
मुंबई :- भारतीय सिनेमा के शोमैन राज कपूर कभी बिगड़ैल नौजवान कहे जाते थे और उन्हें सही राह दिखाने वाले थे महान फिल्मकार केदार शर्मा। केदार शर्मा ने गीता बाली, मधुबाला जैसी कई प्रतिभाशाली कलाकारों के करियर को दिशा दी। उन्होंने ‘नील कमल’, ‘जोगन’ और ‘बावरे नैन’ जैसी कालजयी फिल्में बनाईं। कहा जाता है कि पृथ्वीराज कपूर के बेहद करीबी होने के नाते उन्होंने राज कपूर को भी संवारने की जिम्मेदारी उठाई थी। केदार शर्मा ने 1999 में दिए एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि पृथ्वीराज कपूर एक दिन बेहद उदास बैठे थे। उन्होंने उनसे कहा था कि राज पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान देने के बजाय रेड लाइट एरिया में जाने लगा है और वहां की महिलाओं से मिलने-जुलने लगा है। यह सुनकर केदार शर्मा ने उनसे वादा किया कि वे राज कपूर को सही रास्ते पर ले आएंगे। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने राज कपूर को फिल्ममेकिंग सिखाने की कोशिश की, तब एक दिन राज कैमरा सेट पर कुछ गलत कर बैठे। उन्होंने उन्हें समझाया कि ऐसा न करें, लेकिन राज ने वही गलती दोहराई। इस पर केदार शर्मा ने गुस्से में आकर उन्हें थप्पड़ मार दिया। बाद में उन्होंने कहा कि उन्हें इस घटना पर बेहद पछतावा हुआ। अगली सुबह जब राज कपूर उनके पास आए, तो उनके चेहरे पर उस थप्पड़ का निशान था। तब केदार शर्मा ने महसूस किया कि यह लड़का कैमरे के पीछे नहीं, बल्कि उसके सामने रहने के लिए बना है। इसके बाद राज कपूर ने अभिनय की दुनिया में कदम रखा और देखते ही देखते हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार बन गए। राज कपूर ने ‘आवारा’, ‘श्री 420’, ‘मेरा नाम जोकर’ और ‘संगम’ जैसी फिल्मों से दर्शकों के दिलों पर राज किया। उन्होंने भारतीय सिनेमा को एक नई ऊंचाई दी और अपनी मेहनत व प्रतिभा से यह साबित कर दिया कि कभी गलती करने वाला इंसान भी सही दिशा मिलने पर इतिहास रच सकता है। मालूम हो कि राज कपूर का नाम भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उनके परिवार ने न सिर्फ फिल्मों में अभिनय और निर्देशन के क्षेत्र में अपना जलवा बिखेरा, बल्कि भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई।








