
मध्यप्रदेश में स्व-सहायता समूहों को मिल रहा सशक्त प्रोत्साहन
5 लाख से अधिक समूहों से जुड़कर 65 लाख से अधिक महिलाएँ बनीं आत्मनिर्भर
भोपाल। मध्यप्रदेश में महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में स्व-सहायता समूह (Self Help Groups) एक मजबूत आधार स्तंभ बनकर उभरे हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से राज्य में व्यापक स्तर पर समूहों का गठन और प्रशिक्षण कार्य किया जा रहा है।
राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं के तहत 5 लाख से अधिक स्व-सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे जुड़कर 65 लाख से अधिक महिलाएँ स्वरोजगार, लघु उद्योग, कृषि-आधारित गतिविधियों और सेवा क्षेत्र में कार्य कर रही हैं।
आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएँ बचत, ऋण और उद्यमिता का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। बैंक लिंकेज कार्यक्रमों के तहत उन्हें आसान ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे वे डेयरी, सिलाई-कढ़ाई, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, जैविक खेती और अन्य लघु उद्योग स्थापित कर सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि समूह आधारित मॉडल ने महिलाओं में आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाया है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई ऊर्जा
स्व-सहायता समूहों के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। ग्रामीण हाट-बाजार, मेलों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए महिलाओं के उत्पादों को व्यापक पहचान मिल रही है।
इस पहल से न केवल महिलाओं की आय में वृद्धि हुई है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं।
सामाजिक सशक्तिकरण भी साथ-साथ
आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ सामाजिक परिवर्तन भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। समूहों से जुड़ी महिलाएँ अब ग्राम सभाओं में सक्रिय भागीदारी कर रही हैं, स्वास्थ्य और शिक्षा के मुद्दों पर जागरूकता फैला रही हैं और परिवार के निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
सरकार की प्राथमिकता: महिला उद्यमिता
राज्य सरकार द्वारा महिला उद्यमियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम, विपणन सहायता, कौशल विकास और डिजिटल साक्षरता अभियान संचालित किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसी प्रकार योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश महिला उद्यमिता के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।
मध्यप्रदेश में स्व-सहायता समूहों की सफलता यह दर्शाती है कि सामूहिक प्रयास और सही मार्गदर्शन से महिलाएँ न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि समाज और अर्थव्यवस्था को नई दिशा भी दे सकती हैं।
उद्यमिता से प्रगति और महिलाओं की आर्थिक उन्नति का यह मॉडल प्रदेश के विकास की मजबूत नींव साबित हो रहा है।









