
स्वच्छता शपथ के साथ ‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ अभियान में किया श्रमदान, ‘एक पेड़ मां के नाम’ के तहत किया पौधरोपण
नई दिल्ली। भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), नई दिल्ली में आयोजित ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ कार्यक्रम में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्वच्छता को जनभागीदारी से जोड़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए स्वच्छता की शपथ ली और ‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ पहल के अंतर्गत श्रमदान किया। कार्यक्रम में स्वच्छता को केवल एक अभियान के रूप में नहीं, बल्कि दैनिक जीवन की जिम्मेदारी और सामाजिक सहभागिता के रूप में अपनाने का संदेश दिया गया। संस्थान के विद्यार्थियों, शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों की भागीदारी ने कार्यक्रम को सामूहिक स्वरूप प्रदान किया।
डॉ. एल. मुरुगन ने कार्यक्रम के दौरान स्वच्छता शपथ लेकर स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण के निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की। ‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ पहल के तहत उन्होंने स्वयं श्रमदान में हिस्सा लिया। इस पहल का उद्देश्य लोगों को अपने आसपास के सार्वजनिक और संस्थागत परिसरों की स्वच्छता के लिए प्रत्यक्ष रूप से योगदान देने के लिए प्रेरित करना है। श्रमदान के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि स्वच्छता केवल किसी एक विभाग, संस्था या कर्मचारी की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। जब विद्यार्थी, शिक्षक, कर्मचारी और आम नागरिक मिलकर स्वच्छता गतिविधियों में भाग लेते हैं तो अभियान का प्रभाव व्यापक स्तर पर दिखाई देता है।
कार्यक्रम के दौरान ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत पौधरोपण भी किया गया। डॉ. मुरुगन ने पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण और हरित परिसर के निर्माण का संदेश दिया। पौधरोपण को स्वच्छता अभियान से जोड़ते हुए पर्यावरणीय संतुलन, हरियाली और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित किया गया। स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे से जुड़े विषय हैं। स्वच्छ परिसर के साथ पर्याप्त हरियाली किसी भी शैक्षणिक संस्थान के वातावरण को अधिक स्वस्थ, सुंदर और अनुकूल बनाती है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में भी सहायक होते हैं।
नए अकादमिक ब्लॉक और नवीनीकृत पुस्तकालय का किया अवलोकन
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने आईआईएमसी परिसर में संस्थान के नए अकादमिक ब्लॉक का भी दौरा किया। उन्होंने वहां उपलब्ध शैक्षणिक सुविधाओं और संस्थान के अकादमिक वातावरण का अवलोकन किया। इसके साथ ही उन्होंने नवीनीकृत पुस्तकालय का भी दौरा किया। पुस्तकालय किसी भी शैक्षणिक संस्थान की ज्ञान-व्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र होता है और पत्रकारिता एवं जनसंचार जैसे विषयों के विद्यार्थियों के लिए पुस्तकों, संदर्भ सामग्री तथा अध्ययन संसाधनों की उपलब्धता विशेष महत्व रखती है।
नए अकादमिक ब्लॉक और नवीनीकृत पुस्तकालय का अवलोकन कार्यक्रम के उस व्यापक पक्ष को भी रेखांकित करता है जिसमें स्वच्छता के साथ संस्थागत विकास और बेहतर शैक्षणिक वातावरण को महत्व दिया जाता है। आधुनिक सुविधाओं से युक्त शैक्षणिक परिसरों का उद्देश्य विद्यार्थियों को अध्ययन, शोध और व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना है। आईआईएमसी देश में पत्रकारिता एवं जनसंचार शिक्षा के प्रमुख संस्थानों में से एक है, इसलिए यहां विकसित की जा रही शैक्षणिक सुविधाएं मीडिया शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

स्वच्छता अभियान में विद्यार्थियों की भागीदारी महत्वपूर्ण
‘स्वच्छता ही सेवा’ जैसे अभियानों में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि विद्यार्थी समाज में जागरूकता के संदेश को व्यापक स्तर तक पहुंचाने में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं। आईआईएमसी जैसे मीडिया शिक्षण संस्थान में स्वच्छता से जुड़े कार्यक्रम का महत्व और भी बढ़ जाता है। यहां अध्ययनरत विद्यार्थी भविष्य में पत्रकारिता, जनसंचार, डिजिटल मीडिया, रेडियो, टेलीविजन और अन्य संचार माध्यमों से जुड़े क्षेत्रों में कार्य करेंगे। ऐसे में सामाजिक सरोकारों और नागरिक जिम्मेदारियों के प्रति उनकी समझ भविष्य में उनके पेशेवर कार्यों में भी दिखाई दे सकती है।
कार्यक्रम के दौरान श्रमदान में भागीदारी ने यह संदेश दिया कि सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखने के लिए केवल सरकारी व्यवस्थाओं पर निर्भर रहने के बजाय नागरिकों को भी अपनी भूमिका निभानी चाहिए। स्वच्छता की आदत घर, विद्यालय, महाविद्यालय, कार्यालय और सार्वजनिक स्थलों से शुरू होकर व्यापक सामाजिक व्यवहार का हिस्सा बन सकती है। सामूहिक श्रमदान ऐसे व्यवहार को प्रोत्साहित करने का एक प्रत्यक्ष माध्यम है।
‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ से सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश
‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ पहल का मूल उद्देश्य लोगों को एक निश्चित समय के लिए सामूहिक रूप से स्वच्छता गतिविधियों में शामिल करना है। इस प्रकार की पहल में व्यक्तिगत योगदान सामूहिक प्रयास में बदल जाता है। जब बड़ी संख्या में लोग एक साथ श्रमदान करते हैं तो स्वच्छता के प्रति जागरूकता के साथ-साथ सामाजिक सहभागिता की भावना भी मजबूत होती है।
आईआईएमसी परिसर में केंद्रीय राज्य मंत्री की सहभागिता ने कार्यक्रम को विशेष महत्व दिया। स्वच्छता शपथ लेने के बाद श्रमदान में प्रत्यक्ष भागीदारी ने यह संदेश दिया कि स्वच्छता संबंधी गतिविधियों में नेतृत्व की भूमिका केवल निर्देश देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि स्वयं भागीदारी के माध्यम से भी लोगों को प्रेरित किया जा सकता है। विद्यार्थियों और संस्थान से जुड़े अन्य लोगों के लिए यह सहभागिता एक व्यावहारिक उदाहरण के रूप में सामने आई।
पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता
‘एक पेड़ मां के नाम’ पौधरोपण अभियान ने कार्यक्रम के पर्यावरणीय पक्ष को भी सामने रखा। पौधरोपण केवल एक पौधा लगाने की गतिविधि नहीं है, बल्कि उसके संरक्षण और विकास की जिम्मेदारी से भी जुड़ा है। किसी संस्थान में लगाए गए पौधे भविष्य में परिसर की हरियाली बढ़ाने के साथ पर्यावरणीय गुणवत्ता में भी योगदान कर सकते हैं। विद्यार्थियों को पौधों की देखभाल से जोड़कर पर्यावरण संरक्षण की आदत विकसित की जा सकती है।
स्वच्छता और हरियाली दोनों मिलकर स्वस्थ संस्थागत वातावरण तैयार करते हैं। जहां साफ-सफाई के साथ पेड़-पौधे और हरित क्षेत्र होते हैं, वहां परिसर का वातावरण अधिक व्यवस्थित और अनुकूल दिखाई देता है। इसी दृष्टि से स्वच्छता गतिविधियों के साथ पौधरोपण को जोड़ना व्यापक पर्यावरणीय चेतना का संदेश देता है।
शिक्षा, स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी का समन्वय
आईआईएमसी में आयोजित कार्यक्रम ने शिक्षा, स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संबंध को भी रेखांकित किया। शैक्षणिक संस्थान केवल पाठ्यक्रम आधारित ज्ञान देने वाले केंद्र नहीं होते, बल्कि विद्यार्थियों के सामाजिक दृष्टिकोण और जिम्मेदार नागरिक व्यवहार को विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब विद्यार्थियों को स्वच्छता, पर्यावरण और सामाजिक सेवा से जुड़ी गतिविधियों में प्रत्यक्ष भागीदारी का अवसर मिलता है तो वे इन विषयों को व्यवहारिक रूप से समझ पाते हैं।
कार्यक्रम के दौरान नए अकादमिक ब्लॉक और नवीनीकृत पुस्तकालय का दौरा भी इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा रहा। बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं के साथ स्वच्छ और हरित परिसर विद्यार्थियों के लिए सकारात्मक अध्ययन वातावरण तैयार करता है। आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में भौतिक अधोसंरचना के साथ स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व को भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
स्वच्छता को दैनिक व्यवहार बनाने पर जोर
स्वच्छता अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि स्वच्छता गतिविधियां केवल विशेष अवसरों तक सीमित न रहें, बल्कि दैनिक जीवन का हिस्सा बनें। सार्वजनिक स्थानों पर कचरा न डालना, कचरे का उचित निपटान करना, आसपास के वातावरण को साफ रखना और उपलब्ध स्वच्छता सुविधाओं का जिम्मेदारी से उपयोग करना नागरिक व्यवहार के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ जैसे कार्यक्रम इस दिशा में जागरूकता बढ़ाने का माध्यम बनते हैं। विशेष रूप से युवाओं और विद्यार्थियों की भागीदारी से इन अभियानों का संदेश व्यापक सामाजिक स्तर तक पहुंच सकता है। आईआईएमसी जैसे संस्थान में आयोजित कार्यक्रम से यह संदेश भी सामने आया कि मीडिया शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के बीच मजबूत संबंध है। विद्यार्थी भविष्य में विभिन्न संचार माध्यमों के जरिए स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर जनजागरूकता बढ़ाने में योगदान कर सकते हैं।
संस्थागत विकास के साथ सामाजिक सरोकार
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन का आईआईएमसी में कार्यक्रम केवल स्वच्छता गतिविधियों तक सीमित नहीं रहा। श्रमदान और पौधरोपण के साथ नए अकादमिक ब्लॉक तथा नवीनीकृत पुस्तकालय का अवलोकन संस्थान के विकास और सामाजिक सरोकारों के समन्वय को सामने लाता है। शैक्षणिक संस्थानों के विकास में भवन, कक्षाओं और पुस्तकालय जैसी सुविधाओं के साथ परिसर की स्वच्छता और पर्यावरणीय गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण होती है।
कार्यक्रम में स्वच्छता शपथ, श्रमदान और पौधरोपण के माध्यम से सामूहिक भागीदारी का संदेश दिया गया। वहीं नए अकादमिक ब्लॉक और पुस्तकालय के अवलोकन ने संस्थान में शैक्षणिक सुविधाओं के विकास की दिशा को भी रेखांकित किया। इस प्रकार कार्यक्रम में स्वच्छता, पर्यावरण, शिक्षा और संस्थागत विकास के विभिन्न पहलू एक साथ दिखाई दिए।

युवाओं को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का प्रयास
देश की बड़ी युवा आबादी को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के अभियानों से जोड़ना दीर्घकालीन दृष्टि से महत्वपूर्ण है। विद्यार्थी जब अपने शिक्षण संस्थान में स्वच्छता और पौधरोपण जैसी गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं तो उसका प्रभाव उनके व्यक्तिगत व्यवहार पर भी पड़ सकता है। वे अपने परिवार और सामाजिक परिवेश में भी इन गतिविधियों के महत्व को साझा कर सकते हैं।
आईआईएमसी के विद्यार्थियों के लिए ऐसे कार्यक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि मीडिया और संचार क्षेत्र में कार्य करने वाले युवाओं की सामाजिक जागरूकता उनके भविष्य के पेशेवर कार्यों में भी दिखाई देती है। जनसंचार के माध्यम से किसी भी सामाजिक संदेश को व्यापक जनसमुदाय तक पहुंचाया जा सकता है। स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक जिम्मेदारी जैसे विषयों पर तथ्यपरक और जिम्मेदार संचार समाज में जागरूकता बढ़ाने में उपयोगी हो सकता है।
स्वच्छ परिसर, बेहतर वातावरण और जिम्मेदार नागरिकता
कार्यक्रम का एक प्रमुख संदेश यह रहा कि स्वच्छता किसी एक दिन या अभियान तक सीमित विषय नहीं है। स्वच्छ परिसर के लिए नियमित सफाई, कचरा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सहभागिता आवश्यक है। संस्थानों में स्वच्छता की व्यवस्था जितनी प्रभावी होगी, विद्यार्थियों और कर्मचारियों के लिए वातावरण उतना ही बेहतर होगा।
‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ जैसी पहल नागरिकों को यह अनुभव कराती है कि सामूहिक प्रयास से सार्वजनिक स्थानों में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। इसी तरह ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी पहल पर्यावरण संरक्षण को भावनात्मक और सामाजिक सहभागिता से जोड़ती है। दोनों गतिविधियों का उद्देश्य लोगों को अपने आसपास के वातावरण के प्रति जिम्मेदार बनाने की दिशा में प्रेरित करना है।
आईआईएमसी में आयोजित ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन की सहभागिता ने स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश सामने रखा। स्वच्छता शपथ, श्रमदान और पौधरोपण के साथ नए अकादमिक ब्लॉक तथा नवीनीकृत पुस्तकालय का अवलोकन कार्यक्रम के विभिन्न आयामों को एक साथ जोड़ता है। कार्यक्रम ने यह रेखांकित किया कि स्वच्छ और हरित परिसर, बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं तथा जागरूक नागरिक सहभागिता मिलकर संस्थागत विकास को व्यापक स्वरूप प्रदान करते हैं।









