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स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत सूरतगढ़ रेलवे स्टेशन पर पेयजल बूथों की विशेष सफाई

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सूरतगढ़। स्वच्छता ही सेवा अभियान-2026 के अंतर्गत उत्तर पश्चिम रेलवे द्वारा संचालित स्वच्छता पखवाड़ा एवं स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत बीकानेर मंडल ने सूरतगढ़ रेलवे स्टेशन पर पेयजल बूथों का विशेष स्वच्छता अभियान चलाया। 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर 2026 तक चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य रेलवे परिसरों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने, यात्रियों को स्वच्छ एवं बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने तथा रेलवे कर्मचारियों और आमजन की स्वच्छता में सहभागिता सुनिश्चित करना है। इसी क्रम में सूरतगढ़ रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा से सीधे जुड़े पेयजल बूथों की विशेष साफ-सफाई की गई। रेलवे स्टेशन पर पेयजल व्यवस्था यात्रियों की मूलभूत सुविधाओं में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्रियों का आवागमन होने वाले रेलवे स्टेशनों पर पेयजल बूथों की नियमित सफाई और स्वच्छता बनाए रखना आवश्यक है। स्वच्छता अभियान के दौरान पेयजल बूथों और उनके आसपास के स्थानों की सफाई पर विशेष ध्यान दिया गया, ताकि यात्रियों को स्वच्छ वातावरण में पेयजल सुविधा मिल सके। उत्तर पश्चिम रेलवे द्वारा स्वच्छता ही सेवा एवं स्वच्छता पखवाड़ा-2026 के तहत विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से स्वच्छता को जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। अभियान की थीम “स्वच्छता में सहभाग; स्वच्छ भारत, विकसित भारत” रखी गई है, जो स्वच्छता को केवल रेलवे प्रशासन या सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी न मानकर सामूहिक दायित्व के रूप में देखने का संदेश देती है। रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता बनाए रखने में यात्रियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। यदि यात्री कूड़ा निर्धारित स्थान पर डालें, पेयजल बूथों के आसपास गंदगी न फैलाएं और स्वच्छता संबंधी निर्देशों का पालन करें तो रेलवे परिसर को साफ रखने में काफी मदद मिल सकती है। सूरतगढ़ स्टेशन पर चलाया गया यह विशेष अभियान इसी सामूहिक भावना को आगे बढ़ाने वाला प्रयास रहा। सफाई अभियान के दौरान स्वच्छता के महत्व को रेखांकित करते हुए यह संदेश भी सामने आया कि सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता सीधे तौर पर यात्रियों की सुविधा और स्वास्थ्य से जुड़ी होती है। रेलवे स्टेशनों पर पेयजल बूथों का उपयोग प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री करते हैं, इसलिए वहां स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाना जरूरी है। अभियान के दौरान सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ यात्रियों को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक करने की भावना रही। स्वच्छता पखवाड़े का उद्देश्य केवल कुछ दिनों तक सफाई करना नहीं बल्कि नियमित स्वच्छता को व्यवहार का हिस्सा बनाना है। इसी सोच के साथ उत्तर पश्चिम रेलवे द्वारा निर्धारित अवधि में विभिन्न रेलवे स्टेशनों और परिसरों में स्वच्छता से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। सूरतगढ़ रेलवे स्टेशन पर पेयजल बूथों की विशेष सफाई भी इसी व्यापक अभियान का हिस्सा रही। अभियान के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि स्वच्छ रेलवे स्टेशन यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। रेलवे प्रशासन, कर्मचारी और यात्री यदि मिलकर स्वच्छता को प्राथमिकता दें तो रेलवे परिसरों में लंबे समय तक बेहतर स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखना संभव हो सकता है।
स्वच्छता ही सेवा अभियान के दौरान रेलवे परिसरों में सफाई के साथ-साथ स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जाता है। सूरतगढ़ रेलवे स्टेशन पर पेयजल बूथों की विशेष सफाई का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि पेयजल सुविधा यात्रियों की दैनिक आवश्यकताओं से सीधे जुड़ी होती है। लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए स्टेशन पर उपलब्ध स्वच्छ पेयजल सुविधा अत्यंत उपयोगी होती है। ऐसे में पेयजल बूथों के आसपास साफ-सफाई, कचरा प्रबंधन और स्वच्छ वातावरण बनाए रखना रेलवे प्रशासन की नियमित जिम्मेदारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्वच्छता अभियान के माध्यम से इन व्यवस्थाओं की ओर विशेष ध्यान आकर्षित किया गया। पेयजल बूथों की सफाई के साथ उनके आसपास जमा होने वाले कचरे और अन्य अवांछित सामग्री को हटाना भी आवश्यक होता है। स्टेशन परिसर में यदि किसी स्थान पर गंदगी जमा होती है तो उससे यात्रियों को असुविधा होने के साथ पूरे परिसर की स्वच्छता प्रभावित होती है। इसलिए विशेष अभियान नियमित सफाई व्यवस्था को मजबूती देने का अवसर भी प्रदान करते हैं। स्वच्छता ही सेवा अभियान की मूल भावना नागरिकों को स्वच्छता के प्रति जिम्मेदार बनाने से जुड़ी है। रेलवे स्टेशन सार्वजनिक संपत्ति और सार्वजनिक उपयोग का स्थान है। यहां स्वच्छता बनाए रखने के लिए कर्मचारियों के साथ यात्रियों और स्थानीय नागरिकों का सहयोग भी आवश्यक है। यदि कोई यात्री कूड़ा खुले में न फेंके और निर्धारित डस्टबिन का उपयोग करे तो सफाई व्यवस्था अधिक प्रभावी हो सकती है। इसी प्रकार पेयजल बूथों के पास पानी गिरने या प्लास्टिक एवं अन्य सामग्री फैलने से बचना भी जरूरी है। स्वच्छता अभियान ऐसे व्यवहारों के प्रति जागरूकता पैदा करने का अवसर देते हैं। रेलवे द्वारा चलाए जा रहे स्वच्छता पखवाड़े के दौरान विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से यात्रियों और कर्मचारियों को यह संदेश दिया जा रहा है कि स्वच्छता केवल सफाई करने से नहीं बल्कि गंदगी न फैलाने की आदत विकसित करने से भी कायम रहती है। इस अभियान की थीम “स्वच्छता में सहभाग; स्वच्छ भारत, विकसित भारत” इसी सामूहिक जिम्मेदारी को रेखांकित करती है। स्वच्छ भारत की दिशा में सार्वजनिक संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण है और रेलवे देश के सबसे बड़े सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क में से एक होने के कारण स्वच्छता के संदेश को बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचाने की क्षमता रखता है। रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन विभिन्न आयु वर्ग, क्षेत्रों और सामाजिक पृष्ठभूमि के लोग आते-जाते हैं। ऐसे में स्टेशन परिसर में दिखाई देने वाली स्वच्छता व्यवस्था यात्रियों के व्यवहार को भी प्रभावित कर सकती है। साफ-सुथरे परिसर में लोग सामान्यतः स्वच्छता बनाए रखने के प्रति अधिक जागरूक हो सकते हैं। दूसरी ओर गंदगी दिखाई देने पर कूड़ा फैलने की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए नियमित सफाई और यात्रियों की सहभागिता दोनों आवश्यक हैं। सूरतगढ़ स्टेशन पर पेयजल बूथों की विशेष सफाई अभियान ने इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए स्वच्छता को प्राथमिकता देने का संदेश दिया।
उत्तर पश्चिम रेलवे द्वारा 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर 2026 तक स्वच्छता ही सेवा एवं स्वच्छता पखवाड़ा-2026 मनाया जा रहा है। यह अवधि महात्मा गांधी जयंती तक चलने वाले स्वच्छता से जुड़े कार्यक्रमों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। स्वच्छता अभियान का उद्देश्य लोगों में सफाई के प्रति जागरूकता पैदा करने के साथ स्वच्छता को दैनिक जीवन की आदत बनाने के लिए प्रेरित करना है। रेलवे जैसे बड़े संगठन में स्वच्छता अभियान की पहुंच हजारों कर्मचारियों और लाखों यात्रियों तक हो सकती है। इसलिए रेलवे परिसरों में आयोजित होने वाली स्वच्छता गतिविधियां केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि इनके माध्यम से व्यापक जनजागरूकता का संदेश भी प्रसारित होता है। सूरतगढ़ रेलवे स्टेशन पर आयोजित विशेष सफाई अभियान इसी व्यापक प्रयास का एक हिस्सा रहा। पेयजल बूथों को स्वच्छ रखने के लिए विशेष सफाई अभियान चलाने का उद्देश्य यात्रियों के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना है। स्टेशन पर आने वाले यात्रियों को पेयजल लेने के लिए बूथों का उपयोग करना पड़ता है। यदि इन स्थानों पर नियमित सफाई हो और आसपास कचरा न हो तो यात्रियों को अधिक सुविधाजनक अनुभव मिलता है। इसके साथ ही स्वच्छता का संबंध केवल सुविधा से नहीं बल्कि स्वास्थ्य और पर्यावरण से भी है। खुले में पड़ा कचरा, गंदा पानी या अस्वच्छ स्थान विभिन्न प्रकार की समस्याओं का कारण बन सकते हैं। इसलिए सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता को प्राथमिकता देना आवश्यक है। रेलवे द्वारा विशेष सफाई अभियान के माध्यम से नियमित व्यवस्था को मजबूत करने और कर्मचारियों को स्वच्छता के प्रति सतर्क रखने का प्रयास किया जाता है। ऐसे अभियानों में यात्रियों की सहभागिता भी महत्वपूर्ण होती है। रेलवे प्रशासन द्वारा सफाई की व्यवस्था करने के बावजूद यदि यात्री लगातार कूड़ा इधर-उधर फेंकते रहें तो स्वच्छता बनाए रखना कठिन हो सकता है। इसलिए स्वच्छता अभियान का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य व्यवहार में बदलाव लाना भी है। यात्रियों को यह समझना जरूरी है कि स्टेशन परिसर उनका भी सार्वजनिक स्थान है और उसकी स्वच्छता बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी भी है। कूड़ा निर्धारित स्थान पर डालना, प्लास्टिक और अन्य सामग्री को इधर-उधर न छोड़ना, पेयजल बूथों के आसपास गंदगी न करना तथा सफाई कर्मचारियों के कार्य में सहयोग करना स्वच्छता में सहभागिता के सरल तरीके हैं। इसी प्रकार रेलवे कर्मचारी भी यात्रियों को आवश्यक जानकारी और मार्गदर्शन देकर अभियान को प्रभावी बना सकते हैं। स्वच्छता पखवाड़े के दौरान आयोजित गतिविधियां इस सामूहिक जिम्मेदारी को सामने लाने का अवसर देती हैं। सूरतगढ़ स्टेशन पर पेयजल बूथों की सफाई के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि यात्रियों की मूलभूत सुविधाओं से जुड़े स्थानों की स्वच्छता को विशेष प्राथमिकता दी जानी चाहिए। स्वच्छ पेयजल और स्वच्छ वातावरण दोनों मिलकर यात्रियों के लिए बेहतर सार्वजनिक सुविधा का आधार बनते हैं। अभियान की अवधि समाप्त होने के बाद भी नियमित सफाई और यात्रियों की सहभागिता जारी रहना ही इसकी वास्तविक सफलता होगी। इस दृष्टि से स्वच्छता पखवाड़ा लोगों में स्थायी स्वच्छता आदत विकसित करने की दिशा में एक अवसर प्रदान करता है।
रेलवे स्टेशन पर स्वच्छता बनाए रखना केवल सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं बल्कि सभी संबंधित पक्षों की साझा जिम्मेदारी है। सूरतगढ़ रेलवे स्टेशन पर पेयजल बूथों की विशेष सफाई के माध्यम से इस सामूहिक जिम्मेदारी को व्यवहारिक रूप में सामने लाया गया। रेलवे कर्मचारियों द्वारा नियमित रूप से सफाई व्यवस्था संभालने के साथ यात्रियों को भी स्वच्छता के नियमों का पालन करना आवश्यक है। स्टेशन पर प्रतिदिन अलग-अलग स्थानों से आने वाले यात्रियों की संख्या अधिक होने के कारण थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ी मात्रा में कचरे का कारण बन सकती है। इसलिए कचरा प्रबंधन और स्वच्छता के प्रति जागरूकता दोनों आवश्यक हैं। पेयजल बूथों के आसपास विशेष रूप से प्लास्टिक गिलास, बोतल, पैकेट और अन्य सामग्री जमा होने की संभावना रहती है। यदि इन्हें समय पर हटाया जाए और यात्रियों को निर्धारित स्थान पर कचरा डालने के लिए प्रेरित किया जाए तो सफाई व्यवस्था बेहतर रह सकती है। स्वच्छता अभियान इस व्यवस्था की समीक्षा और सुधार का अवसर प्रदान करता है। अभियान के दौरान कर्मचारियों को भी यह संदेश मिलता है कि सार्वजनिक स्थानों की सफाई में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। सफाई कार्य को केवल एक नियमित ड्यूटी के रूप में नहीं बल्कि यात्रियों की सुविधा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े कार्य के रूप में देखा जाना चाहिए। स्टेशन परिसर की स्वच्छता यात्रियों के लिए पहली नजर में दिखाई देने वाली व्यवस्था होती है। साफ-सुथरा प्लेटफॉर्म, स्वच्छ पेयजल बूथ, व्यवस्थित कचरा प्रबंधन और साफ प्रतीक्षालय यात्रियों को बेहतर सुविधा का अनुभव देते हैं। इसके विपरीत गंदगी से असुविधा और असंतोष की स्थिति बन सकती है। इसलिए स्वच्छता अभियान का प्रभाव यात्रियों की सुविधा और रेलवे की सार्वजनिक छवि दोनों पर पड़ता है। हालांकि किसी भी अभियान की स्थायी सफलता नियमित व्यवस्था और व्यवहार परिवर्तन पर निर्भर करती है। एक दिन विशेष सफाई करने के बाद यदि अगले दिनों में स्वच्छता पर ध्यान न दिया जाए तो स्थिति फिर खराब हो सकती है। इसलिए स्वच्छता ही सेवा अभियान का संदेश यह होना चाहिए कि विशेष अभियान के साथ रोजमर्रा की सफाई भी लगातार जारी रहे। रेलवे कर्मचारियों के साथ यात्रियों को भी इस जिम्मेदारी में भागीदार बनाना आवश्यक है। स्वच्छता के प्रति छोटी-छोटी आदतें लंबे समय में बड़ा परिवर्तन ला सकती हैं। यात्री यदि अपना कचरा डस्टबिन में डालें, अनावश्यक रूप से पानी न बहाएं, सार्वजनिक स्थानों पर थूकने से बचें और अन्य यात्रियों को भी स्वच्छता के लिए प्रेरित करें तो रेलवे परिसर की स्वच्छता व्यवस्था में सुधार हो सकता है। इसी प्रकार स्थानीय स्तर पर स्वयंसेवी संस्थाएं, सामाजिक संगठन और अन्य नागरिक समूह भी जागरूकता गतिविधियों में सहयोग कर सकते हैं। स्वच्छता का संदेश जितने अधिक लोगों तक पहुंचेगा, उतनी ही अधिक संभावना होगी कि यह दैनिक व्यवहार का हिस्सा बने। सूरतगढ़ रेलवे स्टेशन पर चलाया गया अभियान इसी व्यापक जनभागीदारी की दिशा में एक प्रयास रहा। “स्वच्छता में सहभाग; स्वच्छ भारत, विकसित भारत” की भावना तभी मजबूत होगी जब स्वच्छता को केवल अभियान की अवधि तक सीमित न रखकर पूरे वर्ष अपनाया जाए।
स्वच्छता ही सेवा एवं स्वच्छता पखवाड़ा-2026 के अंतर्गत सूरतगढ़ रेलवे स्टेशन पर पेयजल बूथों की विशेष सफाई अभियान ने रेलवे परिसर की स्वच्छता और यात्री सुविधाओं को प्राथमिकता देने का संदेश दिया। उत्तर पश्चिम रेलवे द्वारा 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक चलाए जा रहे अभियान में स्वच्छता को जनभागीदारी से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। सूरतगढ़ में आयोजित गतिविधि इसी प्रयास की एक कड़ी रही, जिसमें पेयजल बूथों की सफाई पर विशेष ध्यान दिया गया। रेलवे स्टेशन पर स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता यात्रियों की मूलभूत आवश्यकता है और इसके साथ स्वच्छ वातावरण बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। इस अभियान ने यह संदेश दिया कि स्वच्छता केवल सफाई कर्मचारियों के प्रयास से संभव नहीं है, बल्कि यात्रियों और आम नागरिकों की सक्रिय सहभागिता भी जरूरी है। स्टेशन पर आने वाला प्रत्येक यात्री यदि अपने स्तर पर स्वच्छता के नियमों का पालन करे तो सामूहिक रूप से रेलवे परिसर को साफ रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है। अभियान के दौरान विशेष सफाई से उन स्थानों को बेहतर बनाने का प्रयास किया गया जो यात्रियों के नियमित उपयोग में आते हैं। पेयजल बूथों की स्वच्छता से जुड़ी गतिविधि यात्रियों के स्वास्थ्य, सुविधा और स्वच्छ वातावरण की आवश्यकता को सामने लाती है। स्वच्छता अभियान का व्यापक उद्देश्य भी यही है कि सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने के साथ नागरिकों में जिम्मेदारी की भावना विकसित हो। रेलवे परिसर में स्वच्छता की निरंतरता के लिए नियमित सफाई, उचित कचरा प्रबंधन, यात्रियों की जागरूकता और कर्मचारियों की सक्रिय भूमिका आवश्यक है। अभियान की अवधि के दौरान विशेष गतिविधियां इस दिशा में प्रेरक भूमिका निभा सकती हैं, लेकिन इसका स्थायी परिणाम तभी सामने आएगा जब लोग स्वच्छता को अपने दैनिक व्यवहार का हिस्सा बनाएंगे। स्वच्छता का संबंध केवल आसपास की गंदगी हटाने से नहीं बल्कि गंदगी पैदा न करने की आदत से भी है। इसलिए यात्रियों को अपने साथ निकलने वाले कचरे को निर्धारित स्थान पर डालना चाहिए और सार्वजनिक सुविधाओं का जिम्मेदारी से उपयोग करना चाहिए। पेयजल बूथों पर भी पानी की बर्बादी रोकना और आसपास स्वच्छता बनाए रखना जरूरी है। रेलवे प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का सही उपयोग करना यात्रियों की जिम्मेदारी है। इसी प्रकार सफाई कर्मचारियों द्वारा किए जा रहे कार्य का सम्मान और उसमें सहयोग करना भी स्वच्छता संस्कृति का हिस्सा है। सूरतगढ़ रेलवे स्टेशन पर चलाया गया विशेष अभियान इस बात का उदाहरण है कि किसी सार्वजनिक सुविधा की स्वच्छता को केंद्र में रखकर जनजागरूकता का संदेश दिया जा सकता है। स्वच्छ रेलवे स्टेशन यात्रियों के लिए सुविधा और गरिमा दोनों से जुड़ा विषय है। स्वच्छ वातावरण में यात्रा करने से यात्रियों को बेहतर अनुभव मिलता है और सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह महत्वपूर्ण है। उत्तर पश्चिम रेलवे के स्वच्छता पखवाड़े की थीम “स्वच्छता में सहभाग; स्वच्छ भारत, विकसित भारत” इस बात को रेखांकित करती है कि स्वच्छ भारत के निर्माण में हर नागरिक की भूमिका है। सूरतगढ़ स्टेशन पर पेयजल बूथों की सफाई के माध्यम से इसी भावना को आगे बढ़ाया गया। अभियान के माध्यम से कर्मचारियों और यात्रियों को यह संदेश मिला कि स्वच्छता को केवल किसी विशेष दिन या पखवाड़े तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे निरंतर आदत और सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाना चाहिए। स्वच्छ स्टेशन, स्वच्छ परिसर और स्वच्छ सुविधाएं यात्रियों की बेहतर सेवा का आधार हैं तथा इन्हें बनाए रखने में रेलवे प्रशासन के साथ आमजन की सहभागिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यही स्वच्छता ही सेवा अभियान का मूल संदेश है—स्वच्छता में सहभाग, स्वच्छ भारत, विकसित भारत।
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