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रायगढ़ में नवीन शासकीय संगीत महाविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया शुरू, 28 सितंबर तक आवेदन का अवसर

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रायगढ़। कला और संगीत की समृद्ध परंपरा के लिए देशभर में अपनी अलग पहचान रखने वाले रायगढ़ में अब संगीत शिक्षा को संस्थागत रूप से नई दिशा मिलने जा रही है। जिले में नवीन शासकीय संगीत महाविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है और शीघ्र ही अस्थायी परिसर में अध्यापन कार्य शुरू करने की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। महाविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से बैचलर ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स के अंतर्गत संगीत, नृत्य और रंगमंच विषयों में अध्ययन का अवसर विद्यार्थियों को उपलब्ध कराया जाएगा। प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही रायगढ़ और आसपास के उन विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा का एक नया विकल्प सामने आया है, जो संगीत, नृत्य और रंगमंच को व्यवस्थित एवं अकादमिक रूप से पढ़ना चाहते हैं।
नवीन महाविद्यालय की तैयारियों का जायजा लेने के लिए इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा ने परिसर का निरीक्षण किया। इस अवसर पर रायगढ़ कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिजीत बबन पठारे, संयुक्त कलेक्टर पूजा बंसल सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान महाविद्यालय के अस्थायी परिसर में विद्यार्थियों के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं, कक्षों की तैयारी, फर्नीचर, वाद्ययंत्रों और अन्य मूलभूत सुविधाओं से संबंधित कार्यों की जानकारी ली गई। प्रशासन की ओर से बताया गया कि महाविद्यालय को प्रारंभिक चरण में क्षेत्रीय पंचायत एवं ग्रामीण विकास प्रशिक्षण केंद्र, रायगढ़ से संचालित किया जाएगा।
रायगढ़ की पहचान लंबे समय से संगीत और नृत्य की विशिष्ट परंपराओं से जुड़ी रही है। महाराजा चक्रधर सिंह के संरक्षण में विकसित रायगढ़ घराने की कथक परंपरा ने देश के सांस्कृतिक मानचित्र पर रायगढ़ को विशेष स्थान दिलाया है। इसी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि में शासकीय संगीत महाविद्यालय की स्थापना को स्थानीय स्तर पर कला शिक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जिला प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार महाविद्यालय के अस्थायी परिसर को विद्यार्थियों के अध्ययन के अनुकूल बनाने के लिए आवश्यक कार्य तेजी से किए जा रहे हैं।
कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के अनुसार प्रारंभिक तौर पर महाविद्यालय का संचालन क्षेत्रीय पंचायत एवं ग्रामीण विकास प्रशिक्षण केंद्र से किया जाएगा। परिसर में विद्यार्थियों के लिए आवश्यक सुविधाएं तैयार की जा रही हैं। भवन के रिनोवेशन से लेकर कमरों की व्यवस्था, दरवाजे-खिड़कियों, टाइल्स तथा अन्य आवश्यक कार्यों को पूरा करने की प्रक्रिया चल रही है। इसके साथ ही संगीत शिक्षा के लिए आवश्यक वाद्ययंत्रों और फर्नीचर की व्यवस्था भी की जा रही है। इन कार्यों को लगभग एक माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। महाविद्यालय के स्थायी भवन के निर्माण के लिए भी प्रक्रिया जारी है।
महाविद्यालय के प्रारंभिक संचालन के लिए अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था किए जाने की बात भी प्रशासन की ओर से कही गई है। इसका उद्देश्य यह है कि स्थायी अधोसंरचना की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ-साथ विद्यार्थियों की पढ़ाई भी समय पर प्रारंभ हो सके। प्रशासन द्वारा महाविद्यालय के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक सुविधाओं और संसाधनों को चरणबद्ध तरीके से तैयार किया जा रहा है। इस व्यवस्था के माध्यम से नए शैक्षणिक सत्र में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को अध्ययन का अवसर उपलब्ध कराने की तैयारी है।
शैक्षणिक सत्र 2026-27 में महाविद्यालय में बैचलर ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स के अंतर्गत संगीत, नृत्य और रंगमंच में अध्ययन की सुविधा प्रस्तावित है। इसका सीधा लाभ रायगढ़ जिले के विद्यार्थियों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों को भी मिल सकेगा। अब तक कला के इन क्षेत्रों में उच्च शिक्षा के लिए विद्यार्थियों को अन्य स्थानों का रुख करना पड़ सकता था। स्थानीय स्तर पर शासकीय महाविद्यालय की शुरुआत होने से कला में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों को अपने जिले में ही औपचारिक उच्च शिक्षा का अवसर मिलने की संभावना बनी है।
प्रवेश के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए पंजीयन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार विद्यार्थी प्रवेश के लिए पंजीयन फार्म किरोड़ीमल शासकीय पीजी महाविद्यालय, रायगढ़ से प्राप्त कर सकते हैं और वहीं जमा कर सकते हैं। जिले की आधिकारिक वेबसाइट से भी पंजीयन फार्म डाउनलोड किया जा सकता है। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 28 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। प्रवेश से संबंधित अधिक जानकारी के लिए नोडल अधिकारी डॉ. आनंद शर्मा के मोबाइल नंबर 9827897200 पर संपर्क किया जा सकता है।
नए संगीत महाविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने के साथ रायगढ़ के कला जगत में भी इसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। रायगढ़ को लंबे समय से संगीत और नृत्य की नगरी के रूप में पहचान मिली है। यहां आयोजित होने वाला चक्रधर समारोह देश के विभिन्न हिस्सों के कलाकारों को एक मंच पर लाता है। वर्ष 2026 में भी 41वें चक्रधर समारोह का आयोजन 14 से 23 सितंबर तक किया गया, जिसमें कथक, ओडिसी, भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी, मणिपुरी, कथकली, लोक संगीत, पंडवानी और अन्य विधाओं के कलाकारों ने भाग लिया। जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर 2026 के समारोह की विस्तृत कलाकार सूची उपलब्ध है।
रायगढ़ में संगीत महाविद्यालय की आवश्यकता और इसकी स्थापना का विषय नया नहीं है। वर्ष 2024 के 39वें चक्रधर समारोह के उद्घाटन अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रायगढ़ में संगीत महाविद्यालय प्रारंभ करने की घोषणा की थी। जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर चक्रधर समारोह-2024 से संबंधित विवरण में इस घोषणा का उल्लेख दर्ज है। अब 2026 में प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने और अस्थायी परिसर में कक्षाएं प्रारंभ करने की तैयारी के साथ उस घोषणा को संस्थागत रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।
संगीत महाविद्यालय की स्थापना का महत्व केवल एक नए शिक्षण संस्थान की स्थापना तक सीमित नहीं है। रायगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को देखते हुए यहां कला शिक्षा के लिए व्यवस्थित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध होना स्थानीय कलाकारों और विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। किसी कला विधा को केवल मंचीय प्रदर्शन तक सीमित रखने के बजाय उसके इतिहास, सिद्धांत, तकनीक, प्रस्तुति और अभ्यास को शैक्षणिक पाठ्यक्रम के माध्यम से समझने का अवसर विद्यार्थियों को मिलने से कला शिक्षा का दायरा व्यापक हो सकता है।
संगीत के क्षेत्र में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए औपचारिक शिक्षा का महत्व इसलिए भी है क्योंकि भारतीय संगीत परंपरा में गुरु-शिष्य परंपरा के साथ-साथ आधुनिक अकादमिक अध्ययन की भी अपनी भूमिका है। शास्त्रीय गायन, वाद्य संगीत, नृत्य और रंगमंच जैसे क्षेत्रों में लंबे समय तक अभ्यास, अनुशासन और तकनीकी समझ की आवश्यकता होती है। यदि विद्यार्थियों को नियमित कक्षाओं, प्रशिक्षित शिक्षकों और आवश्यक वाद्ययंत्रों के साथ अध्ययन का अवसर मिलता है, तो वे अपनी प्रतिभा को व्यवस्थित तरीके से विकसित कर सकते हैं।
नृत्य के क्षेत्र में भी रायगढ़ की अपनी विशिष्ट पहचान है। चक्रधर समारोह के मंच पर देश के विभिन्न घरानों और नृत्य शैलियों के कलाकार नियमित रूप से प्रस्तुति देते हैं। 2026 के समारोह में भी बनारस घराने के कथक से लेकर ओडिसी, भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी, मणिपुरी और कथकली तक विभिन्न विधाओं की प्रस्तुतियां हुईं। ऐसे सांस्कृतिक वातावरण में नृत्य शिक्षा के लिए स्थानीय स्तर पर महाविद्यालय की उपलब्धता विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक विकल्प बन सकती है।
रंगमंच को भी बैचलर ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स के अंतर्गत शामिल किया जाना इस पाठ्यक्रम की व्यापकता को दर्शाता है। रंगमंच केवल अभिनय तक सीमित कला नहीं है, बल्कि इसमें संवाद, अभिव्यक्ति, मंच संचालन, प्रस्तुति, नाट्य संरचना और सामूहिक कार्य जैसे अनेक पक्ष शामिल होते हैं। स्थानीय स्तर पर रंगमंच की शिक्षा का अवसर मिलने से इस क्षेत्र में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों को भी औपचारिक अध्ययन का मंच मिल सकता है।
महाविद्यालय के प्रारंभिक संचालन के लिए अस्थायी परिसर का चयन प्रशासनिक दृष्टि से एक अंतरिम व्यवस्था है। स्थायी भवन के निर्माण की प्रक्रिया अलग से जारी रहने की जानकारी दी गई है। इस प्रकार वर्तमान व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों की पढ़ाई को शुरू करना है, जबकि स्थायी अधोसंरचना तैयार होने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। अस्थायी परिसर में रिनोवेशन और अन्य आवश्यक कार्यों को पूरा करने का लक्ष्य लगभग एक माह रखा गया है।
महाविद्यालय के लिए वाद्ययंत्रों की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है। संगीत की शिक्षा केवल सैद्धांतिक अध्ययन तक सीमित नहीं होती। गायन और विभिन्न वाद्य विधाओं के विद्यार्थियों को नियमित अभ्यास के लिए आवश्यक संसाधनों की जरूरत होती है। इसी तरह नृत्य और रंगमंच के विद्यार्थियों के लिए भी अभ्यास एवं प्रस्तुति के अनुरूप स्थान और सुविधाएं आवश्यक होती हैं। प्रशासन द्वारा इंस्ट्रूमेंट और फर्नीचर की व्यवस्था की जा रही है, जिससे प्रारंभिक चरण में विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जा सकें।
रायगढ़ की सांस्कृतिक विरासत का एक बड़ा हिस्सा स्थानीय कलाकारों और गुरुजनों के योगदान से विकसित हुआ है। चक्रधर समारोह जैसे मंचों ने इस परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में भूमिका निभाई है। आधिकारिक कार्यक्रम सूची में 2026 के समारोह में रायगढ़ और छत्तीसगढ़ के कलाकारों के साथ देश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकारों की प्रस्तुतियां दर्ज हैं। इस व्यापक सांस्कृतिक गतिविधि के बीच संगीत महाविद्यालय की शुरुआत कला के विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण और अध्ययन का नया अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में देखी जा सकती है।
कला शिक्षा का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अपनी रुचि के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए परिवार और समाज से बाहर जाने की आवश्यकता कम हो सकती है। यदि स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा की सुविधा उपलब्ध हो तो विद्यार्थी अपने परिचित वातावरण में रहकर अध्ययन और अभ्यास जारी रख सकते हैं। विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए यह सुविधा उपयोगी हो सकती है, जिनके परिवार अन्य शहरों में शिक्षा का खर्च या व्यवस्था करने की स्थिति में नहीं होते।
नए महाविद्यालय में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के सामने अपनी कला को नियमित अभ्यास और अध्ययन के माध्यम से विकसित करने का अवसर होगा। हालांकि किसी भी कला क्षेत्र में सफलता का आधार केवल डिग्री नहीं होती। निरंतर रियाज, अनुशासन, गुरुजनों का मार्गदर्शन, मंचीय अनुभव और अपनी विधा के प्रति समर्पण भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। महाविद्यालय इन सभी पहलुओं के लिए आधारभूत शैक्षणिक वातावरण तैयार करने की दिशा में पहला कदम हो सकता है।
रायगढ़ में लंबे समय से विभिन्न कला विधाओं के कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं। चक्रधर समारोह इसका प्रमुख उदाहरण है। 2026 के समारोह में दस दिनों तक अलग-अलग विधाओं के कलाकारों ने प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम की आधिकारिक सूची में कथक, ओडिसी, भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी, मणिपुरी, कथकली, लोक संगीत, पंडवानी, संतूर, पखावज, तबला और अन्य कलाओं के कलाकार शामिल रहे। इससे रायगढ़ के सांस्कृतिक वातावरण की व्यापकता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
ऐसे वातावरण में शासकीय संगीत महाविद्यालय की स्थापना से कला के क्षेत्र में स्थानीय शैक्षणिक गतिविधियों का विस्तार हो सकता है। विद्यार्थी मंचीय कार्यक्रमों को केवल दर्शक के रूप में देखने के बजाय कला की संरचना, इतिहास और तकनीक का अध्ययन भी कर सकेंगे। भविष्य में महाविद्यालय और स्थानीय सांस्कृतिक संस्थाओं के बीच शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को मंचीय अनुभव मिलने की संभावनाएं भी बन सकती हैं, हालांकि इस संबंध में किसी विशेष कार्यक्रम की घोषणा उपलब्ध जानकारी में नहीं की गई है।
महाविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ होने के बाद अब इच्छुक विद्यार्थियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन करना है। 28 सितंबर 2026 आवेदन की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। इसलिए संगीत, नृत्य और रंगमंच में उच्च शिक्षा लेने के इच्छुक विद्यार्थियों को पंजीयन प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेजों और संबंधित प्रवेश नियमों की जानकारी लेकर समय पर आवेदन करना होगा। प्रवेश संबंधी किसी भी विशिष्ट शर्त की पुष्टि संबंधित महाविद्यालय या नोडल अधिकारी से की जा सकती है।
प्रशासन की ओर से नोडल अधिकारी के रूप में डॉ. आनंद शर्मा को जानकारी के लिए संपर्क सूत्र बनाया गया है। विद्यार्थियों के लिए यह सुविधा उपयोगी है क्योंकि प्रवेश प्रक्रिया के दौरान पाठ्यक्रम, आवेदन, जमा करने की प्रक्रिया अथवा अन्य आवश्यक जानकारी से संबंधित प्रश्न सीधे संबंधित अधिकारी से पूछे जा सकते हैं। जिले की वेबसाइट से पंजीयन फार्म डाउनलोड करने की सुविधा भी विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई गई है।
स्थायी भवन के लिए प्रक्रिया जारी रहने के बीच अस्थायी परिसर में अध्यापन शुरू करने की तैयारी यह संकेत देती है कि प्रशासन प्रवेश प्रक्रिया और शैक्षणिक गतिविधियों के बीच लंबा अंतर नहीं रखना चाहता। पहले चरण में उपलब्ध भवन को आवश्यकतानुसार तैयार किया जा रहा है और इसके बाद धीरे-धीरे संसाधनों का विस्तार किया जाएगा। प्रशासन ने रिनोवेशन, कमरों, दरवाजे-खिड़कियों, टाइल्स, फर्नीचर और वाद्ययंत्रों सहित अन्य जरूरी व्यवस्थाओं का उल्लेख किया है।
कला शिक्षा को स्थानीय स्तर पर बढ़ावा देने की दृष्टि से यह पहल रायगढ़ की सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप भी दिखाई देती है। रायगढ़ घराने की कथक परंपरा ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। इसके साथ ही जिले में लोककला, संगीत, रंगमंच और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियां भी होती रही हैं। ऐसे में औपचारिक शासकीय संगीत शिक्षा संस्थान की उपलब्धता विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा विकसित करने के लिए एक नया संस्थागत मंच दे सकती है।
इस महाविद्यालय की स्थापना के पीछे मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा का उल्लेख भी प्रशासनिक जानकारी में किया गया है। वर्ष 2024 में चक्रधर समारोह के उद्घाटन अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रायगढ़ में संगीत महाविद्यालय प्रारंभ करने की घोषणा की थी। अब प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने के साथ यह पहल कार्यान्वयन के चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। आधिकारिक जिला वेबसाइट पर दर्ज 2024 के चक्रधर समारोह के विवरण में मुख्यमंत्री की उस घोषणा का स्पष्ट उल्लेख मिलता है।
रायगढ़ के विद्यार्थियों के लिए यह अवसर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कला को अब केवल शौक के रूप में नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा और करियर के एक क्षेत्र के रूप में भी देखा जा रहा है। संगीत, नृत्य और रंगमंच में प्रशिक्षण लेकर विद्यार्थी आगे अध्यापन, मंचीय प्रदर्शन, सांस्कृतिक संस्थानों, शोध, कला प्रबंधन और अन्य संबंधित क्षेत्रों में अपने अवसर तलाश सकते हैं। हालांकि भविष्य के रोजगार और करियर की संभावनाएं विद्यार्थी की विशेषज्ञता, आगे की शिक्षा और उपलब्ध अवसरों पर निर्भर करेंगी।
महाविद्यालय की शुरुआत स्थानीय कला जगत के लिए भी एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है। यहां अध्ययन करने वाले विद्यार्थी आने वाले समय में रायगढ़ की सांस्कृतिक गतिविधियों का हिस्सा बन सकते हैं। नए कलाकारों को मंच और प्रशिक्षण मिलने से स्थानीय कला परंपराओं को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। वहीं दूसरी ओर बाहर से आने वाले कलाकारों और विशेषज्ञों के साथ संवाद से विद्यार्थियों को अपनी कला के व्यापक स्वरूप को समझने का अवसर मिल सकता है।
रायगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को देखते हुए महाविद्यालय के सामने एक बड़ी जिम्मेदारी भी होगी कि वह केवल पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा तक सीमित न रहे, बल्कि विद्यार्थियों को नियमित अभ्यास, प्रस्तुति और सांस्कृतिक अनुभव का वातावरण उपलब्ध कराए। इसके लिए शिक्षक, अतिथि शिक्षक, अभ्यास स्थल, वाद्ययंत्र, पुस्तकालय, मंच और अन्य सुविधाओं का क्रमिक विकास महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल प्रशासन ने प्रारंभिक व्यवस्थाओं को तैयार करने पर ध्यान केंद्रित किया है।
प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने की सूचना के बाद रायगढ़ और आसपास के कला-प्रेमी विद्यार्थियों में रुचि बढ़ने की संभावना है। संगीत और नृत्य की शिक्षा लेने वाले विद्यार्थियों के अलावा रंगमंच में रुचि रखने वाले युवाओं के लिए भी यह नया विकल्प है। शासकीय संस्थान होने के कारण प्रवेश और शुल्क से संबंधित जो भी नियम निर्धारित होंगे, उनके अनुसार विद्यार्थी प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे। विद्यार्थियों को आवेदन से पहले आधिकारिक जानकारी की पुष्टि करने की सलाह दी जा सकती है।
महाविद्यालय की स्थापना की प्रक्रिया को रायगढ़ की दीर्घकालीन सांस्कृतिक यात्रा से जोड़कर भी देखा जा सकता है। महाराजा चक्रधर सिंह के समय से संगीत और नृत्य के संरक्षण की परंपरा ने रायगढ़ को विशिष्ट पहचान दी। वर्तमान समय में चक्रधर समारोह उसी विरासत को व्यापक मंच देता है। अब शासकीय संगीत महाविद्यालय के माध्यम से इसी सांस्कृतिक वातावरण को उच्च शिक्षा के साथ जोड़ने की प्रक्रिया शुरू हुई है।
2026 का चक्रधर समारोह भी इसी सांस्कृतिक परंपरा की निरंतरता का उदाहरण रहा। जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर दर्ज कार्यक्रम के अनुसार 14 सितंबर से 23 सितंबर तक आयोजित समारोह में देश के विभिन्न हिस्सों के कलाकारों ने भाग लिया। समारोह के अंतिम दिन पद्मश्री सम्मानित गायिका कविता कृष्णमूर्ति की प्रस्तुति निर्धारित थी। इस प्रकार जिस समय रायगढ़ में दस दिवसीय सांस्कृतिक आयोजन संपन्न हुआ, उसी दौरान शहर में नए शासकीय संगीत महाविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया भी शुरू हो गई।
कुल मिलाकर रायगढ़ में नवीन शासकीय संगीत महाविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया शुरू होना जिले के कला विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक अवसर है। अस्थायी परिसर में आवश्यक सुविधाएं तैयार की जा रही हैं, अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था की जा रही है और स्थायी भवन के निर्माण की प्रक्रिया जारी है। बैचलर ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स के अंतर्गत संगीत, नृत्य और रंगमंच की पढ़ाई शुरू किए जाने की योजना है। 28 सितंबर 2026 तक आवेदन का अवसर उपलब्ध है।
रायगढ़ की कला और संगीत की पहचान को देखते हुए इस महाविद्यालय से स्थानीय प्रतिभाओं को अपने ही जिले में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। आने वाले समय में महाविद्यालय का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि पाठ्यक्रम, शिक्षण व्यवस्था, प्रशिक्षकों, वाद्ययंत्रों, अभ्यास सुविधाओं और स्थायी परिसर को किस प्रकार विकसित किया जाता है। फिलहाल प्रवेश प्रक्रिया की शुरुआत और अध्यापन शुरू करने की तैयारी रायगढ़ की कला शिक्षा व्यवस्था में एक नए चरण की शुरुआत है।
रायगढ़ में शुरू हुई यह प्रवेश प्रक्रिया उन विद्यार्थियों के लिए अवसर लेकर आई है, जो संगीत, नृत्य और रंगमंच को गंभीरता से पढ़ना और अपनी कला को शैक्षणिक प्रशिक्षण के साथ आगे बढ़ाना चाहते हैं। 28 सितंबर अंतिम तिथि होने के कारण इच्छुक विद्यार्थियों को समय रहते पंजीयन प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
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