
भोपाल। मध्यप्रदेश में जल संरक्षण और जल प्रबंधन को लेकर चल रहे प्रयासों की समीक्षा के दौरान केंद्रीय जल शक्ति मंत्री C. R. Patil ने प्रदेश की सराहना करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश देश के उन राज्यों में शामिल है, जहां सर्वाधिक लोगों को पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने गुजरात, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में संचालित जल परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन राज्यों की तरह मध्यप्रदेश भी जल प्रबंधन के क्षेत्र में लगातार बेहतर कार्य कर रहा है।
भोपाल से आयोजित वर्चुअल बैठक में मुख्यमंत्री Mohan Yadav सहित प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों और संभागीय आयुक्तों ने भाग लिया। बैठक में जल संरक्षण से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों और अभियानों की समीक्षा की गई तथा आगामी कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा हुई।
केंद्रीय मंत्री पाटिल ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि देशभर में जल संकट की चुनौती से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर कार्य कर रही हैं। इन योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
बैठक में विशेष रूप से मध्यप्रदेश में संचालित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ की चर्चा की गई। इस अभियान के माध्यम से प्रदेश में नदियों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों के संरक्षण तथा पुनर्जीवन के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस प्रकार के अभियान जल संसाधनों के संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इससे आने वाली पीढ़ियों के लिए जल उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है।
उन्होंने यह भी बताया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act के माध्यम से भी जल संरक्षण के कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। इस योजना के तहत गांवों में तालाबों का निर्माण, नालों का उपचार, जल संग्रहण संरचनाओं का विकास और पौधरोपण जैसे कार्य किए जा रहे हैं, जिससे जल संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों को रोजगार भी मिल रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैठक में कहा कि प्रदेश सरकार जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जलग्रहण क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने, नदियों के उद्गम स्थलों के विकास, वर्षा जल संचयन और पौधरोपण जैसे कार्यों को और अधिक गति दी जाए। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के लिए प्रशासन और समाज दोनों की सहभागिता आवश्यक है।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि जल संरक्षण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनाए रखने के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। नगरीय निकायों में वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने, जल संरचनाओं के संरक्षण और हरित क्षेत्रों के विकास पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि देश में जल संसाधनों का संरक्षण और उनका प्रभावी प्रबंधन भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मध्यप्रदेश सरकार के प्रयासों और जनभागीदारी के माध्यम से राज्य जल संरक्षण के राष्ट्रीय प्रयासों में लगातार अग्रणी भूमिका निभाता रहेगा।
प्रदेश सरकार का भी यही संकल्प है कि जल गंगा संवर्धन अभियान और अन्य योजनाओं के माध्यम से जल संसाधनों का संरक्षण किया जाए और हर नागरिक तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य पूरा किया जाए। इसके लिए प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और आम जनता के सहयोग से व्यापक स्तर पर अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि जल संरक्षण को एक जन आंदोलन का स्वरूप दिया जा सके।








