
बिहार चुनाव लेकर जो खबरें मिल रही है उसमें पुनः महागठबंधन गलती पर गलती कर रही है और हर घर मेँ नौकरी का वादा तेजस्वी यादव कर रहे है प्रशांत किशोर टी वी और सुर्खियों मेँ बने हुए हैं नौकरी देना हर घर मेँ किस आधार पर मिलेगा क्योंकि नौकरी के लिए पढ़ाई करना जरुरी है नौकरी किस तरह का होगा ऐ भी घोषणा करना चाहिए क्योंकि शिक्षा ही आपकी नौकरी को सुनिश्चित करती है अतः पहले शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए वहाँ अधिकांश नौकरी शिक्षक की होती है अगर शिक्षा मेँ पूर्ण पारंगत नहीं है तो शिक्षक क्या पढ़ाएंगे अतः बेरोजगार को नौकरी मिलना अच्छी बात है लेकिन नौकरी किस पद की मिलेगी क्योंकि हर घर से टैलेंटेड कैंडिडेट तो होंगे नहीं और जो टैलेंटेड नहीं है उसे किस पद पर नौकरी मिलेगी नीतीश कुमार जीत की बुनियाद लिख चुके हैं क्योंकि वो चुपचाप अपना काम कर रहें हैं उनका काम शिक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर और महिलाओ के लिए एक अच्छा काम हुआ है भाई वो एक इंजीनियर हैं उनको नॉलेज है कहाँ क्या करना है पटना मेँ किसी से पूछ लीजिये एक मरीन ड्राइव पटना मेँ भी बना है इतना आसान नहीं है रास्ते को तोड़ कर वहाँ पुल का निर्माण करवाना इसलिए उनको सुशासन बाबू कहा जाता है महागठबंधन मेँ कई ऐसे दल हैं जो माओवादी विचारधारा के हैं उनका सरकार मेँ क्या भूमिका होगी इधर एनडीए मेँ बीजेपी और जेडीयू के साथ मिली है तो 150 सीट तक आराम से प्राप्त कर लेगी इधर कुछ सालों मेँ ऐसी स्थिति हुई है जो जनता को मालूम है लेकिन मीडिया को नहीं जहाँ मेरा गाँव था वहाँ पैदल पहुंचना एक कठिन चुनौती थी वहाँ कार चली गई गावों मेँ बिजली और महिलाओ को बड़ी संख्या मेँ नौकरी मिली है इधर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया और उत्तर प्रदेश की चार बार की मुख्यमंत्री मायावती ने मंगलवार को लखनऊ में बसपा संस्थापक कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस पर आयोजित विशाल रैली को संबोधित किया और समाजवादी पार्टी (सपा) पर जमकर निशाना साधा। इस दौरान उन्होंने योगी आदित्यनाथ सरकार की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने स्मारक स्थलों के रखरखाव के लिए टिकट से मिली राशि का सही उपयोग किया बसपा सुप्रीमो मायावती को काशीराम के परिनिर्वाण दिवस पर बीजेपी की तारीफ करना भी बिहार चुनाव मेँ महागठबंधन के लिए बुरी खबर है और इससे वहाँ के कांग्रेस नेता अजय राय ने कहा कि संविधान की रक्षा हमेशा कांग्रेस ने की है। राहुल गांधी ने संविधान को आम आदमी, गरीब और खासकर दलित समाज के हित में लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मायावती का दलित प्रेम केवल दिखावा है और उनका काम हमेशा दलितों को ठगने तक सीमित रहा है। अजय राय ने कहा कि मायावती की रैली भाजपा द्वारा प्रायोजित है। यह रैली यूपी चुनाव के लिए नहीं बल्कि बिहार चुनाव के लिए आयोजित की गई है, ताकि बीजेपी को लाभ पहुंच सके। अजय राय ने मायावती पर यह भी आरोप लगाया कि मायावती दलित-मुस्लिम विरोधी हैं और भाजपा के कहने पर काम कर रही हैं, जबकि बिहार में दलित कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के साथ खड़ा हो गया है जहाँ इस मुद्दे पर चुप रहना चाहिए तो मुँह खोलने से और भी विवाद बढ़ेगा क्योंकि बसपा की सुप्रीमो मायावती के बयान के कुछ मायने हैं एक समय उप्र मेँ मुख्यमंत्री भी रही है अब इस मुद्दे को योगीजी बिहार के चुनाव मेँ याद दिलाएंगे और उप्र और बिहार मेँ आधे से अधिक लोगों का पारिवारिक संबंध है और ऐ सब जंगल राज के वजह से हुआ टैलेंट जिसमें था वो जंगलराज मेँ बिना पैसे या राजनीति सम्बन्ध ना होने के कारण बाहर बाहर निकलें और वहाँ उनको नौकरी मिली और जो महिला वहाँ थी उसने बिहार का हाल देखकर जंगलराज के डर से उप्र मेँ शादी हुआ अतः मायावती के जो विचार थे उसमें सच्चाई भी होगी तभी उसने कहा होगा और बीजेपी को इसका फायदा बिहार चुनाव मेँ अवश्य मिलेगा नीतीश कुमार का 2020 मेँ उनका सामना उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी और एलजेपी से हुआ जिसमें कई सीटों पर नुकसान हुआ अतः बिहार मेँ एनडीए मेँ जब चिराग पासवान केंद्रीय मंत्री हैं तो वो भी सोच समझ कर ही निर्णय लेंगे और जितनराम मांझी जी भी इस उम्र मेँ भी केंद्रीय मंत्री हैं और राज्य मेँ उनका पुत्र भी मंत्री है अतः वो भी कुछ कम सीटे ही सही लेकिन मान जायेंगे क्योंकि वो अब अपने लड़का को आगे करना चाहेंगे अतः बिहार मेँ ऐ कहना क़ोई बूढ़ा हो गया है शासन नहीं चला सकता ऐ ठीक नहीं है आखिर इतने उम्र मेँ भी जीतनराम मांझी का जनाधार कम नहीं हुआ है नीतीश कुमार के शासन की सबसे बड़ी उपलब्धि ऐ रही की बिहार में शराबबंदी हुई जिससे बिहार में राजस्व का भले ही नुकसान हुआ लेकिन रात में जो पीकर गाली गलौज रोड पर लेते रहते थे इससे उनके परिवार को तो परेशानी होती थी दूसरों को काफी परेशानी होती थी जोड़ जोड़ के आवाज़ से डर लगने लगता था और इससे बहुत से लोगों के लिवर या किडनी भी ख़राब हुई थी और घऱ बर्बाद हुआ शराब बहुत ही गन्दी चीज है जिसकी आदत लगी तो छूटेगी नहीं और इसके लिए पैसा भी चाहिए और फिर घर का समान बेचना जुए खेलने से गाँव शहर में बर्बादी हुई और महिलाओ पर अभद्र टीका टिप्पणी होती थी इसलिए बिहार में अब नहीं चाहिए जंगल राज क्योंकि जैसे ही गलती से भी सत्ता हाथ लगी देखिये डेली क़ोई ना क़ोई घटना चालू हो जायेगा लेकिन अभी भी बिहार माफियाओ से मुक्ति नहीं मिली है जो चुनाव में जीत और हार का ठेका लेते हैं क्योंकि डर से कुछ जगह पब्लिक वोट देने नहीं जाती है और ऐ बिहार के लिए बीजेपी के लिए अभी भी एक चूनौती है जिस दिन ऐ माफियाओ पर लगाम नहीं लगेगी बीजेपी को अपने दम पर सरकार बनाना मुश्किल होगा और छोटे छोटे दल मोल भाव या सीटों पर अपनी दावेदारी मजबूत करेंगे और ऐसे में किसी भी एक पार्टी का सरकार बनना मुश्किल है चिराग पासवान केंद्रीय मंत्री है अतः दूसरे गठबंधन में जाने से पहले जरूर ऐ सोचेंगे की उनके पिता अंत में किसकी विचारधारा से प्रभावित थे।अभी जब मोदीजी बिहार चुनाव में भाषण देने आएंगे तो फिर समझें एनडीए की जीत पक्की है क्योंकि बिहार का हर तपके पर उनकी नजर रहती है और भाषण में प्रणाम भी बोलते हैं यानि एक अच्छे नेता की पहचान होती है।
अशोक गोयल (रि.आई.पी.एस)
एडवोकेट एमपी हाई कोर्ट ग्वालियर









