
शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने पर तत्काल कार्रवाई के आदेश, बिना जवाब शिकायत आगे बढ़ाने वाले एल-1 अधिकारियों पर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश
भोपाल/रीवा। मध्यप्रदेश में आमजन की शिकायतों के त्वरित और संतुष्टिपूर्ण निराकरण को लेकर शासन ने अधिकारियों की जवाबदेही और बढ़ाने के संकेत दिए हैं। मुख्य सचिव श्री अशोक वर्णवाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टरों के साथ सीएम हेल्पलाइन में लंबित शिकायतों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शिकायतों को केवल एक स्तर से दूसरे स्तर तक भेजना समाधान नहीं है, बल्कि शिकायतकर्ता की वास्तविक समस्या का निराकरण करना प्राथमिक जिम्मेदारी है। समीक्षा के दौरान विशेष रूप से 100 दिवस से अधिक समय से लंबित शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि यदि सीएम हेल्पलाइन में किसी शासकीय भूमि पर अतिक्रमण से संबंधित शिकायत प्राप्त होती है तो उसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की जाए और शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जिन मामलों में एल-1 स्तर के अधिकारी शिकायत का समुचित जवाब दिए बिना उसे एल-2 स्तर की ओर आगे बढ़ा देते हैं, ऐसे अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए प्रभावी कार्रवाई की जाए। सीएम हेल्पलाइन की व्यवस्था का उद्देश्य नागरिकों की शिकायतों को संबंधित विभाग और अधिकारी तक पहुंचाकर उनका समाधान कराना है, इसलिए शिकायतों को केवल आगे बढ़ा देना अथवा औपचारिक जवाब देकर बंद करने का प्रयास व्यवस्था की मूल भावना के अनुरूप नहीं माना जा सकता। मुख्य सचिव की समीक्षा में इसी बात पर जोर दिया गया कि शिकायतों का निराकरण ऐसा हो जिससे नागरिक को वास्तविक राहत मिले और उसे बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। इससे पहले भी मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के दौरान मुख्य सचिव ने सीएम हेल्पलाइन, जनसुनवाई और लोक सेवा गारंटी से जुड़े लंबित मामलों के समयबद्ध तथा संतुष्टिपूर्ण निराकरण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। जुलाई में दिए गए निर्देशों के अनुसार मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के दौरान अधिकारी क्षेत्र में जाकर लंबित शिकायतों और स्थानीय समस्याओं की समीक्षा करने वाले हैं।
मुख्य सचिव ने समीक्षा के दौरान विभागवार लंबित शिकायतों की स्थिति पर भी गंभीरता दिखाई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रदेश में महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस विभाग, राजस्व विभाग और जनजातीय कार्य विभाग से संबंधित शिकायतों का एक बड़ा हिस्सा अभी भी निराकरण की प्रतीक्षा में है। मुख्य सचिव ने फील्ड स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि 100 दिवस से अधिक पुरानी शिकायतों का लंबित रहना यह दर्शाता है कि संबंधित क्षेत्रीय अमला समस्याओं के समाधान को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दे रहा है। उन्होंने अधिकारियों से सक्रिय होकर काम करने तथा शिकायत प्राप्त होते ही उसके तथ्यों की जांच कर समाधान की दिशा में कार्रवाई करने को कहा। विशेष रूप से एल-1 अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे शिकायत का परीक्षण कर समाधानकारक जवाब प्रस्तुत करें। यदि शिकायत ऐसी है जिसे नियमानुसार बंद किया जा सकता है तो उसे अनावश्यक रूप से लंबित रखने के बजाय प्राथमिकता से फोर्स क्लोज किया जाए। वहीं जिन मामलों में वास्तविक कार्रवाई आवश्यक है, उनमें संबंधित विभागीय अधिकारी मौके की स्थिति का परीक्षण कर शिकायतकर्ता को वास्तविक समाधान उपलब्ध कराएं। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि शिकायतों की संख्या कम करने के लिए केवल आंकड़ों पर ध्यान न दिया जाए, बल्कि शिकायत के मूल कारण तक पहुंचा जाए। सितंबर में भी मुख्य सचिव द्वारा सीएम हेल्पलाइन की निगरानी को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों को जिलों में जाकर वास्तविक स्थिति देखने और जरूरत पड़ने पर शिकायतकर्ताओं से सीधे बात करने के निर्देश दिए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। उस समीक्षा में अधिकारियों को शिकायतकर्ता से बातचीत कर यह जानने पर जोर दिया गया था कि उसे वास्तव में समाधान मिला है या नहीं। इस दृष्टि से वर्तमान समीक्षा में दिए गए निर्देश प्रशासनिक व्यवस्था में शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निराकरण और जवाबदेही पर केंद्रित दिखाई देते हैं।
बैठक में मुख्य सचिव ने सभी कलेक्टरों को आगामी एक माह के भीतर जिलेवार समीक्षा करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिला प्रशासन को यह पता लगाना चाहिए कि सीएम हेल्पलाइन में सबसे अधिक शिकायतें किस विषय से संबंधित आ रही हैं और वे शिकायतें किन क्षेत्रों से अधिक प्राप्त हो रही हैं। जिन विषयों और क्षेत्रों में शिकायतों की संख्या अधिक है, वहां जिला प्रशासन को विशेष रूप से फोकस करना चाहिए। इसका उद्देश्य केवल पुरानी शिकायतों का निपटारा करना नहीं, बल्कि ऐसी परिस्थितियों की पहचान करना भी है जिनके कारण बार-बार एक ही प्रकार की शिकायतें सामने आ रही हैं। यदि किसी क्षेत्र से लगातार राजस्व संबंधी शिकायतें आती हैं तो वहां संबंधित राजस्व अमले की कार्यप्रणाली की समीक्षा की आवश्यकता हो सकती है। इसी प्रकार यदि किसी क्षेत्र से पुलिस, महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य या अन्य विभाग से जुड़ी शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं तो उसके कारणों की पहचान कर स्थानीय स्तर पर सुधारात्मक कदम उठाने की जरूरत होगी। मुख्य सचिव ने इस बात पर भी नाराजगी व्यक्त की कि कई मामलों में विभागीय अधिकारी शिकायतकर्ता की समस्या का समाधान करने के बजाय उसे अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर लगवाते हैं और कई बार शिकायत को यह कहते हुए कार्यक्षेत्र से बाहर कर देते हैं कि मामला उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। निर्देश दिया गया कि ऐसी कार्यशैली से बचा जाए और नागरिक को समस्या के समाधान के लिए विभागों के बीच भटकने के लिए मजबूर न किया जाए। यदि शिकायत किसी दूसरे विभाग अथवा अधिकारी के अधिकार क्षेत्र से संबंधित है तो उसे उचित माध्यम से संबंधित स्तर तक पहुंचाने और उसकी निगरानी करने की जिम्मेदारी प्रशासनिक स्तर पर तय होनी चाहिए। मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान से संबंधित पूर्व निर्देशों में भी आमजन से सीधे संवाद, लंबित प्रकरणों के निराकरण और सरकारी सेवाओं को नागरिकों तक सहजता से पहुंचाने पर जोर दिया गया है।
रीवा जिले की स्थिति पर भी विशेष समीक्षा हुई, जहां 100 दिवस से अधिक समय से लंबित सीएम हेल्पलाइन शिकायतों की संख्या 4,755 बताई गई। मुख्य सचिव ने जिले की शिकायतों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर श्री नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी को भू-अर्जन के मुआवजे से संबंधित सभी प्रकरणों का एक सप्ताह में निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वहीं पुलिस विभाग से संबंधित शिकायतों पर पुलिस अधीक्षक डॉ. गुरकरन सिंह को विशेष निर्देश दिए गए। समीक्षा में यह बात सामने आई कि रीवा जिले से पुलिस विभाग से संबंधित ऐसी शिकायतें अधिक संख्या में आ रही हैं, जिनमें पक्षकारों पर समझौते अथवा राजीनामे के लिए दबाव बनाए जाने की बात कही गई है। मुख्य सचिव ने ऐसे मामलों का तत्काल प्रभावी और शिकायतकर्ता की संतुष्टि के अनुरूप निराकरण करने के निर्देश दिए। रीवा जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग से संबंधित मातृ वंदना योजना, गृह विभाग से संबंधित आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी न होने, पक्षकारों पर समझौते के लिए दबाव डालने, एफआईआर दर्ज न करने अथवा उचित धाराओं में एफआईआर दर्ज न करने तथा राजस्व विभाग से संबंधित प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के पंजीयन और राशि के भुगतान जैसी शिकायतें प्रमुख रूप से सामने आईं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 100 दिवस से अधिक समय से लंबित शिकायतों में महिला एवं बाल विकास विभाग से संबंधित 656, गृह विभाग से संबंधित 292 तथा राजस्व विभाग से संबंधित 264 शिकायतें लंबित थीं। इन आंकड़ों को देखते हुए मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों से शिकायतों के मूल कारणों पर ध्यान देने और समयबद्ध कार्रवाई करने को कहा। खासतौर पर राजस्व और पुलिस विभाग से संबंधित शिकायतों का सीधा संबंध नागरिकों के रोजमर्रा के अधिकारों और प्रशासनिक सेवाओं से होता है, इसलिए ऐसे मामलों में लंबित स्थिति को कम करने के लिए स्थानीय स्तर पर नियमित समीक्षा जरूरी बताई गई।
शासकीय भूमि पर अतिक्रमण से संबंधित शिकायतों को लेकर मुख्य सचिव का निर्देश भी समीक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। सीएम हेल्पलाइन में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की शिकायत प्राप्त होने पर जिला प्रशासन को तत्काल संज्ञान लेकर कार्रवाई करने को कहा गया है। ऐसे मामलों में शिकायत की वास्तविक स्थिति का परीक्षण, संबंधित राजस्व रिकॉर्ड की जांच, स्थल निरीक्षण और नियमानुसार कार्रवाई जैसे कदम आवश्यक हो सकते हैं। शासकीय भूमि सार्वजनिक उद्देश्य के लिए निर्धारित होती है, इसलिए उस पर अनधिकृत कब्जे की शिकायतों को लंबित रखने के बजाय निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई किए जाने की अपेक्षा रहती है। मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को यह सुनिश्चित करने को कहा कि इस प्रकार की शिकायतों को केवल औपचारिक उत्तर देकर समाप्त न किया जाए। यदि शिकायत सही पाई जाती है तो नियमानुसार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाए और शिकायतकर्ता को कार्रवाई की जानकारी दी जाए। दूसरी ओर यदि जांच में शिकायत के तथ्य सही नहीं पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी को दस्तावेजों और जांच के आधार पर स्पष्ट जवाब प्रस्तुत करना चाहिए। इससे शिकायतकर्ता को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सकेगी और सीएम हेल्पलाइन के आंकड़ों में भी केवल औपचारिक निपटारे के बजाय तथ्यात्मक निराकरण दर्ज होगा। प्रशासनिक शिकायत निवारण व्यवस्था में पारदर्शिता के लिए यह आवश्यक है कि शिकायत की जांच और उसके आधार पर की गई कार्रवाई का रिकॉर्ड उपलब्ध रहे। मुख्य सचिव द्वारा एल-1 अधिकारियों पर कार्रवाई की चेतावनी भी इसी जवाबदेही से जुड़ी है। यदि एल-1 स्तर पर अधिकारी शिकायत को पढ़े और समझे बिना केवल अगले स्तर पर भेज देता है, तो शिकायत का समाधान आगे भी लंबित हो सकता है। इसलिए एल-1 स्तर को शिकायत निवारण की पहली महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के रूप में देखा जा रहा है।
रीवा जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग से संबंधित 656 लंबित शिकायतों का मुद्दा भी समीक्षा में सामने आया। इनमें मातृ वंदना योजना से संबंधित शिकायतें शामिल थीं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना जैसी हितग्राहीमूलक योजनाओं में पात्र महिलाओं को समय पर लाभ उपलब्ध कराना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। यदि पंजीयन, दस्तावेज, भुगतान अथवा पात्रता से संबंधित कोई समस्या आती है तो उसका परीक्षण कर समाधान किया जाना आवश्यक है। इसी तरह प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से जुड़े पंजीयन और राशि भुगतान की शिकायतें भी राजस्व विभाग के स्तर पर लंबित थीं। किसानों के लिए ऐसी योजनाओं से संबंधित शिकायतों का समय पर परीक्षण जरूरी है, क्योंकि कई मामलों में भुगतान या पंजीयन से जुड़ी समस्या का कारण रिकॉर्ड में त्रुटि, पात्रता संबंधी स्थिति अथवा दस्तावेजी कमी हो सकता है। ऐसे मामलों में शिकायतकर्ता को केवल दूसरे कार्यालय में भेजने के बजाय समस्या की प्रकृति स्पष्ट करते हुए संबंधित स्तर पर कार्रवाई की जानी चाहिए। गृह विभाग से जुड़ी शिकायतों में आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी, एफआईआर दर्ज न होने अथवा सही धाराओं में एफआईआर दर्ज न किए जाने जैसी शिकायतों का उल्लेख भी किया गया। पुलिस विभाग से संबंधित मामलों में शिकायतकर्ता की बात सुनना, उपलब्ध तथ्यों और कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई करना तथा शिकायत की स्थिति से संबंधित जानकारी देना आवश्यक है। मुख्य सचिव ने पुलिस अधीक्षक को विशेष रूप से उन शिकायतों पर ध्यान देने को कहा जिनमें पक्षकारों पर समझौते या राजीनामे के लिए दबाव डालने की बात सामने आ रही है। इन मामलों का प्रभावी और संतुष्टिपूर्ण निराकरण करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को यह भी संकेत दिया कि सीएम हेल्पलाइन केवल शिकायतों की संख्या घटाने का माध्यम नहीं है, बल्कि शासन और आम नागरिक के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। यदि किसी नागरिक को अपनी समस्या के समाधान के लिए पहले स्थानीय कार्यालय जाना पड़ा, वहां समाधान नहीं हुआ और उसके बाद सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करनी पड़ी, तो उस शिकायत का गुणवत्तापूर्ण समाधान प्रशासन की जिम्मेदारी बनता है। शिकायत बंद करने से पहले यह देखना आवश्यक है कि वास्तव में समस्या का समाधान हुआ या नहीं। इसी वजह से अधिकारियों को शिकायतकर्ताओं से संवाद करने और आवश्यकता पड़ने पर उनसे सीधे बात करने के निर्देश पहले भी दिए गए हैं। सितंबर में सीएम हेल्पलाइन की समीक्षा के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों को दूरदराज के जिलों में जाकर शिकायतों की वास्तविक स्थिति देखने तथा शिकायतकर्ताओं से बात करने के निर्देश दिए जाने की जानकारी सार्वजनिक हुई थी। मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के दौरान भी सरकार ने लंबित शिकायतों के साथ-साथ जनसुनवाई और लोक सेवा गारंटी से जुड़े मामलों के निराकरण को प्राथमिकता देने की व्यवस्था बताई है। इस पृष्ठभूमि में मुख्य सचिव की वर्तमान समीक्षा को शिकायत निवारण प्रणाली में जवाबदेही बढ़ाने की प्रक्रिया के रूप में देखा जा सकता है। इसका उद्देश्य यह है कि नागरिक की शिकायत केवल पोर्टल पर दर्ज होकर अलग-अलग स्तरों पर घूमती न रहे, बल्कि संबंधित विभाग उसका परीक्षण करे और वास्तविक समाधान उपलब्ध कराए।
एल-1 अधिकारियों की भूमिका इस पूरी व्यवस्था में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। सीएम हेल्पलाइन में शिकायत प्राप्त होने के बाद प्रारंभिक स्तर पर उसका परीक्षण करने और जवाब देने की जिम्मेदारी एल-1 अधिकारी की होती है। यदि अधिकारी शिकायत को बिना पर्याप्त परीक्षण के एल-2 स्तर पर भेज देता है तो इससे न केवल शिकायत के समाधान में देरी हो सकती है, बल्कि शिकायतकर्ता को भी यह महसूस हो सकता है कि उसकी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया गया। मुख्य सचिव ने ऐसे अधिकारियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश देकर यह स्पष्ट किया कि शिकायत को केवल आगे बढ़ाना स्वीकार्य कार्यप्रणाली नहीं होगी। समाधान तभी माना जाएगा जब शिकायत के तथ्यों का परीक्षण कर उसके अनुरूप कार्रवाई या स्पष्ट जवाब दिया जाए। यदि शिकायत वास्तव में निराकरण योग्य नहीं है या नियमों के अनुसार बंद की जा सकती है तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसे फोर्स क्लोज किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए भी शिकायत की प्रकृति और उपलब्ध तथ्यों का परीक्षण जरूरी है। प्रशासनिक अधिकारियों के लिए चुनौती यह है कि बड़ी संख्या में आने वाली शिकायतों के बीच वास्तविक और त्वरित कार्रवाई योग्य मामलों की पहचान की जाए। इसके लिए विभागवार समीक्षा, क्षेत्रवार विश्लेषण और शिकायतों के मूल कारणों की पहचान उपयोगी हो सकती है। मुख्य सचिव ने इसी वजह से कलेक्टरों को आगामी एक महीने में जिले के स्तर पर यह समीक्षा करने के निर्देश दिए कि कौन-से विषय और कौन-से क्षेत्र सबसे अधिक शिकायतें पैदा कर रहे हैं। यदि किसी एक समस्या से लगातार शिकायतें आ रही हैं तो उसके स्थायी समाधान की दिशा में विभागीय योजना तैयार की जा सकती है।
सीएम हेल्पलाइन से संबंधित इस समीक्षा का एक व्यापक पहलू सुशासन और नागरिक संतुष्टि से जुड़ा है। सरकार द्वारा मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के माध्यम से भी लंबित शिकायतों, जनसुनवाई और लोक सेवा गारंटी के प्रकरणों को प्राथमिकता देने की व्यवस्था की गई है। जुलाई में मुख्य सचिव ने अधिकारियों को बताया था कि अभियान 7 अगस्त 2026 से 8 जनवरी 2027 तक चलेगा और इसके दौरान प्रत्येक शुक्रवार संभाग एवं जिला स्तर के अधिकारी क्षेत्र का भ्रमण कर योजनाओं के क्रियान्वयन तथा लंबित प्रकरणों की समीक्षा करेंगे। अभियान के दौरान आमजन से संवाद, लंबित मामलों का निराकरण और स्थानीय समस्याओं की पहचान पर जोर दिया गया है। अगस्त में पहले शिविर की समीक्षा करते हुए भी मुख्य सचिव ने केवल शिकायत बंद करने के बजाय शिकायतकर्ता की संतुष्टि और योजनाओं के वास्तविक क्रियान्वयन की निगरानी पर जोर दिया था। इसी क्रम में सीएम हेल्पलाइन की 100 दिवस से अधिक पुरानी शिकायतों की समीक्षा प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण कार्य है। लंबे समय से लंबित शिकायतें अक्सर ऐसी समस्याओं का संकेत देती हैं जिनमें विभागीय समन्वय, दस्तावेज, कानूनी प्रक्रिया अथवा स्थानीय स्तर पर निर्णय की आवश्यकता हो सकती है। इसलिए इन मामलों में वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी और समयबद्ध समीक्षा उपयोगी हो सकती है। मुख्य सचिव ने जिस तरह विषयवार और क्षेत्रवार शिकायतों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं, उससे भविष्य में बार-बार आने वाली शिकायतों के कारणों को समझने की दिशा में भी काम किया जा सकता है।
रीवा संभाग के अधिकारियों को दिए गए निर्देशों के संदर्भ में भी शिकायतों के स्थानीय स्तर पर समाधान पर जोर दिखाई देता है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान कमिश्नर कार्यालय के एनआईसी कक्ष में रीवा संभाग कमिश्नर श्री शीलेन्द्र सिंह, डीआईजी श्री हेमंत चौहान, संयुक्त आयुक्त श्री वीरेन्द्र पटेल और उपायुक्त राजस्व श्री एल.एल. अहिरवार उपस्थित रहे। वहीं कलेक्टर कार्यालय के एनआईसी कक्ष में कलेक्टर श्री नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी, पुलिस अधीक्षक डॉ. गुरकरन सिंह सहित संबंधित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। समीक्षा में अधिकारियों को अपने-अपने विभाग से संबंधित शिकायतों की स्थिति की निगरानी करने और निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई। प्रशासनिक समीक्षा का उद्देश्य केवल लंबित आंकड़ों की जानकारी लेना नहीं, बल्कि यह पता लगाना भी है कि शिकायतों के लंबित रहने के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं। यदि किसी शिकायत में राजस्व रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है तो संबंधित राजस्व अधिकारी को कार्रवाई करनी होगी। यदि मामला पुलिस जांच से संबंधित है तो पुलिस विभाग को नियमानुसार कार्रवाई करनी होगी। इसी तरह महिला एवं बाल विकास या अन्य हितग्राहीमूलक विभागों से जुड़ी शिकायतों में पात्रता, दस्तावेज और भुगतान की स्थिति की जांच करनी होगी। इस तरह विभागवार जिम्मेदारी तय होने से शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट हो सकती है।
शिकायत निवारण की इस प्रक्रिया में डेटा आधारित समीक्षा को भी महत्व दिया जा रहा है। केवल यह जानना पर्याप्त नहीं कि किसी जिले में कितनी शिकायतें लंबित हैं; यह भी देखना जरूरी है कि उनमें से कितनी शिकायतें 30 दिन, 60 दिन, 100 दिन या उससे अधिक समय से लंबित हैं, किन विभागों से सबसे अधिक शिकायतें हैं और किन क्षेत्रों से लगातार एक ही तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं। मुख्य सचिव द्वारा एक माह में विषय और क्षेत्रवार समीक्षा करने का निर्देश इसी दिशा में है। यदि आंकड़ों से यह सामने आता है कि किसी क्षेत्र में किसी विशेष सेवा को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही हैं तो जिला प्रशासन उस क्षेत्र में विशेष शिविर लगाकर अथवा संबंधित विभागीय अमले की टीम भेजकर समस्या का समाधान कर सकता है। इसी प्रकार यदि किसी विभाग की शिकायतों का लंबित प्रतिशत अधिक है तो विभागीय स्तर पर अतिरिक्त निगरानी की जरूरत हो सकती है। मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान में भी क्षेत्र भ्रमण, जनसंवाद और लंबित प्रकरणों के निराकरण को एक साथ जोड़ने का उद्देश्य यही है कि अधिकारी कार्यालयों तक सीमित न रहें, बल्कि वास्तविक समस्याओं को क्षेत्र में जाकर समझें। सितंबर में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दूरदराज के जिलों में जाकर सीएम हेल्पलाइन शिकायतों की निगरानी करने से संबंधित निर्देश भी इसी व्यापक व्यवस्था का हिस्सा बताए गए थे।
मुख्य सचिव की समीक्षा में शिकायतकर्ता को कार्यालयों के चक्कर लगाने से बचाने पर भी जोर दिया गया। किसी नागरिक द्वारा एक समस्या को लेकर शिकायत दर्ज कराने के बाद यदि उसे एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय भेजा जाता है तो समस्या का समाधान होने के बजाय प्रशासनिक प्रक्रिया जटिल हो जाती है। खासतौर पर ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के लोगों के लिए बार-बार जिला या तहसील मुख्यालय तक जाना समय और संसाधन दोनों की दृष्टि से कठिन हो सकता है। इसलिए यदि शिकायत किसी दूसरे विभाग से संबंधित है तो विभागों के बीच समन्वय के माध्यम से उसे संबंधित अधिकारी तक पहुंचाना प्रशासनिक व्यवस्था की जिम्मेदारी होनी चाहिए। मुख्य सचिव ने शिकायतों को कार्यक्षेत्र से बाहर करने की प्रवृत्ति पर भी नाराजगी जताई और अधिकारियों से कहा कि नागरिक को समस्या के समाधान के लिए अनावश्यक रूप से न भटकाया जाए। इससे शिकायत निवारण व्यवस्था में नागरिक केंद्रित दृष्टिकोण को प्राथमिकता देने का संकेत मिलता है। किसी शिकायत के वास्तविक समाधान के लिए कभी-कभी कई विभागों के बीच समन्वय की आवश्यकता होती है। ऐसे मामलों में एक विभाग को नोडल भूमिका देकर अन्य संबंधित विभागों से कार्रवाई कराना अधिक उपयोगी हो सकता है। हालांकि प्रत्येक मामले में कार्रवाई संबंधित कानून, नियम और विभागीय अधिकार क्षेत्र के अनुसार ही की जानी होगी।
शासकीय भूमि से अतिक्रमण संबंधी शिकायतों पर कार्रवाई के निर्देश के साथ-साथ मुख्य सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि लंबित शिकायतों का समयबद्ध निराकरण प्रशासनिक प्राथमिकता होना चाहिए। यदि किसी सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत लंबे समय तक लंबित रहती है तो इससे संबंधित नागरिकों में असंतोष बढ़ सकता है और विवाद भी जटिल हो सकते हैं। इसलिए शिकायत प्राप्त होने के बाद रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का परीक्षण कर नियमानुसार निर्णय लेने की आवश्यकता है। इसी तरह भू-अर्जन मुआवजे से जुड़े रीवा के मामलों को एक सप्ताह में निपटाने का निर्देश समयबद्धता पर विशेष जोर को दर्शाता है। भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों में मुआवजा, रिकॉर्ड, पात्रता और भुगतान जैसे कई दस्तावेजी पहलू होते हैं, इसलिए संबंधित अधिकारियों को प्रत्येक मामले की स्थिति स्पष्ट करनी होगी। यदि किसी मामले में कोई दस्तावेज या प्रक्रिया लंबित है तो उसे पूरा कराने की कार्रवाई करनी होगी। शिकायतकर्ता को भी यह बताया जाना चाहिए कि उसके प्रकरण में किस स्तर पर क्या कार्रवाई हुई है। इससे शिकायत की पारदर्शिता बढ़ सकती है।
मुख्य सचिव की समीक्षा के दौरान पुलिस विभाग से संबंधित शिकायतों पर दिए गए निर्देश भी नागरिक शिकायत निवारण की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। एफआईआर दर्ज न होने, सही धाराओं में मामला दर्ज न होने, आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी अथवा पक्षकारों पर समझौते के लिए दबाव डालने जैसी शिकायतों का उल्लेख समीक्षा में किया गया। ऐसे मामलों में संबंधित शिकायतों की तथ्यात्मक जांच और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई आवश्यक होगी। पुलिस अधीक्षक को विशेष रूप से समझौते या राजीनामे के लिए दबाव संबंधी शिकायतों का तत्काल प्रभावी और संतुष्टिपूर्ण निराकरण करने के निर्देश दिए गए। यहां यह भी महत्वपूर्ण है कि किसी शिकायत का निराकरण संबंधित कानून और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही किया जाए। प्रशासनिक शिकायत पोर्टल किसी न्यायिक प्रक्रिया का विकल्प नहीं है, लेकिन शिकायतकर्ता की समस्या को उचित विभागीय स्तर पर पहुंचाने और कार्रवाई की स्थिति बताने का माध्यम जरूर हो सकता है। इसलिए पुलिस विभाग से संबंधित सीएम हेल्पलाइन शिकायतों में भी तथ्यात्मक परीक्षण, कानूनी प्रक्रिया और शिकायतकर्ता के साथ संवाद आवश्यक है।
महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़ी लंबित शिकायतों में मातृ वंदना योजना का उल्लेख इस बात की ओर भी संकेत करता है कि हितग्राही योजनाओं की अंतिम छोर तक पहुंच प्रशासनिक निगरानी का महत्वपूर्ण विषय है। यदि किसी पात्र महिला को योजना का लाभ नहीं मिल रहा है तो शिकायत के पीछे पंजीयन, दस्तावेज, पात्रता, बैंक खाते, भुगतान अथवा अन्य प्रशासनिक कारण हो सकते हैं। इसी प्रकार प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से संबंधित शिकायतों में पंजीयन और भुगतान की स्थिति का परीक्षण आवश्यक है। इन मामलों में केवल शिकायत बंद करने के बजाय यह देखना महत्वपूर्ण है कि लाभार्थी की वास्तविक समस्या क्या है। यदि पात्रता पूरी होने के बावजूद भुगतान लंबित है तो संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर नियमानुसार सुधार किया जाना चाहिए। यदि पात्रता नहीं है तो उसका कारण स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए। इस तरह शिकायतकर्ता को स्पष्ट और समझने योग्य जवाब देना भी शिकायत निवारण की गुणवत्ता का हिस्सा है।
मुख्य सचिव की समीक्षा के दौरान सामने आया 4,755 का आंकड़ा रीवा जिले में 100 दिवस से अधिक पुरानी शिकायतों के बड़े बैकलॉग की ओर संकेत करता है। ऐसे मामलों के लिए केवल सामान्य समीक्षा पर्याप्त नहीं हो सकती; विभागवार सूची तैयार कर प्रत्येक लंबित प्रकरण की स्थिति का परीक्षण करना उपयोगी होगा। किन शिकायतों में केवल दस्तावेजी कार्रवाई बाकी है, किनमें स्थल निरीक्षण आवश्यक है, किनमें विभागीय निर्णय चाहिए और किनमें कानूनी प्रक्रिया लंबित है—इन सभी श्रेणियों में शिकायतों को अलग-अलग देखकर कार्रवाई की गति बढ़ाई जा सकती है। इसी तरह 656 महिला एवं बाल विकास, 292 गृह और 264 राजस्व विभाग की 100 दिवस से अधिक पुरानी शिकायतों के आंकड़ों से संबंधित विभागों के लिए प्राथमिकता तय करने की आवश्यकता सामने आती है। जिला प्रशासन यदि नियमित रूप से इन विभागों की समीक्षा करे और लंबित मामलों की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों को सौंपे तो शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया को गति दी जा सकती है। यह भी जरूरी होगा कि बंद की गई शिकायतों में वास्तविक संतुष्टि का परीक्षण किया जाए, क्योंकि केवल पोर्टल पर स्थिति बदलने से नागरिक की समस्या स्वतः समाप्त नहीं होती।
मध्यप्रदेश में सीएम हेल्पलाइन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर लगातार समीक्षा और निगरानी की जा रही है। सितंबर की एक समीक्षा में बताया गया था कि सीएम हेल्पलाइन पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में कॉल और शिकायतें आती हैं तथा अधिकारियों से लंबित शिकायतों को समयसीमा में निपटाने और शिकायतकर्ताओं से सीधे संवाद करने को कहा गया था। अगस्त में मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान की समीक्षा के दौरान भी शिकायतों के संतुष्टिपूर्ण निराकरण और योजनाओं के वास्तविक क्रियान्वयन की निगरानी पर जोर दिया गया था। इससे स्पष्ट है कि शिकायत निवारण को प्रशासनिक निगरानी के एक निरंतर हिस्से के रूप में लिया जा रहा है। वर्तमान समीक्षा में 100 दिवस से अधिक लंबित शिकायतों और एल-1 स्तर की जवाबदेही पर जोर इस प्रक्रिया का अगला चरण है।
मुख्य सचिव श्री अशोक वर्णवाल की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग समीक्षा में सीएम हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों के समयबद्ध और वास्तविक निराकरण को लेकर अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए। शासकीय भूमि पर अतिक्रमण की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई, बिना जवाब शिकायत को एल-2 स्तर पर भेजने वाले एल-1 अधिकारियों पर प्रभावी कार्रवाई, 100 दिवस से अधिक लंबित शिकायतों का प्राथमिकता से निराकरण, शिकायतकर्ता को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगवाना और जिले में सर्वाधिक शिकायत वाले विषय एवं क्षेत्रों की पहचान कर विशेष फोकस करना समीक्षा के प्रमुख बिंदु रहे। रीवा जिले के मामले में 4,755 लंबित शिकायतों की स्थिति की समीक्षा करते हुए भू-अर्जन मुआवजे से जुड़े मामलों को एक सप्ताह में निपटाने तथा पुलिस विभाग से संबंधित समझौते के दबाव जैसी शिकायतों का प्रभावी निराकरण करने के निर्देश दिए गए। महिला एवं बाल विकास, गृह और राजस्व विभाग की लंबित शिकायतों पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया। प्रशासनिक व्यवस्था में शिकायत दर्ज होना पहला चरण है, जबकि वास्तविक समाधान अंतिम लक्ष्य है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों को शिकायतों की संख्या के साथ-साथ उनकी गुणवत्ता, समयसीमा और शिकायतकर्ता की संतुष्टि पर ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के तहत पहले से चल रहे क्षेत्रीय संवाद और शिकायत निवारण कार्यक्रमों के साथ इन निर्देशों का उद्देश्य प्रशासन और नागरिक के बीच शिकायतों के माध्यम से बनने वाली दूरी को कम करना तथा स्थानीय स्तर पर समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया को अधिक जवाबदेह बनाना है।