
अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर राज्यस्तरीय कार्यक्रम में 500 से अधिक वरिष्ठजनों का सम्मान, तीन शतायु माताओं को मिला विशेष सम्मान; स्वास्थ्य परीक्षण, साइबर जागरूकता और सहायक उपकरण वितरण भी हुआ
भोपाल। अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर प्रशासन अकादमी के स्वर्ण जयंती सभागार में राज्यस्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह ने वरिष्ठजनों को समाज की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि वृद्धजनों का जीवन अनुभव, ज्ञान, संस्कार और आशीर्वाद नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शन का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठजनों का सम्मान केवल किसी विशेष दिवस तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह परिवार, समाज और हमारी जीवनशैली का स्थायी हिस्सा बनना चाहिए। कार्यक्रम में 500 से अधिक वरिष्ठजनों को शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। वहीं 100 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुकीं तीन शतायु माताओं को विशेष शतायु सम्मान प्रदान किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठजनों के स्वास्थ्य परीक्षण के साथ दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग, सहायक उपकरण और ट्राइसाइकिल भी वितरित की गईं।
राज्यस्तरीय आयोजन में वरिष्ठजनों के सम्मान के साथ उनकी आवश्यकताओं, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, गरिमापूर्ण जीवन और समाज में उनकी सक्रिय भूमिका को लेकर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता भोपाल सांसद श्री आलोक शर्मा ने की। विधायक श्री शंकर लालवानी सहित जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी, सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में वरिष्ठजन कार्यक्रम में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश में वरिष्ठजनों की भूमिका और उनके अनुभव का महत्व कम नहीं हुआ है, बल्कि नई पीढ़ी के लिए उनके अनुभवों से सीख लेने की आवश्यकता और अधिक बढ़ गई है।
वृद्धजन परिवार और समाज की अमूल्य धरोहर
सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि वृद्धजन हमारे परिवार और समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने अपने जीवन के लंबे अनुभव से परिवार, समाज और देश के निर्माण में योगदान दिया है। उनका अनुभव नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शन का आधार है। वरिष्ठजनों के पास जीवन के अनेक उतार-चढ़ाव देखने और समझने का अनुभव होता है, जिसे आने वाली पीढ़ियां आत्मसात कर अपने जीवन को बेहतर दिशा दे सकती हैं।
मंत्री श्री कुशवाह ने कहा कि वृद्धजनों का सम्मान केवल एक दिन मनाए जाने वाले कार्यक्रम तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह हमारे संस्कार और व्यवहार का हिस्सा होना चाहिए। जिस परिवार में वरिष्ठजनों का सम्मान होता है, वहां पीढ़ियों के बीच संवाद और अनुभवों का आदान-प्रदान मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठजन केवल परिवार के बुजुर्ग सदस्य नहीं होते, बल्कि वे परिवार की परंपराओं, संस्कारों और जीवन-मूल्यों के वाहक भी होते हैं।
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को वरिष्ठजनों के साथ संवाद करना चाहिए। उनके जीवन के अनुभवों को सुनना चाहिए और उनसे सीखने का प्रयास करना चाहिए। बदलते समय में तकनीक और जीवनशैली में अनेक परिवर्तन आए हैं, लेकिन अनुभव और मानवीय मूल्यों का महत्व आज भी बना हुआ है। वरिष्ठजनों के अनुभवों में परिवार और समाज के लिए उपयोगी ज्ञान का भंडार मौजूद है।
शतायु वरिष्ठजन खुले इतिहास की तरह
मंत्री श्री कुशवाह ने कार्यक्रम में उपस्थित उन वरिष्ठजनों का विशेष उल्लेख किया जिन्होंने अपने जीवन के 100 वर्ष पूरे किए हैं। उन्होंने कहा कि 100 वर्ष की आयु पूरी कर चुके वरिष्ठजन अपने आप में एक खुली किताब की तरह होते हैं। उन्होंने लगभग एक शताब्दी के सामाजिक, पारिवारिक और आर्थिक परिवर्तनों को अपनी आंखों से देखा है। उनके अनुभवों में समाज के बदलते स्वरूप की झलक मिलती है।
उन्होंने कहा कि ऐसे वरिष्ठजनों के साथ बैठना, उनसे बातचीत करना और उनके जीवन के अनुभवों को सुनना नई पीढ़ी के लिए सीखने का अवसर है। एक शतायु व्यक्ति के जीवन में अनेक संघर्ष, उपलब्धियां, सामाजिक परिवर्तन और पारिवारिक अनुभव समाहित होते हैं। उनके अनुभवों को समझने से युवा पीढ़ी जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरणा प्राप्त कर सकती है।
उन्होंने कहा कि वरिष्ठजनों को परिवार से जुड़े रहने का अवसर मिलना चाहिए। उन्हें अनावश्यक सामाजिक बंदिशों में नहीं बांधा जाना चाहिए। जो वृद्धजन स्वस्थ हैं और अपनी क्षमता के अनुसार कार्य करना चाहते हैं, उन्हें सक्रिय रहने के अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए। उम्र बढ़ने का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति की उपयोगिता समाप्त हो गई है। अनुभव और क्षमता के आधार पर वरिष्ठजन समाज में विभिन्न रूपों में योगदान दे सकते हैं।
सक्रिय वरिष्ठजन समाज के लिए उपयोगी
मंत्री श्री कुशवाह ने कहा कि स्वस्थ और सक्रिय वरिष्ठजन अपने अनुभव के माध्यम से समाज को दिशा दे सकते हैं। परिवार के युवा सदस्यों को सलाह देने से लेकर सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी तक वरिष्ठजन अपनी भूमिका निभा सकते हैं। उनके अनुभव का उपयोग सामाजिक संस्थाओं और सामुदायिक गतिविधियों में भी किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि वरिष्ठजनों की इच्छाओं और क्षमताओं का सम्मान किया जाना चाहिए। यदि कोई वरिष्ठजन अपनी रुचि के अनुसार सामाजिक, रचनात्मक या अन्य गतिविधियों में सक्रिय रहना चाहता है, तो परिवार और समाज को उसे प्रोत्साहित करना चाहिए। इससे वरिष्ठजनों में आत्मविश्वास और सामाजिक जुड़ाव की भावना मजबूत होती है।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश भी सामने आया कि वृद्धावस्था को केवल निर्भरता की अवस्था के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति, क्षमता और रुचि अलग-अलग होती है। इसलिए वरिष्ठजनों को उनकी क्षमता के अनुसार सक्रिय रहने का अवसर देना गरिमापूर्ण जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
भारतीय पारिवारिक व्यवस्था दुनिया के लिए प्रेरणा
मंत्री श्री कुशवाह ने कहा कि भारत की पारिवारिक व्यवस्था, संस्कार और जीवन-मूल्य पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का विषय हैं। भारतीय समाज में माता-पिता और वरिष्ठजनों के प्रति सम्मान तथा परिवार के साथ रहने की परंपरा लंबे समय से रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया के अनेक विकसित देश भी परिवार, बुजुर्गों के सम्मान और जीवन-मूल्यों से जुड़ी भारतीय परंपराओं से सीख रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली और बदलते सामाजिक परिवेश के बीच यह आवश्यक है कि हम अपनी समृद्ध पारिवारिक परंपराओं को कमजोर न होने दें। परिवार में वरिष्ठजनों का सम्मान, उनके साथ संवाद और उनकी आवश्यकताओं का ध्यान रखना भारतीय संस्कारों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी आधुनिक तकनीक और बदलती जीवनशैली के साथ आगे बढ़े, लेकिन उसे अपने परिवार और संस्कारों से जुड़ाव बनाए रखना चाहिए। वरिष्ठजनों का सम्मान केवल परंपरा नहीं, बल्कि पीढ़ियों को जोड़ने वाला सामाजिक मूल्य भी है।

प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में योजनाओं पर जोर
मंत्री श्री कुशवाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश के वृद्धजनों, दिव्यांगजनों और अन्य सामाजिक रूप से जरूरतमंद वर्गों की आवश्यकताओं को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से पूरा करने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य है कि जरूरतमंद वर्गों तक योजनाओं का लाभ पहुंचे और उन्हें सम्मानजनक तथा बेहतर जीवन के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध हो।
उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि जरूरतमंद लोगों के जीवन में सुरक्षा और सम्मान की भावना को मजबूत करना भी है। वरिष्ठजन समाज का महत्वपूर्ण वर्ग हैं और उनकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा तथा अन्य सुविधाओं की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत भी वरिष्ठजनों के सम्मान और कल्याण को महत्व दिया जा रहा है। इसी भावना के तहत राज्यस्तरीय कार्यक्रम में वरिष्ठजनों का सम्मान, स्वास्थ्य परीक्षण और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।
500 से अधिक वरिष्ठजनों का सम्मान
अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के राज्यस्तरीय कार्यक्रम में 500 से अधिक वरिष्ठजनों को शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह के दौरान वरिष्ठजनों के प्रति समाज की कृतज्ञता और सम्मान की भावना व्यक्त की गई।
वरिष्ठजनों को सम्मानित करने का उद्देश्य उनके जीवनभर के योगदान को रेखांकित करना रहा। परिवार और समाज के निर्माण में वरिष्ठ पीढ़ी की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने अपने जीवन के लंबे समय में परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के साथ सामाजिक और आर्थिक विकास में भी योगदान दिया है।
कार्यक्रम में सम्मान प्राप्त करने वाले वरिष्ठजनों के बीच उत्साह दिखाई दिया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि समाज अपने वरिष्ठ नागरिकों के अनुभव और योगदान को महत्व देता है तथा उनके सम्मान और गरिमा के लिए प्रतिबद्ध है।
तीन शतायु माताओं को विशेष सम्मान
कार्यक्रम में 100 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाली तीन शतायु माताओं—श्रीमती राजूबाई, श्रीमती तुलसीबाई एवं श्रीमती कौशल्या देवी—को विशेष शतायु सम्मान प्रदान किया गया। तीनों शतायु माताओं को 5,100 रुपये की सम्मान राशि तथा शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया।
शतायु माताओं का सम्मान कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा। 100 वर्ष की आयु पूरी करना जीवन की लंबी यात्रा का प्रतीक है। इस अवसर पर उनके अनुभवों और जीवन यात्रा के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया।
कार्यक्रम में कहा गया कि शतायु वरिष्ठजन समाज की जीवंत धरोहर हैं। उन्होंने अनेक दशकों में सामाजिक परिवर्तन को देखा है। उनके अनुभवों से युवा पीढ़ी को परिवार, संघर्ष, धैर्य और जीवन-मूल्यों से जुड़ी महत्वपूर्ण सीख मिल सकती है।
स्वास्थ्य परीक्षण की सुविधा
कार्यक्रम में वरिष्ठजनों के लिए स्वास्थ्य परीक्षण की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा आवश्यक जांच की गई और वरिष्ठजनों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्रदान की गई। बढ़ती उम्र में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और समय पर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी का महत्व होता है।
आयोजन के माध्यम से वरिष्ठजनों को यह संदेश भी दिया गया कि वे अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें और आवश्यकतानुसार चिकित्सकीय परामर्श लें। स्वास्थ्य परीक्षण सुविधा का उद्देश्य कार्यक्रम में शामिल वरिष्ठजनों को मौके पर आवश्यक प्राथमिक जानकारी और सहयोग उपलब्ध कराना रहा।
साइबर अपराधों से बचाव पर जागरूकता
सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती सोनाली पोंक्षे वायंगणकर ने कहा कि जीवन प्रत्याशा बढ़ने के साथ वरिष्ठजनों के स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियां भी बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि वरिष्ठजनों को स्वास्थ्य सुविधाओं और सामाजिक सुरक्षा के साथ-साथ साइबर अपराधों से बचाव के प्रति भी जागरूक करना आवश्यक है।
आज डिजिटल सेवाओं का उपयोग बढ़ने के साथ वरिष्ठ नागरिक भी मोबाइल फोन, ऑनलाइन बैंकिंग और विभिन्न डिजिटल सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करना महत्वपूर्ण है। किसी भी अनजान लिंक, संदेश, फोन कॉल या ऑनलाइन अनुरोध के संबंध में सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से वरिष्ठजनों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विभिन्न स्तरों पर कार्य किए जा रहे हैं। देखभाल से जुड़े प्रशिक्षण पर भी ध्यान दिया जा रहा है, ताकि वरिष्ठजनों की सहायता करने वाले लोगों को उनकी आवश्यकताओं और देखभाल की बेहतर समझ हो।
सामाजिक सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन
कार्यक्रम में वरिष्ठजनों के लिए गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। उम्र बढ़ने के साथ व्यक्ति की शारीरिक आवश्यकताएं बदल सकती हैं, लेकिन सम्मान और आत्मसम्मान की आवश्यकता बनी रहती है। परिवार और समाज की जिम्मेदारी है कि वरिष्ठजनों को सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
विभाग की ओर से भी वरिष्ठजनों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से सहयोग उपलब्ध कराने की बात कही गई। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों को सामाजिक रूप से सक्रिय बनाए रखने और उन्हें परिवार तथा समाज से जोड़े रखने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं।
भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने भी व्यक्त किया सम्मान
भोपाल सांसद श्री आलोक शर्मा ने कहा कि वरिष्ठजनों ने अपने अनुभव, योगदान और संस्कारों से परिवार तथा समाज को समृद्ध किया है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठजनों का सम्मान और उनकी गरिमापूर्ण उपस्थिति परिवार तथा समाज की समृद्ध परंपरा का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि वरिष्ठजनों का जीवन अनुभव नई पीढ़ी को लगातार प्रेरणा देता है। परिवार के युवा सदस्यों को वरिष्ठजनों के साथ संवाद करना चाहिए और उनके अनुभवों से सीखना चाहिए। उनके जीवन की कठिनाइयों और उपलब्धियों को समझना युवाओं के लिए प्रेरणादायक हो सकता है।
विधायक भगवानदास सबनानी ने जताई कृतज्ञता
विधायक श्री भगवानदास सबनानी ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत वृद्धजनों का सम्मान समाज में उनके योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठजनों के अनुभव और आशीर्वाद समाज के लिए अमूल्य हैं।
उन्होंने सभी वरिष्ठजनों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उनके स्वस्थ एवं सुखी जीवन की कामना की। उन्होंने कहा कि वरिष्ठजनों की उपस्थिति परिवार में अनुभव और संस्कारों की निरंतरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
परशुराम कल्याण बोर्ड अध्यक्ष ने बताया संस्कृति की पहचान
परशुराम कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष पं. श्री विष्णु राजोरिया ने अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि माता-पिता और वृद्धजनों की सेवा एवं सम्मान भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण पहचान है। उन्होंने कहा कि परिवार और समाज में वरिष्ठजनों के अनुभव तथा मार्गदर्शन को सम्मान देना सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में भी भारतीय समाज की यह परंपरा महत्वपूर्ण है। परिवार में बुजुर्गों की मौजूदगी नई पीढ़ी को संस्कारों और जीवन-मूल्यों से जोड़ने में सहायता करती है। वरिष्ठजनों की सेवा और सम्मान को परिवार के दैनिक व्यवहार का हिस्सा बनाए जाने की आवश्यकता है।
विभागीय अधिकारियों ने बताई जिम्मेदारियां
सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती सोनाली पोंक्षे वायंगणकर ने वरिष्ठजनों से जुड़ी विभिन्न आवश्यकताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और डिजिटल सुरक्षा जैसे विषयों पर निरंतर जागरूकता आवश्यक है।
विभाग के आयुक्त श्री कृष्ण गोपाल तिवारी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस का उद्देश्य वरिष्ठजनों के योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ उनके सम्मान और गरिमापूर्ण जीवन को सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में स्वास्थ्य परीक्षण और साइबर जागरूकता जैसी सुविधाओं के माध्यम से वरिष्ठजनों को आवश्यक जानकारी और सहयोग उपलब्ध कराया गया।
उन्होंने कहा कि वरिष्ठजनों को आवश्यक सेवाएं और सहयोग उपलब्ध कराने के लिए विभाग द्वारा निरंतर कार्य किया जा रहा है। वरिष्ठ नागरिकों की आवश्यकताओं को समझकर योजनाओं और सेवाओं को प्रभावी तरीके से उन तक पहुंचाना विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है।
दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण
कार्यक्रम में महावीर संस्था द्वारा दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग एवं आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए। सहायक उपकरणों का उद्देश्य दिव्यांगजनों को दैनिक जीवन की गतिविधियों में सुविधा उपलब्ध कराना और उनकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।
दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप सहायक उपकरण उपलब्ध होने से आवागमन, दैनिक कार्यों और सामाजिक गतिविधियों में सुविधा मिल सकती है। कार्यक्रम में इस पहल को सामाजिक सहयोग और सेवा की भावना से जोड़कर देखा गया।
जरूरतमंद दिव्यांगजनों को ट्राइसाइकिल वितरण
कार्यक्रम में जरूरतमंद दिव्यांगजनों को ट्राइसाइकिल भी वितरित की गईं। ट्राइसाइकिल मिलने से लाभार्थियों को आवागमन में सुविधा मिलने के साथ दैनिक गतिविधियों में अधिक आत्मनिर्भर बनने में सहयोग मिलेगा।
सहायक उपकरण और ट्राइसाइकिल वितरण जैसी पहल का उद्देश्य दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सहयोग उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम में दिव्यांगजनों की सुविधा और आत्मनिर्भरता को भी वरिष्ठजनों के कल्याण के साथ महत्वपूर्ण सामाजिक विषय के रूप में शामिल किया गया।
‘वृद्ध मित्रों’ ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम में ‘वृद्ध मित्रों’ ने सक्रिय रूप से अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने वरिष्ठजनों की सहायता करने, उन्हें कार्यक्रम स्थल तक पहुंचाने तथा आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में सहयोग किया। वरिष्ठजनों की सुविधा के लिए स्वयंसेवी सहयोग ने कार्यक्रम को अधिक सहज बनाने में भूमिका निभाई।
वृद्ध मित्रों की भूमिका यह संदेश भी देती है कि वरिष्ठजनों की सहायता केवल सरकारी व्यवस्था की जिम्मेदारी नहीं है। समाज के युवा और अन्य नागरिक भी अपनी क्षमता के अनुसार वरिष्ठजनों की सहायता कर सकते हैं। छोटे-छोटे सहयोग से वरिष्ठ नागरिकों को सामाजिक जुड़ाव और सम्मान की अनुभूति होती है।
पीढ़ियों के बीच संवाद जरूरी
कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठजनों और नई पीढ़ी के बीच संवाद की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। बदलते समय में परिवारों की संरचना और जीवनशैली में परिवर्तन आया है। ऐसे समय में पीढ़ियों के बीच संवाद को मजबूत रखना आवश्यक है।
वरिष्ठजनों के अनुभव और युवाओं की नई सोच एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। युवा तकनीक और आधुनिक जानकारी से परिचित हैं, जबकि वरिष्ठजन जीवन के व्यावहारिक अनुभव से समृद्ध होते हैं। दोनों पीढ़ियों के बीच संवाद से परिवार और समाज को लाभ मिल सकता है।
वृद्धजनों को सामाजिक बंदिशों से मुक्त वातावरण
मंत्री श्री कुशवाह ने कहा कि वरिष्ठजनों को अनावश्यक सामाजिक बंदिशों में नहीं बांधा जाना चाहिए। जो वरिष्ठजन स्वस्थ हैं और काम करना चाहते हैं, उन्हें उनकी क्षमता के अनुसार सक्रिय रहने का अवसर मिलना चाहिए।
यह दृष्टिकोण वरिष्ठजनों को केवल सहायता प्राप्त करने वाले वर्ग के रूप में देखने के बजाय उनकी क्षमता और अनुभव को महत्व देता है। अनेक वरिष्ठजन अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार सामाजिक गतिविधियों में योगदान देने की इच्छा रखते हैं। परिवार को उनकी इच्छाओं और क्षमताओं का सम्मान करना चाहिए।
सम्मान एक दिन का नहीं, जीवन का संस्कार
अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के आयोजन का मुख्य संदेश यही रहा कि वरिष्ठजनों का सम्मान किसी एक दिन तक सीमित नहीं होना चाहिए। एक दिन सम्मान समारोह आयोजित करना महत्वपूर्ण है, लेकिन वास्तविक सम्मान तब है जब परिवार और समाज में वरिष्ठजनों के साथ रोजमर्रा के व्यवहार में सम्मान और संवेदनशीलता दिखाई दे।
वरिष्ठजनों की आवश्यकताओं को समझना, उनके साथ संवाद करना, स्वास्थ्य का ध्यान रखना और उन्हें सामाजिक रूप से सक्रिय बनाए रखना परिवार की जिम्मेदारी का हिस्सा है। इसी प्रकार समाज को भी वरिष्ठजनों के अनुभव और योगदान का सम्मान करना चाहिए।
सेवा संकल्प अभियान से मिला सामाजिक संदेश
सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम ने वरिष्ठजनों के सम्मान और दिव्यांगजनों की सहायता का व्यापक सामाजिक संदेश दिया। एक ओर जहां 500 से अधिक वरिष्ठजनों का सम्मान किया गया, वहीं दूसरी ओर दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण और ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई गईं।
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि समाज के वरिष्ठ और जरूरतमंद वर्गों की सहायता तथा सम्मान सामूहिक जिम्मेदारी है। सरकार, सामाजिक संस्थाएं, स्वयंसेवी संगठन और नागरिक मिलकर इस दिशा में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।
शतायु माताओं का सम्मान बना विशेष आकर्षण
श्रीमती राजूबाई, श्रीमती तुलसीबाई और श्रीमती कौशल्या देवी का शतायु सम्मान समारोह का विशेष आकर्षण रहा। तीनों माताओं ने जीवन के 100 वर्ष पूरे किए हैं। उन्हें 5,100 रुपये की सम्मान राशि और शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया।
शतायु माताओं का सम्मान वरिष्ठजनों के प्रति समाज की कृतज्ञता का प्रतीक रहा। कार्यक्रम में उनके दीर्घ जीवन और अनुभव के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया। उपस्थित लोगों के लिए यह अवसर नई पीढ़ी और वरिष्ठ पीढ़ी के बीच संबंधों की महत्ता को समझने का भी रहा।
स्वास्थ्य और सुरक्षा पर भी ध्यान
कार्यक्रम में वरिष्ठजनों के स्वास्थ्य परीक्षण के साथ साइबर जागरूकता पर ध्यान दिया जाना इस आयोजन के व्यावहारिक पक्ष को दर्शाता है। वरिष्ठजनों की बढ़ती आवश्यकताओं को केवल सम्मान समारोह तक सीमित न रखकर उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा से जोड़ने का प्रयास किया गया।
स्वास्थ्य परीक्षण से वरिष्ठजनों को अपनी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में आवश्यक जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला। वहीं साइबर जागरूकता के माध्यम से उन्हें डिजिटल दुनिया में संभावित जोखिमों के प्रति सावधान रहने की जानकारी देने का प्रयास किया गया।
समाज के लिए वरिष्ठजन अनुभव का स्रोत
कार्यक्रम में बार-बार यह संदेश सामने आया कि वरिष्ठजन समाज के लिए अनुभव का महत्वपूर्ण स्रोत हैं। उन्होंने अपने जीवन में अनेक परिस्थितियों का सामना किया है और उनसे प्राप्त अनुभव अगली पीढ़ी के लिए उपयोगी हो सकते हैं।
परिवारों में यदि युवा नियमित रूप से वरिष्ठजनों के साथ समय बिताएं और उनकी जीवन यात्रा को समझें तो उन्हें अनेक व्यावहारिक सीख मिल सकती हैं। इस प्रकार वरिष्ठजनों का अनुभव परिवार की अगली पीढ़ी तक पहुंचता है और सामाजिक मूल्यों की निरंतरता बनी रहती है।
समापन : सम्मान, सेवा और गरिमा का संदेश
अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम ने वरिष्ठजनों के सम्मान, सेवा, स्वास्थ्य और गरिमापूर्ण जीवन को केंद्र में रखा। प्रशासन अकादमी के स्वर्ण जयंती सभागार में आयोजित कार्यक्रम में 500 से अधिक वरिष्ठजनों को शाल और श्रीफल देकर सम्मानित किया गया। 100 वर्ष की आयु पूरी करने वाली तीन शतायु माताओं—श्रीमती राजूबाई, श्रीमती तुलसीबाई और श्रीमती कौशल्या देवी—को 5,100 रुपये की सम्मान राशि और शॉल भेंट कर विशेष सम्मान प्रदान किया गया।
सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह ने वृद्धजनों को परिवार और समाज की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि उनके अनुभव, ज्ञान और आशीर्वाद से समाज समृद्ध होता है। उन्होंने वरिष्ठजनों के सम्मान को एक दिन की औपचारिकता के बजाय जीवन और संस्कार का हिस्सा बनाने का संदेश दिया। साथ ही स्वस्थ वरिष्ठजनों को उनकी क्षमता के अनुसार सक्रिय रहने के अवसर देने और उन्हें अनावश्यक सामाजिक बंदिशों से मुक्त रखने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में भोपाल सांसद श्री आलोक शर्मा ने वरिष्ठजनों के योगदान और अनुभव को परिवार तथा समाज की समृद्ध परंपरा का आधार बताया। विधायक श्री भगवानदास सबनानी ने सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत वृद्धजनों के सम्मान को उनके योगदान के प्रति कृतज्ञता का अवसर बताया। परशुराम कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष पं. श्री विष्णु राजोरिया ने माता-पिता और वृद्धजनों की सेवा एवं सम्मान को भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण पहचान बताया।
प्रमुख सचिव श्रीमती सोनाली पोंक्षे वायंगणकर ने वरिष्ठजनों के स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया। आयुक्त श्री कृष्ण गोपाल तिवारी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस वरिष्ठजनों के योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ उनके सम्मान और गरिमापूर्ण जीवन को सुनिश्चित करने का अवसर है।
कार्यक्रम में महावीर संस्था द्वारा दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए। जरूरतमंद दिव्यांगजनों को ट्राइसाइकिल वितरित की गईं। वरिष्ठजनों के लिए स्वास्थ्य परीक्षण की सुविधा उपलब्ध कराई गई और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आवश्यक जांच तथा स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी। वहीं ‘वृद्ध मित्रों’ ने वरिष्ठजनों की सहायता कर उन्हें कार्यक्रम स्थल तक पहुंचाने और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में सहयोग किया।

कुल मिलाकर राज्यस्तरीय वृद्धजन दिवस समारोह ने समाज में वरिष्ठजनों के सम्मान, सेवा और गरिमापूर्ण जीवन का संदेश दिया। कार्यक्रम में यह भावना प्रमुखता से सामने आई कि वरिष्ठजन केवल आयु में बड़े व्यक्ति नहीं, बल्कि परिवार और समाज के अनुभव, संस्कार और स्मृतियों के संरक्षक हैं। उनके अनुभवों से नई पीढ़ी सीख सकती है और उनके आशीर्वाद से परिवारों में भावनात्मक एवं सांस्कृतिक निरंतरता बनी रह सकती है। वरिष्ठजनों के सम्मान को व्यवहार और संस्कार का हिस्सा बनाकर ही समाज अपनी इस अमूल्य धरोहर को उचित सम्मान दे सकता है।









