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होर्मुज संकट से भारत की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता सीधा असर: राजनाथ

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Bureau Report

देशों को नई सोच के साथ आगे बढ़ने और बदलते माहौल में खुद को ढालने की जरूरत

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि होर्मुज में पैदा हो रही बाधाएं केवल दूर की घटनाएं नहीं हैं, बल्कि इनका सीधा असर भारत की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। जर्मनी के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचे सिंह ने वहां की संसद की रक्षा और सुरक्षा समिति को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया आज नए तरह के सुरक्षा खतरों का सामना कर रही है। तेजी से बदलती तकनीक ने हालात को और जटिल बना दिया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में देशों को नई सोच के साथ आगे बढ़ने और बदलते माहौल के मुताबिक खुद को ढालने की जरूरत है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा मंत्री ने भारत और जर्मनी के रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने की भी वकालत की। उनका यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब पश्चिम एशिया में पिछले 50 दिनों से जारी तनाव का असर वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है। सिंह ने कहा कि भारत जैसे विकासशील देश के लिए यह सिर्फ अंतरराष्ट्रीय मुद्दा नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता से जुड़ा सीधा खतरा है। उन्होंने बताया कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पश्चिम एशिया पर निर्भर है। ऐसे में अगर इस क्षेत्र में किसी तरह का व्यवधान होता है, तो उसका असर तुरंत दिखाई देता है। यही वजह है कि भारत ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए पहले से ही सक्रिय और समन्वित रणनीति अपनाई है। आत्मनिर्भर भारत अभियान का जिक्र करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि यह केवल खरीद तक सीमित पहल नहीं है। यह दुनिया के देशों के लिए एक खुला निमंत्रण है कि वे भारत के साथ मिलकर तकनीक विकसित करें, नवाचार करें और नए समाधान तैयार करें। उन्होंने जर्मनी की औद्योगिक क्षमता की तारीफ करते हुए कहा कि वहां की बड़ी कंपनियों के साथ-साथ छोटे और मझोले उद्योगों की ताकत भी काबिल-ए-तारीफ है, खासकर उभरती और आधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत और जर्मनी के रिश्तों को और मजबूत बनाने पर जोर देते हुए कहा कि दोनों देश कई क्षेत्रों में एक-दूसरे के स्वाभाविक साझेदार हैं। राजनाथ सिंह ने कहा कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच रक्षा और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि जब इस दौर का इतिहास लिखा जाएगा, तब भारत और जर्मनी की साझेदारी को एक मजबूत और संतुलित कूटनीति के उदाहरण के रूप में देखा जाएगा। उन्होंने मौजूदा वैश्विक हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि अब भू-राजनीतिक तनाव सिर्फ किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहे हैं। इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों का प्रभाव ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक आर्थिक स्थिरता पर साफ दिख रहा है, साथ ही इसका मानवीय असर भी काफी गंभीर है। इससे पहले राजनाथ सिंह ने बर्लिन स्थित हम्बोल्ट यूनिवर्सिटी परिसर में नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर को श्रद्धांजलि अर्पित की।

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