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भिण्ड में अपराध नियंत्रण की नई इबारत : पुलिस अधीक्षक असित यादव के नेतृत्व में बदली कानून-व्यवस्था की तस्वीर

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HQ Report

लेखक : एडवोकेट सौम्या शर्मा

भिण्ड जिला लंबे समय तक अपराध, भय और असुरक्षा की छवि से जुड़ा रहा है। हत्या, लूट, डकैती, रंगदारी, जुआ-सट्टा, पारिवारिक विवाद, महिला संबंधी शिकायतें और ज़मीनी विवाद जैसे अपराध यहाँ की पहचान बनते चले गए थे। आमजन में पुलिस के प्रति अविश्वास और भय की भावना व्याप्त थी। किंतु पिछले दो वर्षों में भिण्ड जिले की कानून-व्यवस्था में जो सकारात्मक और ठोस परिवर्तन देखने को मिला है, उसने इस जिले की छवि को न केवल बदला है, बल्कि यह भी सिद्ध किया है कि यदि नेतृत्व संवेदनशील, रणनीतिक और ईमानदार हो, तो परिस्थितियाँ बदली जा सकती हैं।

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करीब दो वर्ष पूर्व जब श्री असित यादव ने भिण्ड के पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्यभार संभाला, उस समय जिले की स्थिति किसी से छिपी नहीं थी। अपराध का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा था और आम नागरिक स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहा था। ऐसे समय में पुलिस अधीक्षक के रूप में श्री यादव ने कार्यभार संभालते ही स्पष्ट कर दिया था कि उनका लक्ष्य केवल अपराध दर्ज करना नहीं, बल्कि अपराध को जड़ से रोकना है।

अपने कार्यकाल की शुरुआत से ही श्री असित यादव ने अपराध नियंत्रण को प्राथमिकता दी। उन्होंने जिले की भौगोलिक, सामाजिक और आपराधिक संरचना का गहन अध्ययन किया और उसी आधार पर रणनीतिक योजना तैयार की। हत्या, लूट, डकैती और गंभीर अपराधों पर विशेष निगरानी रखी गई। संगठित अपराधों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की गई और अपराधियों के मन में कानून का भय पैदा किया गया। एनएसए जैसी कठोर धाराओं का प्रयोग भी आवश्यकतानुसार किया गया, जिससे अपराधियों को यह संदेश स्पष्ट रूप से मिल सके कि भिण्ड में कानून से ऊपर कोई नहीं है।

पिछले दो वर्षों के आंकड़े यह स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि भिण्ड जिले में अपराधों का ग्राफ तीव्र गति से नीचे आया है। हत्या, लूट और डकैती जैसे जघन्य अपराधों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। यह कमी किसी आकस्मिक घटना का परिणाम नहीं, बल्कि सुनियोजित, निरंतर और मेहनतपूर्ण पुलिसिंग का परिणाम है।

श्री असित यादव की कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने केवल दमनात्मक पुलिसिंग पर भरोसा नहीं किया, बल्कि संवाद और समाधान को भी उतना ही महत्व दिया। पारिवारिक मामलों में पुलिस की भूमिका को केवल मुकदमा दर्ज करने तक सीमित न रखते हुए, उन्होंने समझाइश, काउंसलिंग और आपसी संवाद के माध्यम से विवाद सुलझाने पर जोर दिया। इससे न केवल अनावश्यक मुकदमों में कमी आई, बल्कि कई परिवार टूटने से भी बच गए।

महिला संबंधी शिकायतों के मामलों में भी विशेष संवेदनशीलता दिखाई गई। महिलाओं को थाने में सम्मानजनक व्यवहार मिले, इसके लिए सख्त निर्देश दिए गए। शिकायतों की त्वरित सुनवाई और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की गई। इससे महिलाओं में पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ा और वे खुलकर अपनी समस्याएँ साझा करने लगीं।

एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि झूठे अपराध पंजीबद्ध होने से रोकने के लिए विशेष रूप से कार्य किया गया। कई बार व्यक्तिगत दुश्मनी या पारिवारिक विवादों में झूठे प्रकरण दर्ज करा दिए जाते थे, जिससे निर्दोष लोग अनावश्यक रूप से कानूनी पचड़ों में फँस जाते थे। श्री यादव ने इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए जांच प्रक्रिया को और अधिक सख्त व पारदर्शी बनाया, जिससे न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुआ।

सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में भी पुलिस अधीक्षक द्वारा व्यापक जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए। हेलमेट, सीट बेल्ट, ओवरस्पीडिंग और यातायात नियमों के पालन को लेकर लगातार अभियान चलाए गए। स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। नशा मुक्ति को लेकर भी विशेष अभियान चलाया गया, क्योंकि नशा अपराधों की जड़ माना जाता है। युवाओं को नशे से दूर रखने और समाज में सकारात्मक संदेश देने के लिए पुलिस ने सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर कार्य किया।

यातायात नियंत्रण को लेकर भी काफी मेहनत की गई। हालांकि यह भी एक सच्चाई है कि भिण्ड की सड़कों की स्थिति और जनसंख्या के अनुपात में यातायात संसाधनों की कमी के कारण उतनी सफलता नहीं मिल सकी, जितनी पुलिस अधीक्षक द्वारा अनुमानित की गई थी। फिर भी ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने की दिशा में निरंतर प्रयास किए गए और यह स्पष्ट किया गया कि समस्याओं को स्वीकार कर उनके समाधान की दिशा में काम करना ही बेहतर पुलिसिंग है।

श्री असित यादव के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल अपराधों में कमी नहीं, बल्कि जनता और पुलिस के बीच विश्वास की बहाली रही। उन्होंने स्वयं जनता से संवाद स्थापित किया। आम नागरिकों से सादगी और आत्मीयता से मिलना, उनकी समस्याएँ सुनना और समाधान का प्रयास करना उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा। यही कारण है कि भिण्ड जिले की जनता ने उन्हें केवल एक अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि एक विश्वासपात्र व्यक्ति के रूप में स्वीकार किया।

जनता का यह विश्वास तब और स्पष्ट रूप से सामने आया, जब श्री असित यादव का डीआईजी पद पर पदोन्नति हुई। पदोन्नति की खुशी के साथ-साथ जिले से उनके स्थानांतरण की आशंका ने नागरिकों को भावुक कर दिया। कार्यालय के बाहर दिनभर आम नागरिकों की भीड़, शुभकामनाएँ देने वालों की कतारें और आंखों में आंसू यह दर्शाते थे कि भिण्ड की जनता ने अपने पुलिस अधीक्षक को किस हद तक अपनाया था।

शायद ही इससे पहले भिण्ड जिले में किसी पुलिस अधिकारी को इतना प्रेम, सम्मान और विश्वास मिला हो। यह सम्मान किसी प्रचार का परिणाम नहीं, बल्कि दो वर्षों की ईमानदार, संवेदनशील और परिणामोन्मुख सेवा का प्रतिफल है। ऐसे अधिकारी विरले ही होते हैं, जो अपने कार्यकाल में जनता का दिल जीत लेते हैं और वर्षों तक याद रखे जाते हैं।

श्री असित यादव का भिण्ड में कार्यकाल इस बात का उदाहरण है कि पुलिस यदि जनता की मित्र बने, उनकी भाषा समझे और समस्याओं को केवल कानून नहीं, बल्कि मानवता के दृष्टिकोण से देखे, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। उनका यह कार्यकाल आने वाले अधिकारियों के लिए एक मानक और प्रेरणा के रूप में देखा जाएगा।

भिण्ड जिले की जनता यह आशा करती है कि श्री यादव जहाँ भी अपनी सेवाएँ देंगे, वहाँ भी इसी तरह कानून-व्यवस्था सुदृढ़ होगी और जनता-पुलिस के बीच विश्वास का पुल मजबूत होगा। भिण्ड में उनके द्वारा शुरू की गई पहलें और स्थापित की गई कार्यसंस्कृति आने वाले वर्षों तक जिले को लाभ देती रहेंगी।

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