
सर्दियों का मौसम आते ही ज्यादातर लोगों को हाथ-पैर ठंडे होने की शिकायत रहती है। ठंडी हवा, गिरता तापमान और कम धूप इसके सामान्य कारण माने जाते हैं, लेकिन अगर हल्की ठंड में भी हाथ बर्फ जैसे ठंडे पड़ जाते हैं, रंग बदलने लगता है या झनझनाहट महसूस होती है, तो इसे सिर्फ मौसम का असर समझकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति कई बार शरीर के भीतर छिपी किसी गंभीर समस्या की ओर इशारा कर सकती है।
डॉक्टरों का कहना है कि लगातार ठंडे हाथों का सबसे आम कारण ब्लड सर्कुलेशन की गड़बड़ी हो सकता है। जब हाथों तक पर्याप्त मात्रा में खून नहीं पहुंच पाता, तो वे ठंडे, सुन्न या नीले पड़ने लगते हैं। यह समस्या उन लोगों में ज्यादा देखी जाती है जो लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहते हैं, धूम्रपान करते हैं या जिनकी जीवनशैली बेहद सुस्त होती है।
इसके अलावा रेनॉड्स डिजीज (Raynaud’s Disease) भी हाथों के अत्यधिक ठंडे रहने का एक बड़ा कारण हो सकती है। इस स्थिति में ठंड या तनाव के दौरान हाथों की छोटी रक्त नलिकाएं सिकुड़ जाती हैं, जिससे उंगलियां सफेद, नीली या बैंगनी रंग की दिखाई देने लगती हैं। कुछ समय बाद उनमें तेज दर्द या झनझनाहट भी महसूस हो सकती है। अगर यह समस्या बार-बार हो रही है, तो चिकित्सकीय जांच बेहद जरूरी मानी जाती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि एनीमिया यानी खून की कमी के कारण भी हाथ-पैर ठंडे रह सकते हैं। शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा कम होने पर ऑक्सीजन सही तरह से अंगों तक नहीं पहुंच पाती, जिससे ठंड और कमजोरी महसूस होती है। खासकर महिलाओं में यह समस्या आम देखी जाती है।
थायरॉयड की गड़बड़ी, विशेष रूप से हाइपोथायरॉइडिज्म, भी ठंडे हाथों की वजह बन सकती है। थायरॉयड हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करता है। जब इसकी मात्रा कम हो जाती है, तो शरीर की गर्मी बनाए रखने की क्षमता घट जाती है और व्यक्ति को ज्यादा ठंड लगने लगती है।
कुछ मामलों में डायबिटीज भी इसका कारण हो सकती है। लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रहने से नसों को नुकसान पहुंचता है, जिसे न्यूरोपैथी कहा जाता है। इससे हाथों में ठंडापन, सुन्नता और झनझनाहट महसूस हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हाथों के साथ-साथ बार-बार थकान, चक्कर, त्वचा का पीला पड़ना, बालों का झड़ना या वजन बढ़ना जैसी समस्याएं भी दिख रही हों, तो इसे हल्के में न लें। समय पर जांच और इलाज से गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।
सर्दियों में हाथों को गर्म रखने के लिए ऊनी दस्ताने पहनना, गुनगुना पानी पीना, संतुलित आहार लेना और नियमित व्यायाम करना फायदेमंद होता है। लेकिन अगर समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी है।
सर्दियों में ठंडे हाथ सिर्फ मौसम की मार नहीं होते, बल्कि कई बार यह शरीर के अंदर चल रही किसी समस्या का संकेत भी हो सकते हैं। सही समय पर पहचान और उपचार ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है।








