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आंचल पाण्डेय की भावपूर्ण प्रस्तुति में दिखा भक्त और भगवान का अटूट विश्वास

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रायगढ़। 41वें अंतरराष्ट्रीय चक्रधर समारोह की नौवीं सांस्कृतिक संध्या में ओडिसी एवं कथक नृत्य साधिका आंचल पाण्डेय की भावपूर्ण प्रस्तुति ने दर्शकों को भक्ति, समर्पण और आस्था के आध्यात्मिक भाव से जोड़ दिया। ‘मनौधारण’ विषय पर आधारित प्रस्तुति में उन्होंने पौराणिक प्रसंगों के माध्यम से भक्त और भगवान के बीच के अटूट विश्वास को ओडिसी नृत्य की भावाभिव्यक्ति, मुद्राओं और अभिनय के जरिए मंच पर साकार किया। प्रस्तुति में गज उद्धार और द्रौपदी उद्धार के प्रसंगों को केंद्र में रखते हुए यह भाव उभारा गया कि संकट की घड़ी में जब भक्त पूर्ण विश्वास और समर्पण के साथ अपने आराध्य का स्मरण करता है, तो उसकी आस्था उसे भीतर से शक्ति प्रदान करती है।
आंचल पाण्डेय की प्रस्तुति में ओडिसी नृत्य की शास्त्रीय गरिमा के साथ भावों की गहराई भी देखने को मिली। उन्होंने नृत्य की मुद्राओं और अभिनय के माध्यम से पौराणिक प्रसंगों को केवल प्रस्तुत नहीं किया, बल्कि उनके भाव पक्ष को भी दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास किया। गज द्वारा संकट के समय भगवान को पुकारने और द्रौपदी द्वारा श्रीकृष्ण का स्मरण करने वाले प्रसंगों में भक्ति, विश्वास और समर्पण की भावनाएं प्रमुख रहीं। मंच पर नृत्य की लयबद्धता के साथ चेहरे के भाव और शारीरिक मुद्राओं के संयोजन ने प्रस्तुति को प्रभावपूर्ण बनाया।
‘मनौधारण’ प्रस्तुति का मूल भाव भक्त और भगवान के बीच उस संबंध को सामने लाना रहा, जिसमें संकट की घड़ी में आस्था व्यक्ति का सबसे बड़ा संबल बनती है। आंचल पाण्डेय ने इस भाव को ओडिसी की विशिष्ट नृत्य भाषा में अभिव्यक्त किया। पौराणिक कथाओं में वर्णित प्रसंगों को नृत्य, अभिनय और भावों के माध्यम से प्रस्तुत करते हुए उन्होंने दर्शकों को कथा के आध्यात्मिक पक्ष से जोड़ा। प्रस्तुति के दौरान दर्शक दीर्घा में एकाग्रता दिखाई दी और प्रस्तुति के समापन पर तालियों से कलाकार का उत्साहवर्धन किया गया।
आंचल पाण्डेय का कला-सफर कथक और ओडिसी दोनों शास्त्रीय नृत्य विधाओं से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने कथक की शिक्षा गुरु वसंती वैष्णव, पद्मश्री पंडित रामलाल बरेठ और पंडित भूपेंद्र बरेठ से प्राप्त की है, जबकि ओडिसी नृत्य की साधना गुरु डॉ. गजेन्द्र पण्डा के मार्गदर्शन में की है। दो अलग-अलग शास्त्रीय नृत्य परंपराओं का प्रशिक्षण उनकी प्रस्तुति में दिखाई देने वाली विविधता का एक महत्वपूर्ण आधार रहा।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आंचल पाण्डेय भारतीय शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुतियां दे चुकी हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में जापान, मलेशिया, सिंगापुर, बहरीन, दक्षिण कोरिया, दुबई और उत्तर अफ्रीका सहित विभिन्न स्थानों पर उनके प्रदर्शन का उल्लेख किया गया है। इस अनुभव के साथ चक्रधर समारोह जैसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक मंच पर उनकी प्रस्तुति ने रायगढ़ की कला परंपरा और भारतीय शास्त्रीय नृत्य की व्यापक सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के बीच एक सुंदर सेतु का रूप लिया।
चक्रधर समारोह का मंच स्वयं भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य की विभिन्न परंपराओं को एक साथ देखने का अवसर प्रदान करता है। 41वें समारोह की नौवीं संध्या में भी कथक, ओडिसी, कथकली, सितार, लोक संगीत और सूफी गायन सहित विभिन्न विधाओं की प्रस्तुतियां निर्धारित थीं। इसी सांस्कृतिक वातावरण में आंचल पाण्डेय की ओडिसी प्रस्तुति ने भक्ति और आध्यात्मिक भाव को केंद्र में रखकर शाम के कार्यक्रम में एक अलग रंग जोड़ा।
ओडिसी नृत्य की विशेषता उसकी मुद्राओं, भावाभिनय, लय और शास्त्रीय संरचना के समन्वय में दिखाई देती है। आंचल पाण्डेय ने इन्हीं माध्यमों का उपयोग करते हुए पौराणिक प्रसंगों को मंच पर प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति में कथा को आगे बढ़ाने के लिए नृत्य के साथ अभिनय और भावों का सहारा लिया गया, जिससे दर्शकों को प्रसंगों के भावात्मक पक्ष को समझने का अवसर मिला। विशेष रूप से भक्त द्वारा भगवान के स्मरण और संकट से मुक्ति की कथा ने प्रस्तुति को आध्यात्मिक भाव प्रदान किया।
गज उद्धार का प्रसंग भारतीय धार्मिक कथाओं में भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण और विश्वास के भाव से जुड़ा माना जाता है। वहीं द्रौपदी से संबंधित प्रसंग में भी संकट के समय श्रीकृष्ण के स्मरण और विश्वास का भाव प्रमुखता से सामने आता है। आंचल पाण्डेय ने इन कथात्मक प्रसंगों को नृत्य की भाषा में प्रस्तुत करते हुए उनके भाव पक्ष को प्रमुखता दी। इस प्रस्तुति का उद्देश्य केवल कथा कहना नहीं, बल्कि नृत्य के माध्यम से उस विश्वास को अनुभूत कराना रहा, जो भक्त और उसके आराध्य के संबंध का केंद्र है।
चक्रधर समारोह में प्रस्तुत होने वाली प्रत्येक कला विधा रायगढ़ की सांस्कृतिक पहचान के व्यापक स्वरूप को सामने लाती है। यहां कथक की रायगढ़ परंपरा के साथ देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाली शास्त्रीय नृत्य शैलियों को भी मंच मिलता है। आंचल पाण्डेय स्वयं कथक और ओडिसी दोनों विधाओं से जुड़ी हैं, इसलिए उनकी प्रस्तुति में अलग-अलग शास्त्रीय परंपराओं से अर्जित अनुभव का समन्वय दिखाई दिया।
आंचल पाण्डेय की प्रस्तुति में भावाभिनय विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। नृत्य में केवल गति और लय ही नहीं, बल्कि चेहरे के भाव, आंखों की अभिव्यक्ति, हाथों की मुद्राएं और शरीर की गतियां भी कथा को आगे बढ़ाती हैं। ‘मनौधारण’ के प्रसंग में इन सभी माध्यमों का उपयोग भक्त की पुकार, संकट की स्थिति और ईश्वर के प्रति विश्वास को अभिव्यक्त करने के लिए किया गया। इसी कारण प्रस्तुति का प्रभाव केवल तकनीकी नृत्य प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वह भावनात्मक स्तर पर भी दर्शकों से जुड़ी।
रायगढ़ में आयोजित चक्रधर समारोह का उद्देश्य भारतीय कला परंपराओं को मंच प्रदान करने के साथ-साथ स्थानीय सांस्कृतिक विरासत से नई पीढ़ी को जोड़ना भी रहा है। 2026 के समारोह में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए कलाकारों के साथ स्थानीय और राज्य के कलाकारों ने भी अपनी प्रस्तुतियां दीं। ऐसे मंच पर आंचल पाण्डेय की प्रस्तुति ने शास्त्रीय नृत्य के माध्यम से भक्ति की कथा को सामने रखा और दर्शकों को भारतीय पौराणिक परंपरा के भावात्मक पक्ष से जोड़ा।
आंचल पाण्डेय का संबंध छत्तीसगढ़ की कला परंपरा से भी जुड़ा है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार उनका जन्म करगी रोड, कोटा में हुआ और उन्होंने कथक तथा ओडिसी दोनों विधाओं में प्रशिक्षण प्राप्त किया। कथक में रायगढ़ से जुड़े गुरुजनों से प्रशिक्षण और ओडिसी में गुरु डॉ. गजेन्द्र पण्डा का मार्गदर्शन उनकी कला साधना के दो महत्वपूर्ण पक्ष हैं।
कला साधना में गुरु का मार्गदर्शन कलाकार के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आंचल पाण्डेय की नृत्य यात्रा में अलग-अलग गुरुजनों से मिले प्रशिक्षण ने उन्हें कथक और ओडिसी दोनों शैलियों को समझने का अवसर दिया। चक्रधर समारोह के मंच पर उनकी ओडिसी प्रस्तुति इसी साधना का एक सार्वजनिक रूप रही, जिसमें शास्त्रीय अनुशासन और भावाभिव्यक्ति दोनों दिखाई दिए।
नौवीं सांस्कृतिक संध्या की यह प्रस्तुति इसलिए भी यादगार रही क्योंकि इसमें किसी बाहरी दृश्य प्रभाव की अपेक्षा नृत्य की भावशक्ति और कथा के आध्यात्मिक पक्ष को केंद्र में रखा गया। भक्त और भगवान के बीच विश्वास की कथा को जब शास्त्रीय नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया तो दर्शकों के सामने पौराणिक प्रसंगों का एक दृश्यात्मक और भावनात्मक रूप उभरकर आया। प्रस्तुति के अंत में दर्शकों की तालियों ने कलाकार के प्रति उनकी सराहना को व्यक्त किया।
आंचल पाण्डेय की प्रस्तुति ने यह भी दिखाया कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है। इसके भीतर धार्मिक, आध्यात्मिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक कथाओं को अभिव्यक्त करने की समृद्ध परंपरा मौजूद है। नृत्य के माध्यम से किसी कथा के पात्रों, उनकी भावनाओं और परिस्थितियों को मंच पर साकार किया जा सकता है। इस प्रस्तुति में भी गज और द्रौपदी के प्रसंगों के माध्यम से भक्ति और विश्वास का भाव इसी तरह सामने आया।
41वें चक्रधर समारोह में देश की विभिन्न कला विधाओं का संगम देखने को मिला। नौवीं संध्या के कार्यक्रम में ओडिसी के साथ कथकली, सितार, छत्तीसगढ़ी लोक संगीत और सूफी गायन जैसी प्रस्तुतियां भी शामिल थीं। ऐसे बहुविध सांस्कृतिक आयोजन में आंचल पाण्डेय की ‘मनौधारण’ प्रस्तुति ने भारतीय आध्यात्मिक परंपरा को ओडिसी की शास्त्रीय शैली में प्रस्तुत किया।
आंचल पाण्डेय की कला साधना में अंतरराष्ट्रीय मंचों का अनुभव भी शामिल है। विभिन्न देशों में भारतीय शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति देने के अनुभव के साथ रायगढ़ के चक्रधर समारोह में प्रस्तुति देना उनके लिए भी महत्वपूर्ण सांस्कृतिक अवसर रहा। रायगढ़ की अपनी नृत्य परंपरा और चक्रधर समारोह की प्रतिष्ठा के बीच उनकी प्रस्तुति ने कलाकार और मंच दोनों की सांस्कृतिक यात्रा को एक साथ जोड़ा। उपलब्ध रिपोर्टों में उनके अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियों और कला सम्मान का उल्लेख किया गया है।
कला के क्षेत्र में नई पीढ़ी को जोड़ने के लिए कलाकारों की ऐसी प्रस्तुतियां महत्वपूर्ण होती हैं। मंच पर प्रस्तुत होने वाली कथाएं दर्शकों, विशेषकर युवाओं को भारतीय परंपराओं, पौराणिक प्रसंगों और शास्त्रीय नृत्य की भाषा से परिचित कराती हैं। आंचल पाण्डेय की प्रस्तुति में भक्त और भगवान के संबंध को जिस तरह नृत्य के माध्यम से सामने रखा गया, वह इसी सांस्कृतिक संवाद का हिस्सा रहा।
आंचल पाण्डेय ‘नृत्यधारा वेलफेयर फाउंडेशन’ के माध्यम से कला एवं संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और युवा प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराने से भी जुड़ी हैं, ऐसा उपलब्ध रिपोर्टों में उल्लेख है। इस प्रकार उनकी कला यात्रा केवल मंचीय प्रस्तुति तक सीमित नहीं बताई गई है, बल्कि युवा कलाकारों तक कला पहुंचाने के प्रयास से भी जुड़ी हुई है।
चक्रधर समारोह का मंच कलाकारों को अपनी साधना और कला दृष्टि प्रस्तुत करने का अवसर देता है। आंचल पाण्डेय ने इस मंच पर जिस विषय को चुना, उसमें भक्ति और विश्वास के साथ मानवीय भावनाओं को भी स्थान मिला। संकट के समय किसी आराध्य के प्रति भरोसा और समर्पण भारतीय धार्मिक कथाओं का प्रमुख भाव रहा है। ओडिसी की नृत्य भाषा में इस भाव को प्रस्तुत करना कलाकार के लिए अभिनय और तकनीकी दोनों स्तरों पर चुनौतीपूर्ण कार्य रहा होगा। मंच पर इसका प्रभाव दर्शकों की प्रतिक्रिया में भी दिखाई दिया।
इस प्रस्तुति के माध्यम से चक्रधर समारोह की नौवीं संध्या में एक ऐसा भावात्मक अध्याय जुड़ा, जिसमें नृत्य और भक्ति एक-दूसरे से जुड़े दिखाई दिए। पौराणिक कथाओं के प्रसंग, ओडिसी की शास्त्रीय मुद्राएं, भावाभिनय और लयबद्धता ने मिलकर प्रस्तुति को आकार दिया। दर्शकों ने प्रस्तुति के दौरान एकाग्रता के साथ इसे देखा और समापन पर तालियों से कलाकार का उत्साह बढ़ाया।
आंचल पाण्डेय की ‘मनौधारण’ प्रस्तुति ने 41वें चक्रधर समारोह की नौवीं सांस्कृतिक संध्या में भक्ति, आस्था और शास्त्रीय नृत्य का सुंदर संगम प्रस्तुत किया। गज उद्धार और द्रौपदी के प्रसंगों के माध्यम से भक्त और भगवान के बीच विश्वास तथा समर्पण की भावना को ओडिसी नृत्य में अभिव्यक्त किया गया। भावपूर्ण अभिनय, शास्त्रीय मुद्राओं और लयबद्ध प्रस्तुति ने दर्शकों को प्रभावित किया और प्रस्तुति के अंत में तालियों से कलाकार का उत्साहवर्धन हुआ।
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