
सही जानकारी, सही कदम—योजना से जुड़ें हर पात्र जन
नई दिल्ली। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और महिला सशक्तीकरण को लेकर देशभर में चलाए जा रहे अभियानों के बीच ‘सही जानकारी, सही कदम—योजना से जुड़ें हर पात्र जन’ का संदेश विशेष महत्व रखता है। प्रस्तुत जागरूकता सामग्री में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान महिलाओं और परिवारों तक प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना यानी PMMVY की जानकारी पहुंचाने पर जोर दिया गया है। इसका मूल संदेश बेहद सरल है—पहले पात्रता जानें, फिर योजना से मिलने वाला लाभ समझें और उसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से आवेदन करें। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना एक मातृत्व लाभ योजना है, जिसे पूरे देश में 1 जनवरी 2017 से लागू किया गया था। योजना का उद्देश्य गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं को मातृत्व अवधि में आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं के प्रति जागरूकता और स्वास्थ्य-सेवा लेने के व्यवहार को बढ़ावा देना है। वर्तमान व्यवस्था में पात्र लाभार्थियों को पहले बच्चे के लिए ₹5,000 की सहायता दो किस्तों में तथा पात्रता पूरी होने पर दूसरे बच्चे के रूप में लड़की होने की स्थिति में ₹6,000 की सहायता एक किस्त में दी जाती है। यह राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी DBT के माध्यम से लाभार्थी के बैंक अथवा डाकघर खाते में पहुंचाई जाती है। इस प्रकार योजना का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि गर्भावस्था के दौरान आवश्यक जांच, संस्थागत स्वास्थ्य सेवाओं, प्रसव के बाद बच्चे के टीकाकरण और मां-बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य से जुड़ी प्रक्रियाओं को प्रोत्साहित करना भी है। जागरूकता सामग्री में इसलिए तीन आसान कदमों—‘पात्रता जानें’, ‘लाभ समझें’ और ‘आवेदन करें’—का संदेश दिया गया है, ताकि पात्र परिवार योजना को लेकर भ्रम या अधूरी जानकारी के कारण संभावित लाभ से वंचित न रहें। राष्ट्रीय पोषण माह के व्यापक उद्देश्य से भी यह संदेश जुड़ता है, क्योंकि मातृ पोषण, गर्भावस्था के दौरान देखभाल, शिशु पोषण और शुरुआती जीवन की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पोषण संबंधी अभियानों में महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है। सरकार द्वारा 2026 के 9वें राष्ट्रीय पोषण माह के लिए ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ को केंद्रीय विषय बनाया गया है और अभियान में आहार विविधता, पर्याप्त प्रोटीन, ताजा पका भोजन, सामुदायिक भागीदारी, प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास तथा मातृ पोषण जैसे विषयों पर जोर दिया गया है। इसलिए योजना की जानकारी को केवल एक वित्तीय सहायता के रूप में देखने के बजाय मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की व्यापक व्यवस्था के एक हिस्से के रूप में समझना अधिक उपयोगी है। सही जानकारी का पहला कदम यही है कि महिला यह जाने कि योजना किन परिस्थितियों में लागू होती है, उसे कौन-कौन से दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है, आवेदन कहां किया जा सकता है और किस चरण पर कौन-सी शर्त पूरी करनी होती है।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की पात्रता को लेकर आधिकारिक जानकारी में सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित तथा कमजोर वर्गों की महिलाओं को प्रमुखता दी गई है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की आधिकारिक जानकारी के अनुसार पात्रता के लिए निर्धारित श्रेणियों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाएं, 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाली महिलाएं, बीपीएल राशन कार्ड धारक महिलाएं, आयुष्मान भारत के प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की लाभार्थी महिलाएं, ई-श्रम कार्ड धारक महिलाएं, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की लाभार्थी महिला किसान, मनरेगा जॉब कार्ड रखने वाली महिलाएं, ₹8 लाख से कम वार्षिक पारिवारिक आय वाली महिलाएं, गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ता/सहायिका/आशा कार्यकर्ता तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राशन कार्ड रखने वाली महिलाएं शामिल हैं। इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित अन्य श्रेणियां भी समय-समय पर पात्रता के दायरे में आ सकती हैं। इसका अर्थ यह है कि किसी महिला को केवल यह मानकर योजना से बाहर नहीं हो जाना चाहिए कि उसे सरकारी योजना की जानकारी नहीं है या वह स्वयं ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकती। पात्रता की वास्तविक स्थिति की जानकारी नजदीकी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता अथवा संबंधित सरकारी माध्यम से ली जा सकती है। आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से पात्र महिला स्वयं भी आवेदन कर सकती है और आवश्यकता होने पर आंगनवाड़ी अथवा आशा कार्यकर्ता ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में सहायता कर सकती हैं। योजना के अंतर्गत पहले बच्चे के लिए कुल ₹5,000 का लाभ दो किस्तों में निर्धारित है। पहली किस्त ₹3,000 की है, जिसके लिए गर्भावस्था का पंजीकरण और कम से कम दो एएनसी यानी प्रसवपूर्व जांच पूरी करना आवश्यक है। दूसरी किस्त ₹2,000 की है, जिसके लिए बच्चे का जन्म पंजीकृत होना और बच्चे द्वारा 14 सप्ताह तक के प्रथम चक्र का टीकाकरण पूरा करना आवश्यक है। दूसरे बच्चे के लड़की होने की स्थिति में पात्र लाभार्थी को ₹6,000 की एकमुश्त सहायता दी जाती है, जिसके लिए गर्भावस्था का पंजीकरण, कम से कम दो एएनसी, जन्म पंजीकरण और 14 सप्ताह का पहला टीकाकरण चक्र पूरा होना निर्धारित है। इन शर्तों को समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि योजना का लाभ केवल आवेदन भर देने से स्वतः नहीं मिलता, बल्कि संबंधित चरणों को पूरा करना भी आवश्यक होता है। यही कारण है कि जागरूकता अभियान में ‘लाभ समझें’ को ‘पात्रता जानें’ के बाद रखा गया है। जब लाभार्थी को पता होगा कि पहली और दूसरी किस्त के लिए कौन-सी प्रक्रिया पूरी करनी है, तब वह गर्भावस्था के पंजीकरण, प्रसवपूर्व जांच, जन्म पंजीकरण और टीकाकरण जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को समय पर पूरा करने के लिए अधिक सजग रह सकेगी। इस तरह योजना आर्थिक सहायता और स्वास्थ्य सेवा के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करती है। योजना का उद्देश्य भी आंशिक वेतन क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराना है, ताकि महिला प्रसव से पहले और बाद में पर्याप्त आराम कर सके और मां तथा बच्चे के स्वास्थ्य पर ध्यान दे सके।
योजना से जुड़ा तीसरा महत्वपूर्ण कदम है—‘आवेदन करें’। सरकार ने PMMVY के लिए ऑनलाइन व्यवस्था उपलब्ध कराई है, जिससे पात्र महिलाएं आवेदन प्रक्रिया में भाग ले सकती हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार पात्र महिला स्वयं PMMVY पोर्टल पर आवेदन कर सकती है और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अथवा आशा कार्यकर्ता भी पात्र लाभार्थी का ऑनलाइन आवेदन भरने में सहायता कर सकती हैं। आवेदन के दौरान आधार से संबंधित विवरण, आधार से जुड़े बैंक अथवा डाकघर खाते की जानकारी, मोबाइल नंबर, मातृ एवं शिशु सुरक्षा कार्ड अथवा संबंधित स्वास्थ्य रिकॉर्ड, गर्भावस्था और एएनसी से जुड़े विवरण, बच्चे के जन्म का प्रमाण तथा टीकाकरण संबंधी जानकारी जैसी आवश्यक सूचनाएं मांगी जा सकती हैं। साथ ही पात्रता सिद्ध करने के लिए संबंधित दस्तावेजों में से उपयुक्त दस्तावेज की आवश्यकता हो सकती है। आधिकारिक व्यवस्था में लाभार्थी के पति का आधार अनिवार्य नहीं रखा गया है। यह तथ्य भी जागरूकता के लिहाज से महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई बार योजनाओं को लेकर अधूरी अथवा पुरानी जानकारी लोगों के बीच बनी रहती है और उसके कारण पात्र लाभार्थी आवेदन करने से ही पीछे हट जाते हैं। योजना में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण की व्यवस्था होने के कारण बैंक अथवा डाकघर खाते की जानकारी सही होना महत्वपूर्ण है। आवेदन स्वीकृत होने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार राशि आधार आधारित खाते में DBT के माध्यम से भेजी जाती है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार बच्चे के जन्म के बाद भी आवेदन की एक समयसीमा है और पात्र महिला 270 दिनों तक आवेदन कर सकती है, हालांकि दूसरे बच्चे के मामले में गर्भावस्था के दौरान पंजीकरण आवश्यक है। इसलिए लाभार्थियों के लिए सबसे उपयोगी संदेश यही है कि आवेदन को अनावश्यक रूप से अंतिम समय तक न टालें। गर्भावस्था का पंजीकरण, प्रसवपूर्व जांच और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं समय पर पूरी करने से योजना के निर्धारित लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया व्यवस्थित रहती है। आंगनवाड़ी केंद्र इस पूरी व्यवस्था में स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहां कार्यरत कर्मियों के माध्यम से पात्र महिलाओं तक जानकारी पहुंचाना, आवेदन प्रक्रिया में सहायता करना, आवश्यक दस्तावेजों के बारे में बताना और योजना की प्रगति की जानकारी उपलब्ध कराना संभव होता है। इसी कारण 2026 के राष्ट्रीय पोषण माह में आंगनवाड़ी केंद्रों को सामुदायिक पोषण और देखभाल के केंद्र में रखने पर विशेष जोर दिया गया है।
9वां राष्ट्रीय पोषण माह 2026 इसी व्यापक संदर्भ में मातृ एवं बाल पोषण के संदेश को घर-घर तक पहुंचाने का अवसर प्रदान कर रहा है। भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो के अनुसार 2026 के राष्ट्रीय पोषण माह का केंद्रीय विषय ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ है और इसका शुभारंभ 9 सितंबर 2026 को वाराणसी के रुद्राक्ष इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड कन्वेंशन सेंटर में किया गया। अभियान में पांच परस्पर जुड़े प्राथमिक क्षेत्रों पर जोर दिया गया है—आहार में विविधता और पर्याप्त प्रोटीन, पूरक पोषण कार्यक्रम के अंतर्गत ताजा एवं विविध पका हुआ भोजन, पोषण के लिए सामुदायिक स्वामित्व एवं जवाबदेही, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा में पोषण और संज्ञानात्मक विकास का संबंध तथा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के दस वर्ष पूरे होने के संदर्भ में मातृ पोषण और देखभाल पर जोर। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि साझा की गई जागरूकता सामग्री में 1 सितंबर से 8 अक्टूबर 2026 का उल्लेख दिखाई देता है, जबकि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय/पीआईबी की उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार 9वें राष्ट्रीय पोषण माह 2026 का शुभारंभ 9 सितंबर को हुआ और इसका अभियान काल 9 सितंबर से 8 अक्टूबर 2026 बताया गया है। इसलिए समाचार सामग्री में आधिकारिक तिथि को ही प्राथमिकता देना उचित होगा। राष्ट्रीय पोषण माह का उद्देश्य पोषण को केवल सरकारी कार्यक्रम न बनाकर जनभागीदारी से जोड़ना है। संतुलित भोजन, स्थानीय खाद्य पदार्थों का उपयोग, पर्याप्त प्रोटीन, बच्चों के लिए उपयुक्त पूरक आहार, गर्भवती महिलाओं की पोषण संबंधी जरूरतें, स्तनपान, स्वच्छता और नियमित स्वास्थ्य निगरानी जैसे विषय सीधे परिवारों के दैनिक जीवन से जुड़े हैं। मंत्रालय के अनुसार 2026 के अभियान में आहार विविधता के अंतर्गत अनाज एवं मिलेट्स, दालें, फल एवं सब्जियां, मेवे एवं बीज, दूध एवं दुग्ध उत्पाद तथा उपलब्ध स्रोतों से पर्याप्त प्रोटीन लेने की जानकारी पर जोर दिया जा रहा है। इसका सीधा संबंध इस बात से है कि किसी परिवार में पोषण को लेकर सही जानकारी कितनी है और वह जानकारी व्यवहार में कितनी उतरती है। केवल भोजन की मात्रा ही नहीं, बल्कि भोजन की गुणवत्ता और विविधता भी महत्वपूर्ण होती है। इसी तरह गर्भावस्था के दौरान महिला के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी, आवश्यक जांच और समय पर चिकित्सकीय परामर्श मां और बच्चे दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना इन स्वास्थ्य प्रक्रियाओं से जुड़ी शर्तों के माध्यम से पात्र महिलाओं को समय पर आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित करती है। इस दृष्टि से ‘सही जानकारी, सही कदम’ केवल प्रचार पंक्ति नहीं, बल्कि योजना के लाभार्थी तक सही सूचना पहुंचाने की आवश्यकता को रेखांकित करने वाला संदेश है।
मातृ एवं शिशु पोषण की चर्चा केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं हो सकती। गर्भावस्था से लेकर बच्चे के शुरुआती वर्षों तक का समय स्वास्थ्य और विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इसी वजह से पोषण संबंधी अभियानों में गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, बच्चों और परिवारों को एक साथ जागरूक करने की कोशिश की जाती है। राष्ट्रीय पोषण माह 2026 के बारे में केंद्र सरकार की जानकारी में भी शुरुआती जीवन, पोषण, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और विकास के बीच संबंध को महत्वपूर्ण विषय के रूप में रखा गया है। परिवारों के स्तर पर यह समझ विकसित करना जरूरी है कि गर्भवती महिला का पोषण, नियमित स्वास्थ्य जांच, आयरन-फोलिक एसिड सहित स्वास्थ्यकर्मी द्वारा सुझाए गए आवश्यक उपाय, सुरक्षित प्रसव, जन्म के बाद नवजात की देखभाल, समय पर टीकाकरण और उपयुक्त शिशु आहार—ये सभी एक-दूसरे से जुड़े हुए विषय हैं। सरकारी योजनाएं इन सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाने और जरूरतमंद परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने का माध्यम बनती हैं, लेकिन उनका प्रभाव तभी अधिक हो सकता है जब पात्र परिवार योजनाओं की जानकारी रखें और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करें। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का उद्देश्य भी महिला को मातृत्व अवधि में आर्थिक सहायता के साथ स्वास्थ्य संबंधी व्यवहार को प्रोत्साहित करना है। योजना के तहत मिलने वाली सहायता को महिला और बच्चे की आवश्यकताओं के संदर्भ में उपयोग करने की समझ भी परिवार में विकसित होनी चाहिए। यदि परिवार योजना की पात्रता और शर्तों को पहले से समझ लेता है तो दस्तावेज जुटाने, गर्भावस्था पंजीकरण, एएनसी कराने, बच्चे का जन्म पंजीकृत कराने और टीकाकरण पूरा कराने जैसी प्रक्रियाएं अधिक व्यवस्थित तरीके से पूरी की जा सकती हैं। आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ता इस संबंध में स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण सूचना माध्यम बन सकते हैं। गांव, कस्बे और शहरी बस्तियों में जहां डिजिटल जानकारी हर व्यक्ति तक समान रूप से नहीं पहुंच पाती, वहां सामुदायिक स्तर की जागरूकता गतिविधियां विशेष महत्व रखती हैं। महिलाओं को यह भी बताया जाना चाहिए कि किसी भी सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए केवल सोशल मीडिया पोस्ट या अनधिकृत व्यक्ति की जानकारी पर निर्भर न रहें, बल्कि आधिकारिक सरकारी स्रोत, आंगनवाड़ी केंद्र, आशा कार्यकर्ता अथवा संबंधित विभाग से पात्रता और दस्तावेजों की पुष्टि करें। इससे गलत जानकारी, भ्रम और अनावश्यक परेशानी से बचा जा सकता है। सही जानकारी के साथ उठाया गया एक छोटा कदम गर्भावस्था से संबंधित आवश्यक सेवाओं को समय पर प्राप्त करने में मदद कर सकता है।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में डिजिटल व्यवस्था के विस्तार ने आवेदन प्रक्रिया को भी पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित बनाने का प्रयास किया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार नागरिकों के लिए स्वयं पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध कराई गई है और PMMVY पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और आशा कार्यकर्ता भी पात्र महिलाओं की ओर से ऑनलाइन आवेदन भर सकती हैं। मोबाइल नंबर के माध्यम से आवेदन की स्थिति और भुगतान संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी बताई गई है। इसका उद्देश्य यह है कि लाभार्थी को आवेदन की स्थिति जानने के लिए बार-बार अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और योजना का लाभ अधिक पारदर्शी ढंग से उपलब्ध हो सके। हालांकि डिजिटल व्यवस्था के साथ यह भी जरूरी है कि ग्रामीण और कमजोर वर्ग की महिलाओं को डिजिटल प्रक्रिया समझने में सहायता मिले। जिन महिलाओं को ऑनलाइन आवेदन करना कठिन लगता है, उनके लिए आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं की सहायता महत्वपूर्ण हो जाती है। योजना के आवेदन से जुड़े दस्तावेजों में पात्रता प्रमाण, आधार, बैंक या डाकघर खाते से जुड़ी जानकारी, मोबाइल नंबर तथा गर्भावस्था, जन्म और टीकाकरण संबंधी रिकॉर्ड की आवश्यकता हो सकती है। इसलिए परिवारों को सलाह दी जा सकती है कि गर्भावस्था के दौरान संबंधित दस्तावेजों और स्वास्थ्य रिकॉर्ड को सुरक्षित रखें और आवश्यकता पड़ने पर समय पर उपलब्ध कराएं। किसी भी दस्तावेज की जानकारी में त्रुटि होने पर संबंधित आधिकारिक माध्यम से सुधार की प्रक्रिया के बारे में जानकारी लेना उचित है। इसी तरह बैंक खाता सक्रिय और सही विवरण वाला होना भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि योजना का भुगतान DBT के माध्यम से किया जाता है। योजना के लाभ को लेकर सबसे जरूरी बात यह है कि पात्रता और शर्तें आधिकारिक नियमों के अनुसार ही निर्धारित होती हैं। इसलिए किसी व्यक्ति, निजी एजेंट या सोशल मीडिया संदेश द्वारा बताई गई अतिरिक्त शर्त अथवा भुगतान की मांग पर भरोसा करने के बजाय सरकारी पोर्टल या संबंधित विभाग से सत्यापन किया जाना चाहिए। सरकारी योजना के नाम पर किसी भी प्रकार की अनधिकृत फीस मांगना या व्यक्तिगत बैंकिंग जानकारी का दुरुपयोग करना गंभीर विषय हो सकता है। लाभार्थियों को अपने दस्तावेज और बैंक संबंधी जानकारी सुरक्षित रखने की आवश्यकता है।
राष्ट्रीय पोषण माह का एक बड़ा उद्देश्य पोषण संबंधी जानकारी को घरों तक पहुंचाना है, लेकिन इसकी सफलता का आधार केवल सरकारी विभाग नहीं बल्कि समुदाय की भागीदारी भी है। ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ का संदेश इसी सामुदायिक स्वामित्व की भावना को सामने रखता है। आंगनवाड़ी केंद्र केवल बच्चों को पोषण संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराने का स्थान नहीं, बल्कि समुदाय में मातृ एवं बाल स्वास्थ्य, पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और जागरूकता से जुड़े संवाद का महत्वपूर्ण केंद्र भी है। यदि परिवार आंगनवाड़ी केंद्र से नियमित संपर्क बनाए रखते हैं, गर्भावस्था और बच्चों से संबंधित आवश्यक जानकारी साझा करते हैं तथा उपलब्ध सेवाओं की जानकारी लेते हैं तो योजनाओं की पहुंच बेहतर हो सकती है। इसी तरह पंचायत, स्थानीय जनप्रतिनिधि, महिला समूह, स्वयं सहायता समूह, स्कूल, स्वास्थ्यकर्मी और सामाजिक संगठन भी पोषण जागरूकता को मजबूत करने में सहयोग कर सकते हैं। पोषण की समस्या का समाधान केवल किसी एक विभाग के प्रयास से नहीं हो सकता, क्योंकि इसका संबंध भोजन, स्वास्थ्य, स्वच्छता, आय, शिक्षा, सामाजिक व्यवहार और परिवार की आदतों से है। राष्ट्रीय पोषण माह के 2026 संस्करण में भी इसी कारण आहार विविधता और पर्याप्त प्रोटीन के साथ सामुदायिक जवाबदेही तथा प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास को अभियान के महत्वपूर्ण हिस्सों में शामिल किया गया है। स्थानीय स्तर पर पोषण मेलों, रेसिपी प्रदर्शन, पोषण वाटिका के उत्पादों की जानकारी, स्थानीय खाद्य पदार्थों के उपयोग और परिवारों के साथ संवाद जैसी गतिविधियों के माध्यम से संदेश को व्यवहार तक ले जाने की कोशिश की जा रही है। इन गतिविधियों का उद्देश्य यह बताना है कि पौष्टिक भोजन हमेशा महंगा ही हो, ऐसा जरूरी नहीं; स्थानीय और उपलब्ध खाद्य पदार्थों की विविधता का सही उपयोग भी परिवार के भोजन को अधिक पौष्टिक बना सकता है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए भोजन और स्वास्थ्य देखभाल पर परिवार के सभी सदस्यों की जिम्मेदारी बनती है। महिला के स्वास्थ्य को केवल उसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी मानने के बजाय परिवार और समुदाय की साझी जिम्मेदारी के रूप में देखने की जरूरत है। यही सोच मातृ स्वास्थ्य और शिशु पोषण को मजबूत आधार प्रदान कर सकती है।
‘सही जानकारी, सही कदम—योजना से जुड़ें हर पात्र जन’ का संदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकारी योजनाओं की सफलता में जागरूकता एक बुनियादी भूमिका निभाती है। कोई भी पात्र महिला यदि योजना के बारे में जानकारी नहीं रखती तो उसके लिए लाभ तक पहुंच बनाना कठिन हो सकता है। वहीं सही पात्रता, सही दस्तावेज, सही समय पर पंजीकरण और आवश्यक स्वास्थ्य प्रक्रियाओं की जानकारी होने पर आवेदन प्रक्रिया अधिक सरल हो सकती है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत पात्रता की विभिन्न श्रेणियों को देखते हुए यह जरूरी है कि महिलाएं अपनी स्थिति के आधार पर पात्रता की जांच करें। योजना में सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए निर्धारित श्रेणियां हैं और पात्रता के लिए संबंधित प्रमाण उपलब्ध कराना पड़ सकता है। इसी प्रकार पहले बच्चे और दूसरे बच्चे के लिए लागू लाभों और शर्तों में अंतर को समझना भी आवश्यक है। पहले बच्चे के लिए ₹5,000 दो किस्तों में और दूसरे बच्चे के रूप में लड़की होने पर ₹6,000 की एक किस्त का प्रावधान आधिकारिक जानकारी में दिया गया है। इस जानकारी को स्पष्ट रूप से समझाने का उद्देश्य यही है कि पात्र परिवार आवेदन के समय किसी भ्रम का शिकार न हों। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि योजना के तहत भुगतान निर्धारित शर्तें पूरी होने और आवेदन की स्वीकृति के बाद ही होता है। किसी भी सरकारी योजना के लाभ की गारंटी के नाम पर निजी व्यक्ति को पैसे देने की आवश्यकता नहीं है। आधिकारिक पोर्टल और स्थानीय सरकारी कार्यकर्ता ही योजना से संबंधित जानकारी के विश्वसनीय माध्यम हैं। इसके अलावा महिलाओं को अपने बैंक खाते और मोबाइल नंबर से संबंधित जानकारी साझा करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। डिजिटल सेवाओं के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर सुरक्षा और व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। यदि किसी महिला को आवेदन प्रक्रिया में समस्या आती है तो वह अपने निकटतम आंगनवाड़ी केंद्र अथवा आशा कार्यकर्ता से सहायता ले सकती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विभागीय अधिकारी से संपर्क कर सकती है। इस प्रकार योजना का संदेश केवल ‘आवेदन करें’ तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘पहले समझें, फिर सही तरीके से आवेदन करें और अपनी पात्रता के अनुसार लाभ प्राप्त करें’ की दिशा में है।
राष्ट्रीय पोषण माह 2026 के संदर्भ में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का उल्लेख इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस वर्ष अभियान में योजना के दस वर्ष पूरे होने को भी रेखांकित किया जा रहा है। केंद्र सरकार के अनुसार PMMVY को 1 जनवरी 2017 से पूरे देश में लागू किया गया था और अब यह मातृत्व लाभ व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पिछले वर्षों में योजना के स्वरूप में बदलाव करते हुए दूसरे बच्चे के रूप में लड़की होने की स्थिति में भी लाभ का प्रावधान जोड़ा गया। यह व्यवस्था 1 अप्रैल 2022 से प्रभावी PMMVY 2.0 के तहत लागू हुई। योजना के उद्देश्य में महिला को प्रसव से पहले और बाद में आराम के लिए आंशिक वेतन क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराना तथा गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी व्यवहार को बढ़ावा देना शामिल है। इस दृष्टि से योजना को मातृ स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक सुरक्षा के व्यापक ढांचे के हिस्से के रूप में देखा जा सकता है। राष्ट्रीय पोषण माह में जब परिवारों को संतुलित और विविध भोजन, पर्याप्त प्रोटीन, स्वास्थ्य जांच और बच्चों की देखभाल के बारे में जानकारी दी जा रही है, तब मातृत्व लाभ योजना की जानकारी भी उसी संदेश को आगे बढ़ाती है। किसी भी परिवार के लिए गर्भावस्था का समय आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। यदि महिला कामकाजी है तो गर्भावस्था के दौरान काम से जुड़ी आय प्रभावित हो सकती है; यदि परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है तो पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े खर्च भी चुनौती बन सकते हैं। ऐसी परिस्थितियों में पात्र महिलाओं को उपलब्ध सरकारी सहायता की जानकारी होना उपयोगी है। योजना की सहायता को महिला और बच्चे के स्वास्थ्य से जुड़े खर्च तथा आवश्यक देखभाल के संदर्भ में उपयोग किया जा सकता है। साथ ही, यह समझना भी जरूरी है कि योजना की राशि अपने आप में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की सभी जरूरतों का समाधान नहीं है। नियमित स्वास्थ्य जांच, चिकित्सकीय सलाह, संतुलित भोजन, सुरक्षित प्रसव, टीकाकरण और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं का उपयोग भी समान रूप से आवश्यक है। इसीलिए योजना को स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ जोड़कर समझना अधिक उपयुक्त है।
जागरूकता सामग्री में दिखाई गई महिलाओं की तस्वीर और उसके साथ लिखा गया संदेश भी इसी सामाजिक भागीदारी की ओर संकेत करता है। आंगनवाड़ी केंद्र के आसपास महिलाओं के बीच संवाद की तस्वीर यह बताती है कि सरकारी योजनाओं की जानकारी केवल कार्यालयी भाषा में नहीं, बल्कि लोगों की समझ के अनुसार सरल तरीके से पहुंचाई जानी चाहिए। ‘पात्रता जानें → लाभ समझें → आवेदन करें’ जैसी तीन-चरणीय प्रस्तुति आम नागरिक के लिए जटिल योजना को समझने का आसान तरीका बनाती है। योजना संबंधी जानकारी को सरल भाषा में उपलब्ध कराना विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है जो पहली बार किसी सरकारी मातृत्व लाभ योजना से जुड़ रही हों। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता और स्वास्थ्यकर्मी स्थानीय स्तर पर इस जानकारी को व्यवहारिक रूप देने में मदद कर सकते हैं। उन्हें यह सुनिश्चित करना होता है कि पात्र महिला को योजना की शर्तें, आवश्यक दस्तावेज, आवेदन प्रक्रिया और स्वास्थ्य संबंधी जरूरी कदमों की जानकारी मिले। आधिकारिक जानकारी में भी आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को पात्र महिलाओं के ऑनलाइन आवेदन में सहायता करने की भूमिका दी गई है। इसके साथ ही योजना की निगरानी और आवेदन की स्थिति से संबंधित व्यवस्था भी डिजिटल माध्यमों के जरिए की गई है। यह व्यवस्था तभी प्रभावी हो सकती है जब अंतिम छोर तक जानकारी पहुंचे। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में इंटरनेट, डिजिटल साक्षरता या दस्तावेज संबंधी समस्याएं सामने आ सकती हैं। ऐसे में स्थानीय कार्यकर्ताओं और प्रशासन की सहायता आवश्यक हो जाती है। राष्ट्रीय पोषण माह इसी स्थानीय नेटवर्क को सक्रिय करने का एक अवसर प्रदान करता है। अभियान के दौरान होने वाले संवाद, पोषण मेले, आंगनवाड़ी गतिविधियां और सामुदायिक बैठकें महिलाओं तक योजना की जानकारी पहुंचाने का माध्यम बन सकती हैं। परिवारों को यह भी समझना होगा कि मां और बच्चे के स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं का लाभ लेने के लिए समय पर पंजीकरण और स्वास्थ्य सेवाओं का उपयोग जरूरी है। इसलिए जागरूकता का अंतिम उद्देश्य केवल आवेदन की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रति स्थायी व्यवहार विकसित करना होना चाहिए।
पोषण और स्वास्थ्य की बात करते समय पहले 1,000 दिनों का महत्व भी सामने आता है। गर्भधारण से लेकर बच्चे के शुरुआती जीवन तक का समय शारीरिक और मानसिक विकास की नींव रखने वाला चरण माना जाता है। राष्ट्रीय पोषण माह 2026 के आधिकारिक अभियान में भी मातृ पोषण और शुरुआती जीवन की देखभाल को महत्वपूर्ण विषय बनाया गया है। गर्भावस्था में पर्याप्त और विविध पोषण, नियमित जांच तथा स्वास्थ्यकर्मी की सलाह का पालन मां और भ्रूण के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। जन्म के बाद बच्चे के लिए स्तनपान, समय पर टीकाकरण, उचित पूरक आहार और विकास की निगरानी जैसे कदम महत्वपूर्ण हैं। इन्हीं विषयों को लेकर आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य व्यवस्था के माध्यम से परिवारों के साथ लगातार संवाद किया जाता है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में पहली किस्त के लिए गर्भावस्था पंजीकरण और कम से कम दो एएनसी तथा दूसरी किस्त के लिए जन्म पंजीकरण और 14 सप्ताह का प्रथम टीकाकरण चक्र पूरा करने की शर्तें इसी स्वास्थ्य-सेवा जुड़ाव को दर्शाती हैं। दूसरे बच्चे के रूप में लड़की होने पर ₹6,000 की सहायता के लिए भी गर्भावस्था पंजीकरण, कम से कम दो एएनसी, जन्म पंजीकरण और 14 सप्ताह का टीकाकरण चक्र पूरा करना निर्धारित है। इसलिए योजना के बारे में जानकारी देने के साथ यह भी बताना जरूरी है कि स्वास्थ्य सेवाओं को टालना नहीं चाहिए। यदि महिला को गर्भावस्था के दौरान किसी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या दिखाई देती है तो उसे सरकारी स्वास्थ्य केंद्र अथवा योग्य चिकित्सा विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। योजना का आर्थिक लाभ स्वास्थ्य सेवाओं का विकल्प नहीं है, बल्कि व्यापक मातृत्व देखभाल व्यवस्था के साथ जुड़ी सहायता है। यही अंतर लाभार्थियों और उनके परिवारों को स्पष्ट रूप से समझाया जाना चाहिए।
सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में जनभागीदारी का महत्व लगातार बढ़ रहा है। राष्ट्रीय पोषण माह की थीम ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ भी नागरिकों से सामुदायिक स्वामित्व और जवाबदेही की भावना विकसित करने का आह्वान करती है। इसका अर्थ यह है कि आंगनवाड़ी केंद्र की सेवाओं और पोषण कार्यक्रमों को केवल विभागीय गतिविधि मानने के बजाय समुदाय भी उसमें भागीदार बने। स्थानीय महिलाएं, माता-पिता, पंचायत प्रतिनिधि, स्वयं सहायता समूह और युवा मिलकर पोषण एवं स्वच्छता से संबंधित गतिविधियों को आगे बढ़ा सकते हैं। आंगनवाड़ी केंद्र में उपलब्ध सेवाओं के बारे में परिवारों को जानकारी होनी चाहिए और पात्र महिलाओं को प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना जैसी योजनाओं के लिए आवेदन करने में सहयोग मिलना चाहिए। यदि किसी पात्र महिला को आवेदन प्रक्रिया की जानकारी नहीं है तो समुदाय के लोग उसे संबंधित कार्यकर्ता से जोड़ सकते हैं। यदि दस्तावेजों से संबंधित कोई समस्या है तो उसे उचित सरकारी माध्यम से हल कराने की कोशिश की जा सकती है। इस तरह योजना का लाभ केवल व्यक्तिगत स्तर पर नहीं, बल्कि सामुदायिक स्वास्थ्य के स्तर पर भी प्रभाव डाल सकता है। पोषण संबंधी व्यवहार में बदलाव धीरे-धीरे आता है और इसके लिए निरंतर संवाद जरूरी है। राष्ट्रीय पोषण माह जैसे अभियान इसी निरंतर संवाद को गति देते हैं। इस वर्ष के अभियान में ताजा और विविध पके भोजन, स्थानीय खाद्य पदार्थ, प्रोटीन और आहार विविधता पर विशेष जोर दिया गया है। परिवारों को अपनी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। बच्चों के भोजन में विविधता, गर्भवती महिला के लिए पर्याप्त पोषण और स्तनपान कराने वाली मां के स्वास्थ्य पर ध्यान देने से परिवार के स्वास्थ्य की समग्र स्थिति बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
‘सही जानकारी, सही कदम’ का अर्थ यह भी है कि सरकारी योजनाओं की जानकारी लेते समय आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता दी जाए। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की आधिकारिक जानकारी महिला एवं बाल विकास मंत्रालय तथा सावित्रीबाई फुले राष्ट्रीय महिला एवं बाल विकास संस्थान की वेबसाइट पर उपलब्ध है। योजना के लिए ऑनलाइन पोर्टल भी उपलब्ध है और आवेदन प्रक्रिया में आंगनवाड़ी तथा आशा कार्यकर्ता सहायता कर सकते हैं। लाभार्थियों को अपनी पात्रता के अनुसार आवश्यक प्रमाण और दस्तावेज तैयार रखने चाहिए। आवेदन के बाद प्रक्रिया की स्थिति की जानकारी उपलब्ध माध्यमों से ली जा सकती है। किसी भी व्यक्ति द्वारा योजना का लाभ दिलाने के नाम पर अनधिकृत शुल्क मांगने की स्थिति में सावधानी बरतना जरूरी है। बैंक खाते, आधार, मोबाइल ओटीपी और अन्य व्यक्तिगत जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को साझा नहीं करनी चाहिए। सरकारी योजना का सही लाभ लेने के लिए पारदर्शी और आधिकारिक प्रक्रिया का पालन करना ही सुरक्षित तरीका है। योजना की जानकारी में यदि कहीं पुराना नियम और नया नियम अलग-अलग दिखाई दे तो संबंधित विभाग के नवीनतम निर्देश को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उदाहरण के तौर पर PMMVY में समय के साथ बदलाव हुए हैं और PMMVY 2.0 में दूसरे बच्चे के रूप में लड़की होने की स्थिति में लाभ जोड़ा गया है तथा पति का आधार अनिवार्य नहीं रखा गया है। इसलिए पुरानी जानकारी पर निर्भर रहने के बजाय वर्तमान आधिकारिक जानकारी देखना महत्वपूर्ण है।
राष्ट्रीय पोषण माह 2026 के दौरान प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की जानकारी को अधिक व्यापक रूप से पहुंचाने का उद्देश्य इसी जागरूकता को मजबूत करना है। यदि एक पात्र महिला अपनी पात्रता समझती है, योजना के लाभ की जानकारी प्राप्त करती है और समय पर आवेदन करती है, तो वह सरकारी सहायता की प्रक्रिया से जुड़ सकती है। यदि परिवार गर्भावस्था के दौरान आवश्यक स्वास्थ्य जांच कराता है, बच्चे का जन्म पंजीकृत कराता है और समय पर टीकाकरण पूरा कराता है, तो यह केवल योजना के लाभ से जुड़ी शर्तें पूरी करना नहीं, बल्कि मां और बच्चे के स्वास्थ्य की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण कदम है। योजना के माध्यम से आर्थिक सहायता, स्वास्थ्य सेवाओं और जागरूकता को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। राष्ट्रीय पोषण माह इस प्रयास को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने का अवसर देता है। 2026 का अभियान आंगनवाड़ी केंद्रों को पोषण, देखभाल और प्रारंभिक बाल विकास के केंद्र के रूप में सामने रखता है तथा नागरिकों से उनकी जिम्मेदारी साझा करने का संदेश देता है। ऐसे में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में परिवारों, महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण है। पोषण केवल भोजन का विषय नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, उत्पादकता और आने वाली पीढ़ियों के विकास से जुड़ा विषय है। मातृ पोषण में सुधार का प्रभाव बच्चे के स्वास्थ्य और विकास पर भी पड़ता है। इसलिए गर्भावस्था से जुड़े प्रत्येक परिवार को उपलब्ध सरकारी सेवाओं और योजनाओं की जानकारी होनी चाहिए। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की जानकारी इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा है। ‘पात्रता जानें, लाभ समझें और आवेदन करें’ का सरल संदेश यदि हर पात्र महिला तक पहुंचता है तो योजना की पहुंच बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
अंततः ‘सही जानकारी, सही कदम—योजना से जुड़ें हर पात्र जन’ केवल एक जागरूकता संदेश नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं को पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया का सार प्रस्तुत करता है। योजना की पात्रता को समझना पहला कदम है, क्योंकि हर व्यक्ति को अपनी स्थिति के अनुसार यह देखना होता है कि वह निर्धारित श्रेणी में आती है या नहीं। दूसरा कदम योजना के वास्तविक लाभ और शर्तों को समझना है, ताकि आवेदन करते समय किसी प्रकार का भ्रम न रहे। तीसरा कदम निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से आवेदन करना और आवश्यक स्वास्थ्य एवं दस्तावेज संबंधी प्रक्रियाओं को समय पर पूरा करना है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत पहले बच्चे के लिए ₹5,000 और दूसरे बच्चे के रूप में लड़की होने की स्थिति में पात्र लाभार्थी के लिए ₹6,000 की सहायता का प्रावधान है। राशि DBT के माध्यम से लाभार्थी के बैंक या डाकघर खाते में पहुंचाई जाती है।आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ता पात्र महिलाओं को आवेदन में सहायता कर सकते हैं। वहीं राष्ट्रीय पोषण माह 2026 के माध्यम से आहार विविधता, पर्याप्त प्रोटीन, मातृ पोषण, बाल पोषण, प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास और सामुदायिक भागीदारी पर जोर दिया जा रहा है। इसलिए इस अभियान का संदेश घर-घर तक पहुंचना आवश्यक है। किसी महिला को यदि योजना की जानकारी नहीं है तो उसे जानकारी दी जाए, पात्रता स्पष्ट न हो तो आधिकारिक माध्यम से पात्रता जांची जाए, आवेदन में कठिनाई हो तो आंगनवाड़ी या आशा कार्यकर्ता की सहायता ली जाए और लाभ से संबंधित किसी भी भ्रम की स्थिति में सरकारी स्रोत से पुष्टि की जाए। यही जागरूकता योजनाओं को कागज से वास्तविक लाभ तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बन सकती है। सही जानकारी से सही निर्णय, सही समय पर सही कदम और पात्र व्यक्ति तक सरकारी सहायता—यही ‘सही जानकारी, सही कदम’ का मूल संदेश है। राष्ट्रीय पोषण माह के अवसर पर यह संकल्प और मजबूत किया जा सकता है कि कोई भी पात्र महिला केवल जानकारी के अभाव में मातृत्व लाभ से वंचित न रहे और हर परिवार मां तथा बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षित भविष्य के लिए उपलब्ध सेवाओं का जागरूकता के साथ उपयोग करे।