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कोरबा की बेटी संजू देवी ने एशियन गेम्स में रचा स्वर्णिम इतिहास, भारतीय महिला कबड्डी टीम को मिला स्वर्ण पदक; मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने वीडियो कॉल पर दी बधाई

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कोरबा। जापान में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला कबड्डी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम कर देश के खेल इतिहास में एक और उपलब्धि दर्ज की है। भारतीय टीम ने रोमांचक फाइनल मुकाबले में ईरान को 37-34 से पराजित कर स्वर्ण पदक हासिल किया। इस ऐतिहासिक जीत में छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले की बेटी संजू देवी की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। भारतीय महिला कबड्डी टीम की सदस्य संजू देवी ने पूरे टूर्नामेंट में अपने खेल कौशल, आक्रामक तेवर और लगातार बेहतर प्रदर्शन से टीम के अभियान में योगदान दिया। फाइनल में भारतीय टीम ने बेहद संघर्षपूर्ण मुकाबले में ईरान की चुनौती का सामना करते हुए निर्णायक क्षणों में संयम बनाए रखा और तीन अंकों के अंतर से मुकाबला अपने नाम किया। इस स्वर्णिम उपलब्धि के बाद कोरबा सहित पूरे छत्तीसगढ़ में खेल प्रेमियों और संजू देवी के प्रशंसकों में खुशी का माहौल है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी संजू देवी से फोन पर बातचीत कर उन्हें इस शानदार उपलब्धि के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने बातचीत के दौरान संजू देवी के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी प्रतिभा, मेहनत और शानदार खेल प्रदर्शन से न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश का मान बढ़ाया है। मुख्यमंत्री की ओर से संजू देवी को बधाई दिए जाने की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से भी साझा की गई। मुख्यमंत्री ने संजू देवी की उपलब्धि को प्रदेश की बेटियों और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक बताया तथा कहा कि उनकी सफलता से छत्तीसगढ़ गौरवान्वित है।
एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला कबड्डी टीम का अभियान शुरुआत से ही मजबूत रहा। प्रतियोगिता के लिए चुनी गई 12 सदस्यीय भारतीय महिला टीम में कप्तान पुष्पा राणा के साथ रितु नेगी, सोनाली शिंगाटे, संजू देवी, पूजा काजला, रितु श्योराण, ज्योति ठाकुर, पिंकी रॉय, मनीषा कुमारी, भावना ठाकुर, राज रानी और निकिता कुमारी शामिल थीं। टीम ने जापान के आइची-नगोया में आयोजित प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक की अपनी दावेदारी को लगातार मजबूत किया। भारतीय महिला टीम पहले से ही एशियन गेम्स की मजबूत कबड्डी टीमों में शामिल रही है और 2026 में भी उसने अपने अभियान को उसी निरंतरता के साथ आगे बढ़ाया। प्रतियोगिता में महिला कबड्डी के मुकाबले टोकाई सिटिजन्स जिम्नेजियम में खेले गए। ग्रुप चरण में भारत ने बांग्लादेश के खिलाफ 42-21 की जीत से अभियान की शुरुआत की। इस मुकाबले में संजू देवी ने आक्रमण में महत्वपूर्ण योगदान दिया और भारतीय टीम को शुरुआती बढ़त बनाने में मदद की। मैच के दौरान भारत ने प्रभावी रेडिंग और मजबूत डिफेंस के सहारे बांग्लादेश को दबाव में रखा तथा अंततः 21 अंकों के अंतर से मुकाबला जीता। इसके बाद भारतीय टीम ने ईरान को 37-23 से हराकर अपने अभियान को और मजबूत किया। ग्रुप चरण के अंतिम मुकाबले में भारत ने मेजबान जापान को 50-25 से पराजित किया और तीन जीत के साथ अपने ग्रुप अभियान को अपराजित रहते हुए समाप्त किया। जापान के खिलाफ मुकाबले में भारतीय टीम ने पहले हाफ में 32-13 की बढ़त बना ली थी और पूरे मैच में अपना नियंत्रण बनाए रखा। इस प्रदर्शन के बाद भारतीय महिला टीम ने सेमीफाइनल में जगह बनाई और खिताब की ओर अपना कदम आगे बढ़ाया।
सेमीफाइनल में भारतीय महिला टीम का सामना नेपाल से हुआ। 25 सितंबर को खेले गए मुकाबले में भारत ने नेपाल को 48-24 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। इस मुकाबले में भारतीय टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और पहले हाफ में 31-17 की बढ़त हासिल कर ली। भारतीय रेडरों ने लगातार अंक जुटाए, जबकि डिफेंस ने नेपाल की खिलाड़ियों को खुलकर खेलने का अवसर नहीं दिया। संजू देवी ने भी रेडिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और कई मौकों पर भारतीय टीम के लिए अंक जुटाए। भारत ने पूरे मैच में तीन ऑलआउट हासिल किए और 48-24 के अंतर से मुकाबला अपने नाम कर फाइनल का टिकट पक्का किया। सेमीफाइनल की जीत के साथ भारतीय महिला टीम ने लगातार अपने स्वर्ण पदक अभियान को आगे बढ़ाया। इससे पहले भारतीय महिला कबड्डी टीम ने 2022 के हांगझोउ एशियन गेम्स में भी स्वर्ण पदक जीता था और 2026 में उसका लक्ष्य खिताब को बरकरार रखना था। प्रतियोगिता से पहले भारतीय टीम के सामने मजबूत प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक बचाने की चुनौती थी। टीम की तैयारियों के दौरान खिलाड़ियों ने प्रशिक्षण शिविरों में अभ्यास किया था और प्रतिद्वंद्वी टीमों के खेल का अध्ययन भी किया गया था। कप्तान पुष्पा राणा और कोचिंग स्टाफ ने प्रतियोगिता के लिए रणनीति तैयार की थी। टीम में अनुभवी खिलाड़ियों के साथ युवा प्रतिभाओं का संतुलन भी दिखाई दिया। संजू देवी को टीम की महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में शामिल किया गया था। प्रतियोगिता से पहले उन्हें 2025 महिला कबड्डी विश्व कप की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी यानी एमवीपी के रूप में भी उल्लेखित किया गया था और उनके प्रदर्शन को भारतीय टीम के लिए महत्वपूर्ण माना गया था।
फाइनल मुकाबले में भारतीय महिला कबड्डी टीम के सामने ईरान की चुनौती थी। मुकाबला शुरू होने के बाद दोनों टीमों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। ईरान ने कई मौकों पर भारतीय टीम पर दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने लगातार जवाब देते हुए मुकाबले को अपने नियंत्रण में बनाए रखा। फाइनल का स्कोर 37-34 रहा और भारत ने तीन अंकों के अंतर से स्वर्ण पदक अपने नाम किया। मैच के अंतिम चरण में दोनों टीमों के बीच अंतर बहुत कम था और ऐसे समय में भारतीय खिलाड़ियों ने धैर्य तथा सामूहिक रणनीति का परिचय दिया। निर्णायक क्षणों में भारतीय डिफेंस ने आवश्यक अंक हासिल किए और ईरान की वापसी की कोशिशों को रोक दिया। रिपोर्टों के अनुसार अंतिम मिनट में भारतीय रक्षा ने महत्वपूर्ण टैकल किया, जिसके बाद भारत की जीत की स्थिति मजबूत हो गई और टीम ने 37-34 से मुकाबला समाप्त किया। इस जीत के साथ भारतीय महिला टीम ने एशियन गेम्स में अपना स्वर्ण पदक बरकरार रखा। टीम की इस उपलब्धि को खिलाड़ियों की मेहनत, तैयारी, सामूहिक खेल और पूरे टूर्नामेंट में बनाए गए प्रदर्शन की निरंतरता से जोड़कर देखा जा रहा है। भारतीय महिला कबड्डी के लिए यह सफलता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि टीम ने ग्रुप चरण से लेकर सेमीफाइनल और फाइनल तक लगातार जीत दर्ज करते हुए बिना हार के अपना अभियान पूरा किया। भारतीय टीम ने पहले बांग्लादेश, फिर ईरान और जापान को ग्रुप चरण में हराया, इसके बाद सेमीफाइनल में नेपाल को पराजित किया और फाइनल में ईरान को मात देकर स्वर्ण पदक हासिल किया।
इस स्वर्णिम सफलता में कोरबा की बेटी संजू देवी का नाम विशेष रूप से चर्चा में आया है। संजू देवी भारतीय महिला कबड्डी टीम का हिस्सा हैं और एशियन गेम्स 2026 में देश का प्रतिनिधित्व कर रही थीं। उनके प्रदर्शन को भारतीय टीम के अभियान में महत्वपूर्ण माना गया। शुरुआती मुकाबले में बांग्लादेश के खिलाफ संजू देवी ने आक्रमण में लगातार अंक जुटाए और टीम को जीत दिलाने में योगदान दिया। आधिकारिक प्रतियोगिता कवरेज के अनुसार बांग्लादेश के खिलाफ 42-21 की जीत में संजू देवी ने भारतीय आक्रमण को गति दी और दूसरे हाफ में भी सफल रेड के माध्यम से टीम का स्कोर बढ़ाया। नेपाल के खिलाफ सेमीफाइनल में भी उनका योगदान उल्लेखित रहा, जहां भारत ने 48-24 से जीत हासिल की। फाइनल में भी भारतीय टीम की सामूहिक रणनीति और खिलाड़ियों के योगदान से ईरान पर जीत मिली। इस प्रकार संजू देवी की एशियन गेम्स यात्रा केवल एक खिलाड़ी के रूप में व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं रही, बल्कि कोरबा और छत्तीसगढ़ की खेल प्रतिभाओं के लिए भी एक उल्लेखनीय उपलब्धि बन गई। उनकी सफलता ने यह दिखाया है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से निकलने वाली प्रतिभाएं उचित अवसर और मेहनत के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं। संजू देवी की उपलब्धि विशेष रूप से उन युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक हो सकती है जो छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से खेल की दुनिया में आगे बढ़ने का सपना देखते हैं। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिलना स्थानीय स्तर पर खेल गतिविधियों के प्रति रुचि बढ़ाने में भी सहायक हो सकता है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा संजू देवी को बधाई देने के दौरान उनकी उपलब्धि को प्रदेश और देश के गौरव से जोड़ा गया। मुख्यमंत्री ने फोन पर संजू देवी से बातचीत कर उन्हें स्वर्ण पदक जीतने पर शुभकामनाएं दीं और उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्री ने कहा कि संजू देवी ने अपनी प्रतिभा, कड़ी मेहनत और शानदार प्रदर्शन से छत्तीसगढ़ तथा देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने यह भी कहा कि संजू देवी की सफलता प्रदेश के युवा खिलाड़ियों और विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की बेटियों की विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए खेल प्रतिभाओं को अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार के प्रयासों की बात कही। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के गांवों, आदिवासी क्षेत्रों और छोटे शहरों में मौजूद प्रतिभाओं को उचित मंच देने तथा उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने भारतीय महिला कबड्डी टीम के सभी खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और सहयोगी स्टाफ को भी इस सफलता के लिए बधाई दी। इस बातचीत के दौरान संजू देवी की उपलब्धि को लेकर मुख्यमंत्री की ओर से उन्हें प्रदेश वापस आने पर सम्मानित किए जाने की बात भी कही गई है। इससे संजू देवी के लिए यह सम्मान उनके खेल प्रदर्शन की सराहना के साथ-साथ प्रदेश की खेल प्रतिभाओं के लिए प्रोत्साहन का संदेश भी माना जा सकता है। मुख्यमंत्री और संजू देवी के बीच हुई बातचीत को सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के बाद यह खबर कोरबा और छत्तीसगढ़ में तेजी से चर्चा का विषय बनी।
कोरबा की संजू देवी की सफलता को केवल एक अंतरराष्ट्रीय पदक तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। किसी भी खिलाड़ी के लिए राष्ट्रीय टीम तक पहुंचना लंबी तैयारी, निरंतर अभ्यास, अनुशासन और प्रतियोगिताओं में लगातार प्रदर्शन का परिणाम होता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए खिलाड़ी को अपनी तकनीक के साथ-साथ शारीरिक फिटनेस, मानसिक एकाग्रता, टीम रणनीति और प्रतियोगिता के दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता विकसित करनी होती है। कबड्डी जैसे टीम खेल में व्यक्तिगत कौशल के साथ सामूहिक तालमेल भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। रेडर और डिफेंडर के बीच तालमेल, समय पर बोनस हासिल करना, टैकल की रणनीति, ऑलआउट से बचना और मैच के अंतिम क्षणों में स्कोर का प्रबंधन टीम की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारतीय महिला टीम ने एशियन गेम्स 2026 के दौरान इन सभी पहलुओं में निरंतरता दिखाई। संजू देवी की भूमिका भी इसी टीम रणनीति का हिस्सा रही। बांग्लादेश के खिलाफ उनके रेडिंग योगदान से लेकर नेपाल के खिलाफ सेमीफाइनल तक उनका प्रदर्शन टीम के अभियान में दर्ज हुआ। प्रतियोगिता से पहले भी संजू देवी को भारतीय टीम की प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल किया गया था। 2025 महिला कबड्डी विश्व कप में उन्हें एमवीपी चुने जाने का उल्लेख भी टीम की घोषणा से संबंधित कवरेज में किया गया था। इस पृष्ठभूमि में एशियन गेम्स का स्वर्ण उनके अंतरराष्ट्रीय खेल करियर की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आया है।
भारतीय महिला कबड्डी टीम के लिए 2026 एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक टीम के लगातार प्रदर्शन की कड़ी को आगे बढ़ाता है। एशियन गेम्स में महिला कबड्डी की शुरुआत 2010 से हुई थी और भारतीय टीम ने शुरुआती संस्करणों से ही इस प्रतियोगिता में मजबूत प्रदर्शन किया है। 2026 से पहले भारतीय महिला टीम ने 2010, 2014 और 2022 में स्वर्ण पदक जीता था, जबकि 2018 में उसे रजत पदक मिला था। इस बार टीम ने एक बार फिर स्वर्ण पदक हासिल कर अपनी स्थिति को मजबूत किया। इस उपलब्धि का महत्व इसलिए भी है कि टीम को हर प्रतियोगिता में नई परिस्थितियों और अलग-अलग प्रतिद्वंद्वियों का सामना करना पड़ता है। जापान में आयोजित प्रतियोगिता में भारतीय टीम ने स्थानीय परिस्थितियों के बीच अपना खेल कायम रखा और मेजबान जापान के खिलाफ भी 50-25 से जीत दर्ज की। इसके बाद नेपाल को 48-24 से हराकर फाइनल में पहुंची और ईरान के खिलाफ 37-34 की जीत के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया। यह पूरा अभियान भारतीय महिला कबड्डी टीम के लिए सामूहिक सफलता का उदाहरण रहा, जिसमें प्रत्येक खिलाड़ी ने अपनी भूमिका के अनुरूप योगदान दिया। संजू देवी के लिए इस अभियान की विशेषता यह रही कि कोरबा से निकलकर उन्होंने भारतीय महिला कबड्डी की राष्ट्रीय टीम में अपनी जगह बनाई और एशियन गेम्स जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करते हुए स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा बनीं।
मुख्यमंत्री की ओर से संजू देवी को दी गई बधाई ने इस उपलब्धि को प्रदेश स्तर पर भी विशेष चर्चा में ला दिया है। खेलों में अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के लिए राज्य और स्थानीय समाज की ओर से सम्मान का महत्व होता है। इससे खिलाड़ी को आगे बेहतर प्रदर्शन करने का उत्साह मिलता है और अन्य युवा खिलाड़ियों को भी खेलों में आगे आने की प्रेरणा मिलती है। मुख्यमंत्री ने संजू देवी की उपलब्धि को प्रदेश की बेटियों और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बताया है। यह संदेश ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब खेलों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और विभिन्न खेल विधाओं में भारतीय महिला खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक जीत रही हैं। संजू देवी की सफलता से कोरबा के स्थानीय खिलाड़ियों के बीच भी यह भावना मजबूत हो सकती है कि सीमित संसाधनों से शुरुआत करने वाली प्रतिभाएं मेहनत और निरंतर प्रशिक्षण के माध्यम से राष्ट्रीय टीम तक पहुंच सकती हैं। खेल प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण, मैदान, प्रशिक्षक, प्रतियोगिताओं में भागीदारी और आर्थिक सहयोग जैसे कई पक्ष महत्वपूर्ण होते हैं। किसी खिलाड़ी की अंतरराष्ट्रीय सफलता के पीछे उसके परिवार, प्रशिक्षकों, खेल संस्थाओं और टीम सहयोगियों की भी भूमिका होती है। संजू देवी के मामले में भी उनकी व्यक्तिगत मेहनत के साथ प्रशिक्षण और प्रतियोगी अनुभव ने उन्हें इस स्तर तक पहुंचाने में भूमिका निभाई होगी। उनकी उपलब्धि का प्रभाव केवल उनके व्यक्तिगत करियर तक सीमित न रहकर आने वाले खिलाड़ियों के लिए एक उदाहरण के रूप में भी सामने आ सकता है।
एशियन गेम्स में भारतीय महिला कबड्डी टीम की सफलता के बाद देशभर में खेल प्रेमियों के बीच उत्साह का माहौल है। भारत ने इस प्रतियोगिता में महिला कबड्डी का स्वर्ण पदक अपने नाम किया और टीम की खिलाड़ियों ने पूरे अभियान के दौरान मजबूत प्रदर्शन किया। फाइनल में ईरान जैसी मजबूत टीम के खिलाफ मुकाबला बेहद करीबी रहा और भारत ने 37-34 से जीत दर्ज की। इस जीत ने भारतीय महिला कबड्डी टीम की निरंतरता को भी सामने रखा। कप्तान पुष्पा राणा के नेतृत्व में टीम ने प्रतियोगिता के दौरान आक्रामक और रक्षात्मक दोनों मोर्चों पर संतुलित प्रदर्शन किया। वहीं संजू देवी सहित टीम की अन्य खिलाड़ियों ने अलग-अलग मुकाबलों में अपनी जिम्मेदारी निभाई। टीम की सफलता किसी एक खिलाड़ी की उपलब्धि नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास का परिणाम रही। फिर भी कोरबा की बेटी का इस टीम में शामिल होना छत्तीसगढ़ के लिए विशेष महत्व रखता है। जब किसी राज्य का खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम में शामिल होकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीतता है, तो स्थानीय स्तर पर उसकी उपलब्धि की अलग पहचान बनती है। संजू देवी के स्वर्ण पदक से कोरबा के खेल जगत और युवा खिलाड़ियों में उत्साह बढ़ने की संभावना है। मुख्यमंत्री द्वारा उन्हें व्यक्तिगत रूप से बधाई देना भी इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा सकता है।
संजू देवी की उपलब्धि से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उन्होंने महिला खिलाड़ियों के लिए अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर अपनी पहचान बनाई है। महिलाओं के खेल में भागीदारी को बढ़ाने के लिए परिवार, समाज, प्रशिक्षकों और खेल संस्थाओं का सहयोग आवश्यक होता है। जब किसी महिला खिलाड़ी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता मिलती है तो उसकी उपलब्धि अन्य युवतियों के लिए भी अवसरों और संभावनाओं का संदेश लेकर आती है। मुख्यमंत्री ने भी संजू देवी की सफलता को प्रदेश की बेटियों के लिए प्रेरणादायक बताया है। छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की पहचान और उन्हें आगे बढ़ाने की दिशा में ग्रामीण तथा छोटे शहरों से खिलाड़ियों को अवसर देने की आवश्यकता लंबे समय से महत्वपूर्ण विषय रही है। कोरबा की संजू देवी का राष्ट्रीय महिला कबड्डी टीम तक पहुंचना इस बात का उदाहरण है कि स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं को पहचान मिलने पर वे बड़े मंच तक पहुंच सकती हैं। एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक उनके खेल सफर में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस उपलब्धि के बाद उनकी जिम्मेदारी भी बढ़ेगी कि वे आगे आने वाली प्रतियोगिताओं में अपने प्रदर्शन को बनाए रखें और नए खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनें। साथ ही उनके अनुभव का उपयोग स्थानीय युवा खिलाड़ियों को मार्गदर्शन देने में भी किया जा सकता है, यदि भविष्य में उन्हें ऐसे अवसर मिलते हैं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने संजू देवी को बधाई देने के साथ भारतीय महिला कबड्डी टीम के खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और सहयोगी स्टाफ को भी शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय खिलाड़ी आने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी देश का गौरव बढ़ाते रहेंगे। यह सफलता भारतीय कबड्डी के लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पुरुष और महिला दोनों वर्गों में भारत लंबे समय से एशियन गेम्स में मजबूत प्रदर्शन करता रहा है। 2026 में भारतीय पुरुष और महिला दोनों कबड्डी टीमें फाइनल में पहुंची थीं। महिला टीम ने 26 सितंबर को ईरान को 37-34 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। ऐसे में संजू देवी की उपलब्धि को भारतीय कबड्डी की व्यापक सफलता के हिस्से के रूप में भी देखा जा सकता है। खेल के अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार प्रदर्शन से खिलाड़ियों को अनुभव मिलता है और टीम की अगली पीढ़ी के लिए प्रतिस्पर्धी आधार तैयार होता है। भारतीय महिला कबड्डी टीम की इस सफलता में अनुभवी और उभरती खिलाड़ियों का संयोजन दिखाई दिया। टीम में अलग-अलग पृष्ठभूमि से आने वाली खिलाड़ियों ने मिलकर भारत को स्वर्ण पदक दिलाया। यह टीम भावना ही कबड्डी जैसे खेल की प्रमुख ताकत है, जहां व्यक्तिगत प्रदर्शन के साथ-साथ प्रत्येक खिलाड़ी का दूसरे खिलाड़ी के साथ तालमेल निर्णायक भूमिका निभाता है।
कोरबा की बेटी संजू देवी का नाम अब एशियन गेम्स 2026 की स्वर्ण पदक विजेता भारतीय महिला कबड्डी टीम के साथ दर्ज हो गया है। उनके लिए यह उपलब्धि वर्षों की मेहनत, प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं में अर्जित अनुभव का परिणाम है। एशियन गेम्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करना अपने आप में महत्वपूर्ण उपलब्धि है और वहां स्वर्ण पदक जीतना उनके खेल सफर को एक नई पहचान देता है। संजू देवी ने भारतीय टीम के शुरुआती मुकाबले में बांग्लादेश के खिलाफ प्रभावी रेडिंग का प्रदर्शन किया था और बाद के मुकाबलों में भी टीम के अभियान में योगदान दिया। अब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा उन्हें बधाई दिए जाने और प्रदेश लौटने पर सम्मानित किए जाने की बात ने उनकी उपलब्धि को छत्तीसगढ़ के सार्वजनिक जीवन में भी चर्चा का विषय बना दिया है। मुख्यमंत्री की बातचीत में संजू देवी को आगे भी बेहतर प्रदर्शन करने और प्रदेश का नाम रोशन करने के लिए शुभकामनाएं दी गईं। संजू देवी की उपलब्धि से कोरबा के साथ-साथ पूरे छत्तीसगढ़ के खेल प्रेमियों को गर्व का अवसर मिला है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि खेल प्रतिभाओं को यदि निरंतर अभ्यास, उचित प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धी मंच मिले तो वे राष्ट्रीय सीमाओं से आगे जाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं।
एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला कबड्डी टीम की स्वर्णिम सफलता और उसमें कोरबा की बेटी संजू देवी की भागीदारी छत्तीसगढ़ के लिए विशेष उपलब्धि बनकर सामने आई है। भारत ने फाइनल में ईरान को 37-34 से हराया और स्वर्ण पदक हासिल किया। इस पूरे अभियान में टीम ने बांग्लादेश, ईरान, जापान और नेपाल को हराते हुए लगातार जीत दर्ज की और फाइनल में भी करीबी मुकाबले में अपना संयम बनाए रखा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने फोन पर संजू देवी से बात कर उन्हें बधाई दी और उनकी सफलता को देश तथा प्रदेश के लिए गौरव का विषय बताया। उन्होंने संजू देवी की उपलब्धि को प्रदेश की बेटियों और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बताते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। संजू देवी की यह सफलता अब कोरबा के खेल इतिहास की उल्लेखनीय उपलब्धियों में शामिल हो गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला कबड्डी टीम का हिस्सा बनकर उन्होंने न केवल अपने खेल करियर में एक महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किया, बल्कि अपने गृह क्षेत्र के युवा खिलाड़ियों के सामने भी एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। आने वाले समय में संजू देवी की उपलब्धि को लेकर सम्मान समारोह और स्थानीय स्तर पर अभिनंदन की गतिविधियां आयोजित होने की संभावना है। फिलहाल एशियन गेम्स 2026 का यह स्वर्ण पदक उनके खेल सफर की महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज हो चुका है और कोरबा से लेकर पूरे छत्तीसगढ़ तक उनकी सफलता को लेकर उत्साह का माहौल है। भारतीय महिला कबड्डी टीम की इस जीत ने देश को एक और अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक दिया है, जबकि संजू देवी की सहभागिता ने इस सफलता को छत्तीसगढ़ के लिए भी विशेष बना दिया है। मुख्यमंत्री की ओर से व्यक्त शुभकामनाओं और प्रदेश की बेटियों को आगे बढ़ने के संदेश के बीच संजू देवी की यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए खेल के क्षेत्र में निरंतर मेहनत और अवसरों की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रेरक उदाहरण के रूप में सामने आई है।
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