
एमपी, यूपी, राजस्थान, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, गुजरात साझा करेगें एफआईआर – किसी भी स्टेट में चोरी होने पर सभी राज्यो की पुलिस अपने यहॉ खंगालेगी नेटवर्क
भोपाल :- रनिंग ट्रेनों में होने वाली वारदातो पर अकुंश लगाने और स्टेट लेवल पर अपराध करने वालो को दबोचने के लिये रेल्वे पुलिस ने काफी मंथन के बाद दो आवश्यक कदम उठाने की योजना बनाई है। पहला कदम मध्य प्रदेश और अन्य पड़ोसी राज्यो में ट्रेनों में होने वाले अपराधो की दर्ज की गई एफआईआर ई-मेल पर एक दूसरे से साझा करने की है। इसका उददेश्य अपराधी और अपराध की प्रकृति के बारे में अधिक जानकारी जुटाना है। बताया जा रहा है कि कुछ जिलों ने बीते दिनो इसकी शुरुआत भी कर दी है। दरअसल कई वारदातो में जब पुलिस ने गिरोह को पकड़ा तब सामने आया की गिरोह ने अंर्तराज्यीय स्तर पर कई वारदातें की है, लेकिन जिन राज्यों में वारदाते की है वह वहॉ के रहने वाले भी नहीं है, और कुछ मामलो में उस राज्य की पुलिस उनको पकड़ भी नहीं सकी। इसका कारण यह सामने आया की ट्रेन में चोरी या लूट की वारदात करने वाले बदमाशो के गैंग का नेटवर्क आस-पास के राज्यों में भी फैला रहता है। कई बार बदमाश ट्रेन में किसी एक राज्य से सवार होता है, और वह जब घटना का अंजाम देता है, तो ट्रेन दूसरे राज्य में पहुंच चुकी होती है। ऐसे में अपराधी की तलाश तो दूर कई दिनो तक एफआईआर दर्ज करने के लिये सही घटनास्थल का पता लगाना भी मुश्किल हो जाता है। बदमाशो के इस तरीके से पुलिस के लिए ऐसे अपराधियों पर नजर रख पाना काफी मुश्किल होता है। जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश की सीमा से जुड़े राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, गुजरात के बीच लगभग एक साल पहले इस उपाय पर सहमति बनी थी, जिस पर अमल करना शुरु कर दिया गया है। अब जिस जिले में एफआईआर दर्ज होगी वहां से रिर्पौट की कापी अन्य प्रदेशो को भी भेजी जाएगी। इसके साथ ही रेलवे स्टेशनों के आसपास के मुसाफिरो की आवाजाही के क्षेत्र में रेल पुलिस सीसीटीवी कैमरे लगाएगी। यह व्यवस्था छोटे-बड़े सभी स्टेशनों में पर होगी। अभी सिर्फ स्टेशन के भीतर ही रेलवे के तरफ से लगाये गये सीसीटीवी कैमरो की मदद नजर रखी जाती है, लेकिन सर्कुलेटिंग एरिया में आने-जाने वाले संदेहियो के सुराग नहीं मिल पाते।









