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Madhya Pradesh सरकार होली पर लेगी 4700 करोड़ का कर्ज, बढ़ता जा रहा ऋण बोझ

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भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बजट पारित कर दिया है और बजट सत्र के दौरान तीसरा अनुपूरक बजट भी पेश किया जा चुका है। इसके बावजूद राज्य सरकार को अपनी वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए खुले बाजार से कर्ज लेना पड़ रहा है।

सरकार 4 मार्च (होली) को तीन चरणों में कुल 4700 करोड़ रुपये का कर्ज लेने जा रही है। यह ऋण 9 वर्ष से लेकर 15 वर्ष की अवधि के लिए लिया जाएगा, जिसकी परिपक्वता अवधि 2035 से 2041 तक चुकाया जाना है।

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यह पूरा कर्ज राज्य सरकार द्वारा बाजार से बॉन्ड के माध्यम से जुटाया जा रहा है।

तीन चरणों में कर्ज उठाव

पहले चरण में सरकार 9 वर्षों के लिए 1800 करोड़ रुपये का कर्ज लेगी, जिसे 4 मार्च 2035 को चुकाया जाएगा।

दूसरे चरण में 1600 करोड़ रुपये का ऋण लिया जाएगा, जिसकी अदायगी 4 मार्च 2039 तक की जाएगी, यानी लगभग 13 वर्षों में।

तीसरे चरण में 1300 करोड़ रुपये का कर्ज 15 वर्षों की अवधि के लिए लिया जाएगा, जिसे 4 मार्च 2041 तक चुकाया जाना है।

यह पूरा कर्ज राज्य सरकार द्वारा बाजार से बॉन्ड के माध्यम से जुटाया जा रहा है।

2026 में लगातार कर्ज उठाव

वर्ष 2026 के शुरुआती महीनों में ही राज्य सरकार कई चरणों में बड़ा ऋण ले चुकी है।

6 जनवरी को 4000 करोड़ रुपये,

20 जनवरी को 5000 करोड़ रुपये,

27 जनवरी को 6000 करोड़ रुपये,

3 फरवरी को 5200 करोड़ रुपये,

10 फरवरी को 5000 करोड़ रुपये,

और 17 फरवरी को 5600 करोड़ रुपये का कर्ज उठाया गया।

इनमें से अधिकांश ऋण 17 से 22 वर्षों की अवधि के लिए लिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि 18 फरवरी को राज्य सरकार ने अपना वार्षिक बजट भी प्रस्तुत किया था।

बढ़ता कर्ज, बढ़ती चिंता

31 मार्च 2025 तक राज्य सरकार पर कुल कर्ज 4 लाख 21 हजार 740 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका था। यह ऋण बाजार उधारी, वित्तीय संस्थानों और केंद्र सरकार से लिए गए कर्ज का सम्मिलित आंकड़ा है।

फरवरी 2026 तक यह कर्ज बढ़कर लगभग 4.90 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा राज्य के मौजूदा वार्षिक बजट से भी अधिक बताया जा रहा है।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती उधारी से ब्याज भुगतान का दबाव भी बढ़ेगा, जिससे विकास योजनाओं और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के लिए उपलब्ध संसाधनों पर असर पड़ सकता है। हालांकि सरकार का पक्ष है कि यह उधारी पूंजीगत व्यय और विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए की जा रही है।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार राजस्व बढ़ाने और वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए क्या रणनीति अपनाती है।

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