
ट्रस्टों के लिए एमनेस्टी स्कीम को भी मंजूरी
नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भविष्य निधि (EPF) जमा पर 8.25 प्रतिशत ब्याज दर बनाए रखने की सिफारिश की है। यह निर्णय Mansukh Mandaviya की अध्यक्षता में हुई सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की बैठक में लिया गया। लगातार तीसरे वर्ष ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
श्रम मंत्रालय के अनुसार, वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद संगठन ने अपनी वित्तीय स्थिति संतुलित बनाए रखते हुए खाताधारकों को स्थिर रिटर्न सुनिश्चित किया है। प्रस्तावित ब्याज दर को अंतिम मंजूरी वित्त मंत्रालय की सहमति के बाद अधिसूचित किया जाएगा।
ट्रस्टों के लिए एकमुश्त एमनेस्टी स्कीम
बैठक में एक बार की ‘एमनेस्टी स्कीम’ को भी मंजूरी दी गई। यह योजना आयकर नियमों के तहत आने वाले उन ट्रस्टों के लिए है, जो अब तक EPF कानून के दायरे में नहीं आए हैं।
छह महीने की इस माफी योजना का उद्देश्य कंपनियों और ट्रस्टों को वैधानिक ढांचे में लाना तथा कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। मंत्रालय के अनुसार, जो ट्रस्ट पहले से कर्मचारियों को कानूनी प्रावधानों के बराबर या उससे बेहतर लाभ दे रहे हैं, उन्हें जुर्माना और ब्याज में राहत दी जाएगी।
सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 के अनुरूप नई योजनाएँ
बैठक में ‘सोशल सिक्योरिटी कोड 2020’ के अनुरूप नई सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को भी स्वीकृति दी गई। प्रस्तावित नई EPF योजना, EPS 2026 और EDLI योजना 2026 मौजूदा योजनाओं का स्थान लेंगी।
इन नई योजनाओं का उद्देश्य भविष्य निधि, पेंशन और बीमा लाभ के लिए अधिक स्पष्ट और सुदृढ़ कानूनी आधार तैयार करना है, जिससे पुराने नियमों से नए ढांचे में सुचारु संक्रमण सुनिश्चित हो सके।
निष्क्रिय खातों के निपटारे के लिए पायलट प्रोजेक्ट
लंबे समय से निष्क्रिय (इनऑपरेटिव) पड़े खातों के निपटारे के लिए बोर्ड ने एक पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। इसके तहत 1,000 रुपये या उससे कम की लावारिस राशि वाले खातों में ऑटो-सेटलमेंट प्रक्रिया स्वतः प्रारंभ की जाएगी।
यदि यह पहल सफल रहती है, तो इसे 1,000 रुपये से अधिक शेष राशि वाले खातों तक विस्तारित किया जाएगा। इससे लाखों छोटे खाताधारकों को राहत मिलने की संभावना है।
निवेश प्रबंधन में पारदर्शिता
निवेश प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को भी स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके माध्यम से निवेश की निगरानी, जोखिम प्रबंधन और अनुपालन तंत्र को और सशक्त बनाया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज दर को स्थिर रखना, एमनेस्टी स्कीम लागू करना और नई सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मंजूरी देना—ये सभी कदम संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए उठाए गए हैं।








