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सेवा संकल्प अभियान के तहत दिल्ली विश्वविद्यालय के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में हुआ कार्यक्रम, ऐप लॉन्च कर 1 अक्टूबर से पंजीकरण की शुरुआत; युवाओं से स्वच्छ यमुना के महाअभियान को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान

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नई दिल्ली। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत दिल्ली विश्वविद्यालय के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में बुधवार को ‘मैं भी यमुना प्रहरी’ कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय राज्य मंत्री श्री हर्ष मल्होत्रा के साथ अभियान की शुरुआत की गई और युवाओं को इससे जोड़ने के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए ऐप को लॉन्च किया गया। कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य दिल्ली के युवाओं को यमुना की स्वच्छता और संरक्षण के प्रयासों से जोड़ना तथा स्वच्छ यमुना के लिए चलाए जा रहे अभियान में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करना रहा। इस अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों से बड़ी संख्या में युवा उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बताया गया कि दिल्ली विश्वविद्यालय के 30 कॉलेजों के हजारों युवा ‘क्लीन यमुना मिशन’ से जुड़ने जा रहे हैं और 1 अक्टूबर से ऐप के माध्यम से पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

कार्यक्रम के दौरान युवाओं को संबोधित करते हुए उनसे अपील की गई कि वे स्वच्छ यमुना के अभियान को केवल एक सरकारी कार्यक्रम के रूप में न देखें, बल्कि इसे सामाजिक जिम्मेदारी और जनभागीदारी से जुड़े अभियान के रूप में आगे बढ़ाएं। युवाओं से कहा गया कि वे ऐप डाउनलोड कर अपना पंजीकरण कराएं और ‘यमुना प्रहरी’ बनकर यमुना की स्वच्छता के लिए चलाए जा रहे महाअभियान में अपनी भूमिका निभाएं। साथ ही अपने मित्रों, सहपाठियों, कॉलेज के विद्यार्थियों और आसपास के लोगों को भी इस अभियान से जोड़ने का प्रयास करें। कार्यक्रम में यह संदेश प्रमुखता से दिया गया कि किसी भी बड़े सामाजिक परिवर्तन के लिए जनभागीदारी आवश्यक होती है और युवा शक्ति इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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‘मैं भी यमुना प्रहरी’ कार्यक्रम के माध्यम से स्वच्छता को युवा शक्ति से जोड़ने की पहल की गई है। दिल्ली विश्वविद्यालय देश के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में से एक है और यहां विभिन्न क्षेत्रों से विद्यार्थी अध्ययन के लिए आते हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय के कॉलेजों के विद्यार्थियों के माध्यम से स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। कार्यक्रम में इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए 30 कॉलेजों के हजारों विद्यार्थियों को अभियान से जोड़ने की योजना सामने रखी गई। आयोजकों की ओर से युवाओं से कहा गया कि वे स्वयं अभियान का हिस्सा बनें और दूसरों को भी प्रेरित करें, ताकि स्वच्छ यमुना का संदेश केवल कॉलेज परिसर तक सीमित न रहे, बल्कि दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों और समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचे।

कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि एक युवा जब किसी सामाजिक अभियान से जुड़ता है तो वह अपने साथ अन्य लोगों को भी प्रेरित कर सकता है। इसी क्रम में संदेश दिया गया कि एक युवा जुड़ेगा तो एक और युवा प्रेरित होगा, एक कॉलेज जुड़ेगा तो पूरा कैंपस जुड़ सकता है और जब दिल्ली के युवा सामूहिक रूप से यमुना की स्वच्छता के लिए आगे आएंगे तो स्वच्छ और निर्मल यमुना का संकल्प और मजबूत होगा। इस विचार के माध्यम से युवाओं को अभियान की सक्रिय कड़ी बनाने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में मौजूद युवाओं से अपेक्षा की गई कि वे अभियान को अपने कॉलेज, परिवार और सामाजिक परिवेश में आगे बढ़ाने का कार्य करेंगे।

ऐप के माध्यम से शुरू हुआ पंजीकरण

‘मैं भी यमुना प्रहरी’ अभियान के लिए ऐप लॉन्च किया गया और 1 अक्टूबर से पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। ऐप को युवाओं के लिए अभियान से जुड़ने का डिजिटल माध्यम बताया गया। कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों से कहा गया कि वे ऐप डाउनलोड करें, अपना पंजीकरण कराएं और ‘यमुना प्रहरी’ के रूप में अभियान का हिस्सा बनें। डिजिटल माध्यम के जरिए बड़ी संख्या में युवाओं तक पहुंच बनाने और उन्हें अभियान के साथ जोड़ने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम बताया गया।

आज की युवा पीढ़ी डिजिटल तकनीक से व्यापक रूप से जुड़ी हुई है। मोबाइल फोन और ऐप आधारित सेवाएं युवाओं के दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुकी हैं। ऐसे में सामाजिक अभियान के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करने से सहभागिता की प्रक्रिया को अधिक व्यापक बनाने की संभावना रहती है। ‘मैं भी यमुना प्रहरी’ ऐप इसी उद्देश्य से युवाओं को अभियान के साथ जोड़ने का माध्यम बनाया गया है। इसके जरिए विद्यार्थी अपने स्तर पर पंजीकरण कर अभियान का हिस्सा बन सकते हैं और स्वच्छता के संदेश को आगे बढ़ाने में भूमिका निभा सकते हैं।

कार्यक्रम में यह स्पष्ट किया गया कि अभियान का उद्देश्य केवल अधिक से अधिक लोगों का पंजीकरण कराना नहीं है, बल्कि पंजीकरण के माध्यम से युवाओं को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी से जोड़ना है। जब कोई युवा स्वयं को ‘यमुना प्रहरी’ के रूप में जोड़ता है तो उससे अपेक्षा की जाती है कि वह अपने व्यवहार में स्वच्छता को महत्व देगा और अपने आसपास के लोगों को भी इसके लिए जागरूक करेगा। इस प्रकार ऐप अभियान के लिए एक डिजिटल माध्यम होने के साथ-साथ जनभागीदारी को संगठित करने का साधन भी बन सकता है।

30 कॉलेजों के विद्यार्थियों को जोड़ने की तैयारी

कार्यक्रम में बताया गया कि दिल्ली विश्वविद्यालय के 30 कॉलेजों के हजारों युवा ‘क्लीन यमुना मिशन’ से जुड़ने जा रहे हैं। विश्वविद्यालय के अलग-अलग कॉलेजों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी अध्ययनरत हैं और उनके माध्यम से स्वच्छता तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश व्यापक स्तर पर पहुंचाया जा सकता है। कॉलेज परिसर में यदि विद्यार्थी अभियान के साथ सक्रिय रूप से जुड़ते हैं तो वे अपने साथियों को भी प्रेरित कर सकते हैं।

कॉलेजों को केवल शिक्षा प्राप्त करने के स्थान के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता के केंद्र के रूप में भी देखा जाता है। विद्यार्थी अपने आसपास होने वाली सामाजिक गतिविधियों से प्रभावित होते हैं और कई बार स्वयं भी सामाजिक अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। यमुना स्वच्छता जैसे विषय से विद्यार्थियों को जोड़ने से उनमें पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत किया जा सकता है।

कार्यक्रम में इसी उद्देश्य से युवाओं से कहा गया कि वे अपने कॉलेजों में अभियान के बारे में जानकारी साझा करें और अधिक से अधिक विद्यार्थियों को ऐप के माध्यम से पंजीकरण के लिए प्रेरित करें। यदि एक कॉलेज के विद्यार्थी सामूहिक रूप से इस अभियान का हिस्सा बनते हैं तो पूरे परिसर में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता का वातावरण तैयार किया जा सकता है। इसके बाद यही संदेश कॉलेज से बाहर समाज तक पहुंच सकता है।

जनभागीदारी को अभियान का आधार बनाने पर जोर

‘मैं भी यमुना प्रहरी’ कार्यक्रम में जनभागीदारी को विशेष महत्व दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी नदी की स्वच्छता के लिए सरकारी प्रयासों के साथ नागरिकों का सहयोग आवश्यक होता है। प्रशासन अपने स्तर पर योजनाएं और व्यवस्थाएं संचालित कर सकता है, लेकिन यदि आम नागरिक स्वच्छता के प्रति जिम्मेदार व्यवहार नहीं अपनाते हैं तो अपेक्षित परिणाम हासिल करना कठिन हो सकता है।

यमुना की स्वच्छता के संदर्भ में भी नागरिक जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है। नदी और उसके आसपास के क्षेत्रों को स्वच्छ रखने, कचरे का उचित निस्तारण करने, सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी नहीं फैलाने और दूसरे लोगों को भी जागरूक करने जैसे छोटे-छोटे प्रयास सामूहिक रूप से बड़ा प्रभाव पैदा कर सकते हैं। कार्यक्रम में युवाओं को इसी प्रकार की जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।

युवाओं से कहा गया कि वे सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चलें और स्वच्छ यमुना के उद्देश्य को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाएं। इसका अर्थ केवल किसी आयोजन में शामिल होना नहीं, बल्कि स्वच्छता को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना भी है। जब व्यक्ति स्वयं जिम्मेदारी से व्यवहार करता है और दूसरों को भी प्रेरित करता है तो अभियान की पहुंच बढ़ती है।

‘यमुना प्रहरी’ के रूप में युवाओं की भूमिका

कार्यक्रम में ‘यमुना प्रहरी’ की अवधारणा को अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया। इसके माध्यम से युवाओं को यह संदेश दिया गया कि वे यमुना की स्वच्छता के प्रति जागरूक नागरिक की भूमिका निभा सकते हैं। एक प्रहरी का अर्थ केवल निगरानी करना नहीं, बल्कि जिम्मेदारी को समझना और अपने स्तर पर सकारात्मक भूमिका निभाना भी है।

युवा अपने कॉलेज और आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता को लेकर जागरूकता फैला सकते हैं। वे अपने मित्रों को कचरा उचित स्थान पर डालने, सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता बनाए रखने और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील रहने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। इस तरह एक व्यक्ति की जिम्मेदारी धीरे-धीरे सामूहिक जिम्मेदारी में बदल सकती है।

कार्यक्रम में युवाओं से कहा गया कि वे इस अभियान को अपने व्यक्तिगत संकल्प से जोड़ें। यदि प्रत्येक विद्यार्थी यह तय करता है कि वह स्वयं गंदगी नहीं फैलाएगा और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेगा, तो इसका प्रभाव व्यापक हो सकता है। इसी विचार को अभियान की मूल भावना के रूप में सामने रखा गया।

स्वच्छता को दैनिक व्यवहार से जोड़ने की पहल

कार्यक्रम में स्वच्छता को केवल विशेष दिवस या विशेष आयोजन तक सीमित नहीं रखने पर जोर दिया गया। स्वच्छता तभी प्रभावी हो सकती है जब उसे दैनिक जीवन के व्यवहार से जोड़ा जाए। घर, कॉलेज, सड़क, सार्वजनिक स्थान और जलस्रोत—हर स्थान पर स्वच्छता बनाए रखने की जिम्मेदारी नागरिकों की भी है।

यमुना की स्वच्छता के लिए भी यही दृष्टिकोण आवश्यक बताया गया। यदि लोग नदी के आसपास गंदगी फैलाने से बचते हैं, कचरे का उचित प्रबंधन करते हैं और अन्य लोगों को जागरूक करते हैं तो नदी संरक्षण के प्रयासों को सहयोग मिल सकता है। युवाओं को इस व्यवहार परिवर्तन का वाहक बनाने की कोशिश कार्यक्रम के माध्यम से की गई।

सेवा संकल्प अभियान की भावना

‘मैं भी यमुना प्रहरी’ कार्यक्रम को सेवा संकल्प अभियान की भावना से जोड़कर देखा गया। सेवा का अर्थ केवल किसी व्यक्ति की सहायता करना नहीं, बल्कि समाज और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना भी है। स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों में भाग लेना भी सामाजिक जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।

कार्यक्रम में युवाओं को इसी भावना से प्रेरित किया गया। उनसे कहा गया कि वे अपने समय और ऊर्जा का उपयोग समाज के हित से जुड़े कार्यों में करें। यमुना की स्वच्छता के लिए योगदान देना दिल्ली के पर्यावरण और सार्वजनिक जीवन से जुड़ा विषय है। इसलिए इसमें युवाओं की सहभागिता को महत्वपूर्ण माना गया।

एक युवा से शुरू होगी प्रेरणा की श्रृंखला

कार्यक्रम में युवाओं के बीच यह संदेश दिया गया कि किसी भी बड़े अभियान की शुरुआत एक व्यक्ति से हो सकती है। एक युवा यदि अभियान से जुड़ता है तो वह अपने मित्र को जोड़ सकता है। दो युवा मिलकर चार अन्य युवाओं को प्रेरित कर सकते हैं और इस तरह सहभागिता की श्रृंखला आगे बढ़ सकती है।

इसी प्रकार एक कॉलेज के विद्यार्थी यदि अभियान से जुड़ते हैं तो वे दूसरे कॉलेजों के विद्यार्थियों के साथ भी संवाद स्थापित कर सकते हैं। सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के जरिए अभियान का संदेश और अधिक लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। इस तरह एक स्थानीय पहल व्यापक जनजागरूकता अभियान का रूप ले सकती है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के युवाओं से विशेष अपेक्षा

दिल्ली विश्वविद्यालय के युवाओं से विशेष रूप से अपेक्षा की गई कि वे ‘मैं भी यमुना प्रहरी’ अभियान को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों में अध्ययनरत विद्यार्थियों की संख्या और उनकी सामाजिक पहुंच को देखते हुए उन्हें अभियान के महत्वपूर्ण सहभागी के रूप में देखा गया।

कार्यक्रम में युवाओं से कहा गया कि वे पहले स्वयं ऐप पर पंजीकरण कराएं और फिर अपने कॉलेज के अन्य विद्यार्थियों को अभियान के बारे में जानकारी दें। विद्यार्थियों को अपने परिवार और मित्रों के बीच भी स्वच्छ यमुना का संदेश पहुंचाने के लिए प्रेरित किया गया।

इस प्रकार कॉलेज से शुरू होने वाला अभियान घर और समाज तक पहुंच सकता है। यदि विद्यार्थी अपने परिवार के सदस्यों को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक करते हैं तो इसका प्रभाव कॉलेज से बाहर भी दिखाई दे सकता है।

पर्यावरण संरक्षण में युवा शक्ति की भूमिका

पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में युवा शक्ति को महत्वपूर्ण माना जाता है। युवा नई तकनीक को समझते हैं, डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते हैं और सामाजिक मुद्दों पर तेजी से संवाद स्थापित कर सकते हैं। ऐसे में उन्हें पर्यावरण संरक्षण के अभियान से जोड़ने से जनजागरूकता को नई गति मिल सकती है।

‘क्लीन यमुना मिशन’ के साथ दिल्ली विश्वविद्यालय के युवाओं को जोड़ने की पहल इसी क्षमता का उपयोग करने का प्रयास है। विद्यार्थी अपने स्तर पर स्वच्छता से जुड़े संदेशों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा कर सकते हैं और अपने मित्रों को अभियान से जोड़ सकते हैं।

कार्यक्रम में युवाओं से अपेक्षा की गई कि वे अभियान को केवल एक कार्यक्रम न समझें, बल्कि इसे एक जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करें। अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहना इस जिम्मेदारी का हिस्सा बताया गया।

सरकार और नागरिकों के बीच सहयोग

यमुना की स्वच्छता के लिए सरकार और नागरिकों के बीच सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। सरकार की योजनाओं और प्रयासों को नागरिकों की भागीदारी मिलने से अभियान की पहुंच बढ़ सकती है। वहीं नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारियों को समझना होगा।

कार्यक्रम में युवाओं से कहा गया कि वे सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ें। इससे यह संदेश गया कि स्वच्छता जैसे व्यापक विषय को केवल सरकारी विभागों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। समाज की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।

‘मैं भी यमुना प्रहरी’ अभियान इसी साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक पहल है। इसमें युवाओं को सीधे जोड़ा जा रहा है ताकि वे अपने स्तर पर स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर सकें।

ऐप से जुड़ेगा अभियान का युवा वर्ग

ऐप लॉन्च किए जाने के बाद युवाओं के लिए अभियान से जुड़ने का एक डिजिटल माध्यम उपलब्ध हुआ है। 1 अक्टूबर से पंजीकरण शुरू होने के साथ अभियान में शामिल होने की प्रक्रिया शुरू हो गई। युवाओं से अपील की गई कि वे अधिक से अधिक संख्या में पंजीकरण कराएं।

डिजिटल पंजीकरण के जरिए अभियान से जुड़ने वाले युवाओं को एक साझा मंच से जोड़ा जा सकता है। इससे अभियान के संदेश को तेजी से फैलाने और अधिक लोगों तक पहुंचाने में सहायता मिल सकती है।

कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि डिजिटल जुड़ाव के साथ वास्तविक जीवन में भी स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी दिखाई जानी चाहिए। ऐप पर पंजीकरण अभियान की शुरुआत है, जबकि वास्तविक उद्देश्य स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को नागरिक व्यवहार का हिस्सा बनाना है।

यमुना को लेकर जागरूकता बढ़ाने का प्रयास

यमुना दिल्ली के सार्वजनिक जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। नदी की स्वच्छता को लेकर समय-समय पर जागरूकता और जनभागीदारी की आवश्यकता महसूस की जाती रही है। ऐसे में युवाओं को अभियान से जोड़ना जागरूकता को व्यापक बनाने का माध्यम बन सकता है।

‘मैं भी यमुना प्रहरी’ कार्यक्रम में युवाओं को इसी उद्देश्य से सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया गया। विद्यार्थियों से कहा गया कि वे यमुना के प्रति जागरूकता बढ़ाएं और अपने आसपास के लोगों को भी स्वच्छता के महत्व के बारे में बताएं।

कॉलेज परिसर से समाज तक पहुंचेगा संदेश

कॉलेज परिसर में शुरू होने वाला कोई भी सामाजिक अभियान विद्यार्थियों के माध्यम से समाज तक पहुंच सकता है। विद्यार्थी अपने घर जाते हैं, मित्रों से मिलते हैं और विभिन्न सामाजिक समूहों से जुड़े रहते हैं। इसलिए उनके माध्यम से स्वच्छता का संदेश व्यापक हो सकता है।

कार्यक्रम में 30 कॉलेजों को अभियान से जोड़ने की पहल इसी संभावना को ध्यान में रखकर की गई। यदि प्रत्येक कॉलेज के विद्यार्थी अपने स्तर पर अभियान का प्रचार और जनजागरूकता करते हैं तो दिल्ली में स्वच्छ यमुना के संदेश का दायरा बढ़ सकता है।

सामाजिक जिम्मेदारी का विस्तार

कार्यक्रम के दौरान युवाओं को यह समझाने का प्रयास किया गया कि सामाजिक जिम्मेदारी केवल बड़े कार्यक्रमों में भाग लेने तक सीमित नहीं होती। दैनिक जीवन में छोटी-छोटी जिम्मेदारियां निभाना भी समाज के प्रति योगदान है।

सार्वजनिक स्थानों को साफ रखना, कचरा निर्धारित स्थान पर डालना, प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट के जिम्मेदार निस्तारण के प्रति जागरूक रहना तथा दूसरों को प्रेरित करना ऐसे कदम हैं जिनका सामूहिक प्रभाव हो सकता है। यमुना की स्वच्छता के संदर्भ में भी यही जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा रहे मौजूद

दिल्ली विश्वविद्यालय के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा उपस्थित रहे। युवाओं की मौजूदगी ने कार्यक्रम को व्यापक जनभागीदारी का स्वरूप दिया। कार्यक्रम में अभियान के उद्देश्य और ऐप के माध्यम से पंजीकरण की जानकारी दी गई।

इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय राज्य मंत्री श्री हर्ष मल्होत्रा के साथ अभियान का शुभारंभ किया गया। कैबिनेट सहयोगी श्री प्रवेश साहिब सिंह, विधायक श्री सूर्य प्रकाश खत्री सहित अन्य लोग भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में युवाओं को अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया।

‘क्लीन यमुना मिशन’ को मिलेगा युवा आधार

दिल्ली विश्वविद्यालय के 30 कॉलेजों के हजारों युवाओं के अभियान से जुड़ने से ‘क्लीन यमुना मिशन’ को व्यापक युवा आधार मिलने की उम्मीद है। युवा वर्ग के माध्यम से अभियान को कॉलेज परिसरों से बाहर समाज तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

यदि विद्यार्थी अभियान के संदेश को अपने परिवार और मित्रों तक पहुंचाते हैं तो इससे व्यापक सामाजिक जागरूकता तैयार हो सकती है। कार्यक्रम में इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए युवाओं से सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की गई।

स्वच्छ यमुना के लिए सामूहिक संकल्प

कार्यक्रम का मूल संदेश स्वच्छ यमुना के लिए सामूहिक संकल्प रहा। युवाओं से कहा गया कि वे ऐप के माध्यम से पंजीकरण कर अभियान से जुड़ें और अपने साथ अन्य लोगों को भी जोड़ें। अभियान को जन-जन का अभियान बनाने के लिए प्रत्येक नागरिक की भागीदारी को आवश्यक बताया गया।

यह संदेश भी दिया गया कि जब दिल्ली के युवा एकजुट होकर यमुना की स्वच्छता के लिए आगे आएंगे तो स्वच्छ और निर्मल यमुना का संकल्प और मजबूत होगा। इस सामूहिक प्रयास में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

जनअभियान बनाने की दिशा में कदम

‘मैं भी यमुना प्रहरी’ कार्यक्रम को एक ऐसे अभियान के रूप में आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है जिसमें नागरिक स्वयं को जिम्मेदार सहभागी समझें। सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों के साथ समाज की भागीदारी जुड़ने से स्वच्छता के उद्देश्य को व्यापक आधार मिल सकता है।

युवाओं को इस अभियान की मुख्य कड़ी बनाकर उन्हें जिम्मेदारी और सहभागिता का संदेश दिया गया। कॉलेजों से शुरू होने वाला यह अभियान दिल्ली के अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

स्वच्छता का संदेश घर-घर तक पहुंचाने की पहल

अभियान की सफलता के लिए जरूरी है कि स्वच्छता का संदेश केवल कार्यक्रम स्थल तक सीमित न रहे। युवाओं से कहा गया कि वे अपने घर, परिवार और मित्रों तक भी यह संदेश पहुंचाएं। जब कोई विद्यार्थी घर पर स्वच्छता को लेकर जागरूकता फैलाता है तो परिवार के अन्य सदस्य भी इससे प्रभावित हो सकते हैं।

इसी प्रकार मित्र समूहों में चर्चा और डिजिटल माध्यमों से अभियान का प्रचार युवाओं के बीच सहभागिता बढ़ा सकता है। कार्यक्रम में युवाओं को इसी प्रकार अभियान का दूत बनने के लिए प्रेरित किया गया।

सेवा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश

सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में सेवा की अवधारणा को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का प्रयास दिखाई दिया। स्वच्छ नदी, स्वच्छ सार्वजनिक स्थान और स्वच्छ पर्यावरण समाज के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसलिए इनकी रक्षा करना भी नागरिक सेवा का हिस्सा माना जा सकता है।

युवाओं को इसी भावना से अभियान में जोड़ने की कोशिश की गई। उनसे कहा गया कि वे अपनी ऊर्जा और क्षमता का उपयोग समाजहित से जुड़े कार्यों में करें और स्वच्छता के संदेश को आगे बढ़ाएं।

आगे की राह

1 अक्टूबर से ऐप पर पंजीकरण शुरू होने के साथ ‘मैं भी यमुना प्रहरी’ अभियान के अगले चरण की शुरुआत हुई है। अब अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने युवा इससे जुड़ते हैं और कितनी सक्रियता से इसके संदेश को आगे बढ़ाते हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय के 30 कॉलेजों से हजारों युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य अभियान को व्यापक आधार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यदि कॉलेज स्तर पर विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होती है तो अभियान को जनजागरूकता के व्यापक मंच के रूप में आगे बढ़ाया जा सकता है।

समापन

दिल्ली विश्वविद्यालय के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित ‘मैं भी यमुना प्रहरी’ कार्यक्रम ने स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और युवा भागीदारी को एक साथ जोड़ने का संदेश दिया। प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय राज्य मंत्री श्री हर्ष मल्होत्रा के साथ अभियान का शुभारंभ और ऐप लॉन्च किया गया। 1 अक्टूबर से ऐप पर पंजीकरण शुरू करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के 30 कॉलेजों के हजारों युवाओं को ‘क्लीन यमुना मिशन’ से जोड़ने की पहल की गई।

कार्यक्रम में युवाओं से सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ने और यमुना की स्वच्छता को जन-जन का अभियान बनाने का आह्वान किया गया। युवाओं को बताया गया कि एक व्यक्ति की पहल दूसरे व्यक्ति को प्रेरित कर सकती है और एक कॉलेज की भागीदारी दूसरे कॉलेज को अभियान से जोड़ सकती है। इसी तरह सामूहिक भागीदारी से स्वच्छता के संदेश को व्यापक रूप दिया जा सकता है।

कैबिनेट सहयोगी श्री प्रवेश साहिब सिंह, विधायक श्री सूर्य प्रकाश खत्री सहित बड़ी संख्या में युवाओं की मौजूदगी में आयोजित कार्यक्रम का केंद्रीय संदेश यही रहा कि यमुना की स्वच्छता के लिए सरकार के प्रयासों के साथ नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। ‘मैं भी यमुना प्रहरी’ अभियान के माध्यम से युवाओं को इसी जिम्मेदारी से जोड़ने का प्रयास किया गया है।

युवाओं से ऐप डाउनलोड कर पंजीकरण कराने, ‘यमुना प्रहरी’ बनने और अपने साथ अन्य युवाओं को जोड़ने की अपील की गई। अभियान का उद्देश्य स्वच्छता को केवल किसी एक आयोजन तक सीमित रखने के बजाय इसे सामाजिक व्यवहार और सामूहिक जिम्मेदारी का हिस्सा बनाना है। दिल्ली विश्वविद्यालय के 30 कॉलेजों के हजारों युवाओं की प्रस्तावित भागीदारी से इस पहल को व्यापक जनाधार मिलने की संभावना है।

कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश सामने आया कि स्वच्छ यमुना का लक्ष्य केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि समाज की सक्रिय सहभागिता से मजबूत होगा। जब युवा स्वयं आगे आकर स्वच्छता की जिम्मेदारी स्वीकार करेंगे और दूसरों को भी प्रेरित करेंगे, तब अभियान को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास और प्रभावी हो सकता है। इसी सामूहिक भावना के साथ ‘मैं भी यमुना प्रहरी’ अभियान को आगे बढ़ाने का आह्वान किया गया।

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