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वन अधिकार अधिनियम की समीक्षा बैठक में कलेक्टर जयति सिंह ने दिए आवश्यक दिशा-निर्देश

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कलेक्टर कार्यालय बड़वानी में हुई बैठक, वन अधिकार दावों के निराकरण और पात्र हितग्राहियों को अधिकार सुनिश्चित करने पर रहेगा जोर
बड़वानी। कलेक्टर श्रीमती जयति सिंह की अध्यक्षता में कलेक्टर कार्यालय बड़वानी के सभागृह में वन अधिकार अधिनियम से संबंधित समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत चल रही प्रक्रियाओं और उससे जुड़े कार्यों की समीक्षा की गई। बैठक में सीईओ जिला पंचायत, डीएफओ सेंधवा, डीएफओ बड़वानी, एसडीएम बड़वानी, सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक का उद्देश्य वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के तहत पात्र लोगों को उनके अधिकार उपलब्ध कराने से जुड़ी प्रक्रियाओं की समीक्षा करना तथा संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना रहा। कलेक्टर ने अधिकारियों से विभागवार जानकारी लेते हुए वन अधिकार से जुड़े मामलों में निर्धारित प्रक्रिया और शासन के प्रावधानों के अनुरूप कार्यवाही सुनिश्चित करने पर जोर दिया। बैठक में जिले के वन क्षेत्रों और आदिवासी समुदायों से जुड़े अधिकारों के विषय को प्रशासनिक प्राथमिकता के साथ लेते हुए संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने स्तर पर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
वन अधिकार अधिनियम का उद्देश्य परंपरागत रूप से वन क्षेत्रों में निवास करने वाले अनुसूचित जनजाति तथा अन्य परंपरागत वन निवासियों के वन भूमि एवं वन संसाधनों से जुड़े अधिकारों को कानूनी मान्यता प्रदान करना है। इस कानून के तहत पात्र हितग्राहियों के व्यक्तिगत और सामुदायिक दावों की प्रक्रिया निर्धारित स्तरों पर की जाती है। बड़वानी जिले की भौगोलिक एवं सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए वन अधिकार अधिनियम से संबंधित विषय प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण हैं। समीक्षा बैठक में अधिकारियों से वन अधिकार से संबंधित मामलों की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली गई। दावों के परीक्षण, दस्तावेजों की उपलब्धता, संबंधित समितियों के स्तर पर की जा रही प्रक्रिया तथा लंबित मामलों के निराकरण से जुड़े पहलुओं पर विभागीय स्तर पर जानकारी प्रस्तुत की गई। कलेक्टर की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि पात्र लोगों के दावों की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप पारदर्शी ढंग से आगे बढ़े। साथ ही जिन प्रकरणों में आवश्यक दस्तावेज अथवा जानकारी उपलब्ध नहीं है, वहां नियमानुसार प्रक्रिया पूरी करने के लिए संबंधित स्तर पर समन्वय किया जाए। बैठक में मौजूद अधिकारियों को अपने विभाग से जुड़े दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में वन विभाग और जनजातीय कार्य विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। डीएफओ सेंधवा और डीएफओ बड़वानी की उपस्थिति में वन क्षेत्रों से संबंधित विषयों पर विभागीय समन्वय को लेकर चर्चा की गई। वन अधिकार अधिनियम के तहत दावों के परीक्षण और अधिकारों के निर्धारण की प्रक्रिया में राजस्व, वन और जनजातीय कार्य विभाग सहित विभिन्न स्तरों के अधिकारियों की भूमिका होती है। ऐसे में विभागों के बीच समन्वय के अभाव में प्रक्रिया प्रभावित न हो, इसके लिए समीक्षा बैठकों के माध्यम से प्रगति की जानकारी लेना महत्वपूर्ण माना जाता है। एसडीएम बड़वानी तथा सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग सहित अन्य अधिकारियों से भी उनके स्तर पर किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली गई। प्रशासन का प्रयास है कि वन अधिकार से संबंधित मामलों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए पात्र हितग्राहियों के दावों का उचित परीक्षण हो। बैठक में अधिकारियों से यह भी अपेक्षा की गई कि वे क्षेत्रीय स्तर पर आने वाली समस्याओं की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष रखें, ताकि उनका नियमानुसार समाधान किया जा सके। इस प्रकार समीक्षा बैठक में प्रशासनिक, वन एवं जनजातीय विभागों के बीच समन्वय को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया।
वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत व्यक्तिगत वन अधिकार और सामुदायिक वन अधिकार से जुड़े विषयों की अपनी अलग-अलग महत्ता है। व्यक्तिगत वन अधिकार के माध्यम से पात्र परिवारों के भूमि संबंधी दावों की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, जबकि सामुदायिक अधिकारों के माध्यम से समुदायों को परंपरागत रूप से उपयोग किए जाने वाले वन संसाधनों से जुड़े अधिकार प्राप्त हो सकते हैं। जिले में इनसे संबंधित प्रकरणों की स्थिति की समीक्षा प्रशासनिक स्तर पर की जाती है, ताकि पात्र हितग्राहियों के मामलों में नियमानुसार निर्णय हो सके। समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने अपने-अपने विभाग से संबंधित कार्यों की जानकारी रखी। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वन अधिकार अधिनियम के प्रकरणों में शासन द्वारा निर्धारित नियमों और प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया जाए। किसी भी प्रकरण में पात्रता, दस्तावेज, स्थल संबंधी जानकारी या अन्य आवश्यक प्रक्रिया से जुड़े विषय हों तो संबंधित विभागों के बीच समन्वय के माध्यम से उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जाए। बैठक का उद्देश्य किसी एक विभाग तक सीमित न रहकर सभी संबंधित विभागों को एक साथ लाकर वन अधिकार से जुड़े कार्यों की प्रगति की समीक्षा करना रहा।
बड़वानी जिले में वन क्षेत्रों और आदिवासी आबादी से जुड़े विषयों की व्यापकता को देखते हुए वन अधिकार अधिनियम की प्रभावी क्रियान्वयन प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जाती है। प्रशासन के सामने एक ओर पात्र लोगों के अधिकारों को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है, वहीं दूसरी ओर वन भूमि और वन संसाधनों से जुड़े मामलों में कानून के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। इसी संतुलित प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए समीक्षा बैठकों का आयोजन किया जाता है। कलेक्टर श्रीमती जयति सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में अधिकारियों को प्रकरणों की स्थिति की नियमित समीक्षा करने तथा आवश्यक कार्रवाई समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के संबंध में मार्गदर्शन दिया गया। अधिकारियों को क्षेत्रीय स्तर पर आने वाली व्यावहारिक समस्याओं और लंबित प्रक्रियाओं पर विशेष ध्यान देने के लिए कहा गया। साथ ही विभागीय अधिकारियों से अपेक्षा की गई कि वे आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए पात्र हितग्राहियों से संबंधित मामलों में अनावश्यक विलंब से बचें। वन अधिकार से संबंधित योजनाओं और अधिकारों की जानकारी संबंधित समुदायों तक पहुंचाने तथा प्रक्रिया के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की भूमिका भी प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
समीक्षा बैठक में मौजूद सीईओ जिला पंचायत, डीएफओ सेंधवा, डीएफओ बड़वानी, एसडीएम बड़वानी और सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग सहित अन्य अधिकारियों ने अपने विभागों से संबंधित जानकारी प्रस्तुत की। अधिकारियों की मौजूदगी से यह स्पष्ट हुआ कि वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय आवश्यक है। जिला पंचायत स्तर से ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े विषयों, वन विभाग की ओर से वन क्षेत्रों से संबंधित मामलों तथा जनजातीय कार्य विभाग की ओर से अनुसूचित जनजाति समुदायों से जुड़े विषयों पर समन्वित रूप से कार्य किया जाता है। राजस्व प्रशासन के स्तर पर भी भूमि संबंधी मामलों और रिकॉर्ड से जुड़े विषयों की भूमिका रहती है। इन सभी विभागों के समन्वय से ही वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत आने वाले मामलों की प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सकता है। बैठक में अधिकारियों को अपने-अपने दायित्वों के अनुरूप कार्यवाही करते हुए आवश्यक जानकारी साझा करने और प्रकरणों के निराकरण में सहयोग करने पर जोर दिया गया।
वन अधिकार अधिनियम से जुड़े मामलों में दस्तावेजी प्रक्रिया और दावों के परीक्षण का विशेष महत्व होता है। पात्रता के निर्धारण के लिए उपलब्ध साक्ष्यों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रकरणों का परीक्षण किया जाता है। कई बार ग्रामीण एवं दूरस्थ वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को दस्तावेज जुटाने या प्रशासनिक प्रक्रिया समझने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में संबंधित विभागों और मैदानी अमले की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। समीक्षा बैठक में अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि प्रक्रिया के दौरान पात्र लोगों को आवश्यक जानकारी और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए। साथ ही किसी भी प्रकरण में निर्णय लेते समय शासन के निर्धारित प्रावधानों का पालन किया जाए। इससे वन अधिकार से संबंधित मामलों में पारदर्शिता और प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने में मदद मिलेगी। प्रशासनिक स्तर पर नियमित समीक्षा का एक उद्देश्य यह भी है कि लंबित मामलों की पहचान कर उन्हें नियमानुसार आगे बढ़ाया जा सके और विभागों के बीच किसी प्रकार के समन्वय संबंधी अंतर को दूर किया जा सके।
कलेक्टर श्रीमती जयति सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में वन अधिकार अधिनियम को लेकर जिला प्रशासन की प्राथमिकताओं को भी रेखांकित किया गया। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे अपने स्तर पर लंबित एवं प्रक्रियाधीन मामलों की जानकारी अद्यतन रखें तथा आवश्यकतानुसार संबंधित विभागों के साथ समन्वय करें। समीक्षा के दौरान प्रकरणों में आने वाली कठिनाइयों को चिन्हित कर उनके नियमानुसार समाधान की दिशा में कार्य करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। जिला प्रशासन की ओर से यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि वन अधिकार से जुड़े मामलों में शासन की मंशा के अनुरूप पात्र हितग्राहियों को उनके अधिकार उपलब्ध हों और पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित हो। बैठक में अधिकारियों की उपस्थिति और विभागवार समीक्षा इसी दिशा में एक प्रशासनिक कदम रही। क्षेत्रीय स्तर पर कार्यरत अधिकारियों को स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्रकरणों की जांच और आवश्यक कार्रवाई करने की जिम्मेदारी दी जाती है। समीक्षा बैठक के माध्यम से वरिष्ठ स्तर पर प्रगति की जानकारी प्राप्त करने से कार्यों की निगरानी और समन्वय को बेहतर बनाने में सहायता मिलती है।
बैठक का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि वन अधिकार से जुड़े विषयों को केवल राजस्व अथवा वन विभाग का विषय न मानते हुए बहु-विभागीय समन्वय के माध्यम से आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। वन क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उनके अधिकारों से संबंधित मामलों का उचित परीक्षण आवश्यक है। वहीं वन संरक्षण और कानून के प्रावधानों का पालन भी समान रूप से महत्वपूर्ण है। प्रशासनिक स्तर पर दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार निर्णय लेना आवश्यक होता है। बैठक में अधिकारियों को इसी दृष्टिकोण के अनुरूप कार्य करने के लिए मार्गदर्शन दिया गया। जिला प्रशासन द्वारा समय-समय पर ऐसी समीक्षा बैठकों के माध्यम से प्रकरणों की स्थिति की जानकारी ली जाती है और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं। इससे विभागीय स्तर पर कार्यों की गति की समीक्षा करने तथा आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने में मदद मिलती है।
वन अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन का सीधा संबंध वन क्षेत्रों में रहने वाले पात्र परिवारों और समुदायों से है। अधिकारों की प्रक्रिया स्पष्ट और नियमानुसार होने से पात्र लोगों को अपने दावों की स्थिति समझने और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने में सहायता मिलती है। प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी पात्र व्यक्ति या समुदाय का दावा केवल प्रक्रिया संबंधी कठिनाई के कारण अनावश्यक रूप से लंबित न रहे। साथ ही प्रत्येक दावे का परीक्षण कानून में निर्धारित मापदंडों के आधार पर किया जाना आवश्यक है। कलेक्टर की अध्यक्षता में हुई बैठक में इसी प्रकार की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे अपने स्तर पर मामलों की नियमित समीक्षा करें और आवश्यक समन्वय के साथ प्रकरणों को आगे बढ़ाएं। बैठक में उपस्थित वरिष्ठ अधिकारियों की सहभागिता से वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न विभागीय पहलुओं पर चर्चा का अवसर मिला। जिला स्तर पर इस प्रकार की समीक्षा से अधिकारियों के बीच बेहतर संवाद स्थापित होता है और जमीनी स्तर पर सामने आने वाले विषयों को उच्च स्तर तक पहुंचाने का माध्यम भी मिलता है।
बड़वानी जिले की प्रशासनिक व्यवस्था में वन अधिकार अधिनियम से जुड़े मामलों की समीक्षा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जिले के कई क्षेत्र वन और आदिवासी बहुल क्षेत्र हैं। ऐसे क्षेत्रों में शासन की योजनाओं और अधिकार संबंधी प्रावधानों को लोगों तक पहुंचाने के लिए मैदानी प्रशासन की सक्रिय भूमिका आवश्यक होती है। वन अधिकार से संबंधित प्रकरणों में राजस्व रिकॉर्ड, वन क्षेत्र की स्थिति, परंपरागत निवास और अन्य निर्धारित मापदंडों से जुड़े पहलुओं की जांच की जाती है। संबंधित समितियों और विभागीय अधिकारियों द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रकरणों का परीक्षण किया जाता है। कलेक्टर कार्यालय में हुई बैठक में अधिकारियों से इसी प्रक्रिया की प्रगति की जानकारी लेकर आवश्यक मार्गदर्शन दिया गया। प्रशासन की कोशिश रहती है कि संबंधित विभाग अपने-अपने दायित्वों को समय पर पूरा करें और किसी भी स्तर पर समन्वय की कमी से प्रक्रिया प्रभावित न हो। बैठक में सीईओ जिला पंचायत और दोनों वन मंडलों के अधिकारियों की मौजूदगी से जिला स्तर पर विभिन्न विभागों के बीच तालमेल की आवश्यकता स्पष्ट हुई। एसडीएम और जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारी भी समीक्षा में शामिल रहे, जिससे राजस्व और जनजातीय क्षेत्र से जुड़े मामलों पर समन्वित चर्चा का अवसर मिला।
वन अधिकार अधिनियम की समीक्षा बैठक में प्रशासनिक पारदर्शिता और निर्धारित नियमों के पालन को महत्वपूर्ण आधार माना गया। किसी भी अधिकार संबंधी मामले में अंतिम निर्णय से पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत दस्तावेज और दावों का परीक्षण किया जाना आवश्यक है। ऐसे में मैदानी स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलने से प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है। कलेक्टर श्रीमती जयति सिंह ने अधिकारियों के साथ बैठक कर जिले में वन अधिकार अधिनियम से संबंधित कार्यों की समीक्षा की। बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने अपने-अपने विभाग से संबंधित विषयों पर जानकारी दी। बैठक के दौरान यह सुनिश्चित करने की दिशा में चर्चा हुई कि पात्र हितग्राहियों से जुड़े मामलों का परीक्षण नियमों के अनुसार हो और आवश्यक कार्रवाई में विभागीय समन्वय बना रहे। वन अधिकार से संबंधित मामलों में स्थानीय समुदायों की जानकारी और दावों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत महत्व दिया जाता है। प्रशासनिक स्तर पर नियमित समीक्षा से ऐसे मामलों की निगरानी और प्रगति का आकलन किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से कलेक्टर कार्यालय में आयोजित यह बैठक जिले में वन अधिकार अधिनियम के कार्यान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रशासनिक समीक्षा के रूप में सामने आई।
वन अधिकार अधिनियम की समीक्षा के साथ-साथ यह भी महत्वपूर्ण है कि संबंधित समुदायों को उनके अधिकारों और प्रक्रिया के बारे में पर्याप्त जानकारी उपलब्ध हो। कई बार ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक शासन की योजनाओं और कानूनी प्रावधानों की जानकारी सीमित रूप से पहुंच पाती है। मैदानी अमला ऐसे मामलों में जानकारी और आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जनजातीय कार्य विभाग, वन विभाग और राजस्व प्रशासन के अधिकारी मिलकर पात्र हितग्राहियों से संबंधित प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने में सहयोग करते हैं। समीक्षा बैठक में इन विभागों की मौजूदगी ने इसी समन्वित व्यवस्था को मजबूत करने का अवसर दिया। अधिकारियों को अपने स्तर पर प्रकरणों की समीक्षा करते हुए आवश्यक कार्यवाही करने की दिशा में मार्गदर्शन मिला। इससे उम्मीद की जाती है कि वन अधिकार से जुड़े मामलों की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जा सकेगा। प्रशासन का उद्देश्य कानून के प्रावधानों के अनुरूप पात्र हितग्राहियों के अधिकार सुनिश्चित करना और वन क्षेत्रों में विकास एवं संरक्षण से जुड़े कार्यों के बीच आवश्यक समन्वय बनाए रखना है।
बैठक में सीईओ जिला पंचायत, डीएफओ सेंधवा, डीएफओ बड़वानी, एसडीएम बड़वानी, सहायक आयुक्त जनजातीय सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। इन अधिकारियों के विभागीय अनुभव और क्षेत्रीय जानकारी के आधार पर वन अधिकार से जुड़े विषयों की समीक्षा की गई। जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में होने वाली ऐसी बैठकों में विभिन्न विभागों से प्राप्त जानकारी को एक साथ रखकर आगे की कार्यवाही की दिशा तय की जाती है। इससे अधिकारियों को प्राथमिकताओं के संबंध में स्पष्टता मिलती है और लंबित मामलों पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है। वन अधिकार अधिनियम के मामलों में विशेष रूप से दूरस्थ क्षेत्रों तक प्रशासन की पहुंच और मैदानी स्तर पर प्रभावी कार्यवाही महत्वपूर्ण होती है। संबंधित अधिकारी क्षेत्रीय स्तर पर आने वाली समस्याओं को वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाकर उनके समाधान के लिए आवश्यक प्रक्रिया अपना सकते हैं। बैठक के माध्यम से विभागों के बीच संवाद को मजबूत करने और शासन के प्रावधानों के अनुरूप कार्यवाही सुनिश्चित करने पर जोर रहा।
कलेक्टर कार्यालय बड़वानी के सभागृह में आयोजित यह समीक्षा बैठक जिले में वन अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में प्रशासनिक स्तर पर की जा रही निगरानी का हिस्सा रही। बैठक में कलेक्टर श्रीमती जयति सिंह ने संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी में वन अधिकार से जुड़े कार्यों की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। अधिकारियों को अपने-अपने विभागीय दायित्वों के अनुसार कार्यवाही करने तथा आवश्यक समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया गया। वन अधिकार से संबंधित मामलों में पात्रता और दावों का परीक्षण निर्धारित नियमों के अनुसार होना आवश्यक है, इसलिए प्रशासनिक समीक्षा के माध्यम से प्रक्रिया की स्थिति पर लगातार नजर रखना महत्वपूर्ण है। बैठक में वन विभाग, जिला पंचायत, राजस्व प्रशासन और जनजातीय कार्य विभाग से जुड़े अधिकारी शामिल हुए। इससे यह संकेत मिलता है कि वन अधिकार अधिनियम से जुड़े मामलों में बहु-विभागीय समन्वय को प्राथमिकता दी जा रही है। बैठक के माध्यम से अधिकारियों को कार्यों की प्रगति, प्रक्रियाधीन मामलों और आवश्यक कार्रवाई के संबंध में मार्गदर्शन मिला। जिला प्रशासन की ओर से वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप पात्र हितग्राहियों को उनके अधिकार उपलब्ध कराने तथा संबंधित प्रक्रियाओं को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने का प्रयास जारी रहेगा। समीक्षा बैठक के माध्यम से प्रशासन ने वन अधिकार से जुड़े मामलों की निगरानी और विभागीय समन्वय को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
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