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विद्युत नियामक आयोग ने टैरिफ याचिकाओं पर जन-सुनवाई की तारीख घोषित की, दो दिन ऑनलाइन और दो दिन ऑफलाइन होगी सुनवाई

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HQ Report

राज्य में बिजली उपभोक्ताओं, उद्योगों, किसानों और अन्य हितधारकों के लिए महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों द्वारा दायर टैरिफ याचिकाओं पर जन-सुनवाई के लिए विस्तृत कार्यक्रम घोषित कर दिया है। आयोग ने पारदर्शिता और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस बार सुनवाई की प्रक्रिया को दो भागों में विभाजित किया है, जिसमें दो दिन ऑनलाइन और दो दिन ऑफलाइन जन-सुनवाई आयोजित की जाएगी।

यह सुनवाई राज्य की प्रमुख बिजली कंपनियों द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2029-30 तक के लिए टैरिफ निर्धारण, वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ARR), पूंजी निवेश योजना (CIP) और पूर्व वर्षों के वित्तीय समायोजन (True-up) से संबंधित याचिकाओं पर आयोजित की जा रही है। आयोग ने उपभोक्ताओं, उद्योग संगठनों, किसान समूहों, स्थानीय निकायों और आम नागरिकों से इन याचिकाओं पर सुझाव और आपत्तियां प्रस्तुत करने की अपील की है।

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यह प्रक्रिया राज्य की बिजली दरों के निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, क्योंकि इसी के आधार पर आने वाले वर्षों के लिए बिजली दरों में संशोधन, शुल्क संरचना और बिजली वितरण प्रणाली की वित्तीय रूपरेखा तय की जाती है।


किन कंपनियों ने दायर की हैं टैरिफ और राजस्व से जुड़ी याचिकाएं

राज्य की प्रमुख सरकारी बिजली कंपनियों ने आयोग के समक्ष विभिन्न याचिकाएं प्रस्तुत की हैं। इनमें उत्पादन, प्रसारण और वितरण से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं। प्रमुख कंपनियों में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड, छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड, छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड और छत्तीसगढ़ स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर शामिल हैं।

इन कंपनियों ने आयोग के समक्ष वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए True-up यानी वास्तविक आय और खर्च का समायोजन करने के साथ ही वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2029-30 तक के लिए वार्षिक राजस्व आवश्यकता को मंजूरी देने का अनुरोध किया है। इसके अलावा उत्पादन, प्रसारण और वितरण से संबंधित टैरिफ दरों के निर्धारण के लिए भी याचिकाएं प्रस्तुत की गई हैं।

इन याचिकाओं में बिजली उत्पादन लागत, वितरण खर्च, ट्रांसमिशन नेटवर्क के रखरखाव, नई परियोजनाओं में निवेश, उपभोक्ता सेवाओं के विस्तार और अन्य वित्तीय पहलुओं का विस्तृत विवरण शामिल है।


क्या होता है ARR और True-up, क्यों जरूरी होती है जन-सुनवाई

वार्षिक राजस्व आवश्यकता यानी ARR बिजली कंपनियों द्वारा आयोग को प्रस्तुत की जाने वाली वह वित्तीय योजना होती है, जिसमें यह बताया जाता है कि कंपनी को बिजली उत्पादन, प्रसारण और वितरण के लिए कितनी लागत आएगी और उसे कितनी आय की आवश्यकता होगी।

True-up प्रक्रिया में कंपनियों द्वारा पहले निर्धारित अनुमानित लागत और वास्तविक खर्च के बीच अंतर का विश्लेषण किया जाता है। यदि कंपनियों का खर्च अनुमान से अधिक या कम होता है, तो उसका समायोजन भविष्य की बिजली दरों में किया जाता है।

इस पूरी प्रक्रिया में जन-सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इससे उपभोक्ताओं को अपनी राय रखने का अवसर मिलता है और आयोग को बिजली दरों के निर्धारण में जनता की जरूरतों और चिंताओं को ध्यान में रखने का मौका मिलता है।


दो दिन ऑनलाइन और दो दिन ऑफलाइन होगी जन-सुनवाई

आयोग ने इस बार सुनवाई की प्रक्रिया को अधिक सुलभ और व्यापक बनाने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों का उपयोग करने का निर्णय लिया है।

ऑनलाइन जन-सुनवाई राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के लिए निर्धारित तिथियों पर आयोजित की जाएगी, जिसमें संबंधित क्षेत्र के उपभोक्ता और हितधारक अपने निकटतम क्षेत्रीय कार्यालय में उपस्थित होकर या डिजिटल माध्यम से भाग ले सकेंगे।

इसके अलावा आयोग के मुख्यालय में ऑफलाइन जन-सुनवाई भी आयोजित की जाएगी, जिसमें विभिन्न उपभोक्ता वर्गों के लिए अलग-अलग समय निर्धारित किया गया है।


ऑनलाइन जन-सुनवाई का विस्तृत कार्यक्रम

ऑनलाइन जन-सुनवाई राज्य के छह प्रमुख क्षेत्रों में आयोजित की जाएगी। इनमें दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव, अंबिकापुर, जगदलपुर और रायगढ़ शामिल हैं।

पहले दिन दुर्ग, बिलासपुर और राजनांदगांव क्षेत्रों के लिए सुनवाई आयोजित की जाएगी। दूसरे दिन अंबिकापुर, जगदलपुर और रायगढ़ क्षेत्रों के लिए सुनवाई का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।

इन क्षेत्रों के उपभोक्ता संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय में जाकर ऑनलाइन माध्यम से सुनवाई में भाग ले सकेंगे और अपनी आपत्तियां और सुझाव प्रस्तुत कर सकेंगे।


ऑफलाइन जन-सुनवाई का कार्यक्रम

ऑफलाइन जन-सुनवाई आयोग के मुख्यालय में आयोजित की जाएगी, जिसमें विभिन्न उपभोक्ता वर्गों के लिए अलग-अलग सत्र निर्धारित किए गए हैं।

पहले दिन कृषि और कृषि से जुड़े उपभोक्ताओं, घरेलू उपभोक्ताओं और गैर-घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सुनवाई होगी।

दूसरे दिन स्थानीय निकायों, उद्योगों और उच्च वोल्टेज उपभोक्ताओं के लिए सुनवाई आयोजित की जाएगी।

इस दौरान उपभोक्ता सीधे आयोग के समक्ष उपस्थित होकर अपनी बात रख सकेंगे।


उपभोक्ताओं और उद्योगों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रक्रिया

बिजली दरों का निर्धारण राज्य की अर्थव्यवस्था और आम जनता के जीवन पर सीधा प्रभाव डालता है। यदि बिजली दरों में वृद्धि होती है, तो इसका असर घरेलू उपभोक्ताओं, किसानों और उद्योगों पर पड़ता है।

जन-सुनवाई के माध्यम से उपभोक्ता अपनी चिंताओं और सुझावों को आयोग के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं, जिससे बिजली दरों के निर्धारण में संतुलन बनाए रखा जा सके।


पूंजी निवेश योजना पर भी होगी सुनवाई

बिजली कंपनियों ने आगामी वर्षों के लिए पूंजी निवेश योजना भी प्रस्तुत की है। इसमें नई बिजली परियोजनाओं, ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार, नई सब-स्टेशन स्थापना और बिजली वितरण प्रणाली को मजबूत करने की योजनाएं शामिल हैं।

इस निवेश का उद्देश्य राज्य में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता में सुधार करना और भविष्य की मांग को पूरा करना है।


पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की पहल

आयोग द्वारा जन-सुनवाई आयोजित करने का उद्देश्य बिजली दरों के निर्धारण में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और उपभोक्ताओं की भागीदारी को बढ़ावा देना है।

इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित किया जाता है कि बिजली कंपनियां अपनी लागत और निवेश योजनाओं को उचित तरीके से प्रस्तुत करें और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की जाए।


उपभोक्ताओं को दिए गए आवश्यक निर्देश

आयोग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि यदि वे सुनवाई में भाग लेना चाहते हैं, तो वे निर्धारित तिथियों और समय के अनुसार संबंधित कार्यालय में उपस्थित हों।

जो व्यक्ति सुनवाई में प्रस्तुति देना चाहते हैं, उन्हें पहले से आयोग को सूचित करना होगा।


भविष्य की बिजली दरों पर पड़ेगा असर

इस जन-सुनवाई के बाद आयोग सभी सुझावों और आपत्तियों पर विचार करेगा और उसके आधार पर अंतिम टैरिफ आदेश जारी करेगा।

इस आदेश के बाद राज्य में बिजली दरों में संशोधन किया जा सकता है।


बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

यह जन-सुनवाई राज्य की बिजली व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और उपभोक्ता-हितैषी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इससे यह सुनिश्चित होगा कि बिजली दरों का निर्धारण उचित तरीके से किया जाए और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की जाए।


विद्युत नियामक आयोग द्वारा टैरिफ याचिकाओं पर जन-सुनवाई की तारीख घोषित करना राज्य के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस प्रक्रिया के माध्यम से उपभोक्ता अपनी आवाज उठा सकते हैं और बिजली दरों के निर्धारण में भागीदारी कर सकते हैं।

दो दिन ऑनलाइन और दो दिन ऑफलाइन आयोजित होने वाली यह जन-सुनवाई पारदर्शिता और जनभागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल बिजली कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित होगी बल्कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा भी होगी।

आने वाले समय में आयोग द्वारा जारी किया जाने वाला अंतिम टैरिफ आदेश राज्य की बिजली दरों और बिजली व्यवस्था की दिशा तय करेगा, जिसका असर लाखों उपभोक्ताओं और उद्योगों पर पड़ेगा।

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