
मोशन सिकनेस से लेकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं तक, जानिए पूरी रिपोर्ट
नई दिल्ली। गाड़ी, बस, ट्रेन या पहाड़ी रास्तों पर सफर करते समय जी मिचलाना और उलटी आना बहुत से लोगों के लिए आम समस्या है। आमतौर पर इसे लोग हल्के में लेकर “सफर की दिक्कत” मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यदि यह परेशानी बार-बार और लगभग हर यात्रा में होने लगे, तो यह शरीर के भीतर छिपी कुछ स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत भी हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार सफर के दौरान उलटी आना केवल असहजता नहीं, बल्कि शरीर की चेतावनी भी हो सकती है।
क्या है मोशन सिकनेस?
सफर के दौरान उलटी आने का सबसे आम कारण मोशन सिकनेस है। जब शरीर की आंखें, कान और मस्तिष्क अलग-अलग प्रकार के संकेत भेजते हैं, तो दिमाग भ्रमित हो जाता है। आंखें चलती हुई चीजें देखती हैं, जबकि शरीर स्थिर महसूस करता है या इसके विपरीत स्थिति बनती है। इसी असंतुलन के कारण जी मिचलाना, चक्कर और उलटी जैसी समस्या उत्पन्न होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जिन लोगों का संतुलन तंत्र (वेस्टिब्युलर सिस्टम) अधिक संवेदनशील होता है, उन्हें मोशन सिकनेस की संभावना अधिक रहती है। यह समस्या बच्चों, महिलाओं और माइग्रेन से पीड़ित लोगों में ज्यादा देखी जाती है।
सफर में उलटी आना किन संकेतों की ओर इशारा करता है?
कमजोर संतुलन तंत्र का संकेत
यदि आपको थोड़ी दूरी के सफर में भी चक्कर और उलटी आने लगती है, तो यह संकेत हो सकता है कि आपके कान के अंदर मौजूद संतुलन तंत्र ठीक से काम नहीं कर रहा। आंतरिक कान का यह हिस्सा शरीर के संतुलन और दिशा का नियंत्रण करता है। इसमें गड़बड़ी होने पर मोशन सिकनेस बढ़ जाती है।
पाचन तंत्र की कमजोरी
सफर के दौरान उलटी आने का एक बड़ा कारण कमजोर पाचन तंत्र भी हो सकता है। यात्रा से पहले भारी, तला-भुना या अत्यधिक मसालेदार भोजन करने से पेट में एसिड बढ़ जाता है। वहीं खाली पेट सफर करने से भी उलटी की समस्या हो सकती है।
डॉक्टर बताते हैं कि जिन लोगों को गैस, एसिडिटी या अपच की शिकायत रहती है, उन्हें सफर में ज्यादा परेशानी होती है।
माइग्रेन से जुड़ी समस्या
कई बार सफर में उलटी आना माइग्रेन से जुड़ा होता है। ऐसे लोगों को सफर के दौरान सिरदर्द, रोशनी से परेशानी और उलटी तीनों समस्याएं एक साथ हो सकती हैं। इसे माइग्रेन-एसोसिएटेड मोशन सिकनेस कहा जाता है।
यह संकेत देता है कि समस्या केवल पेट से नहीं, बल्कि न्यूरोलॉजिकल कारणों से भी जुड़ी हो सकती है।
एंग्जायटी और मानसिक तनाव का असर
सफर से पहले ही घबराहट, डर या बेचैनी महसूस होना भी उलटी का कारण बन सकता है। मानसिक तनाव के कारण शरीर में एड्रेनालिन हार्मोन बढ़ता है, जिससे पाचन प्रभावित होता है और जी मिचलाने लगता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि जिन लोगों को ट्रैवल एंग्जायटी होती है, उनमें यह समस्या ज्यादा देखी जाती है।
हार्मोनल बदलाव का संकेत
महिलाओं में सफर के दौरान उलटी आना कई बार हार्मोनल बदलाव से जुड़ा होता है। गर्भावस्था के शुरुआती चरण, पीरियड्स के दौरान या हार्मोनल असंतुलन की स्थिति में यह समस्या बढ़ सकती है।
यह शरीर का संकेत हो सकता है कि हार्मोनल संतुलन में बदलाव हो रहा है।
कान से जुड़ी बीमारियां
यदि उलटी के साथ कान में दर्द, भारीपन या सुनाई कम देना जैसी समस्या हो, तो यह आंतरिक कान की बीमारी का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में इसे हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है।
बच्चों और बुजुर्गों में क्यों ज्यादा होती है समस्या?
बच्चों में संतुलन तंत्र पूरी तरह विकसित नहीं होता, जबकि बुजुर्गों में यह कमजोर होने लगता है। यही कारण है कि इन दोनों वर्गों में मोशन सिकनेस ज्यादा देखने को मिलती है।
बुजुर्गों में इसके साथ ब्लड प्रेशर, शुगर और दवाओं के साइड इफेक्ट भी उलटी का कारण बन सकते हैं।
कब बन सकती है यह गंभीर बीमारी का संकेत?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि निम्नलिखित लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए:
- हर छोटे सफर में उलटी
- उलटी के साथ तेज सिरदर्द
- बार-बार चक्कर आना
- कान में दर्द या सुनाई कम देना
- उलटी में खून आना
- बेहोशी या अत्यधिक कमजोरी
ये लक्षण किसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल या कान की बीमारी का संकेत हो सकते हैं।
सफर में उलटी से बचाव के घरेलू उपाय
- सफर से पहले हल्का भोजन करें
- अदरक का टुकड़ा या अदरक की चाय लें
- नींबू पानी या सौंफ का सेवन करें
- गाड़ी में आगे की सीट पर बैठें
- खिड़की से बाहर स्थिर वस्तुओं को देखें
- मोबाइल या किताब पढ़ने से बचें
ये उपाय मोशन सिकनेस को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
दवाइयों की भूमिका
कुछ मामलों में डॉक्टर मोशन सिकनेस की दवाइयां सलाह देते हैं, लेकिन इन्हें बिना चिकित्सकीय परामर्श के लंबे समय तक लेना ठीक नहीं। दवाइयों के साथ जीवनशैली में सुधार सबसे जरूरी है।
योग और जीवनशैली का महत्व
विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित योग, प्राणायाम और हल्का व्यायाम संतुलन तंत्र को मजबूत करता है। तनाव कम करने से भी सफर के दौरान उलटी की समस्या में सुधार आता है।
सफर में बार-बार उलटी आना सामान्य समस्या जरूर है, लेकिन इसे पूरी तरह नजरअंदाज करना सही नहीं। यह शरीर के संतुलन तंत्र, पाचन, मानसिक स्थिति या हार्मोनल बदलाव का संकेत हो सकता है। समय पर कारण पहचानकर सही उपाय अपनाने से इस समस्या से राहत पाई जा सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि यदि यह परेशानी लगातार बनी रहे, तो स्वयं उपचार करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।









