
रायगढ़। 41वें चक्रधर समारोह-2026 की छठवीं सांस्कृतिक संध्या साहित्य, हास्य, व्यंग्य, वीर रस और गीतों के विविध रंगों से सजी रही। रायगढ़ के रामलीला मैदान में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देश के अलग-अलग क्षेत्रों से पहुंचे कवियों ने अपनी रचनाओं और प्रस्तुतियों से देर रात तक श्रोताओं को बांधे रखा। कवि सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा रहे, जिनकी सहज, चुटीली और विशिष्ट हास्य-व्यंग्य शैली ने पूरे वातावरण को ठहाकों और तालियों से गुंजायमान कर दिया। करीब चार दशकों से कवि सम्मेलन के मंच पर सक्रिय सुरेंद्र शर्मा ने जीवन, समाज और बदलते परिवेश से जुड़े प्रसंगों को अपने अंदाज में प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुतियों में हास्य के साथ जीवन के अनुभवों और सामाजिक सरोकारों का पक्ष भी दिखाई दिया।
चक्रधर समारोह की यह काव्य संध्या इस मायने में भी अलग रही कि मंच पर कविता के अलग-अलग रस और शैलियां एक साथ दिखाई दीं। जहां सुरेंद्र शर्मा ने हास्य-व्यंग्य के माध्यम से श्रोताओं को गुदगुदाया, वहीं वीर रस की कवयित्री कविता तिवारी ने ओजपूर्ण रचनाओं के माध्यम से नारी सम्मान और सशक्तिकरण का संदेश सामने रखा। गीतकार किशोर तिवारी ने छत्तीसगढ़ी गीतों के जरिए स्थानीय माटी, लोकजीवन और ग्रामीण संवेदना की झलक प्रस्तुत की। इसके साथ डॉ. प्रवीण शुक्ला, डॉ. दिनेश दिग्गज और अमन अक्षर ने हास्य, व्यंग्य और गीतों के अलग-अलग रंगों से कवि सम्मेलन को विविधता प्रदान की। इस तरह पूरी शाम में कविता केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रही, बल्कि सामाजिक सरोकार, लोकसंस्कृति और जीवन के अनुभवों की अभिव्यक्ति भी बनी।
सुरेंद्र शर्मा की प्रस्तुति के दौरान रामलीला मैदान में लगातार ठहाके और तालियां सुनाई देती रहीं। उनकी शैली की खासियत सहज भाषा, रोजमर्रा के जीवन से जुड़े प्रसंग और सामाजिक व्यवहार पर हास्यपूर्ण टिप्पणी रही। करीब 40 वर्षों के मंचीय अनुभव के कारण उनकी प्रस्तुति में मंच संचालन, संवाद और श्रोताओं से जुड़ने की विशेष सहजता दिखाई दी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने हास्य के साथ जीवन से जुड़े गहरे संदेश भी दिए और इस बात पर जोर दिया कि व्यक्ति जीवन में कितनी भी ऊंचाई या शक्ति हासिल कर ले, उसे अहंकार और अकड़ से बचना चाहिए। इस तरह उनकी प्रस्तुति में हंसी के साथ जीवन-दर्शन का पक्ष भी जुड़ा रहा।
सुरेंद्र शर्मा की कविताओं और व्यंग्य की प्रस्तुति में बदलते सामाजिक परिवेश की झलक भी दिखाई दी। उनकी चुटीली शैली में रोजमर्रा की परिस्थितियों को देखने का एक अलग नजरिया सामने आया। यही कारण रहा कि श्रोता केवल हास्य के स्तर पर ही नहीं, बल्कि उन प्रसंगों में छिपे सामाजिक संकेतों को भी महसूस करते नजर आए। लंबे समय से कवि सम्मेलन के मंच पर सक्रिय रहने के कारण उनके पास विभिन्न सामाजिक परिस्थितियों और मानवीय व्यवहार को देखने का व्यापक अनुभव है, जिसे वे हास्य और व्यंग्य के माध्यम से अभिव्यक्त करते हैं। चक्रधर समारोह के मंच पर भी इसी शैली की झलक देखने को मिली।
कवि सम्मेलन की शुरुआत कविता तिवारी की प्रस्तुति से हुई। उन्होंने मां सरस्वती की वंदना के साथ काव्य संध्या का शुभारंभ किया और इसके बाद वीर रस की रचनाएं प्रस्तुत कीं। उनकी कविताओं में युवाओं, बेटियों और नारी सम्मान से जुड़े विषय प्रमुख रहे। नारी सशक्तिकरण और बेटियों की सुरक्षा से जुड़े भावों ने श्रोताओं को भावुक भी किया। उनके काव्य में ओज और संवेदना का संयोजन दिखाई दिया। वीर रस की प्रभावशाली प्रस्तुति ने कार्यक्रम की शुरुआत को गंभीर और ऊर्जा से भरपूर स्वर दिया तथा इसके बाद हास्य और व्यंग्य की प्रस्तुतियों के लिए एक अलग वातावरण तैयार हुआ।
कविता तिवारी की प्रस्तुति में नारी सम्मान और बेटियों के प्रति संवेदनशीलता से जुड़े विषयों को विशेष स्थान मिला। उनकी रचनाओं ने समाज में बेटियों की भूमिका और उनके सम्मान की आवश्यकता का संदेश दिया। वीर रस केवल युद्ध और पराक्रम की अभिव्यक्ति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक चेतना से जुड़े विषयों के साथ भी मंच पर सामने आया। उनके काव्य पाठ में ओजपूर्ण शब्दों और भावपूर्ण अभिव्यक्ति ने श्रोताओं को जोड़े रखा। इस प्रस्तुति ने कवि सम्मेलन के भीतर हास्य और मनोरंजन के साथ सामाजिक संदेश के लिए भी स्थान बनाया।
कवि सम्मेलन में किशोर तिवारी ने छत्तीसगढ़ी गीतों की प्रस्तुति से स्थानीय लोकजीवन का रंग भर दिया। उनके गीतों में छत्तीसगढ़ की माटी, ग्रामीण परिवेश और लोक-संवेदना की झलक दिखाई दी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने ‘नया सूरज के नवा अंजोर’, ‘हरिहर धनिया’ और ‘राम-राम बबा जोहार बूढ़ी दाई’ जैसे गीत प्रस्तुत किए। इन गीतों ने श्रोताओं को छत्तीसगढ़ की लोकभाषा और सांस्कृतिक परिवेश से जोड़ा। चक्रधर समारोह में देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले कलाकारों के बीच स्थानीय भाषा और लोकसंगीत की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को क्षेत्रीय सांस्कृतिक पहचान से भी जोड़ा।
किशोर तिवारी की प्रस्तुति ने यह भी दिखाया कि कविता और गीत केवल साहित्यिक मंच तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे किसी क्षेत्र की सामाजिक स्मृति और सांस्कृतिक पहचान को अभिव्यक्त करने का माध्यम भी बनते हैं। छत्तीसगढ़ी भाषा में प्रस्तुत गीतों ने रामलीला मैदान के श्रोताओं के बीच स्थानीय जुड़ाव का वातावरण बनाया। माटी, खेती, ग्रामीण जीवन और लोक-संबंधों से जुड़े भाव गीतों में दिखाई दिए। राष्ट्रीय स्तर के कवि सम्मेलन में क्षेत्रीय भाषा के गीतों को स्थान मिलने से कार्यक्रम में भाषाई और सांस्कृतिक विविधता का पक्ष मजबूत हुआ।
डॉ. प्रवीण शुक्ला ने अपने चिर-परिचित हास्य अंदाज में सामाजिक विसंगतियों पर व्यंग्य प्रस्तुत किया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वे लगभग 36 वर्षों से कवि सम्मेलन के मंच पर सक्रिय हैं और उनकी 27 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी प्रस्तुति में सामाजिक परिस्थितियों और मानवीय व्यवहार से जुड़े विषयों को हास्य के माध्यम से सामने रखा गया। गंभीर सामाजिक विषयों को हल्के-फुल्के अंदाज में प्रस्तुत करना हास्य-व्यंग्य की महत्वपूर्ण विशेषता है और डॉ. शुक्ला ने इसी शैली के माध्यम से श्रोताओं को हंसाने के साथ सोचने का अवसर भी दिया।
उज्जैन के हास्य कवि डॉ. दिनेश दिग्गज ने भी अपनी व्यंग्य रचनाओं से कवि सम्मेलन के माहौल में हास्य का रंग घोला। उनकी प्रस्तुति में व्यंग्य के माध्यम से सामाजिक जीवन के विभिन्न पहलुओं को सामने रखा गया। सुरेंद्र शर्मा और डॉ. प्रवीण शुक्ला के बाद डॉ. दिनेश दिग्गज की प्रस्तुति ने हास्य-व्यंग्य की कड़ी को आगे बढ़ाया। अलग-अलग कवियों की अलग शैली होने के बावजूद कार्यक्रम का केंद्रीय भाव श्रोताओं के साथ साहित्य के माध्यम से संवाद स्थापित करना रहा।
अमन अक्षर ने गीतों की भावपूर्ण प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में हास्य और व्यंग्य के बीच एक मधुर साहित्यिक रंग जोड़ा। उनकी गीत प्रस्तुति ने कवि सम्मेलन के वातावरण को सुरमय बनाया। गीत और कविता के इस मेल ने कार्यक्रम को एक ही शैली में सीमित नहीं रहने दिया। हास्य, व्यंग्य और वीर रस के बाद गीतों की भावप्रधान प्रस्तुति ने काव्य संध्या में विविधता कायम रखी। श्रोताओं ने अलग-अलग विधाओं की प्रस्तुतियों को सुनते हुए कवि सम्मेलन की पूरी शाम का आनंद लिया।
चक्रधर समारोह की काव्य संध्या के लिए 19 सितंबर की रात 9 बजे का कार्यक्रम निर्धारित किया गया था। आयोजन की पूर्व सूचना में पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा को हास्य रस, डॉ. प्रवीण शुक्ला को हास्य-व्यंग्य, कविता तिवारी को वीर रस, शशि सुरेंद्र दुबे को हास्य काव्य, दिनेश दिग्गज को हास्य काव्य, अमन अक्षर को गीत और किशोर तिवारी को अखिल भारतीय गीतों की प्रस्तुति के लिए सूचीबद्ध किया गया था। बाद की रिपोर्टों में इसी काव्य संध्या के आयोजन और प्रस्तुतियों की जानकारी सामने आई।
यह काव्य संध्या 41वें चक्रधर समारोह के उस व्यापक स्वरूप का हिस्सा रही जिसमें नृत्य, संगीत, साहित्य और लोककला को एक ही सांस्कृतिक मंच पर स्थान दिया गया है। 14 से 23 सितंबर तक आयोजित समारोह में देश के विभिन्न हिस्सों से कलाकारों को आमंत्रित किया गया। शास्त्रीय नृत्य से लेकर लोकसंगीत और कविता तक अनेक विधाओं की प्रस्तुतियां कार्यक्रम का हिस्सा बनीं। ऐसे आयोजन में साहित्यिक संध्या का होना समारोह के सांस्कृतिक विस्तार को दर्शाता है।
रायगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को चक्रधर समारोह से लंबे समय से जोड़ा जाता है। महाराजा चक्रधर सिंह की कला-साधना और सांस्कृतिक विरासत को समर्पित इस आयोजन में कथक के साथ भारतीय शास्त्रीय नृत्य की अनेक विधाओं, संगीत, साहित्य और लोककलाओं को मंच मिलता है। 41वें समारोह में भी देश-प्रदेश के कलाकारों के साथ स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर दिया गया। काव्य संध्या ने इस सांस्कृतिक विविधता में साहित्य का एक अलग आयाम जोड़ा।
कवि सम्मेलन के दौरान श्रोताओं की प्रतिक्रिया भी लगातार बनी रही। सुरेंद्र शर्मा की चुटीली प्रस्तुति पर ठहाके और तालियां सुनाई दीं, जबकि कविता तिवारी की ओजपूर्ण कविताओं ने अलग प्रकार की ऊर्जा पैदा की। किशोर तिवारी के छत्तीसगढ़ी गीतों ने स्थानीय सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत किया और अमन अक्षर के गीतों ने वातावरण को भावपूर्ण बनाया। डॉ. प्रवीण शुक्ला और डॉ. दिनेश दिग्गज की व्यंग्य प्रस्तुतियों ने हास्य का क्रम बनाए रखा। इस प्रकार कार्यक्रम में भाव, हास्य, व्यंग्य, वीरता और लोक-संवेदना सभी का समावेश रहा।
कवि सम्मेलन की विशेषता यह रही कि मंच पर प्रस्तुत कविताओं का स्वरूप एक जैसा नहीं था। एक तरफ जीवन और समाज की विसंगतियों पर हास्य-व्यंग्य था, तो दूसरी तरफ नारी सम्मान और सामाजिक चेतना से जुड़े वीर रस के स्वर थे। वहीं छत्तीसगढ़ी गीतों में स्थानीय लोकजीवन की अनुभूति थी और गीतकारों ने भावनात्मक पक्ष को सामने रखा। इस विविधता ने काव्य संध्या को एक बहुरंगी साहित्यिक आयोजन का रूप दिया। चक्रधर समारोह के मंच पर कविता का यह विस्तार दर्शकों को साहित्य की विभिन्न विधाओं और रसों से परिचित कराने वाला रहा।
सुरेंद्र शर्मा की प्रस्तुति का प्रभाव देर रात तक बना रहा। चार दशक के मंचीय अनुभव के साथ उनकी प्रस्तुति में हास्य के साथ संवाद की सहजता दिखाई दी। उनकी शैली में जीवन के सामान्य प्रसंगों को हास्यपूर्ण दृष्टि से देखने की क्षमता प्रमुख रही। उपलब्ध रिपोर्टों में भी उनकी प्रस्तुति को जीवन, समाज और बदलते परिवेश से जुड़े विषयों से जोड़ा गया है। इसी कारण उनका हास्य केवल तत्काल हंसी पैदा करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई प्रसंगों में सामाजिक व्यवहार और जीवन की वास्तविकताओं की ओर भी संकेत करता रहा।
कविता तिवारी की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में ओज और संवेदना का संतुलन बनाया। उन्होंने मां सरस्वती की वंदना से शुरुआत की और इसके बाद युवाओं तथा बेटियों से जुड़े विषयों पर अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। नारी सम्मान को केंद्र में रखने वाली उनकी कविताओं ने श्रोताओं को भावनात्मक रूप से जोड़ा। उनकी प्रस्तुति में वीर रस के साथ सामाजिक संदेश का पक्ष भी रहा। इस प्रकार काव्य संध्या में साहित्य के माध्यम से सामाजिक चेतना का स्वर भी सुनाई दिया।
किशोर तिवारी की छत्तीसगढ़ी गीत प्रस्तुति ने कवि सम्मेलन को स्थानीय रंग प्रदान किया। चक्रधर समारोह देश के विभिन्न हिस्सों के कलाकारों का मंच है, लेकिन रायगढ़ और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान भी इसके केंद्र में रहती है। स्थानीय भाषा और लोकजीवन से जुड़े गीतों की प्रस्तुति ने इसी पहचान को सामने रखा। लोकभाषा में गीतों की सहजता और ग्रामीण जीवन से जुड़ी संवेदनाएं श्रोताओं तक सीधे पहुंचीं।
कवि सम्मेलन की शाम में हास्य से गंभीरता और फिर गीतों की भावुकता तक कई रंग दिखाई दिए। यही विविधता इस आयोजन की खासियत बनी। साहित्य का मंच तभी व्यापक प्रभाव पैदा करता है जब उसमें अलग-अलग संवेदनाओं के लिए स्थान हो। इस काव्य संध्या में हास्य-व्यंग्य ने मनोरंजन किया, वीर रस ने ऊर्जा और सामाजिक संदेश दिया, लोकगीतों ने सांस्कृतिक जुड़ाव पैदा किया तथा भावपूर्ण गीतों ने कार्यक्रम को सुरमय बनाया।
41वें चक्रधर समारोह की छठवीं सांस्कृतिक संध्या में आयोजित यह अखिल भारतीय कवि सम्मेलन साहित्य प्रेमियों के लिए विशेष अवसर रहा। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कवियों की उपस्थिति ने रायगढ़ के सांस्कृतिक मंच को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। समारोह में शास्त्रीय नृत्य और संगीत के साथ साहित्य को स्थान मिलने से आयोजन की विधागत विविधता भी सामने आई।
रायगढ़ के रामलीला मैदान में देर रात तक चले इस कवि सम्मेलन में श्रोताओं की सहभागिता लगातार बनी रही। पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा के हास्य-व्यंग्य से लेकर कविता तिवारी के ओजस्वी काव्य, किशोर तिवारी के छत्तीसगढ़ी गीत, डॉ. प्रवीण शुक्ला और डॉ. दिनेश दिग्गज के व्यंग्य तथा अमन अक्षर के गीतों तक कार्यक्रम ने साहित्य के अलग-अलग रंग प्रस्तुत किए। हर कवि की अपनी शैली रही और उसी विविधता ने शाम को एक व्यापक साहित्यिक अनुभव में बदल दिया।
चक्रधर समारोह में आयोजित काव्य संध्या ने यह भी रेखांकित किया कि कविता आज भी सामाजिक संवाद और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का प्रभावी माध्यम है। हास्य-व्यंग्य के माध्यम से समाज की विसंगतियों पर बात की जा सकती है, वीर रस के माध्यम से सम्मान और साहस का संदेश दिया जा सकता है, गीतों के माध्यम से लोकजीवन की स्मृतियों को जीवित रखा जा सकता है और भावपूर्ण रचनाओं के माध्यम से मनुष्य के अनुभवों को अभिव्यक्ति मिल सकती है। रायगढ़ की इस शाम में इन सभी पक्षों का समावेश देखने को मिला।
चक्रधर समारोह की छठवीं सांस्कृतिक संध्या अंततः हंसी, संवेदना, ओज, लोक-संस्कृति और गीतों के संगम के रूप में सामने आई। पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा ने अपने हास्य-व्यंग्य से श्रोताओं को देर रात तक गुदगुदाया, कविता तिवारी ने ओजपूर्ण रचनाओं से नारी सम्मान और सशक्तिकरण का संदेश दिया, किशोर तिवारी ने छत्तीसगढ़ी गीतों में माटी की खुशबू बिखेरी, जबकि डॉ. प्रवीण शुक्ला, डॉ. दिनेश दिग्गज और अमन अक्षर ने अपनी-अपनी शैली से काव्य संध्या को विविधता दी।
इस तरह 41वें चक्रधर समारोह की यह काव्य संध्या केवल ठहाकों की शाम नहीं रही, बल्कि कविता के अनेक रंगों—हास्य, व्यंग्य, वीर रस, लोकगीत और भावपूर्ण गीत—का ऐसा संगम बनी जिसने रायगढ़ के रामलीला मैदान को देर रात तक साहित्यिक और सांस्कृतिक ऊर्जा से भर दिया।