
नई दिल्ली। चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब देशभर की निगाहें चुनाव परिणामों पर टिकी हुई हैं। पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में मतदान समाप्त होने के साथ ही विभिन्न एजेंसियों के एग्ज़िट पोल सामने आए हैं। इन एग्ज़िट पोल्स ने राजनीतिक हलकों में चर्चा और उत्सुकता बढ़ा दी है। हालांकि चुनाव विशेषज्ञों का कहना है कि एग्ज़िट पोल केवल अनुमान होते हैं और अंतिम तस्वीर मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगी। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश के चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव दो चरणों में संपन्न हुए। राज्य की 294 विधानसभा सीटों के लिए मतदान 23 और 29 अप्रैल को कराया गया। बहुमत के लिए किसी भी दल या गठबंधन को 148 सीटों की आवश्यकता होगी। चुनाव के बाद आए विभिन्न एग्ज़िट पोल्स में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला दिखाई दे रहा है। पी-मार्क एग्ज़िट पोल के अनुसार भारतीय जनता पार्टी को 150 से 175 सीटें मिल सकती हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस को 118 से 138 सीटों का अनुमान दिया गया है। अन्य दलों के खाते में 2 से 6 सीटें जा सकती हैं। वहीं मैटराइज़ एग्ज़िट पोल में भाजपा को 146 से 161 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है, जबकि तृणमूल कांग्रेस को 125 से 140 सीटें मिल सकती हैं। अन्य दलों को 6 से 10 सीटें मिलने का अनुमान व्यक्त किया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव बेहद रोचक रहा और शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान का रुझान अलग-अलग दिखाई दिया। चुनाव प्रचार के दौरान विकास, क्षेत्रीय पहचान, सामाजिक योजनाएं और संगठनात्मक मजबूती जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। यही कारण है कि विभिन्न एग्ज़िट पोल्स में अलग-अलग तस्वीर सामने आ रही है। असम में विधानसभा की 126 सीटों के लिए एक चरण में 9 अप्रैल को मतदान हुआ था। राज्य में बहुमत के लिए 64 सीटों की आवश्यकता है। अधिकांश एग्ज़िट पोल्स में भाजपा गठबंधन को बढ़त मिलती दिखाई गई है। वहीं कांग्रेस गठबंधन को भी कई क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन करने वाला बताया गया है। असम में विकास कार्य, बुनियादी ढांचा, रोजगार, कृषि और क्षेत्रीय मुद्दे चुनावी चर्चा के केंद्र में रहे। एग्ज़िट पोल्स के अनुसार भाजपा गठबंधन दोबारा सरकार बनाने की स्थिति में दिखाई दे रहा है, हालांकि अंतिम परिणाम मतगणना के बाद ही स्पष्ट होंगे। केरल में भी एक चरण में 9 अप्रैल को मतदान कराया गया था। राज्य में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा है। कई एग्ज़िट पोल्स में वाम मोर्चे को बढ़त दिखाई गई है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि केरल में स्वास्थ्य सेवाएं, सामाजिक कल्याण योजनाएं, शिक्षा और आर्थिक मुद्दे चुनाव के दौरान प्रमुख रहे। कुछ सर्वेक्षणों में वाम मोर्चे की वापसी के संकेत मिले हैं, जबकि कांग्रेस नेतृत्व वाला गठबंधन भी मजबूत चुनौती देता दिखाई दे रहा है। तमिलनाडु में 234 विधानसभा सीटों के लिए 23 अप्रैल को मतदान हुआ था। यहां बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत है। अधिकांश एग्ज़िट पोल्स में डीएमके गठबंधन को स्पष्ट बढ़त मिलती दिखाई गई है। वहीं एआईएडीएमके गठबंधन को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। तमिलनाडु में चुनाव प्रचार के दौरान विकास, सामाजिक कल्याण, शिक्षा, रोजगार और क्षेत्रीय मुद्दों पर विशेष चर्चा हुई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में इस बार मतदाताओं ने बदलाव और स्थिरता दोनों पहलुओं को ध्यान में रखकर मतदान किया है। पुडुचेरी में भी एक चरण में मतदान कराया गया। यहां विभिन्न एग्ज़िट पोल्स में भाजपा समर्थित गठबंधन को बढ़त दिखाई गई है। हालांकि कुछ सीटों पर मुकाबला करीबी माना जा रहा है। चुनाव विशेषज्ञों का कहना है कि एग्ज़िट पोल्स मतदान के बाद मतदाताओं से बातचीत और आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर तैयार किए जाते हैं, लेकिन वास्तविक परिणाम कई बार इससे अलग भी हो सकते हैं। भारत जैसे बड़े और विविधतापूर्ण लोकतंत्र में स्थानीय मुद्दे, क्षेत्रीय समीकरण और अंतिम समय के मतदान रुझान परिणामों को प्रभावित करते हैं।
पिछले कई चुनावों में देखा गया है कि कुछ एग्ज़िट पोल्स सही साबित हुए, जबकि कुछ के अनुमान वास्तविक नतीजों से अलग रहे। इसलिए राजनीतिक दलों और मतदाताओं दोनों की नजर अब मतगणना पर है। चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के इन चुनावों को राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पश्चिम बंगाल और असम के परिणाम पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वहीं तमिलनाडु और केरल के नतीजे दक्षिण भारत की राजनीतिक तस्वीर को प्रभावित करेंगे। फिलहाल एग्ज़िट पोल्स ने राजनीतिक वातावरण को उत्साह और चर्चाओं से भर दिया है। समर्थक अपनी-अपनी पार्टियों की संभावित जीत को लेकर उत्साहित हैं, जबकि सभी दल अंतिम परिणामों का इंतजार कर रहे हैं। अब 4 मई को होने वाली मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा कि किस राज्य में किस दल या गठबंधन की सरकार बनने जा रही है।






