
रायपुर। सेवा, समर्पण, संवेदना और जनभागीदारी को केंद्र में रखकर संचालित किए जा रहे सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत रायपुर में आयोजित आयुर्वेद सेवा सम्मेलन, रक्तदान महाकुंभ एवं वृहद स्वास्थ्य जांच शिविर ने सामाजिक सहभागिता के विभिन्न स्वरूपों को एक मंच पर सामने लाया। राजधानी के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शामिल हुए और रक्तदान, देहदान तथा अंगदान के लिए आगे आने वाले नागरिकों की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान रक्तदान के साथ-साथ जरूरतमंद बच्चों के लिए पुस्तक, खिलौने और स्टेशनरी एकत्रित करने की पहल भी की गई, जिससे सेवा गतिविधियों का दायरा स्वास्थ्य क्षेत्र से आगे बढ़कर शिक्षा और सामाजिक सहयोग तक पहुंचा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सेवा संकल्प अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक प्रदेशभर में संचालित किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत विभिन्न जिलों में जनसेवा और जनकल्याण से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। 21 सितंबर को राज्य के मुख्य सचिव विकासशील ने सभी जिलों के कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अभियान की समीक्षा करते हुए इसे केवल एक आयोजन के रूप में नहीं, बल्कि जनभागीदारी और एक-दूसरे की मदद की संस्कृति को मजबूत करने के अवसर के रूप में संचालित करने के निर्देश दिए थे। रायपुर के आयोजन में इसी जनभागीदारी का एक व्यापक स्वरूप देखने को मिला, जहां महिलाओं, युवाओं और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने रक्तदान के लिए हिस्सा लिया। कार्यक्रम में आयुर्वेद से संबंधित गतिविधियों और स्वास्थ्य जांच की सुविधा के साथ सेवा कार्यों को जोड़ा गया। मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में रक्तदान को मानवता की महत्वपूर्ण सेवाओं में शामिल करते हुए कहा कि रक्त की एक यूनिट किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने रक्तदान के साथ देहदान और अंगदान के लिए नागरिकों के आगे आने को भी सामाजिक संवेदनशीलता और दायित्व से जोड़ा। आयोजन के दौरान प्रोजेक्ट दधीचि के अंतर्गत नागरिकों द्वारा देहदान का संकल्प लिया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 31 लोगों ने इस अवसर पर देहदान का संकल्प लिया, जिनमें पद्मश्री एवं धरसींवा विधायक अनुज शर्मा भी शामिल थे। इस पहल के माध्यम से कार्यक्रम में यह संदेश सामने आया कि सेवा का अर्थ केवल तत्काल सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्ति अपने जीवन के बाद भी चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और जरूरतमंदों की सहायता में योगदान देने का संकल्प ले सकता है। रक्तदान, देहदान और अंगदान जैसे विषयों को एक ही कार्यक्रम में स्थान मिलने से स्वास्थ्य एवं सामाजिक सेवा से जुड़े विभिन्न पक्षों पर लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने का अवसर भी मिला। आयुर्वेद सेवा सम्मेलन के कारण कार्यक्रम में भारतीय चिकित्सा पद्धति और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता से जुड़े विषय भी शामिल रहे। मुख्यमंत्री ने आयुर्वेद को भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण धरोहर बताते हुए आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने की बात कही। इस प्रकार आयोजन का स्वरूप रक्तदान, स्वास्थ्य जांच, आयुर्वेद, देहदान, अंगदान और जरूरतमंद बच्चों की सहायता जैसी अलग-अलग सेवा गतिविधियों को जोड़ने वाला रहा।
रक्तदान महाकुंभ इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहा, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं और अन्य नागरिकों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया। उपलब्ध कार्यक्रम रिपोर्ट के अनुसार रक्तदान के लिए 3600 से अधिक महिलाओं ने पंजीयन कराया था और आयोजन स्थल पर रक्त संग्रह के लिए 200 बेड की व्यवस्था की गई थी। रिपोर्टों में बताया गया है कि एक ही दिन में आठ घंटे के भीतर एक हजार से अधिक महिलाओं द्वारा रक्तदान करने की पहल को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया और इसके प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को प्रमाण-पत्र एवं मेडल प्रदान किया। एक अन्य रिपोर्ट में कुल 2,548 लोगों द्वारा रक्तदान किए जाने तथा इनमें 1,188 महिलाओं के शामिल होने की जानकारी दी गई है। आयोजन से जुड़े इन आंकड़ों के अनुसार रक्तदान में महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। हालांकि किसी भी रक्तदान अभियान का महत्व केवल संख्या या रिकॉर्ड से नहीं, बल्कि सुरक्षित रक्त की उपलब्धता और जरूरतमंद मरीजों तक रक्त पहुंचाने की व्यवस्था से जुड़ा होता है। रक्तदान के माध्यम से अस्पतालों में उपचाररत ऐसे मरीजों को सहायता मिल सकती है जिन्हें दुर्घटना, प्रसव, शल्य चिकित्सा, गंभीर बीमारी या अन्य चिकित्सकीय परिस्थितियों में रक्त की आवश्यकता होती है। इस दृष्टि से स्वैच्छिक रक्तदान को नियमित सामाजिक सहभागिता से जोड़ना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए उपयोगी हो सकता है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने रक्तदान के लिए आगे आने वाले नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और युवाओं की भागीदारी की सराहना की। आयोजन में लगभग 2500 यूनिट रक्तदान का लक्ष्य रखे जाने की जानकारी भी उपलब्ध रिपोर्टों में दी गई है। बड़ी संख्या में लोगों का रक्तदान के लिए पंजीयन कराना अपने आप में जागरूकता की स्थिति को दर्शाता है, जबकि रक्त संग्रह की प्रक्रिया में चिकित्सा मानकों, रक्तदाता की पात्रता, जांच और सुरक्षित भंडारण का पालन आवश्यक होता है। सेवा संकल्प अभियान में रक्तदान को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने का उद्देश्य इसी प्रकार लोगों को स्वास्थ्य और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़े कार्यों में सक्रिय भागीदार बनाना है। कार्यक्रम में महिलाओं की भागीदारी ने रक्तदान को लेकर समाज में मौजूद धारणा और जागरूकता के बदलते स्वरूप को भी सामने रखा। आमतौर पर रक्तदान को लेकर कई तरह की भ्रांतियां और संकोच देखने को मिलते हैं, जिन्हें वैज्ञानिक जानकारी और चिकित्सकीय परामर्श के माध्यम से दूर किया जा सकता है। ऐसे आयोजनों में चिकित्सकीय विशेषज्ञों और स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि रक्तदान से पहले दाता की उपयुक्तता की जांच और रक्तदान के बाद आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी जाती है। इस आयोजन में वृहद स्वास्थ्य जांच शिविर को रक्तदान कार्यक्रम के साथ जोड़ने से लोगों को स्वास्थ्य संबंधी जांच और चिकित्सकीय परामर्श का अवसर भी मिला। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कार्यक्रम के संदर्भ में कहा कि रक्तदान के माध्यम से किसी जरूरतमंद व्यक्ति का जीवन बचाने में मदद मिल सकती है और बड़ी संख्या में नागरिकों का स्वेच्छा से आगे आना सेवा भावना की भागीदारी को दर्शाता है। इस तरह रक्तदान महाकुंभ ने सेवा संकल्प अभियान में स्वास्थ्य सेवा और नागरिक सहभागिता के बीच एक सीधा संबंध स्थापित किया।
सेवा संकल्प अभियान की एक अन्य महत्वपूर्ण गतिविधि प्रोजेक्ट दधीचि के अंतर्गत देहदान एवं अंगदान का संकल्प रही। कार्यक्रम में 31 नागरिकों द्वारा देहदान का संकल्प लिए जाने की जानकारी सामने आई है और उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार प्रोजेक्ट दधीचि के अंतर्गत अब तक 103 लोगों द्वारा देहदान का संकल्प लिया जा चुका था। देहदान का संबंध चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान से है, जबकि अंगदान जरूरतमंद मरीजों को प्रत्यारोपण के माध्यम से जीवन की संभावना उपलब्ध करा सकता है। इसलिए देहदान और अंगदान के विषय में जागरूकता बढ़ाना स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े सामाजिक अभियानों का एक महत्वपूर्ण पक्ष है। मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में देहदान और अंगदान का संकल्प लेने वाले नागरिकों की सराहना करते हुए इसे मानव सेवा से जुड़ी भावना बताया। इस पहल के साथ सेवा संकल्प अभियान ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि सेवा केवल जीवनकाल में किसी व्यक्ति को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्ति अपने शरीर और अंगों के उपयोग को लेकर भी मृत्यु के बाद समाज के हित में योगदान का निर्णय ले सकता है। हालांकि देहदान और अंगदान की प्रक्रिया के लिए निर्धारित चिकित्सकीय एवं कानूनी प्रावधानों का पालन आवश्यक होता है और इच्छुक व्यक्तियों को अधिकृत स्वास्थ्य संस्थानों तथा संबंधित प्राधिकरणों से पूरी जानकारी प्राप्त करके ही संकल्प अथवा पंजीयन की प्रक्रिया अपनानी चाहिए। रायपुर के आयोजन में रक्तदान के साथ देहदान और अंगदान को स्थान दिए जाने से स्वास्थ्य क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की मानवीय भागीदारी पर चर्चा का अवसर मिला। इसी क्रम में वृहद स्वास्थ्य जांच शिविर भी आयोजित किया गया, जहां लोगों को स्वास्थ्य परीक्षण और चिकित्सकीय परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराई गई। कार्यक्रम में आयुर्वेद से जुड़े स्टॉल भी लगाए गए और मुख्यमंत्री ने इन गतिविधियों का अवलोकन कर आयोजकों तथा प्रतिभागियों से जानकारी ली। आयुर्वेद सेवा सम्मेलन का उद्देश्य भारतीय चिकित्सा पद्धति से संबंधित जानकारी और स्वास्थ्य जागरूकता को जनसामान्य तक पहुंचाने से भी जुड़ा रहा। मुख्यमंत्री ने आयुर्वेद को भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर बताते हुए आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने की बात कही। इस संदर्भ में सेवा संकल्प अभियान का स्वास्थ्य संबंधी पक्ष तीन स्तरों पर दिखाई देता है—एक ओर रक्तदान जैसी तत्काल उपयोगी सेवा, दूसरी ओर देहदान-अंगदान जैसी दीर्घकालिक मानवीय पहल और तीसरी ओर स्वास्थ्य जांच तथा आयुर्वेद के माध्यम से स्वास्थ्य जागरूकता। इन सभी गतिविधियों में नागरिक की स्वैच्छिक सहभागिता महत्वपूर्ण है। अभियान का उद्देश्य यदि जनभागीदारी को व्यापक बनाना है, तो ऐसी गतिविधियां अलग-अलग आयु वर्ग, सामाजिक समूहों और समुदायों को अपने तरीके से सेवा कार्यों में जुड़ने का अवसर देती हैं। इससे सेवा की अवधारणा केवल किसी एक संगठन या संस्था की गतिविधि न रहकर नागरिकों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी और सामाजिक सहभागिता का विषय बन सकती है।
सेवा संकल्प अभियान का दायरा केवल रक्तदान और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित नहीं रखा गया है। रायपुर के आयोजन में जरूरतमंद बच्चों के लिए पुस्तक, खिलौने और स्टेशनरी संग्रह की विशेष पहल भी की गई। आयोजन स्थल पर बुक कलेक्शन, टॉय कलेक्शन और स्टेशनरी कलेक्शन के लिए अलग-अलग केंद्र बनाए गए थे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मुख्यमंत्री ने इस पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि सेवा का अर्थ समाज में जहां आवश्यकता हो, वहां संवेदनशीलता के साथ सहयोग करना है और जरूरतमंद बच्चों तक पुस्तकें, खिलौने तथा अध्ययन सामग्री पहुंचाने से उनकी शिक्षा और विकास में सहायता मिल सकती है। इस पहल ने सेवा अभियान को स्वास्थ्य क्षेत्र से निकालकर शिक्षा और बाल कल्याण से भी जोड़ दिया। किसी बच्चे के लिए पुस्तक केवल पढ़ने की सामग्री नहीं होती, बल्कि वह उसके ज्ञान और कल्पना के विस्तार का माध्यम भी हो सकती है। इसी तरह स्टेशनरी सामग्री उन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी हो सकती है जिनके परिवार सीमित संसाधनों में बच्चों की शिक्षा का खर्च वहन करते हैं। खिलौनों के माध्यम से बच्चों के मनोरंजन और भावनात्मक विकास से जुड़ी जरूरतों को भी ध्यान में रखा जा सकता है। इस प्रकार सामग्री संग्रह की पहल को वस्तु-सहायता और सामाजिक सहभागिता के एक रूप के तौर पर देखा जा सकता है। अभियान की व्यापकता का एक पहलू यह भी है कि इसमें हर व्यक्ति अपने संसाधन और क्षमता के अनुसार योगदान कर सकता है। कोई रक्तदान कर सकता है, कोई स्वास्थ्य शिविर में सहयोग कर सकता है, कोई पुस्तक या स्टेशनरी दे सकता है और कोई देहदान-अंगदान के बारे में जानकारी प्राप्त कर संकल्प ले सकता है। इस तरह सेवा की अलग-अलग संभावनाओं को एक मंच पर लाने से जनभागीदारी का विस्तार हो सकता है। 21 सितंबर को मुख्य सचिव विकासशील द्वारा जिलों के कलेक्टरों के साथ की गई समीक्षा में भी अभियान को अधिक से अधिक लोगों, स्वयंसेवी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों की भागीदारी वाला बनाने पर जोर दिया गया था। जिलों में ब्लॉक और तहसील स्तर पर आयोजित होने वाले शिविरों में लोगों को भागीदार बनाकर उनकी समस्याओं के त्वरित निराकरण की दिशा में काम करने के निर्देश भी दिए गए थे। इससे स्पष्ट होता है कि अभियान की संरचना केवल बड़े शहरों में आयोजित कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रखी गई है, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर जिलों और स्थानीय क्षेत्रों तक गतिविधियों को पहुंचाने की योजना बनाई गई है। जनभागीदारी का यह मॉडल तभी प्रभावी हो सकता है जब स्थानीय प्रशासन, स्वयंसेवी संस्थाएं, सामाजिक संगठन, स्वास्थ्यकर्मी और आम नागरिक अपनी-अपनी भूमिका के अनुसार जुड़ें। सेवा कार्यों में पारदर्शिता, जरूरतमंद लोगों तक वास्तविक पहुंच और संसाधनों के उचित उपयोग पर भी ध्यान देना आवश्यक है। इस दृष्टि से पुस्तक, खिलौने और स्टेशनरी संग्रह जैसी पहल के बाद सामग्री को जरूरतमंद बच्चों तक व्यवस्थित ढंग से पहुंचाना भी अभियान का महत्वपूर्ण चरण होगा। सेवा तभी सार्थक मानी जा सकती है जब सहायता सही व्यक्ति तक सही समय पर और उचित तरीके से पहुंचे।
सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से जनसेवा, स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक संवेदना और सामुदायिक सहभागिता को एक साथ जोड़ने की कोशिश दिखाई दे रही है। रायपुर में आयोजित आयुर्वेद सेवा सम्मेलन और रक्तदान महाकुंभ ने जहां स्वास्थ्य क्षेत्र में नागरिक सहभागिता को सामने रखा, वहीं देहदान और अंगदान के संकल्प ने जीवन के बाद भी समाज के लिए योगदान की अवधारणा को चर्चा में लाया। पुस्तक, खिलौने और स्टेशनरी संग्रह ने बच्चों की शिक्षा और जरूरतों को अभियान से जोड़ा। वृहद स्वास्थ्य जांच शिविर ने लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होने तथा आवश्यक चिकित्सा परामर्श प्राप्त करने का अवसर दिया। कार्यक्रम में आयुर्वेद से संबंधित गतिविधियों ने भारतीय चिकित्सा पद्धति और स्वास्थ्य परंपरा को भी चर्चा का हिस्सा बनाया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, वन मंत्री केदार कश्यप, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक सुनील सोनी, विधायक एवं पद्मश्री अनुज शर्मा, विधायक प्रबोध मिंज सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, अर्धसैनिक बल एवं सेना के अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। इस व्यापक सहभागिता से कार्यक्रम का स्वरूप बहुस्तरीय रहा। मुख्यमंत्री साय ने अभियान के संदर्भ में जनसेवा और जनकल्याण की विभिन्न गतिविधियों को समाज के अलग-अलग वर्गों से जोड़ने की बात कही है। राज्य स्तर पर अभियान की समीक्षा के दौरान भी अधिकारियों को इसे व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने तथा सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इस प्रकार सेवा संकल्प अभियान के आगे के चरणों में इसकी गतिविधियां कितनी व्यापक होती हैं और स्थानीय स्तर पर इनका वास्तविक प्रभाव कितना दिखाई देता है, यह विभिन्न जिलों में होने वाले कार्यक्रमों, नागरिक भागीदारी तथा सेवा के बाद की कार्यप्रणाली पर निर्भर करेगा। रक्तदान के मामले में नियमित स्वैच्छिक रक्तदाताओं का नेटवर्क, देहदान-अंगदान में पंजीयन के बाद निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन, स्वास्थ्य शिविरों में जांच के बाद जरूरतमंद लोगों को उचित चिकित्सा सुविधा से जोड़ना तथा बच्चों के लिए एकत्रित सामग्री का व्यवस्थित वितरण ऐसे क्षेत्र हैं जहां अभियान की निरंतरता महत्वपूर्ण होगी। जनसेवा को केवल एक दिन के आयोजन के बजाय नियमित सामाजिक व्यवहार बनाने के लिए स्थानीय संस्थाओं और नागरिकों की निरंतर सहभागिता आवश्यक होती है। इसी भावना के साथ 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चल रहे सेवा संकल्प अभियान में विभिन्न प्रकार की गतिविधियों को शामिल किया गया है। रायपुर का आयुर्वेद सेवा सम्मेलन और रक्तदान महाकुंभ इसी अभियान की एक प्रमुख कड़ी के रूप में सामने आया, जहां हजारों नागरिकों की सहभागिता, महिलाओं की बड़ी संख्या में रक्तदान पहल, देहदान के संकल्प, स्वास्थ्य जांच और जरूरतमंद बच्चों के लिए सामग्री संग्रह जैसी गतिविधियां एक साथ हुईं।
सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से सामने आई गतिविधियों का व्यापक संदेश यही है कि सामाजिक सेवा अनेक रूपों में की जा सकती है और इसके लिए समाज के अलग-अलग वर्ग अपनी क्षमता के अनुसार योगदान दे सकते हैं। रक्तदान किसी मरीज की तत्काल आवश्यकता पूरी करने में सहायक हो सकता है, स्वास्थ्य जांच किसी व्यक्ति को अपनी स्वास्थ्य स्थिति के प्रति समय रहते जागरूक कर सकती है, देहदान चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान में योगदान का माध्यम बन सकता है, अंगदान जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवन की संभावना से जुड़ सकता है और पुस्तक, खिलौने तथा स्टेशनरी जैसी सामग्री जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा एवं दैनिक आवश्यकताओं में उपयोगी हो सकती है। रायपुर में आयोजित कार्यक्रम ने इन सभी गतिविधियों को एक साझा मंच पर प्रस्तुत किया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार रक्तदान में 2,548 लोगों की भागीदारी और इनमें 1,188 महिलाओं के शामिल होने की जानकारी सामने आई है, जबकि 31 नागरिकों ने देहदान का संकल्प लिया। महिलाओं की रक्तदान पहल को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किए जाने की जानकारी भी कार्यक्रम रिपोर्टों में दी गई है। इन उपलब्धियों को केवल रिकॉर्ड के रूप में देखने के बजाय नियमित स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक सहभागिता के संदर्भ में देखना महत्वपूर्ण है। किसी भी सेवा अभियान की दीर्घकालिक उपयोगिता इस बात से निर्धारित होती है कि कार्यक्रम के बाद भी नागरिक सेवा गतिविधियों से जुड़े रहें और जरूरत के समय समाज में सहयोग की व्यवस्था सक्रिय रहे। राज्य सरकार ने अभियान को 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक संचालित करने और जिलों में अलग-अलग गतिविधियां आयोजित करने की योजना बनाई है। मुख्य सचिव द्वारा जिलों के कलेक्टरों को अभियान को जनभागीदारी का व्यापक माध्यम बनाने के निर्देश दिए जाने से प्रशासनिक स्तर पर भी इस दिशा में निरंतर गतिविधियों की अपेक्षा की गई है। रायपुर में आयोजित आयुर्वेद सेवा सम्मेलन, रक्तदान महाकुंभ एवं वृहद स्वास्थ्य जांच शिविर ने इस अभियान के स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा पक्ष को सामने रखा, जबकि पुस्तक, खिलौने और स्टेशनरी संग्रह ने जरूरतमंद बच्चों की सहायता को अभियान से जोड़ा। देहदान और अंगदान के संकल्प ने मानवीय सेवा के एक अलग आयाम को सामने रखा। इस तरह सेवा संकल्प अभियान में जनभागीदारी के माध्यम से सेवा, समर्पण और संवेदना से जुड़े विभिन्न प्रयासों को एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश दिखाई देती है। अभियान की आगामी गतिविधियों में भी यदि स्थानीय नागरिक, सामाजिक संगठन, स्वयंसेवी संस्थाएं, स्वास्थ्यकर्मी और प्रशासन समन्वय के साथ कार्य करते हैं तो विभिन्न सेवा पहलों की पहुंच और निरंतरता बढ़ सकती है। फिलहाल रायपुर का आयोजन इस अभियान के अंतर्गत हुई स्वास्थ्य एवं सामाजिक सेवा गतिविधियों का एक प्रमुख उदाहरण है, जिसमें रक्तदान से लेकर देहदान, स्वास्थ्य जांच और बच्चों के लिए उपयोगी सामग्री जुटाने तक नागरिकों ने अलग-अलग रूपों में सहभागिता की। जनसेवा और सुशासन से जुड़े सरकारी प्रयासों के साथ ऐसी नागरिक भागीदारी सामाजिक सेवा के क्षेत्र में प्रशासन और समाज के बीच सहयोग की भूमिका को रेखांकित करती है।