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आगर-मालवा में मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना से गब्बू गवली का कारोबार का सपना हुआ साकार, 8 लाख रुपये के ऋण से शुरू किया तिरुपति कलेक्शन

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HQ Report
आगर-मालवा। मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के माध्यम से युवाओं को स्वरोजगार और स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के लिए बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने की पहल का एक उदाहरण आगर-मालवा में सामने आया है। आगर निवासी श्री गब्बू गवली के लिए भी अपने व्यवसाय का सपना उस समय साकार हुआ, जब उन्हें योजना के अंतर्गत बैंक से 8 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ और उन्होंने इस आर्थिक सहायता का उपयोग तिरुपति कलेक्शन नाम से अपना व्यवसाय शुरू करने में किया। व्यवसाय शुरू होने के बाद गब्बू गवली अपने कारोबार का संचालन कर रहे हैं और इसे अपनी आजीविका का माध्यम बना रहे हैं। मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना का मूल उद्देश्य शिक्षित युवाओं को स्वयं का उद्यम अथवा स्वरोजगार स्थापित करने के लिए बैंकों के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराना तथा ब्याज अनुदान के माध्यम से ऋण की लागत को कम करना है। मध्यप्रदेश शासन के आधिकारिक योजना पोर्टल के अनुसार योजना के तहत वितरित ऋण पर 3 प्रतिशत प्रतिवर्ष ब्याज अनुदान और बैंक ऋण गारंटी शुल्क की सहायता अधिकतम सात वर्षों तक दिए जाने का प्रावधान है।
गब्बू गवली की कहानी में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पूंजी के अभाव के कारण स्वयं का व्यवसाय शुरू करने की राह में आ रही बाधा को योजना के माध्यम से उपलब्ध बैंक ऋण ने दूर करने में मदद की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्हें उद्योग विभाग के माध्यम से मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने तिरुपति कलेक्शन के लिए जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से आवेदन किया। आवेदन प्रक्रिया के बाद प्रकरण स्वीकृत हुआ और नर्मदा झाबुआ ग्रामीण बैंक, आगर-मालवा से उन्हें 8 लाख रुपये का ऋण मिला। इसी राशि का उपयोग उन्होंने अपना प्रतिष्ठान शुरू करने के लिए किया। योजना से संबंधित आधिकारिक जानकारी में भी बैंक के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने को प्रमुख उद्देश्य बताया गया है। इस तरह गब्बू गवली के लिए बैंक ऋण केवल वित्तीय सहायता का माध्यम नहीं रहा, बल्कि अपने व्यवसाय को आकार देने की दिशा में शुरुआती पूंजी का आधार बना।
मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना को मध्यप्रदेश शासन के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग से संबंधित राज्य प्रवर्तित योजना के रूप में संचालित किया जा रहा है। आधिकारिक योजना विवरण के अनुसार इसका उद्देश्य युवाओं को नौकरी के विकल्प के रूप में स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना और प्रदेश में अधिक से अधिक सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना को बढ़ावा देना है। योजना में बैंक के माध्यम से उपलब्ध कराए जाने वाले ऋण को ब्याज अनुदान के साथ जोड़ा गया है, जिससे पात्र उद्यमियों के लिए ऋण की लागत कम करने में सहायता मिल सके। इसके साथ ही योजना को कोलेटरल फ्री ऋण व्यवस्था से भी जोड़ा गया है। राज्य के ऑनलाइन सेवा पोर्टल पर मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के अंतर्गत पात्र मामलों को संबंधित बैंक शाखा तक भेजने और जमानत-मुक्त ऋण से संबंधित सेवाओं का उल्लेख किया गया है।
गब्बू गवली द्वारा तिरुपति कलेक्शन की शुरुआत इस बात को भी सामने लाती है कि छोटे और मध्यम स्तर के व्यवसायों के लिए शुरुआती पूंजी की उपलब्धता कितनी महत्वपूर्ण होती है। किसी व्यक्ति के पास व्यवसाय शुरू करने की इच्छा, कार्य करने का अनुभव या अपनी आजीविका को नए तरीके से स्थापित करने का विचार हो, लेकिन पर्याप्त पूंजी उपलब्ध न हो, तो बैंक ऋण जैसी वित्तीय सुविधा व्यवसाय की शुरुआत का आधार बन सकती है। गब्बू गवली के मामले में भी योजना के अंतर्गत ऋण स्वीकृत होने के बाद प्रतिष्ठान शुरू किया गया और अब वे तिरुपति कलेक्शन का संचालन कर रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार व्यवसाय के माध्यम से वे अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। इस प्रकार उनकी कहानी को योजना के माध्यम से स्वरोजगार शुरू करने वाले हितग्राही के व्यक्तिगत अनुभव के रूप में देखा जा सकता है।
योजना की विशेषता यह भी है कि इसका उद्देश्य केवल ऋण उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि स्वरोजगार की दिशा में युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता के वातावरण को मजबूत करना है। मध्यप्रदेश शासन के आधिकारिक पोर्टल के अनुसार ब्याज अनुदान के माध्यम से ऋण की लागत कम करने और परियोजना की व्यवहार्यता बढ़ाने का प्रयास किया जाता है। इससे पात्र आवेदकों को अपने उद्यम की स्थापना और संचालन के लिए वित्तीय व्यवस्था बनाने में सहायता मिल सकती है। हालांकि किसी भी व्यवसाय की सफलता में ऋण के साथ-साथ बाजार की मांग, व्यवसाय का चयन, प्रबंधन, ग्राहक सेवा, लागत नियंत्रण और नियमित संचालन जैसे अनेक कारक महत्वपूर्ण होते हैं। गब्बू गवली ने उपलब्ध ऋण का उपयोग तिरुपति कलेक्शन शुरू करने में किया और वर्तमान में इस प्रतिष्ठान का संचालन कर रहे हैं।
आगर-मालवा से सामने आई यह खुशियों की दास्तां स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने वाले हितग्राहियों के अनुभव को सामने लाती है। गब्बू गवली के लिए व्यवसाय शुरू करने की इच्छा को बैंक ऋण के माध्यम से पूंजी का आधार मिला और इसके बाद तिरुपति कलेक्शन की शुरुआत हुई। उपलब्ध समाचार रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने योजना के माध्यम से मिले आर्थिक सहयोग के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है। दूसरी ओर, योजना के आधिकारिक विवरण से स्पष्ट है कि सरकार इसका उपयोग युवाओं को स्वयं का उद्यम स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कर रही है। ऐसे हितग्राही अनुभव योजनाओं की पहुंच, बैंकिंग व्यवस्था और स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसरों के बारे में लोगों को जानकारी देने का माध्यम भी बनते हैं। आगर-मालवा में गब्बू गवली की यह कहानी इसी क्रम में एक स्थानीय उद्यमी के व्यवसाय शुरू करने और अपनी आजीविका को नए आधार से जोड़ने की कहानी के रूप में सामने आई है।
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