसा देकर संगठित फर्जीवाड़ा — ED ने 15 शहरों में छापेमारी, मामला उद्योग‑पैमाने पर धनशोधन और ठगी का”
सरकारी नौकरी का सपना और ठगी का जाल
भारत में सरकारी नौकरी का सपना लाखों युवाओं की पहली प्राथमिकता है। राजधानी दिल्ली से लेकर छोटे‑छोटे शहरों तक देश के युवा पीढ़ी सरकारी सेवा में जाने के लिए कटिबद्ध रहते हैं। यही अवसरों की भीड़ गिरोहों के लिए भरोसा कमाने का माध्यम बन जाती है, जिनका लक्ष्य युवाओं को झांसे में लेकर धनशोधन एवं धोखाधड़ी करना है।
हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़े पैमाने पर ऐसे संगठित फर्जीवाड़ा रैकेट का पर्दाफाश किया है, जो सरकारी नौकरी का झूठा वादा करके बेरोज़गारों को धोखा दे रहा था। यह मामला केवल Railway या RRB भर्ती तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें 40 से अधिक सरकारी विभागों के नाम का उपयोग किया गया — जैसे वन विभाग, भारतीय डाक, आयकर विभाग, उच्च न्यायालय, लोक निर्माण विभाग, बिहार सरकार, डीडीए, राजस्थान सचिवालय आदि।
घोटाले का प्रारंभ: रेलways से फर्जीवाड़ा पहचान में आया
जांच के शुरुआती चरणों में यह मामला Indian Railways के नाम पर नौकरी नीरस घोटाले के रूप में सामने आया. ED को प्रारंभिक सूचना मिली कि कुछ बेरोज़गारों को रेलवे भर्ती की झांसी में फर्जी नियुक्ति पत्र और जॉइनिंग लेटर दिए जा रहे हैं। लेकिन जैसे‑जैसे टीम ने गहराई से विश्लेषण किया, यह घोटाला वास्तव में एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा निकला जो 40 से अधिक सरकारी संगठनों और विभागों में नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी कर रहा था।
जांच अधिकारियों ने बताया कि गिरोह ने सरकारी विभागों से मिलता‑जुलता ईमेल डोमेन बनाया था और फिर फर्जी ई‑मेल अकाउंट्स से नियुक्ति पत्र भेजे थे। यह तकनीक युवा उम्मीदवारों को विश्वसनीय और वास्तविक सरकारी नौकरी के रूप में विश्वास में लेने के लिए काफी प्रभावी साबित हुई थी।
गिरोह का modus operandi — धोखा देने की योजना
अनुसंधान में पता चला कि यह गिरोह केवल फर्जी नियुक्ति पत्र तक ही सीमित नहीं था। उन्होंने भरोसा जीतने के लिए समय‑समय पर कुछ उम्मीदवारों को 2‑3 महीने तक सैलरी भी भुगतान जारी रखी, ताकि वे समझें कि वे वास्तव में नौकरी पर नियुक्त हैं। इस धोखे के चलते पीड़ितों ने यह कल्पना कर ली कि वास्तविक सरकारी नौकरी उन्हें मिल गई है।
कुछ प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
- गिरोह ने RRB (Railway Recruitment Board) और Indian Railways के नाम पर नौकरी भेजकर शुरू किया।
- बाद में जांच में पता चला कि यह 40 से अधिक सरकारी विभागों तथा संस्थानों में विस्तार छिपा हुआ था।
- वे फर्जी ई‑मेल डोमेन बनाकर फ़र्जी नियुक्ति पत्र जारी करते थे।
- कुछ पीड़ितों को आरपीएफ (RPF), ट्रेवलिंग टिकट परीक्षक (TTE) और टेक्नीशियन जैसी पोस्टों पर फर्जी नियुक्ति बंटवाए गए थे।
- भरोसा जीतने के बाद उनसे फॉर्मलिटी फीस, प्रशिक्षण राशि, सेवा शुल्क आदि के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती थी।
इस सभी योजनाबद्ध गतिविधि में पैसे का मनी लॉन्डरिंग रूप से भी इस्तेमाल होने का संदेह है, जिस पर ED ने अपनी जांच केंद्रित की है।
सबसे बड़ी रेड: 6 राज्यों में 15 ठिकानों पर छापेमारी
प्रवर्तन निदेशालय ने 8 जनवरी 2026 को इस फर्जीवाड़ा रैकेट के खिलाफ देशव्यापी तलाशी अभियान शुरू किया। यह अभियान 15 स्थानों पर आयोजित हुआ, जो कई राज्यों में फैला हुआ है। ED की टीमों ने दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और संदिग्ध लेन‑देन के सबूतों को जब्त किया है।
छापेमारी निम्नलिखित इलाकों में की जा रही है:
- बिहार — मुज़फ़्फरपुर (एक स्थान), मोतिहारी (दो स्थान)
- पश्चिम बंगाल — कोलकाता (दो स्थान)
- केरल — एर्नाकुलम, पंडालम, अडूर, कोडुर
- तमिलनाडु — चेन्नई
- गुजरात — राजकोट
- उत्तर प्रदेश — गोरखपुर (दो स्थान), प्रयागराज, लखनऊ
यह व्यापक अभियान ED के पटना जोनल ऑफिस द्वारा राज्य पुलिस के सहयोग में संचालित किया जा रहा है, जिससे गिरोह के गहरे नेटवर्क को बेनकाब किया जा सके।
जांच एजेंसी का बयान और धक्का
ED अधिकारियों ने बताया है कि इस फर्जीवाड़े के पीछे संगठित गिरोह वर्षों से काम कर रहा था और इसका पैमाना काफी बड़ा है क्योंकि यह सिर्फ रेलवे तक सीमित नहीं रहा — बल्कि Forest Department, Indian Post, Income Tax Department, High Courts, PWD जैसे विभागों तक फैल चुका था।
एक अधिकारी ने कहा, “यह मामला धनशोधन की जांच के दायरे में आ चुका है और हम यह देख रहे हैं कि किस प्रकार से धोखाधड़ी से प्राप्त धन को किस दिशा में निवेश/संरक्षित किया गया।”
पीड़ितों की कहानी — नौकरी का सपना, धोखे का अंजाम
पीड़ितों और पोस्टेड उम्मीदवारों ने बताया कि उन्हें फ़र्जी नियुक्ति पत्र, फर्जी ID कार्ड और ट्रैनिंग कैलेंडर भेजा गया था। कुछ को तो टैक्स डिडक्शन स्लिप और बैंक स्टेटमेंट्स भी दिखाए गए, जिससे वे समझ बैठे कि वे सरकारी कर्मचारी हैं।
लेकिन जैसे‑जैसे मामला फैलता गया, जब उनसे अतिरिक्त भुगतान (प्रशिक्षण शुल्क, ज्वाइनिंग फीस, दस्तावेज़ प्रोसैसिंग चार्ज आदि) मांगा गया, तो संदिग्ध संकेत मिलने लगे। कई पीड़ितों ने अपनी कठिनाइयाँ और वित्तीय नुकसान भी दर्ज करवाए हैं, लेकिन शिकायत के बावजूद उन्हें आगे सही सहायता नहीं मिल पाई।
यह सबूत इस बात की ओर संकेत करता है कि गिरोह समस्याओं का लाभ उठा रहा था, विशेष रूप से उन युवाओं के लिए जो बिना वास्तविक सरकारी वेतन जानकारी और पात्रता सुनिश्चित किए बिना भारी रकम जमा कर देते थे।
विशेषज्ञों की राय और चेतावनी
विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसे गिरोह भरोसे का दुरुपयोग करते हैं — जब कोई नौकरी खोजने वाला व्यक्ति सरकारी विभागों के नाम को देखता है, तो वह तुरंत विश्वसनीय समझ लेता है। वहीं दूसरी ओर, ये गिरोह email spoofing और ग़लत नौकरी domain name spoofing जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे धोखा आसान हो जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक:
सरकारी भर्ती जानकारी केवल आधिकारिक .gov.in वेबसाइटों से ही देखनी चाहिए।
कभी भी किसी नौकरी की फीस/लागत UPI/QR कोड या निजी खातों में न भेजें।
यदि किसी ने पैसे दे दिए हैं, तो सबूत संजोकर तुरंत शिकायत करें।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि ऐसे गिरोह राष्ट्रीय रोजगार नीतियों और ऑडिट नियमों में छेद का फायदा उठा रहे हैं।
कानूनी दायरा और आगे की कार्रवाई
ED की कार्रवाई सिर्फ छापेमारी तक सीमित नहीं है। अब मामला मनी लॉन्डरिंग, धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार और संगठित अपराध की श्रेणी में दर्ज है। ED मूल रूप से यह पता लगाने की कोशिश करेगा कि ठगी से प्राप्त धन को कहाँ खर्च किया गया, संरक्षित किया गया या निवेश किया गया।
आगे की कार्रवाई के तहत:
गिरोह के मुख्य संचालकों की पहचान और गिरफ्तारी
फंड ट्रेल (money trail) की पूर्ण जांच
बैंकिंग रिकॉर्ड और वित्तीय लेन‑देन की समीक्षा
पीड़ितों की सहायता सूची तैयार करना आदि प्रक्रिया जारी है।
सरकार और ED की चेतावनी
सरकारी एजेंसियों द्वारा स्पष्ट कहा जा चुका है कि:
“कोई भी सरकारी भर्ती आधिकारिक विभाग के अलावा किसी ईमेल, वॉट्सऐप या निजी पोर्टल से नहीं आती है।”
“सीधे आवेदन करें केवल मान्यता प्राप्त सरकारी पोर्टल ही भरोसे का स्थान हैं।”
यह फर्जी सरकारी नौकरी घोटाला 16 जनवरी 2026 तक जारी जांच में स्पष्ट हो रहा है कि कैसे एक संगठित गिरोह ने बेरोज़गार युवाओं के भरोसे का दुरुपयोग किया और 40 से अधिक सरकारी विभागों के नाम पर नौकरी का झांसा देकर करोड़ों रुपये का व्यापार किया। ED की यह कार्रवाई देशभर में 15 स्थानों पर संतुलित तलाशी अभियान बन चुकी है, और यह उन युवाओं के खिलाफ एक सतर्क करने वाली खबर भी बन गई है कि सरकारी भर्ती केवल आधिकारिक सरकारी चैनलों पर ही मान्य है।








