
इंदौर। देश के हवाई अड्डों की सुरक्षा व्यवस्था को बदलती तकनीकी चुनौतियों के अनुरूप और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत CISF Airport Sector द्वारा मध्यप्रदेश पुलिस के सहयोग से PRTS इंदौर ट्रेनिंग सेंटर में 10 दिवसीय Drone/UAV एवं Counter-Drone Systems प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम CISF Unit Indore Airport के समन्वय से आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य हवाई अड्डों की सुरक्षा में तैनात CISF personnel की ड्रोन और मानवरहित हवाई प्रणालियों से संबंधित तकनीकी तथा परिचालन क्षमता को मजबूत करना है। वर्तमान समय में ड्रोन तकनीक का उपयोग अनेक वैध और उपयोगी कार्यों में हो रहा है, लेकिन किसी भी संवेदनशील प्रतिष्ठान और विशेष रूप से विमानन क्षेत्र में अनधिकृत ड्रोन गतिविधियां सुरक्षा के लिहाज से गंभीर विषय बन सकती हैं। ऐसे में सुरक्षा बलों के लिए ड्रोन की पहचान, उसके संभावित खतरे को समझना और उपलब्ध Counter-Drone Systems के संबंध में आवश्यक तकनीकी एवं परिचालन समझ विकसित करना महत्वपूर्ण हो जाता है। इंदौर में शुरू किया गया यह 10 दिवसीय प्रशिक्षण इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में विभिन्न एयरपोर्ट्स से CISF personnel भाग ले रहे हैं, जिससे प्रशिक्षण का दायरा केवल एक हवाई अड्डे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अलग-अलग विमानन परिसरों में कार्यरत सुरक्षा कर्मियों के अनुभव और प्रशिक्षण आवश्यकताओं को एक साझा मंच मिलने की संभावना है। प्रशिक्षण में ड्रोन/UAV तकनीक से जुड़े मूलभूत एवं परिचालन पक्षों के साथ Counter-Drone Systems की कार्यप्रणाली और सुरक्षा संदर्भ में उनके उपयोग से संबंधित विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाना प्रस्तावित है। इस पहल का व्यापक उद्देश्य एयरपोर्ट सुरक्षा में तैनात personnel को आधुनिक तकनीकी चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल उपलब्ध कराना है, ताकि संवेदनशील विमानन परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था को तकनीकी रूप से और मजबूत बनाया जा सके।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन समारोह भी अधिकारियों और personnel की उपस्थिति में आयोजित किया गया। इसमें श्री मनोज कुमार श्रीवास्तव, IPS, DIG/Director, PRTS, MP Police तथा श्री P.C. Dalai, Sr. Commandant/CASO, ASG Indore सहित अन्य अधिकारी एवं personnel उपस्थित रहे। मध्यप्रदेश पुलिस और CISF के बीच इस प्रकार का प्रशिक्षण सहयोग विमानन सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं में समन्वय की आवश्यकता को रेखांकित करता है। एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील और उच्च सुरक्षा वाले परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कई स्तरों पर काम करती है। इसमें प्रवेश नियंत्रण, निगरानी, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान, आपात परिस्थितियों से निपटने की तैयारी और आधुनिक तकनीकी साधनों का उपयोग शामिल होता है। ड्रोन/UAV से संबंधित प्रशिक्षण इस व्यापक सुरक्षा व्यवस्था में तकनीकी जागरूकता की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में सामने आता है। उद्घाटन कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी से प्रशिक्षण के महत्व को भी रेखांकित किया गया। PRTS इंदौर ट्रेनिंग सेंटर में आयोजित यह कार्यक्रम प्रशिक्षणार्थियों को निर्धारित अवधि में ड्रोन एवं Counter-Drone Systems से संबंधित जानकारी और व्यावहारिक समझ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है। विभिन्न एयरपोर्ट्स से आए CISF personnel के शामिल होने से प्रशिक्षण में अलग-अलग एयरपोर्ट सुरक्षा परिस्थितियों के संदर्भ में अनुभव साझा करने का अवसर भी बन सकता है। अलग-अलग विमानन परिसरों में कार्यरत personnel को अपने अनुभवों, चुनौतियों और कार्यक्षेत्र से जुड़े विषयों पर प्रशिक्षण के दौरान संवाद का अवसर मिलना प्रशिक्षण की उपयोगिता को और बढ़ा सकता है। इस तरह कार्यक्रम को केवल तकनीकी प्रशिक्षण तक सीमित न रखते हुए सुरक्षा बल के personnel की परिचालन तैयारी को मजबूत करने वाली पहल के रूप में देखा जा सकता है।
ड्रोन और UAV तकनीक ने हाल के वर्षों में निगरानी, सर्वेक्षण, आपदा प्रबंधन, कृषि, लॉजिस्टिक्स और अन्य वैध क्षेत्रों में उपयोग के नए अवसर पैदा किए हैं। इसके साथ ही सुरक्षा प्रतिष्ठानों के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वे ड्रोन तकनीक से जुड़े संभावित जोखिमों को समझें और उनके अनुरूप सुरक्षा क्षमता विकसित करें। विमानन क्षेत्र में यह आवश्यकता विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि हवाई अड्डे अत्यंत संवेदनशील परिसर होते हैं और वहां किसी भी अनधिकृत हवाई गतिविधि को समय रहते पहचानना सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। इसी संदर्भ में Counter-Drone Systems की भूमिका सामने आती है। इन प्रणालियों का उद्देश्य अनधिकृत या संभावित रूप से खतरनाक ड्रोन गतिविधियों की पहचान और उनसे निपटने के लिए सुरक्षा तंत्र को सक्षम बनाना है। इंदौर में शुरू किए गए प्रशिक्षण में CISF personnel को Drone/UAV और Counter-Drone Systems से संबंधित तकनीकी तथा परिचालन क्षमता को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के माध्यम से personnel को तकनीक को समझने, सुरक्षा संदर्भ में उसका आकलन करने और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुरूप कार्य करने की क्षमता विकसित करने का अवसर मिलेगा। यहां यह महत्वपूर्ण है कि किसी भी सुरक्षा तकनीक का प्रभाव केवल उपकरण की उपलब्धता से निर्धारित नहीं होता, बल्कि उसे संचालित करने वाले personnel की प्रशिक्षण क्षमता, परिस्थिति की समझ और समन्वित कार्रवाई भी महत्वपूर्ण होती है। यही कारण है कि नियमित और विशेषीकृत प्रशिक्षण सुरक्षा बलों की तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता है। इंदौर में आयोजित 10 दिवसीय प्रशिक्षण इसी दिशा में एक केंद्रित प्रयास है, जिसमें तकनीकी ज्ञान और परिचालन आवश्यकता को एक साथ रखा गया है।
एयरपोर्ट सुरक्षा में तैनात CISF personnel के लिए आधुनिक तकनीकों की जानकारी लगातार विकसित होते सुरक्षा वातावरण में महत्वपूर्ण है। हवाई अड्डों पर यात्रियों, विमान, टर्मिनल परिसर, रनवे क्षेत्र और अन्य संवेदनशील हिस्सों की सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय व्यवस्था काम करती है। ऐसे वातावरण में किसी नई तकनीक या संभावित खतरे के संबंध में personnel की जागरूकता और तैयारी सुरक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण आवश्यकता बन जाती है। ड्रोन और UAV से संबंधित गतिविधियों की प्रकृति अन्य पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों से अलग हो सकती है, इसलिए इनके लिए विशेष तकनीकी प्रशिक्षण की आवश्यकता पड़ती है। इसी को ध्यान में रखते हुए CISF Airport Sector ने मध्यप्रदेश पुलिस के सहयोग से PRTS इंदौर में यह प्रशिक्षण शुरू किया है। प्रशिक्षण में भाग ले रहे personnel को ड्रोन तकनीक तथा Counter-Drone Systems के बारे में व्यवस्थित जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इस दौरान तकनीकी अवधारणाओं के साथ सुरक्षा एवं परिचालन दृष्टिकोण से उनकी उपयोगिता को समझना भी प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा। विभिन्न एयरपोर्ट्स से personnel की भागीदारी इस कार्यक्रम को व्यापक स्वरूप प्रदान करती है। इससे प्रशिक्षण के दौरान अलग-अलग स्थानों पर काम करने वाले कर्मियों के अनुभवों का आदान-प्रदान संभव होगा। एयरपोर्ट सुरक्षा में तैनात personnel को अपने कार्यक्षेत्र में आने वाली परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने की आवश्यकता पड़ सकती है। इसलिए तकनीकी प्रशिक्षण के साथ परिस्थिति-आधारित समझ विकसित करना भी महत्वपूर्ण है। किसी भी सुरक्षा उपकरण की उपयोगिता तभी अधिक प्रभावी हो सकती है जब personnel उसे निर्धारित प्रोटोकॉल और सुरक्षा मानकों के अनुसार संचालित करने में सक्षम हों। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य इसी क्षमता को मजबूत करना है।
CISF और MP Police के बीच प्रशिक्षण स्तर पर सहयोग का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि विमानन सुरक्षा और व्यापक कानून-व्यवस्था व्यवस्था के बीच समन्वय की आवश्यकता रहती है। किसी भी संवेदनशील क्षेत्र में सुरक्षा से जुड़ी चुनौती सामने आने पर अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचनाओं और कार्रवाई का समन्वय महत्वपूर्ण हो सकता है। प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित कार्यक्रम के माध्यम से personnel को तकनीकी विषयों के साथ अंतर-एजेंसी सहयोग की भावना में भी प्रशिक्षण का अवसर मिल सकता है। हालांकि कार्यक्रम के उपलब्ध विवरण में प्रशिक्षण के प्रत्येक सत्र की विस्तृत विषय-सूची उपलब्ध नहीं है, लेकिन यह स्पष्ट किया गया है कि इसका केंद्र Drone/UAV एवं Counter-Drone Systems से संबंधित तकनीकी और परिचालन क्षमता को मजबूत करना है। 10 दिन की निर्धारित अवधि प्रशिक्षणार्थियों को विषय से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझने और प्रशिक्षण गतिविधियों में भाग लेने का पर्याप्त अवसर प्रदान करती है। प्रशिक्षण की अवधि में सैद्धांतिक जानकारी के साथ व्यावहारिक समझ विकसित करने पर ध्यान दिए जाने की संभावना है, हालांकि उपलब्ध सूचना में किसी विशिष्ट अभ्यास या उपकरण का अलग से विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए कार्यक्रम की वास्तविक प्रशिक्षण पद्धति के बारे में वही जानकारी दी जानी उचित है जो आयोजकों द्वारा साझा की गई है। इतना स्पष्ट है कि प्रशिक्षण का फोकस सुरक्षा personnel की क्षमता वृद्धि पर है। यह पहल आधुनिक विमानन सुरक्षा के बदलते स्वरूप के अनुरूप प्रशिक्षण व्यवस्था को विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस प्रशिक्षण की उपयोगिता केवल वर्तमान सुरक्षा परिस्थितियों तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की विमानन सुरक्षा जरूरतों से भी जुड़ी है। तकनीक के विकास के साथ सुरक्षा एजेंसियों को भी अपने प्रशिक्षण और कार्यप्रणाली में समय-समय पर बदलाव करना पड़ता है। ड्रोन/UAV तकनीक तेजी से विकसित होने वाला क्षेत्र है और इसके साथ जुड़े सुरक्षा पहलुओं को समझने के लिए personnel को निरंतर प्रशिक्षण की आवश्यकता हो सकती है। किसी एक प्रशिक्षण कार्यक्रम के बाद भी तकनीकी ज्ञान को नियमित अभ्यास और अपडेट के माध्यम से मजबूत बनाए रखना आवश्यक होता है। इंदौर में शुरू किया गया यह 10 दिवसीय कार्यक्रम इसी निरंतर क्षमता विकास की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा सकता है। इसमें विभिन्न एयरपोर्ट्स से आने वाले CISF personnel की भागीदारी से प्रशिक्षण का अनुभव अलग-अलग कार्यक्षेत्रों तक पहुंचने की संभावना है। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले personnel अपने-अपने कार्यस्थलों पर वापस जाकर वहां की सुरक्षा व्यवस्था में प्राप्त तकनीकी समझ का उपयोग निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुरूप कर सकते हैं। इससे प्रशिक्षण का प्रभाव केवल PRTS इंदौर परिसर तक सीमित न रहकर संबंधित एयरपोर्ट्स की सुरक्षा क्षमता तक विस्तार पा सकता है। हालांकि प्रशिक्षण के बाद किसी विशिष्ट परिचालन परिणाम का दावा अभी करना उचित नहीं होगा, लेकिन क्षमता निर्माण की दृष्टि से ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम सुरक्षा कर्मियों को नई तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार करने में सहायक हो सकते हैं।
विमानन सुरक्षा की दृष्टि से ड्रोन से जुड़े मामलों में समय पर पहचान और उचित प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण विषय हैं। किसी भी संवेदनशील परिसर में अनधिकृत ड्रोन गतिविधि सामने आने पर सुरक्षा personnel को निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार प्रतिक्रिया देनी होती है। इसके लिए केवल उपकरणों की जानकारी पर्याप्त नहीं होती, बल्कि personnel को परिस्थितियों को समझने, उपलब्ध तकनीकी प्रणालियों का सही उपयोग करने और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय बनाए रखने की क्षमता भी आवश्यक होती है। Counter-Drone Systems का प्रशिक्षण इसी व्यापक सुरक्षा प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इंदौर में चल रहा प्रशिक्षण CISF personnel को ऐसी तकनीकी क्षमताओं से परिचित कराने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। इसमें तकनीकी ज्ञान और परिचालन दक्षता दोनों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। प्रशिक्षणार्थियों के लिए यह अवसर भी महत्वपूर्ण है कि वे ड्रोन तकनीक को केवल एक उपकरण के रूप में नहीं, बल्कि आधुनिक सुरक्षा वातावरण के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में समझें। किसी तकनीकी प्रणाली की प्रभावशीलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि personnel उसे किस प्रकार समझते और इस्तेमाल करते हैं। इसलिए नियमित प्रशिक्षण, अभ्यास और तकनीकी अपडेट सुरक्षा व्यवस्था के लिए आवश्यक हैं।
PRTS इंदौर ट्रेनिंग सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति ने प्रशिक्षण के महत्व को रेखांकित किया। श्री मनोज कुमार श्रीवास्तव, IPS, DIG/Director, PRTS, MP Police तथा श्री P.C. Dalai, Sr. Commandant/CASO, ASG Indore सहित अन्य अधिकारी और personnel कार्यक्रम में उपस्थित रहे। वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत से यह संदेश भी जाता है कि आधुनिक तकनीक आधारित सुरक्षा प्रशिक्षण को सुरक्षा व्यवस्था में महत्व दिया जा रहा है। प्रशिक्षण का आयोजन CISF Unit Indore Airport के समन्वय से किया जा रहा है, जिससे इंदौर एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशिक्षण गतिविधि के बीच समन्वय का पक्ष भी सामने आता है। विभिन्न एयरपोर्ट्स से CISF personnel की भागीदारी इसे एक व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम बनाती है। प्रशिक्षणार्थियों को अपने-अपने कार्यक्षेत्र से जुड़े अनुभवों को नए तकनीकी ज्ञान के साथ जोड़ने का अवसर मिलेगा। इससे भविष्य में एयरपोर्ट सुरक्षा से जुड़े तकनीकी विषयों पर कर्मियों की समझ और अधिक व्यवस्थित हो सकती है। सुरक्षा क्षेत्र में प्रशिक्षण की निरंतरता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नई तकनीकें और उनसे जुड़ी चुनौतियां समय के साथ बदलती रहती हैं। किसी भी सुरक्षा बल की परिचालन क्षमता उसके personnel की तैयारी और प्रशिक्षण से भी निर्धारित होती है। इस दृष्टि से यह 10 दिवसीय कार्यक्रम क्षमता निर्माण की दिशा में एक केंद्रित पहल है।
इंदौर में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि इसमें Drone/UAV और Counter-Drone Systems दोनों को प्रशिक्षण के केंद्र में रखा गया है। यानी प्रशिक्षण केवल ड्रोन तकनीक की जानकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि संभावित ड्रोन-आधारित सुरक्षा चुनौतियों से संबंधित प्रतिरोधी तकनीकी व्यवस्था को भी समझने पर जोर दिया जा रहा है। आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था में किसी तकनीक के संभावित उपयोग और उसके संभावित दुरुपयोग दोनों को समझना आवश्यक होता है। ड्रोन का वैध उपयोग अनेक क्षेत्रों में हो सकता है, लेकिन संवेदनशील विमानन परिसरों के संदर्भ में अनधिकृत उड़ानें सुरक्षा चिंता का विषय बन सकती हैं। इसलिए सुरक्षा personnel को ऐसी परिस्थितियों के प्रति तकनीकी रूप से जागरूक रखना आवश्यक है। Counter-Drone Systems इसी प्रकार की सुरक्षा जरूरतों से जुड़े उपकरणों और प्रक्रियाओं का हिस्सा हैं। प्रशिक्षण के माध्यम से personnel को इन प्रणालियों की अवधारणा और परिचालन उपयोग की समझ विकसित करने का अवसर मिलेगा। इससे सुरक्षा बल की तकनीकी तैयारी में वृद्धि हो सकती है। हालांकि किसी भी तकनीकी प्रणाली के उपयोग के लिए निर्धारित कानूनी और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन आवश्यक रहता है। प्रशिक्षण का उद्देश्य भी personnel को निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुरूप सक्षम बनाना है।
एयरपोर्ट सुरक्षा में तकनीक और मानव संसाधन का संयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण है। आधुनिक उपकरण सुरक्षा personnel की क्षमता को बढ़ा सकते हैं, लेकिन परिस्थितियों को समझने, सही निर्णय लेने और विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय करने की जिम्मेदारी प्रशिक्षित personnel की रहती है। इसी कारण सुरक्षा बलों के लिए तकनीकी प्रशिक्षण का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इंदौर में शुरू किया गया यह प्रशिक्षण इसी समन्वय को मजबूत करने का प्रयास है। 10 दिनों तक चलने वाले कार्यक्रम में भाग लेने वाले personnel को Drone/UAV तथा Counter-Drone Systems से संबंधित ज्ञान प्राप्त करने के साथ सुरक्षा वातावरण में उनके महत्व को समझने का अवसर मिलेगा। प्रशिक्षण के दौरान विकसित तकनीकी समझ भविष्य में एयरपोर्ट सुरक्षा से जुड़े कार्यों में उपयोगी हो सकती है। अलग-अलग एयरपोर्ट्स से आने वाले personnel के कारण प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न कार्यक्षेत्रों का अनुभव साझा होने की भी संभावना है। इससे प्रशिक्षण एकतरफा व्याख्यान के बजाय अनुभव और तकनीकी जानकारी के आदान-प्रदान का माध्यम बन सकता है। सुरक्षा व्यवस्था में ऐसी साझा समझ उपयोगी होती है, क्योंकि अलग-अलग स्थानों पर काम करने वाले personnel को अलग-अलग परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। उनके अनुभवों से प्रशिक्षण में वास्तविक कार्यपरिस्थितियों की समझ भी विकसित हो सकती है।
विमानन सुरक्षा के लिए किसी भी नई तकनीक का प्रशिक्षण केवल उपकरण चलाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। उसमें सुरक्षा प्रोटोकॉल, परिस्थितिजन्य जागरूकता, समन्वय, जिम्मेदारी और प्रतिक्रिया की प्रक्रिया भी शामिल होती है। इंदौर में चल रहे प्रशिक्षण का उद्देश्य CISF personnel की तकनीकी एवं परिचालन क्षमता को मजबूत करना बताया गया है। इस उद्देश्य में तकनीकी ज्ञान के साथ परिचालन समझ भी शामिल है। यही कारण है कि इस प्रशिक्षण को एयरपोर्ट सुरक्षा की व्यापक जरूरतों के संदर्भ में देखा जा रहा है। प्रशिक्षण प्राप्त personnel को अपने कार्यक्षेत्र में तकनीकी परिस्थितियों का बेहतर आकलन करने में मदद मिल सकती है। किसी भी संभावित ड्रोन गतिविधि की स्थिति में निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होगा। इसके लिए personnel को तकनीक, सुरक्षा व्यवस्था और परिचालन जिम्मेदारियों के बीच संतुलन समझना होगा। Counter-Drone Systems से संबंधित प्रशिक्षण इसी तैयारी को मजबूत करने में योगदान कर सकता है।
आज के समय में हवाई अड्डों की सुरक्षा केवल भौतिक सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गई है। सुरक्षा व्यवस्था में तकनीकी निगरानी, आधुनिक संचार प्रणाली, डिजिटल साधन और विभिन्न प्रकार की तकनीकी प्रणालियों का महत्व बढ़ा है। ड्रोन/UAV भी इसी तकनीकी परिवेश का हिस्सा हैं। ऐसे में CISF जैसे विमानन सुरक्षा बल के personnel के लिए ड्रोन से संबंधित तकनीकी जानकारी और Counter-Drone Systems की समझ महत्वपूर्ण हो जाती है। इंदौर में आयोजित 10 दिवसीय कार्यक्रम इसी बदलते सुरक्षा वातावरण के अनुरूप प्रशिक्षण क्षमता को मजबूत करने का प्रयास है। कार्यक्रम का आयोजन PRTS इंदौर ट्रेनिंग सेंटर में मध्यप्रदेश पुलिस के सहयोग से किया जा रहा है और CISF Unit Indore Airport इसका समन्वय कर रही है। इससे प्रशिक्षण के लिए एक ऐसा वातावरण तैयार हुआ है जिसमें सुरक्षा बल और पुलिस प्रशिक्षण संस्थान के बीच सहयोग दिखाई देता है। विभिन्न एयरपोर्ट्स से personnel की भागीदारी कार्यक्रम को व्यापक प्रशिक्षण पहल का रूप देती है।
इस प्रशिक्षण का प्रभाव भविष्य में एयरपोर्ट सुरक्षा की तैयारियों में दिखाई दे सकता है, लेकिन फिलहाल इसका मुख्य उद्देश्य क्षमता निर्माण है। प्रशिक्षण के दौरान personnel को तकनीकी जानकारी और परिचालन समझ प्राप्त होगी। इसके बाद वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र में निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था के अनुरूप इस ज्ञान का उपयोग कर सकेंगे। किसी प्रशिक्षण की सफलता का वास्तविक मूल्यांकन उसके बाद personnel की कार्यक्षमता और सुरक्षा प्रक्रियाओं में उसके उपयोग से किया जाता है। इसलिए इस कार्यक्रम को एक सतत क्षमता-विकास प्रक्रिया के रूप में देखना अधिक उचित होगा। तकनीक लगातार बदल रही है और सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण को भी उसके अनुरूप विकसित करना आवश्यक है। ड्रोन और Counter-Drone तकनीक से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम इसी निरंतर प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
इंदौर जैसे महत्वपूर्ण शहर में PRTS ट्रेनिंग सेंटर पर आयोजित यह कार्यक्रम मध्यप्रदेश में पुलिस प्रशिक्षण और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के बीच सहयोग की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण गतिविधि के रूप में सामने आया है। प्रशिक्षण में वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी, विभिन्न एयरपोर्ट्स से CISF personnel की भागीदारी और 10 दिवसीय निर्धारित अवधि इसे एक केंद्रित प्रशिक्षण कार्यक्रम बनाती है। कार्यक्रम का उद्देश्य किसी एक घटना या तत्काल परिस्थिति तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षा कर्मियों की तकनीकी तैयारी को मजबूत करना है। ड्रोन/UAV तथा Counter-Drone Systems के क्षेत्र में ज्ञान बढ़ने से personnel आधुनिक विमानन सुरक्षा चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। इसके साथ ही यह भी आवश्यक रहेगा कि प्रशिक्षण से प्राप्त जानकारी को निर्धारित नियमों और प्रोटोकॉल के अनुसार ही कार्य में उपयोग किया जाए। सुरक्षा व्यवस्था में तकनीक तभी प्रभावी होती है जब उसे प्रशिक्षित मानव संसाधन के साथ उचित तरीके से जोड़ा जाए।
CISF Airport Sector की इस पहल का व्यापक संदेश यही है कि विमानन सुरक्षा व्यवस्था को समय के साथ बदलती तकनीकी चुनौतियों के अनुरूप तैयार रखना आवश्यक है। ड्रोन/UAV तकनीक का विस्तार होने के साथ ही संवेदनशील परिसरों की सुरक्षा में Counter-Drone क्षमता का महत्व भी बढ़ता है। इंदौर में शुरू हुआ 10 दिवसीय प्रशिक्षण इसी आवश्यकता के अनुरूप CISF personnel की तकनीकी और परिचालन क्षमता को मजबूत करने का प्रयास है। मध्यप्रदेश पुलिस के सहयोग से PRTS इंदौर में आयोजित यह प्रशिक्षण और CISF Unit Indore Airport का समन्वय सुरक्षा एजेंसियों के बीच प्रशिक्षण सहयोग का उदाहरण प्रस्तुत करता है। उद्घाटन समारोह में DIG/Director PRTS मनोज कुमार श्रीवास्तव, IPS, Sr. Commandant/CASO ASG Indore P.C. Dalai सहित अन्य अधिकारियों और personnel की उपस्थिति रही। विभिन्न एयरपोर्ट्स से आए CISF personnel इस प्रशिक्षण में हिस्सा ले रहे हैं। प्रशिक्षण के माध्यम से ड्रोन/UAV और Counter-Drone Systems से जुड़े तकनीकी ज्ञान तथा परिचालन क्षमता को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। आधुनिक विमानन सुरक्षा में ऐसी क्षमता-वृद्धि भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए personnel को तैयार रखने में उपयोगी हो सकती है। सुरक्षित विमानन और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था के उद्देश्य के साथ शुरू हुआ यह प्रशिक्षण कार्यक्रम इंदौर में तकनीक आधारित सुरक्षा क्षमता निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है।