
झुकेही रैक प्वाइंट से यूरिया की अनलोडिंग शुरू, किसानों को आवश्यकता के अनुसार खाद उपलब्ध कराने की तैयारी; कलेक्टर ने ई-टोकन से ही वितरण के दिए निर्देश
कटनी, 26 सितंबर। जिले में खरीफ फसलों के लिए आवश्यक उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में नीम कोटेड यूरिया की दो रैक झुकेही रैक प्वाइंट पर पहुंची हैं। इन दोनों रैकों के माध्यम से जिले को कुल 871 मीट्रिक टन यूरिया प्राप्त हो रही है। रैक प्वाइंट पर यूरिया को उतारने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है तथा निर्धारित वितरण व्यवस्था के अनुसार इसे जिले के विभिन्न डबल लॉक केंद्रों, सहकारी संस्थाओं और अन्य निर्धारित केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा। जिला प्रशासन के अनुसार किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह व्यवस्था की गई है। कलेक्टर श्री आशीष तिवारी द्वारा जिले में उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था को लेकर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से निरंतर संवाद किया जा रहा है। प्राप्त यूरिया का व्यवस्थित और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। विशेष रूप से कलेक्टर ने खाद का वितरण ई-टोकन के माध्यम से ही कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसानों को पारदर्शी व्यवस्था के तहत उनकी आवश्यकता के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराया जा सके। खरीफ सीजन में यूरिया की मांग बढ़ने के कारण किसानों के लिए इसकी उपलब्धता एक महत्वपूर्ण विषय रहती है। फसलों की आवश्यकता के अनुसार समय पर खाद उपलब्ध होना कृषि कार्यों की निरंतरता के लिए जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिले में उपलब्ध स्टॉक को विभिन्न केंद्रों पर आवश्यकता के अनुरूप वितरित करने की योजना बनाई गई है। जिला विपणन अधिकारी श्री आनंद नारायण पाण्डेय के अनुसार प्राप्त 871 मीट्रिक टन यूरिया में से अलग-अलग केंद्रों के लिए निर्धारित मात्रा आवंटित की गई है। कटनी डबल लॉक केंद्र को 30 मीट्रिक टन, बहोरीबंद डबल लॉक केंद्र को 140 मीट्रिक टन, स्लीमनाबाद डबल लॉक केंद्र को 159 मीट्रिक टन और बरही डबल लॉक केंद्र को 140 मीट्रिक टन यूरिया आवंटित की गई है। इसके अतिरिक्त जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक कटनी को 270 मीट्रिक टन, सीएमएस कटनी को 30 मीट्रिक टन, सीएमएस उमरियापान-ढीमरखेड़ा को 30 मीट्रिक टन तथा एमपी एग्रो कटनी को 72 मीट्रिक टन यूरिया आवंटित की गई है। इस प्रकार प्राप्त खाद को जिले के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है, जिससे किसानों को अपने नजदीकी निर्धारित केंद्र से उर्वरक प्राप्त करने में सुविधा हो। प्रशासन द्वारा वितरण व्यवस्था को नियंत्रित और पारदर्शी रखने के लिए ई-टोकन प्रणाली के उपयोग पर जोर दिया गया है। इससे किसानों को खाद प्राप्त करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया की जानकारी पहले से मिल सकेगी और वितरण केंद्रों पर अनावश्यक भीड़ एवं अव्यवस्था को नियंत्रित करने में सहायता मिल सकती है। जिले में यूरिया की नई खेप पहुंचने से किसानों के लिए उपलब्धता को लेकर राहत की स्थिति बनने की संभावना है। हालांकि खाद का उपयोग भी फसल और मिट्टी की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार ही किया जाना आवश्यक है। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे मिट्टी के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए संतुलित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करें। आवश्यकता से अधिक खाद का उपयोग करने से एक ओर कृषि लागत बढ़ सकती है, वहीं दूसरी ओर लंबे समय में मिट्टी के स्वास्थ्य और उसकी उर्वरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए किसानों को कृषि विशेषज्ञों और विभागीय सलाह के अनुसार उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने की सलाह दी गई है। जिले में पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने के साथ-साथ किसानों को वैज्ञानिक एवं संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूक करना भी इस व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
प्राप्त यूरिया का केंद्रवार आवंटन किसानों तक खाद की पहुंच सुनिश्चित करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। झुकेही रैक प्वाइंट पर पहुंची दो रैकों से उतारी जा रही कुल 871 मीट्रिक टन यूरिया को जिले के अलग-अलग वितरण केंद्रों तक पहुंचाया जाना है। जिला विपणन अधिकारी श्री आनंद नारायण पाण्डेय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार कटनी डबल लॉक केंद्र को 30 मीट्रिक टन यूरिया आवंटित की गई है। बहोरीबंद डबल लॉक केंद्र को 140 मीट्रिक टन, स्लीमनाबाद डबल लॉक केंद्र को 159 मीट्रिक टन और बरही डबल लॉक केंद्र को 140 मीट्रिक टन यूरिया दी जाएगी। जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक कटनी को सबसे अधिक 270 मीट्रिक टन यूरिया आवंटित की गई है। वहीं सीएमएस कटनी तथा सीएमएस उमरियापान-ढीमरखेड़ा को 30-30 मीट्रिक टन और एमपी एग्रो कटनी को 72 मीट्रिक टन यूरिया का आवंटन किया गया है। इस वितरण व्यवस्था का उद्देश्य जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में खाद की उपलब्धता को बनाए रखना है, ताकि किसानों को केवल एक ही स्थान पर निर्भर न रहना पड़े। अलग-अलग केंद्रों को निर्धारित मात्रा आवंटित होने से स्थानीय स्तर पर मांग के अनुरूप खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा सकेगी। हालांकि किसी भी केंद्र पर वास्तविक उपलब्धता और वितरण की स्थिति उस समय की मांग, उठाव और प्रशासन द्वारा जारी व्यवस्था पर निर्भर करेगी। किसानों को सलाह दी गई है कि वे खाद की आवश्यकता होने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही संबंधित केंद्र से उर्वरक प्राप्त करें। प्रशासन द्वारा ई-टोकन व्यवस्था को अनिवार्य किए जाने का उद्देश्य वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और उपलब्ध खाद का व्यवस्थित तरीके से वितरण सुनिश्चित करना है। किसानों के लिए यह व्यवस्था इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उर्वरक की मांग बढ़ने के समय वितरण केंद्रों पर भीड़ की स्थिति बन सकती है। ई-टोकन के माध्यम से किसान को अपने खाद उठाव से संबंधित जानकारी पहले से प्राप्त हो सकती है और निर्धारित तिथि के अनुसार उर्वरक लेने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इससे वितरण केंद्र पर किसानों के समय की बचत होने की संभावना रहती है और प्रशासन के लिए भी उपलब्ध स्टॉक तथा वितरण की निगरानी आसान हो सकती है। खाद की उपलब्धता के साथ-साथ यह भी आवश्यक है कि इसका वितरण पात्र एवं वास्तविक किसानों तक पहुंचे और निर्धारित प्रक्रिया का पालन हो। किसानों को किसी भी प्रकार की अफवाह या अनधिकृत व्यक्ति की जानकारी पर निर्भर रहने के बजाय विभागीय व्यवस्था के अनुसार खाद प्राप्त करने की सलाह दी गई है। यदि किसान को ई-टोकन, रिटेलर, उर्वरक की उपलब्धता या उठाव की तिथि को लेकर जानकारी चाहिए तो ई-विकास 2.0 के तहत उपलब्ध व्हाट्सएप बॉट सुविधा का उपयोग किया जा सकता है। किसान मोबाइल पर व्हाट्सएप के माध्यम से “हेल्प” या “मदद” लिखकर आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इस डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से टोकन, रिटेलर, उर्वरक, उठाव की तिथि और टोकन की वैधता से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। डिजिटल माध्यम का उपयोग किसानों को वितरण प्रक्रिया से जोड़ने और जानकारी को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक कदम है।
खरीफ फसलों के दौरान यूरिया की मांग का सीधा संबंध फसल की अवस्था, क्षेत्रफल और किसान द्वारा अपनाई जा रही कृषि पद्धति से होता है। यूरिया नाइट्रोजन आधारित प्रमुख उर्वरक है और कई फसलों में इसका उपयोग किया जाता है। लेकिन किसी भी उर्वरक का उपयोग मिट्टी की स्थिति, फसल की आवश्यकता और अनुशंसित मात्रा के अनुसार करना जरूरी है। कृषि विभाग ने इसी कारण किसानों से संतुलित मात्रा में उर्वरक उपयोग करने की अपील की है। आवश्यकता से अधिक यूरिया डालने से हमेशा फसल को अतिरिक्त लाभ मिले, यह जरूरी नहीं है। इसके विपरीत अनावश्यक उपयोग से कृषि लागत बढ़ सकती है और मिट्टी के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। संतुलित पोषण के लिए खेत की मिट्टी की स्थिति और फसल की जरूरत को ध्यान में रखना आवश्यक होता है। किसानों को मिट्टी परीक्षण, कृषि विशेषज्ञों की सलाह और विभागीय अनुशंसाओं के आधार पर उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए। यूरिया की उपलब्धता बढ़ने के साथ यह संदेश भी महत्वपूर्ण है कि किसान केवल उपलब्धता के आधार पर आवश्यकता से अधिक खाद का भंडारण या उपयोग न करें। जिले में नई खेप पहुंचने का उद्देश्य किसानों को जरूरत के समय खाद उपलब्ध कराना है। यदि किसान निर्धारित मात्रा में ही उर्वरक खरीदते और उपयोग करते हैं तो उपलब्ध स्टॉक अधिक संख्या में किसानों तक पहुंच सकता है। इससे वितरण व्यवस्था पर भी दबाव कम हो सकता है। प्रशासन द्वारा ई-टोकन के माध्यम से वितरण कराने के निर्देश इसी प्रकार की नियंत्रित व्यवस्था का हिस्सा हैं। डिजिटल टोकन से किसान के खाद उठाव की प्रक्रिया दर्ज होने में सहायता मिल सकती है और उपलब्ध स्टॉक की निगरानी की जा सकती है। साथ ही किसानों को यह सुविधा भी मिलती है कि वे अपने मोबाइल के माध्यम से टोकन से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकें। ई-विकास 2.0 के तहत व्हाट्सएप बॉट में “हेल्प” या “मदद” लिखकर टोकन और अन्य आवश्यक जानकारी प्राप्त करने की सुविधा किसानों के लिए उपलब्ध कराई गई है। इस सुविधा के माध्यम से रिटेलर की जानकारी, संबंधित उर्वरक, उठाव की तारीख और टोकन की वैधता जैसी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। डिजिटल सुविधा का उपयोग करने के लिए किसानों को अपने मोबाइल फोन पर व्हाट्सएप के माध्यम से निर्धारित प्रक्रिया अपनानी होगी। इससे किसान को खाद लेने से पहले आवश्यक जानकारी प्राप्त करने में मदद मिल सकती है। हालांकि जिन किसानों को डिजिटल माध्यम का उपयोग करने में कठिनाई हो, उनके लिए संबंधित सहकारी केंद्र, कृषि विभाग या निर्धारित वितरण केंद्र से जानकारी प्राप्त करना उपयोगी रहेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ने के साथ ऐसी सुविधाएं किसानों को सरकारी वितरण व्यवस्था से जोड़ने में सहायक हो सकती हैं। खाद की उपलब्धता के साथ-साथ सही जानकारी का उपलब्ध होना भी जरूरी है, क्योंकि गलत सूचना के कारण किसानों को अनावश्यक परेशानी हो सकती है। इसलिए विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई अधिकृत जानकारी का ही पालन करना उचित रहेगा।
कलेक्टर श्री आशीष तिवारी द्वारा ई-टोकन से ही खाद वितरण कराने के निर्देश को पारदर्शी वितरण व्यवस्था से जोड़कर देखा जा रहा है। उर्वरक की मांग बढ़ने के समय किसानों की संख्या अधिक होने के कारण वितरण केंद्रों पर भीड़ और लंबी कतार जैसी स्थिति बन सकती है। ई-टोकन व्यवस्था से किसानों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार खाद प्राप्त करने का अवसर मिलेगा और केंद्रों पर एक साथ अधिक संख्या में लोगों की भीड़ को व्यवस्थित करने में सहायता मिल सकती है। इसके अलावा टोकन आधारित व्यवस्था से खाद वितरण का रिकॉर्ड तैयार होता है, जिससे उपलब्ध स्टॉक और उठाव की स्थिति की निगरानी की जा सकती है। जिला प्रशासन के लिए भी यह जानकारी महत्वपूर्ण होती है कि किस केंद्र पर कितना खाद उपलब्ध है और कितनी मात्रा वितरित हो चुकी है। यदि किसी केंद्र पर मांग अधिक है तो उपलब्ध जानकारी के आधार पर वितरण व्यवस्था में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं। इसी तरह किसी अन्य केंद्र पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने की स्थिति में किसानों को उसके बारे में जानकारी दी जा सकती है। हालांकि वास्तविक व्यवस्था प्रशासन और संबंधित विभाग द्वारा उपलब्ध स्टॉक एवं स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर तय की जाएगी। किसानों के लिए यह जरूरी है कि वे खाद खरीदने से पहले टोकन संबंधी प्रक्रिया पूरी कर लें और निर्धारित तिथि एवं केंद्र के अनुसार ही खाद उठाएं। ई-विकास 2.0 की व्हाट्सएप सुविधा इस प्रक्रिया में किसानों को मोबाइल से जानकारी उपलब्ध कराने का माध्यम है। किसान “हेल्प” या “मदद” लिखकर टोकन और अन्य जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इससे उन किसानों को विशेष सुविधा मिल सकती है जो मोबाइल के माध्यम से सेवाओं का उपयोग करने में सक्षम हैं। साथ ही विभागीय स्तर पर ऐसे किसानों के लिए भी सहायता व्यवस्था जरूरी है जिन्हें डिजिटल प्रक्रिया समझने में कठिनाई होती है। सहकारी समितियों और निर्धारित केंद्रों पर किसानों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है। खाद की बिक्री और वितरण के दौरान निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही उर्वरक खरीदें और किसी अनधिकृत व्यक्ति से खाद खरीदने या अतिरिक्त राशि देने से बचें। उर्वरक की उपलब्धता और वितरण को लेकर किसी प्रकार की समस्या होने पर संबंधित कृषि या सहकारी विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया जा सकता है। जिला प्रशासन द्वारा दो रैक यूरिया उपलब्ध कराने के प्रयास से जिले के विभिन्न क्षेत्रों में खाद की आपूर्ति को बनाए रखने की दिशा में कदम उठाया गया है। 871 मीट्रिक टन यूरिया की उपलब्धता से उन किसानों को सहायता मिल सकती है जिन्हें खरीफ फसलों के लिए निर्धारित मात्रा में यूरिया की आवश्यकता है। हालांकि यह भी जरूरी है कि खाद का वितरण क्षेत्रवार मांग और वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप हो। केंद्रवार आवंटन इसी उद्देश्य से किया गया है। प्रशासनिक निगरानी, विभागीय समन्वय और डिजिटल टोकन व्यवस्था मिलकर वितरण को व्यवस्थित बनाने में भूमिका निभा सकते हैं।
झुकेही रैक प्वाइंट पर पहुंची नीम कोटेड यूरिया की दो रैक से जिले को मिली 871 मीट्रिक टन खाद खरीफ सीजन में किसानों की आवश्यकता को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण आपूर्ति है। रैक प्वाइंट से यूरिया उतारकर निर्धारित केंद्रों तक भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कटनी, बहोरीबंद, स्लीमनाबाद, बरही, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक, सीएमएस कटनी, सीएमएस उमरियापान-ढीमरखेड़ा और एमपी एग्रो कटनी को निर्धारित मात्रा में यूरिया आवंटित की गई है। इससे जिले के विभिन्न क्षेत्रों में किसानों को खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। कलेक्टर श्री आशीष तिवारी ने खाद का वितरण ई-टोकन के माध्यम से ही कराने के निर्देश दिए हैं। किसानों के लिए ई-विकास 2.0 के तहत व्हाट्सएप बॉट से टोकन जनरेट करने और आवश्यक जानकारी प्राप्त करने की सुविधा उपलब्ध है। किसान मोबाइल पर “हेल्प” या “मदद” लिखकर टोकन, रिटेलर, उर्वरक, उठाव की तारीख और टोकन की वैधता सहित जरूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए किसान संबंधित केंद्र से खाद प्राप्त कर सकेंगे। कृषि विभाग ने किसानों से संतुलित उर्वरक उपयोग की अपील करते हुए कहा है कि आवश्यकता से अधिक खाद का इस्तेमाल करने से कृषि लागत बढ़ने के साथ मिट्टी की उर्वरक क्षमता पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसलिए किसान फसल और मिट्टी की आवश्यकता के अनुरूप ही यूरिया एवं अन्य उर्वरकों का उपयोग करें। उर्वरक की उपलब्धता के साथ-साथ उसका वैज्ञानिक और संतुलित उपयोग भी टिकाऊ कृषि के लिए महत्वपूर्ण है। नई खेप से जिले में खाद की उपलब्धता को मजबूत करने का प्रयास किया गया है और केंद्रवार आवंटन के माध्यम से इसे विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। किसानों के लिए आवश्यक है कि वे खाद की खरीद निर्धारित प्रक्रिया और अधिकृत केंद्रों के माध्यम से ही करें तथा ई-टोकन से संबंधित निर्देशों का पालन करें। इससे वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने और उपलब्ध खाद को अधिक संख्या में जरूरतमंद किसानों तक पहुंचाने में सहायता मिल सकती है। प्रशासन द्वारा उर्वरक उपलब्धता की निगरानी, केंद्रवार वितरण और डिजिटल टोकन व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है। झुकेही पहुंची दोनों रैकों के माध्यम से प्राप्त 871 मीट्रिक टन यूरिया का निर्धारित आवंटन इसी व्यवस्था के तहत किया जा रहा है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह या अनधिकृत जानकारी पर निर्भर न रहें और खाद से संबंधित जानकारी के लिए विभागीय व्यवस्था का उपयोग करें। इस प्रकार नई यूरिया आपूर्ति, केंद्रवार आवंटन और ई-टोकन आधारित वितरण व्यवस्था के माध्यम से कटनी जिले में खरीफ सीजन के दौरान किसानों की उर्वरक आवश्यकता को पूरा करने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है।