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सितंबर माह में एनसीआरबी पोर्टल पर वित्तीय धोखाधड़ी की 581 शिकायतें दर्ज, साइबर अपराधों के विभिन्न तरीकों को लेकर पुलिस ने किया जागरूक
दुर्ग। डिजिटल लेनदेन और इंटरनेट के बढ़ते उपयोग के बीच साइबर अपराधों से बचाव के लिए दुर्ग रेंज पुलिस ने आम नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस द्वारा जारी जागरूकता संदेश में ऑनलाइन ठगी के विभिन्न तरीकों की जानकारी देते हुए लोगों को किसी भी अनजान लिंक, संदिग्ध कॉल, फर्जी निवेश योजना और लालच देने वाले प्रस्तावों से सावधान रहने की सलाह दी गई है। पुलिस के अनुसार, सितंबर माह में एनसीआरबी पोर्टल पर वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित 581 शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें 5 लाख रुपये से अधिक की चार शिकायतें तथा 3 लाख रुपये से अधिक की पांच शिकायतें शामिल बताई गई हैं। पुलिस इन मामलों में त्वरित एवं उचित कार्रवाई कर रही है। दुर्ग रेंज पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि साइबर अपराध का शिकार होने पर बिना देरी किए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें अथवा नजदीकी साइबर सेल या पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएं।
डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा बनी महत्वपूर्ण आवश्यकता
आज इंटरनेट, स्मार्टफोन, डिजिटल भुगतान और सोशल मीडिया लोगों के दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। ऑनलाइन बैंकिंग, खरीदारी, टिकट बुकिंग, निवेश और विभिन्न सरकारी सेवाओं का उपयोग पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक हुआ है। हालांकि, डिजिटल सुविधाओं के विस्तार के साथ साइबर ठगी के मामले भी सामने आते रहते हैं। साइबर अपराधी लोगों की व्यक्तिगत जानकारी, बैंकिंग विवरण और डिजिटल खातों तक पहुंच बनाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं।
दुर्ग रेंज पुलिस ने इसी विषय को ध्यान में रखते हुए नागरिकों को जागरूक रहने का संदेश दिया है। पुलिस का कहना है कि ऑनलाइन गतिविधियों के दौरान सावधानी बरतना और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की समय पर पहचान करना आवश्यक है। कई बार ठग आकर्षक पुरस्कार, मुफ्त उपहार, कम समय में अधिक मुनाफा, कम ब्याज पर ऋण या नौकरी का प्रस्ताव देकर लोगों को अपने जाल में फंसाने का प्रयास करते हैं।
ऐसी परिस्थितियों में किसी भी प्रस्ताव पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना जरूरी है। केवल किसी व्यक्ति की बातों, सोशल मीडिया पोस्ट या संदेश में किए गए दावों के आधार पर धन हस्तांतरित नहीं करना चाहिए। किसी भी अनजान व्यक्ति को बैंक खाते, ओटीपी, यूपीआई पिन, पासवर्ड या कार्ड से संबंधित गोपनीय जानकारी देना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।
सितंबर में वित्तीय धोखाधड़ी की 581 शिकायतें
दुर्ग रेंज पुलिस द्वारा जारी सूचना के अनुसार, सितंबर माह में एनसीआरबी पोर्टल पर वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित 581 शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें पांच लाख रुपये से अधिक की चार शिकायतें और तीन लाख रुपये से अधिक की पांच शिकायतों का उल्लेख किया गया है। पुलिस ने इन मामलों में त्वरित एवं उचित कार्रवाई किए जाने की जानकारी साझा की है।
वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में समय पर शिकायत दर्ज कराना महत्वपूर्ण होता है। यदि किसी व्यक्ति के खाते से अनधिकृत लेनदेन हो जाता है या वह ऑनलाइन ठगी का शिकार होता है, तो उसे तत्काल संबंधित बैंक और साइबर अपराध हेल्पलाइन को सूचना देनी चाहिए। समय पर जानकारी मिलने से संबंधित एजेंसियों को लेनदेन की जांच और उपलब्ध कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार कार्रवाई करने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, धनराशि वापस मिलने की गारंटी नहीं होती।
पुलिस की जागरूकता अपील का उद्देश्य नागरिकों को संभावित जोखिमों से परिचित कराना और ठगी की स्थिति में सही कदम उठाने के लिए प्रेरित करना है। साइबर अपराध से बचाव के लिए केवल तकनीकी जानकारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि सतर्क व्यवहार और गोपनीय जानकारी की सुरक्षा भी आवश्यक है।
अज्ञात एपीके फाइल डाउनलोड करने से बचें
दुर्ग रेंज पुलिस ने अज्ञात एपीके फाइलों को साइबर ठगी के संभावित माध्यमों में शामिल करते हुए सावधानी बरतने की अपील की है। एपीके फाइल एंड्रॉयड उपकरणों पर एप्लिकेशन इंस्टॉल करने के लिए इस्तेमाल की जाती है। यदि ऐसी फाइल किसी अनजान व्यक्ति या संदिग्ध वेबसाइट से प्राप्त होती है, तो उसे डाउनलोड या इंस्टॉल करने से मोबाइल की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
ठग कई बार बैंक, डाक विभाग, बिजली कंपनी, कुरियर सेवा या अन्य संस्थानों के नाम से संदेश भेजकर लोगों को फाइल इंस्टॉल करने के लिए कहते हैं। संदेश में यह दावा किया जा सकता है कि एप्लिकेशन इंस्टॉल करने से कोई सेवा चालू होगी, भुगतान प्राप्त होगा या खाते से जुड़ी समस्या दूर हो जाएगी। ऐसे दावों पर बिना सत्यापन भरोसा नहीं करना चाहिए।
मोबाइल में संदिग्ध एप्लिकेशन इंस्टॉल होने पर वह अनावश्यक अनुमतियां मांग सकता है या व्यक्तिगत जानकारी तक पहुंचने का प्रयास कर सकता है। इसलिए एप्लिकेशन केवल विश्वसनीय आधिकारिक स्रोतों से डाउनलोड करें। किसी अनजान फाइल को इंस्टॉल करने के लिए सुरक्षा सेटिंग्स बंद करने या अतिरिक्त अनुमति देने से बचें।
यदि किसी संदिग्ध फाइल को पहले ही इंस्टॉल कर लिया गया है और मोबाइल में असामान्य गतिविधि दिखाई दे रही है, तो संबंधित बैंकिंग गतिविधियों पर नजर रखें, आवश्यक सुरक्षा कदम उठाएं और जरूरत पड़ने पर बैंक तथा साइबर पुलिस से संपर्क करें।
फ्री लॉटरी टिकट और इनाम के नाम पर ठगी
साइबर ठगी का एक प्रचलित तरीका मुफ्त लॉटरी, पुरस्कार या इनाम मिलने का लालच देना है। ठग फोन कॉल, संदेश, ईमेल या सोशल मीडिया के माध्यम से दावा कर सकते हैं कि व्यक्ति ने कोई बड़ा पुरस्कार जीत लिया है। इसके बाद पुरस्कार जारी करने, पंजीकरण कराने या टैक्स के नाम पर पहले पैसे जमा करने को कहा जा सकता है।
ऐसे संदेशों में अक्सर सीमित समय का दबाव बनाया जाता है, ताकि व्यक्ति बिना जांच-पड़ताल के भुगतान कर दे। वास्तविकता यह है कि केवल संदेश प्राप्त होने या किसी अनजान व्यक्ति के दावा करने से पुरस्कार मिलने की पुष्टि नहीं होती।
नागरिकों को चाहिए कि किसी भी लॉटरी या पुरस्कार संबंधी दावे की आधिकारिक स्रोत से जांच करें। किसी अनजान व्यक्ति को पुरस्कार दिलाने के नाम पर अग्रिम भुगतान न करें। बैंकिंग विवरण, ओटीपी या डिजिटल भुगतान का गोपनीय पिन साझा करने से भी बचें।
यदि कोई व्यक्ति पुरस्कार के नाम पर धन की मांग करता है या संदिग्ध लिंक भेजता है, तो उस पर तुरंत भरोसा करने के बजाय संदेश की सत्यता जांचें। जागरूकता और सावधानी ऐसे धोखाधड़ी के तरीकों से बचने में मदद कर सकती है।
कैश रिवॉर्ड क्लेम के नाम पर सावधानी
ऑनलाइन कैश रिवॉर्ड या नकद इनाम प्राप्त करने का दावा भी साइबर ठगी का माध्यम बन सकता है। लोगों को संदेश भेजकर बताया जाता है कि उन्हें किसी योजना, खरीदारी या खाते के उपयोग के बदले नकद पुरस्कार मिला है। इसके बाद लिंक पर क्लिक करने, एप्लिकेशन डाउनलोड करने या बैंकिंग जानकारी दर्ज करने के लिए कहा जाता है।
ऐसी स्थिति में किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले भेजने वाले की पहचान और संदेश की प्रामाणिकता जांचना जरूरी है। किसी पुरस्कार को प्राप्त करने के लिए बैंक खाते की गोपनीय जानकारी, यूपीआई पिन या ओटीपी साझा नहीं करना चाहिए।
यदि कोई प्रस्ताव असामान्य रूप से आकर्षक दिखाई देता है और तुरंत कार्रवाई करने का दबाव बनाया जाता है, तो उसे संदेह की दृष्टि से देखना उचित है। आधिकारिक कंपनी या संस्था की वेबसाइट अथवा सत्यापित ग्राहक सहायता माध्यम से जानकारी प्राप्त करना अधिक सुरक्षित है।
फॉरेक्स ट्रेडिंग और निवेश के नाम पर धोखाधड़ी
दुर्ग रेंज पुलिस ने फॉरेक्स ट्रेडिंग से जुड़े प्रस्तावों के प्रति भी सतर्क रहने की अपील की है। विदेशी मुद्रा बाजार में कारोबार से संबंधित वास्तविक सेवाओं के साथ-साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले भी सामने आ सकते हैं। ठग लोगों को कम समय में भारी मुनाफा कमाने का लालच देकर धन निवेश करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
कुछ मामलों में नकली निवेश प्लेटफॉर्म पर खाते में बढ़ता हुआ मुनाफा दिखाया जाता है। शुरुआत में छोटी रकम निकालने की सुविधा देकर भरोसा पैदा किया जा सकता है, लेकिन बाद में बड़ी राशि जमा कराने या निकासी के लिए अतिरिक्त शुल्क मांगने की स्थिति बन सकती है।
निवेश करने से पहले संबंधित संस्था की वैधता, नियामकीय स्थिति और जोखिमों की जांच करना जरूरी है। केवल सोशल मीडिया पर उपलब्ध स्क्रीनशॉट, प्रशंसापत्र या किसी अनजान व्यक्ति के दावों के आधार पर निवेश का निर्णय नहीं लेना चाहिए। किसी भी निवेश में निश्चित और अत्यधिक लाभ का दावा संदेह का कारण हो सकता है।
नागरिकों को अपनी आर्थिक क्षमता और जोखिम सहने की सीमा को ध्यान में रखकर ही निवेश संबंधी निर्णय लेने चाहिए। किसी भी संदिग्ध निवेश प्रस्ताव की जानकारी संबंधित नियामक या सक्षम एजेंसी के आधिकारिक माध्यम से जांचना उचित है।
ऑनलाइन खरीदारी में फर्जी वेबसाइटों से सावधान रहें
ऑनलाइन खरीदारी की सुविधा के साथ नकली वेबसाइटों और फर्जी विक्रेताओं से जुड़ा जोखिम भी बना रहता है। ठग लोकप्रिय उत्पादों को बहुत कम कीमत पर उपलब्ध कराने का दावा कर सकते हैं। कई बार सोशल मीडिया पर विज्ञापन या संदेश के माध्यम से ऐसी वेबसाइटों का प्रचार किया जाता है, जिनका उद्देश्य भुगतान प्राप्त करना होता है।
ऑनलाइन खरीदारी करते समय वेबसाइट का पता, विक्रेता की पहचान, भुगतान के विकल्प, वापसी नीति और ग्राहक सहायता की जानकारी जांचें। केवल कम कीमत देखकर किसी अज्ञात विक्रेता को भुगतान करने से बचें।
किसी वेबसाइट पर बैंकिंग विवरण दर्ज करने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह सही और विश्वसनीय प्लेटफॉर्म है। किसी संदिग्ध लिंक से खुली वेबसाइट पर पासवर्ड या भुगतान संबंधी जानकारी दर्ज न करें। जहां संभव हो, भुगतान के सुरक्षित और सत्यापित माध्यमों का उपयोग करें।
यदि भुगतान के बाद उत्पाद नहीं मिलता या विक्रेता संपर्क बंद कर देता है, तो भुगतान का रिकॉर्ड, ऑर्डर विवरण और बातचीत के प्रमाण सुरक्षित रखें। इसके बाद संबंधित भुगतान सेवा और जरूरत के अनुसार पुलिस या साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत करें।
फेसबुक पर फर्जी प्रोफाइल और धोखाधड़ी से बचें
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर लोगों को धोखा देने की घटनाएं भी साइबर सुरक्षा की महत्वपूर्ण चुनौती हैं। कोई व्यक्ति परिचित, रिश्तेदार, अधिकारी या संस्था के नाम से नकली अकाउंट बनाकर धन मांग सकता है या व्यक्तिगत जानकारी प्राप्त करने का प्रयास कर सकता है।
यदि सोशल मीडिया पर किसी परिचित के नाम से अचानक पैसे मांगने का संदेश मिले, तो भुगतान करने से पहले उस व्यक्ति से किसी दूसरे विश्वसनीय माध्यम से पुष्टि करें। केवल प्रोफाइल फोटो, नाम या पुराने संदेश देखकर पहचान पर भरोसा न करें।
अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल की गोपनीयता सेटिंग्स का उपयोग करें और अनजान लोगों को व्यक्तिगत जानकारी उपलब्ध कराने से बचें। पासवर्ड मजबूत रखें तथा जहां सुविधा उपलब्ध हो, दो-स्तरीय प्रमाणीकरण का उपयोग करें।
यदि कोई फर्जी प्रोफाइल आपके नाम या फोटो का गलत इस्तेमाल कर रही है, तो संबंधित प्लेटफॉर्म पर शिकायत दर्ज कराएं और आवश्यक होने पर साइबर पुलिस को जानकारी दें। स्क्रीनशॉट, प्रोफाइल लिंक और संबंधित संदेश सुरक्षित रखना जांच में मददगार हो सकता है।
इंस्टाग्राम पर फर्जी मार्केटिंग और निवेश प्रस्ताव
इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी फर्जी मार्केटिंग, नकली निवेश योजनाओं और भ्रामक ऑफर के माध्यम से लोगों को निशाना बनाया जा सकता है। ठग किसी लोकप्रिय ब्रांड, कारोबारी या सोशल मीडिया प्रभावशाली व्यक्ति की नकल करते हुए प्रोफाइल बना सकते हैं।
कई बार लोगों को कम कीमत पर सामान उपलब्ध कराने, घर बैठे कमाई करने या किसी निवेश योजना में शामिल होने के लिए संदेश भेजे जाते हैं। ऐसे प्रस्तावों में अग्रिम भुगतान करने या निजी जानकारी साझा करने का दबाव बनाया जा सकता है।
किसी भी कारोबारी प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले उसकी विश्वसनीयता जांचें। आधिकारिक वेबसाइट और सत्यापित संपर्क माध्यमों से पुष्टि करें। अनजान खातों को बैंकिंग जानकारी, पहचान संबंधी दस्तावेज या ओटीपी देने से बचें।
यदि कोई खाता संदिग्ध दिखाई देता है, तो उससे लेनदेन करने के बजाय उसकी रिपोर्ट प्लेटफॉर्म पर करें। सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाला विज्ञापन या प्रचार अपने आप में किसी प्रस्ताव की वैधता का प्रमाण नहीं होता।
मंदिर और पूजा के नाम पर ऑनलाइन दान में सावधानी
धार्मिक आस्था का लाभ उठाकर भी लोगों को ठगी का शिकार बनाने के प्रयास हो सकते हैं। किसी मंदिर, धार्मिक संस्था या पूजा आयोजन के नाम पर फर्जी खाते और नकली भुगतान लिंक तैयार किए जा सकते हैं। लोगों से दान या पूजा के लिए धन भेजने की अपील की जाती है, जबकि प्राप्त राशि किसी अनधिकृत व्यक्ति के खाते में जा सकती है।
दान करने से पहले संबंधित मंदिर या संस्था के आधिकारिक माध्यम से भुगतान विवरण की पुष्टि करें। किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए क्यूआर कोड या लिंक पर बिना जांच के भुगतान न करें। धार्मिक संदेश या भावनात्मक अपील के आधार पर जल्दबाजी में धन हस्तांतरित करने से बचना चाहिए।
यदि कोई व्यक्ति दान के नाम पर संदिग्ध तरीके से धन मांगता है, तो संस्था से सीधे संपर्क करके जानकारी प्राप्त करें। भुगतान करने के बाद रसीद और लेनदेन संबंधी विवरण सुरक्षित रखें।
एटीएम और क्रेडिट कार्ड ब्लॉक होने के नाम पर ठगी
साइबर अपराधी बैंक अधिकारी बनकर फोन कर सकते हैं और दावा कर सकते हैं कि एटीएम या क्रेडिट कार्ड बंद होने वाला है। इसके बाद कार्ड नंबर, सीवीवी, ओटीपी, पिन या अन्य गोपनीय जानकारी मांगी जा सकती है।
बैंकिंग संबंधी किसी समस्या के समाधान के लिए अनजान कॉलर को गोपनीय जानकारी देना जोखिमपूर्ण है। बैंक के नाम से आया संदेश भी अपने आप में प्रामाणिक नहीं माना जाना चाहिए। बैंक से संपर्क करने के लिए उसकी आधिकारिक वेबसाइट, कार्ड पर दिए गए सत्यापित नंबर या आधिकारिक बैंकिंग एप्लिकेशन का उपयोग करें।
यदि कोई व्यक्ति कार्ड ब्लॉक होने की धमकी देकर तुरंत जानकारी मांगता है, तो घबराकर निर्देशों का पालन न करें। बैंकिंग विवरण या ओटीपी साझा करने से खाते से अनधिकृत लेनदेन का जोखिम बढ़ सकता है।
कार्ड से संबंधित वास्तविक समस्या होने पर बैंक के आधिकारिक ग्राहक सहायता माध्यम से पुष्टि करें। यदि खाते में संदिग्ध लेनदेन दिखाई दे, तो तत्काल बैंक को सूचना दें और साइबर अपराध हेल्पलाइन से संपर्क करें।
अनब्लॉक और बैंक केवाईसी अपडेट के नाम पर फर्जी संदेश
कई बार लोगों को बैंक खाता बंद होने, केवाईसी अपडेट नहीं होने या खाता अनब्लॉक कराने के नाम पर संदेश भेजे जाते हैं। इन संदेशों में एक लिंक दिया जाता है, जिसके माध्यम से व्यक्तिगत और बैंकिंग जानकारी भरने के लिए कहा जाता है।
नागरिकों को ऐसे संदेशों में दिए गए लिंक पर सीधे क्लिक करने से बचना चाहिए। बैंक खाते या केवाईसी से संबंधित वास्तविक जानकारी के लिए बैंक की आधिकारिक वेबसाइट, शाखा या सत्यापित ग्राहक सहायता माध्यम का उपयोग करें।
किसी भी अज्ञात वेबसाइट पर पासवर्ड, ओटीपी, कार्ड विवरण या पहचान से जुड़ी संवेदनशील जानकारी दर्ज न करें। यदि संदेश में तुरंत कार्रवाई नहीं करने पर खाता बंद होने की धमकी दी गई है, तो पहले उसकी सत्यता जांचें।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी
दुर्ग रेंज पुलिस की जागरूकता सूची में डिजिटल अरेस्ट का तरीका भी शामिल है। इस प्रकार की ठगी में अपराधी स्वयं को पुलिस, जांच एजेंसी या अन्य सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर लोगों को फोन या वीडियो कॉल करते हैं। वे किसी कथित अपराध, पार्सल, बैंक खाते या पहचान पत्र के दुरुपयोग का डर दिखाकर व्यक्ति पर दबाव बना सकते हैं।
इसके बाद पीड़ित को घर में रहने, किसी से संपर्क न करने, वीडियो कॉल चालू रखने या पैसे हस्तांतरित करने के लिए कहा जा सकता है। ऐसी धमकियों के कारण लोग घबराकर अपनी बचत या अन्य धनराशि भेज देते हैं।
नागरिकों को याद रखना चाहिए कि केवल फोन या वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति के खुद को अधिकारी बताने से उसकी पहचान प्रमाणित नहीं होती। घबराहट में धन हस्तांतरित न करें और किसी भी कथित जांच के नाम पर बैंकिंग गोपनीय जानकारी साझा न करें।
ऐसी स्थिति में कॉल समाप्त करके संबंधित विभाग के आधिकारिक संपर्क माध्यम से जानकारी की पुष्टि करें। यदि पैसे की मांग, धमकी या संदिग्ध गतिविधि सामने आती है, तो साइबर हेल्पलाइन 1930 और पुलिस से संपर्क करें।
कम ब्याज दर पर ऋण देने के नाम पर ठगी
ऑनलाइन कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने के प्रस्ताव भी सावधानी की मांग करते हैं। ठग लोगों को तुरंत लोन मंजूर कराने या बिना अधिक दस्तावेजों के बड़ी राशि दिलाने का लालच दे सकते हैं। इसके बाद आवेदन शुल्क, बीमा, प्रोसेसिंग फीस या अन्य नामों पर पहले भुगतान मांगा जा सकता है।
ऋण लेने से पहले संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था की विश्वसनीयता और शर्तों की जांच करना आवश्यक है। किसी अनजान व्यक्ति के व्यक्तिगत खाते में अग्रिम भुगतान करने से पहले विशेष सावधानी बरतें।
ऋण आवेदन के दौरान पहचान संबंधी दस्तावेज साझा करने की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन उन्हें केवल सत्यापित और अधिकृत माध्यम से ही उपलब्ध कराना चाहिए। किसी संदिग्ध एप्लिकेशन को अनावश्यक मोबाइल अनुमतियां देने से भी बचें।
यदि कोई ऋण प्रस्ताव असामान्य रूप से आकर्षक दिखाई देता है या तुरंत भुगतान करने का दबाव बनाया जाता है, तो पहले उसकी सत्यता की जांच करें।
फर्जी पार्ट-टाइम जॉब ऑफर से रहें सावधान
घर बैठे कमाई, ऑनलाइन काम और पार्ट-टाइम नौकरी के नाम पर भी लोगों को ठगी का शिकार बनाया जा सकता है। ऐसे प्रस्तावों में शुरुआत में आसान काम और अच्छी कमाई का दावा किया जाता है। बाद में काम जारी रखने, अगला टास्क खोलने या अधिक मुनाफा प्राप्त करने के लिए पैसे जमा करने को कहा जा सकता है।
नागरिकों को चाहिए कि किसी नौकरी के प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले कंपनी की पहचान और काम की शर्तें जांचें। नौकरी देने के नाम पर अनावश्यक अग्रिम भुगतान, सिक्योरिटी डिपॉजिट या संदिग्ध निवेश की मांग पर सावधानी बरतें।
यदि किसी व्यक्ति को ऑनलाइन टास्क के बदले कमाई का भरोसा देकर लगातार पैसे जमा कराने को कहा जा रहा है, तो आगे भुगतान करने से पहले स्थिति की जांच करें। वास्तविक नौकरी के प्रस्तावों में कंपनी का स्पष्ट विवरण, जिम्मेदारियों की जानकारी और संपर्क के सत्यापित माध्यम होने चाहिए।
फर्जी आरटीओ ई-चालान लिंक से बचें
दुर्ग रेंज पुलिस ने फर्जी आरटीओ ई-चालान के एपीके लिंक से भी सावधान रहने की अपील की है। साइबर अपराधी यातायात चालान के नाम पर संदेश भेजकर लोगों को भुगतान करने या एप्लिकेशन डाउनलोड करने के लिए कह सकते हैं।
ऐसे संदेशों में चालान लंबित होने, वाहन पंजीकरण प्रभावित होने या तत्काल भुगतान नहीं करने पर कार्रवाई की धमकी दी जा सकती है। कुछ संदेशों में संदिग्ध लिंक या फाइल दी जाती है, जिसके माध्यम से मोबाइल की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
किसी भी ई-चालान की वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित सरकारी पोर्टल का आधिकारिक पता स्वयं दर्ज करके जानकारी प्राप्त करें। अनजान संदेशों में दिए गए लिंक पर क्लिक करने या एपीके फाइल इंस्टॉल करने से बचें।
यदि चालान वास्तव में लंबित है, तो उसकी जानकारी आधिकारिक माध्यम से जांचें और भुगतान की प्रक्रिया भी उसी माध्यम से पूरी करें। केवल संदेश में लिखी जानकारी के आधार पर भुगतान न करें।
साइबर ठगी होने पर तुरंत क्या करें?
साइबर अपराध का शिकार होने पर समय पर कदम उठाना महत्वपूर्ण है। यदि किसी व्यक्ति के खाते से अनधिकृत राशि निकल जाती है या वह धोखाधड़ी के कारण भुगतान कर देता है, तो उसे निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:
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1930 पर संपर्क करें: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की सूचना तुरंत साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दें।
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ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें: भारत सरकार के आधिकारिक साइबर अपराध पोर्टल
cybercrime.gov.inपर उपलब्ध प्रक्रिया के अनुसार शिकायत दर्ज करें। -
बैंक को सूचित करें: अपने बैंक या संबंधित भुगतान सेवा प्रदाता को तत्काल जानकारी दें और खाते या भुगतान को सुरक्षित करने के लिए आवश्यक कदम पूछें।
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सबूत सुरक्षित रखें: लेनदेन का विवरण, संदेश, कॉल संबंधी जानकारी, स्क्रीनशॉट, वेबसाइट लिंक और शिकायत संख्या सुरक्षित रखें।
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पुलिस से संपर्क करें: जरूरत के अनुसार नजदीकी पुलिस थाने या साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराएं।
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पासवर्ड बदलें: यदि किसी खाते की जानकारी उजागर हो गई है, तो सुरक्षित उपकरण से संबंधित पासवर्ड बदलें और अतिरिक्त सुरक्षा सुविधाएं सक्रिय करें।
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आगे भुगतान न करें: ठगी की राशि वापस दिलाने के नाम पर अतिरिक्त फीस मांगने वाले अनजान व्यक्तियों से सावधान रहें।
शिकायत के समय सही जानकारी और उपलब्ध प्रमाण देना उपयोगी होता है। समय पर सूचना देने से संबंधित एजेंसियों को कार्रवाई करने का अवसर मिल सकता है, हालांकि राशि की वापसी मामले की परिस्थितियों और जांच पर निर्भर करती है।
नागरिकों के लिए साइबर सुरक्षा के जरूरी नियम
दुर्ग रेंज पुलिस की अपील के अनुरूप नागरिक कुछ सामान्य सावधानियां अपनाकर साइबर जोखिम कम कर सकते हैं।
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किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता जांचें।
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ओटीपी, यूपीआई पिन, पासवर्ड और कार्ड का सीवीवी किसी के साथ साझा न करें।
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मोबाइल में अज्ञात स्रोत से एपीके फाइल डाउनलोड या इंस्टॉल न करें।
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बैंक और सरकारी विभागों के नाम से आए संदेशों की आधिकारिक माध्यम से पुष्टि करें।
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सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल और असामान्य धन संबंधी अनुरोधों से सावधान रहें।
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ऑनलाइन निवेश या नौकरी के प्रस्तावों में अग्रिम भुगतान की मांग होने पर जांच करें।
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मोबाइल और एप्लिकेशन को समय-समय पर अपडेट रखें।
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मजबूत पासवर्ड तथा जहां उपलब्ध हो, दो-स्तरीय प्रमाणीकरण का उपयोग करें।
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बैंक खातों और डिजिटल भुगतान की सूचनाओं पर नजर रखें।
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परिवार के वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों को भी साइबर ठगी के तरीकों की जानकारी दें।









