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एआई तकनीक के जरिए साइबर ठगी से सावधान रहें, डिजिटल सुरक्षा के लिए जागरूकता जरूरी

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नेशनल साइबर सिक्योरिटी अवेयरनेस मंथ 2026 के अंतर्गत जनहित संदेश, सोशल मीडिया से फोटो-वीडियो चुराकर बनाई जा रही नकली पहचान और आवाज के जरिए लोगों को निशाना बनाने के प्रति सतर्क रहने की अपील
डिजिटल तकनीक के तेजी से बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधियों ने ठगी करने के नए-नए तरीके अपनाने शुरू कर दिए हैं। इंटरनेट, सोशल मीडिया, ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और वीडियो कॉल जैसी सुविधाओं ने आम नागरिकों के जीवन को आसान बनाया है, लेकिन इनके दुरुपयोग से आर्थिक धोखाधड़ी तथा निजी जानकारी के गलत इस्तेमाल का खतरा भी बढ़ा है। विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की सहायता से किसी व्यक्ति की फोटो, वीडियो और आवाज की नकल तैयार करके लोगों को भ्रमित किया जा सकता है। साइबर सुरक्षा जागरूकता से संबंधित जारी पोस्टर में इसी तरह की ठगी के तरीकों को समझाते हुए नागरिकों को सावधान रहने का संदेश दिया गया है। पोस्टर का मुख्य संदेश है—‘ठगी का तरीका’—और इसके माध्यम से बताया गया है कि अपराधी सोशल मीडिया तथा अन्य ऑनलाइन माध्यमों से लोगों की तस्वीरें, वीडियो और आवाज के नमूने जुटाकर उनका दुरुपयोग कर सकते हैं। इस प्रकार तैयार की गई नकली सामग्री का इस्तेमाल किसी परिचित, परिवार के सदस्य, वरिष्ठ अधिकारी या भरोसेमंद व्यक्ति के रूप में सामने आने के लिए किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में सामने वाले की आवाज या तस्वीर परिचित होने के बावजूद उसकी पहचान को पूरी तरह प्रमाणित नहीं माना जाना चाहिए। आम नागरिकों के लिए यह समझना जरूरी है कि इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री को बिना सावधानी साझा करना या किसी अनजान व्यक्ति को निजी जानकारी देना जोखिम भरा हो सकता है। डिजिटल दुनिया में सुरक्षा का अर्थ केवल मोबाइल फोन में पासवर्ड लगाना नहीं है, बल्कि ऑनलाइन व्यवहार में सतर्कता बरतना, जानकारी साझा करने से पहले उसकी आवश्यकता पर विचार करना और किसी भी संदिग्ध संदेश या कॉल की सत्यता की जांच करना भी है। साइबर अपराधी कई बार लोगों की भावनाओं, विश्वास और जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। वे किसी परिचित के संकट में होने, तत्काल पैसे की आवश्यकता पड़ने या किसी जरूरी काम के लिए गोपनीय जानकारी मांगने का बहाना बना सकते हैं। इसलिए किसी भी असामान्य अनुरोध पर तुरंत कार्रवाई करने के बजाय रुककर सोचने और स्वतंत्र माध्यम से पुष्टि करने की आदत विकसित करना आवश्यक है। साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विशेषज्ञों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक मोबाइल और इंटरनेट उपयोगकर्ता की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि नागरिक डिजिटल सुविधाओं का इस्तेमाल समझदारी से करें, अपनी निजी जानकारी की सुरक्षा करें और दूसरों को भी जागरूक बनाएं, तो ऑनलाइन धोखाधड़ी के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण सहायता मिल सकती है।
पोस्टर में बताया गया है कि साइबर ठग सोशल मीडिया या अन्य ऑनलाइन स्रोतों से किसी व्यक्ति की फोटो, वीडियो अथवा आवाज के नमूने एकत्र कर सकते हैं। इसके बाद एआई आधारित तकनीकों की मदद से ऐसी सामग्री तैयार की जा सकती है, जो देखने या सुनने में वास्तविक प्रतीत हो। उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति की सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तस्वीरों का इस्तेमाल करके नकली प्रोफाइल बनाई जा सकती है, जबकि उसकी आवाज के नमूनों से मिलती-जुलती आवाज तैयार कर परिचितों को फोन किया जा सकता है। इसी तरह वीडियो या ऑडियो संदेशों के जरिए ऐसा भ्रम पैदा किया जा सकता है कि संदेश किसी वास्तविक व्यक्ति ने ही भेजा है। इस प्रकार की तकनीक को सामान्य रूप से एआई आधारित प्रतिरूपण और कुछ परिस्थितियों में डीपफेक सामग्री के रूप में समझा जा सकता है। इसका दुरुपयोग किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने, परिवार के सदस्यों को भ्रमित करने, आर्थिक सहायता के नाम पर पैसे मांगने या संवेदनशील जानकारी हासिल करने के लिए किया जा सकता है। नागरिकों को चाहिए कि वे सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें, निजी वीडियो और व्यक्तिगत जानकारी साझा करते समय सावधानी बरतें। अपने खातों की गोपनीयता संबंधी सेटिंग्स की समीक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि अनावश्यक रूप से व्यक्तिगत सामग्री सार्वजनिक न हो। सोशल मीडिया पर किसी परिचित के नाम से आया संदेश या वीडियो अपने आप में उसकी वास्तविकता का प्रमाण नहीं है। यदि कोई परिचित अचानक पैसे मांगता है, बैंक से संबंधित जानकारी चाहता है या किसी गोपनीय प्रक्रिया को तुरंत पूरा करने का दबाव डालता है, तो उसके पुराने संपर्क नंबर पर फोन करके अथवा आमने-सामने पुष्टि करके ही आगे बढ़ना चाहिए। यदि फोन पर आवाज जानी-पहचानी लग रही हो, तब भी केवल आवाज के आधार पर विश्वास नहीं करना चाहिए, क्योंकि आवाज की नकल करने वाली तकनीक का इस्तेमाल संभव है। परिवार के सदस्यों के बीच आपात स्थिति में पहचान की पुष्टि करने का कोई अलग तरीका तय किया जा सकता है, ताकि किसी संदिग्ध कॉल के आधार पर जल्दबाजी में पैसा न भेजा जाए। कार्यालयों और संस्थानों में भी वित्तीय लेन-देन या संवेदनशील जानकारी से जुड़े अनुरोधों की पुष्टि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जानी चाहिए। किसी भी व्यक्ति को केवल इसलिए भरोसेमंद नहीं मान लेना चाहिए कि उसके संदेश में सही नाम, फोटो, पद या परिचित आवाज दिखाई देती है। साइबर सुरक्षा के लिए आवश्यक है कि नागरिक तकनीक की उपयोगिता को स्वीकार करते हुए उसके संभावित दुरुपयोग के प्रति भी जागरूक रहें। किसी सामग्री के वास्तविक होने पर संदेह हो, तो उसे आगे प्रसारित करने से बचना चाहिए। इससे गलत जानकारी फैलने, किसी व्यक्ति की छवि खराब होने और दूसरे लोगों के ठगी का शिकार बनने की आशंका कम की जा सकती है।
साइबर जागरूकता पोस्टर का तीसरा महत्वपूर्ण संदेश उन संदिग्ध कॉल, वॉइस नोट और वीडियो संदेशों को लेकर है, जिनमें किसी पीड़ित से तत्काल पैसा, ओटीपी, बैंक खाते की जानकारी या अन्य गोपनीय विवरण मांगे जाते हैं। साइबर अपराधी कई बार किसी विश्वसनीय व्यक्ति, परिवार के सदस्य, वरिष्ठ अधिकारी या किसी संस्था के प्रतिनिधि की तरह बात करते हैं। वे सामने वाले को यह विश्वास दिलाने की कोशिश कर सकते हैं कि कोई आपात स्थिति उत्पन्न हो गई है और तुरंत पैसा भेजना आवश्यक है। कुछ मामलों में वे खाते से जुड़ी जानकारी, पहचान संबंधी विवरण, ओटीपी या अन्य गोपनीय जानकारी मांगकर उसका गलत इस्तेमाल करने का प्रयास करते हैं। ऐसे समय में घबराहट और जल्दबाजी व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। इसलिए सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है कि किसी भी अनजान कॉल, संदेश या वीडियो के आधार पर जल्दबाजी में वित्तीय लेन-देन न करें। बैंक, भुगतान सेवा या किसी अन्य संस्था के नाम पर संपर्क करने वाला व्यक्ति यदि ओटीपी, पिन, पासवर्ड या अन्य गोपनीय जानकारी मांगता है, तो इसे गंभीर चेतावनी के रूप में लें। किसी भी परिस्थिति में अपना एटीएम पिन, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड, यूपीआई पिन या ओटीपी किसी दूसरे व्यक्ति को न बताएं। यदि कोई परिचित आपात स्थिति बताकर पैसे मांगता है, तो उसके सामान्य और पहले से ज्ञात फोन नंबर पर अलग से संपर्क करके पुष्टि करें। यदि फोन पर बात करना संभव न हो, तो परिवार के किसी अन्य सदस्य या संबंधित व्यक्ति से स्वतंत्र रूप से जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करें। किसी संदेश में भेजे गए लिंक पर बिना जांच किए क्लिक न करें और अनजान स्रोत से प्राप्त ऐप या फाइल डाउनलोड करने से बचें। कई बार संदिग्ध लिंक के माध्यम से नकली वेबसाइट पर ले जाया जाता है, जहां उपयोगकर्ता से बैंकिंग या व्यक्तिगत जानकारी भरने को कहा जाता है। इसी प्रकार, किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन साझा करने वाले ऐप का उपयोग करना या फोन का रिमोट एक्सेस देना भी जोखिम पैदा कर सकता है। यदि किसी व्यक्ति को यह संदेह हो कि उसके खाते या मोबाइल की जानकारी किसी गलत हाथ में पहुंच गई है, तो उसे तुरंत संबंधित बैंक या सेवा प्रदाता से संपर्क कर सुरक्षा के आवश्यक कदम उठाने चाहिए। नागरिकों को यह भी समझना चाहिए कि असली पहचान की पुष्टि करने के लिए केवल वीडियो कॉल पर्याप्त नहीं है, क्योंकि वीडियो सामग्री में भी बदलाव या नकली प्रस्तुति संभव है। किसी भी गंभीर आर्थिक अनुरोध की पुष्टि अलग माध्यम से करना अधिक सुरक्षित है। परिवारों में बच्चों, बुजुर्गों और डिजिटल भुगतान का कम अनुभव रखने वाले सदस्यों को विशेष रूप से जागरूक करना चाहिए, ताकि वे किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश के दबाव में आकर अपनी गोपनीय जानकारी साझा न करें। सावधानी, सत्यापन और गोपनीयता के नियमों का पालन करके अनेक प्रकार की साइबर ठगी से बचाव किया जा सकता है।
पोस्टर के चौथे भाग में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि एआई से बनाई गई सामग्री को वास्तविक समझकर कोई व्यक्ति पैसे ट्रांसफर कर सकता है या संवेदनशील जानकारी साझा कर सकता है। यही साइबर अपराध का एक महत्वपूर्ण खतरा है, क्योंकि तकनीक से तैयार की गई नकली सामग्री कई बार विश्वसनीय दिखाई देती है। यदि किसी व्यक्ति को किसी परिचित की आवाज में संदेश मिलता है कि वह मुसीबत में है और तत्काल आर्थिक सहायता चाहता है, तो भावनात्मक दबाव के कारण वह बिना जांच किए पैसे भेज सकता है। इसी तरह नकली वीडियो या किसी अधिकारी की तरह दिखाई देने वाली छवि के जरिए किसी व्यक्ति को डराने, भ्रमित करने या उससे जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा सकती है। ऐसी घटनाओं से बचने के लिए प्रत्येक नागरिक को कुछ बुनियादी सुरक्षा नियम अपनाने चाहिए। सबसे पहले, किसी भी संदिग्ध अनुरोध की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। दूसरे, किसी भी व्यक्ति को गोपनीय बैंकिंग जानकारी, ओटीपी, पिन या पासवर्ड न दें। तीसरे, अनजान लिंक, संदिग्ध क्यूआर कोड और अपरिचित ऐप के प्रति सावधान रहें। चौथे, सोशल मीडिया खातों पर मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड का उपयोग करें तथा जहां सुविधा उपलब्ध हो, वहां बहु-कारक प्रमाणीकरण सक्रिय रखें। पांचवें, मोबाइल और कंप्यूटर के ऑपरेटिंग सिस्टम तथा सुरक्षा संबंधी ऐप को नियमित रूप से अपडेट करें। छठे, अपने सोशल मीडिया खातों की गोपनीयता सेटिंग्स की समीक्षा करें और सार्वजनिक रूप से साझा की जाने वाली व्यक्तिगत सामग्री सीमित रखें। सातवें, यदि कोई व्यक्ति किसी सरकारी अधिकारी, बैंक कर्मचारी या प्रतिष्ठित संस्था का प्रतिनिधि बनकर संपर्क करे, तो उसकी पहचान की पुष्टि संबंधित संस्था के आधिकारिक माध्यम से करें। किसी संदेश में सरकारी चिह्न, संस्था का लोगो या परिचित नाम दिखाई देना अपने आप में उसकी प्रामाणिकता साबित नहीं करता। इसके अलावा, डिजिटल भुगतान करते समय प्राप्तकर्ता का नाम और भुगतान संबंधी विवरण ध्यान से जांचना चाहिए। पैसे प्राप्त करने के नाम पर यूपीआई पिन दर्ज करने या अनजान व्यक्ति के निर्देश पर कोई वित्तीय प्रक्रिया पूरी करने से पहले उसकी आवश्यकता और सत्यता समझना जरूरी है। यदि किसी को संदेह हो कि उसके साथ धोखाधड़ी का प्रयास किया जा रहा है, तो उसे बातचीत रोककर संबंधित व्यक्ति या संस्था से स्वतंत्र रूप से संपर्क करना चाहिए। यदि धोखाधड़ी हो चुकी है, तो समय न गंवाते हुए अपने बैंक को सूचना देना, उपलब्ध डिजिटल प्रमाण सुरक्षित रखना और उचित शिकायत दर्ज कराना महत्वपूर्ण है। भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 और आधिकारिक पोर्टल https://cybercrime.gov.in का उपयोग किया जा सकता है। वित्तीय धोखाधड़ी होने पर जल्द से जल्द शिकायत करना उपयोगी है, क्योंकि शीघ्र सूचना मिलने से संबंधित एजेंसियों को लेन-देन की जांच और संभावित धनराशि रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का अवसर मिल सकता है। हालांकि शिकायत दर्ज होने से धन वापस मिलने की गारंटी नहीं होती, इसलिए रोकथाम और त्वरित सूचना दोनों महत्वपूर्ण हैं। नागरिकों को संदिग्ध संदेश, कॉल विवरण, लेन-देन की रसीद और अन्य संबंधित प्रमाण सुरक्षित रखने चाहिए तथा उन्हें सार्वजनिक सोशल मीडिया पर साझा करने के बजाय संबंधित बैंक और अधिकृत शिकायत माध्यमों तक पहुंचाना चाहिए।
साइबर सुरक्षा जागरूकता का उद्देश्य केवल अपराध के तरीकों की जानकारी देना नहीं, बल्कि समाज में सुरक्षित डिजिटल व्यवहार की संस्कृति विकसित करना भी है। ‘Build a Culture of Cyber Hygiene’ अर्थात साइबर स्वच्छता की संस्कृति विकसित करने का संदेश इसी विचार को सामने रखता है। जिस प्रकार शारीरिक स्वच्छता के लिए नियमित आदतें जरूरी होती हैं, उसी प्रकार डिजिटल सुरक्षा के लिए भी कुछ सावधानियों को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना आवश्यक है। मोबाइल फोन में स्क्रीन लॉक लगाना, खातों के पासवर्ड सुरक्षित रखना, अनावश्यक ऐप की अनुमतियों की समीक्षा करना, नियमित रूप से सॉफ्टवेयर अपडेट करना, संदिग्ध लिंक से बचना और किसी भी वित्तीय अनुरोध की पुष्टि करना डिजिटल स्वच्छता के महत्वपूर्ण अंग हैं। बच्चों और किशोरों को ऑनलाइन गोपनीयता, साइबर बुलिंग, नकली प्रोफाइल और व्यक्तिगत तस्वीरों के दुरुपयोग के बारे में सरल भाषा में समझाया जाना चाहिए। बुजुर्गों को विशेष रूप से यह जानकारी देना उपयोगी है कि बैंक या सरकारी सहायता के नाम पर फोन करने वाला हर व्यक्ति वास्तविक प्रतिनिधि नहीं होता। उन्हें यह स्पष्ट बताया जाना चाहिए कि किसी भी परिस्थिति में फोन पर ओटीपी, यूपीआई पिन या पासवर्ड साझा नहीं करना चाहिए। शिक्षण संस्थानों में साइबर सुरक्षा संबंधी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं, जिनमें विद्यार्थियों को नकली संदेशों की पहचान, सुरक्षित पासवर्ड, सोशल मीडिया गोपनीयता और ऑनलाइन धोखाधड़ी की शिकायत करने की प्रक्रिया समझाई जाए। कार्यालयों और व्यावसायिक संस्थानों में भी कर्मचारियों को यह प्रशिक्षण देना चाहिए कि संदिग्ध ईमेल, भुगतान अनुरोध और वरिष्ठ अधिकारियों के नाम से आने वाले असामान्य निर्देशों की पुष्टि कैसे की जाए। परिवार में सभी सदस्यों को यह समझना चाहिए कि गलती से किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक हो जाने या ठगी का शिकार होने की स्थिति में पीड़ित को दोष देने के बजाय उसकी मदद करना जरूरी है। शर्म या भय के कारण शिकायत न करना अपराधियों को लाभ पहुंचा सकता है। इसलिए साइबर अपराध की जानकारी मिलने पर पीड़ित को प्रोत्साहित करना चाहिए कि वह जल्द से जल्द संबंधित बैंक, सेवा प्रदाता और अधिकृत शिकायत व्यवस्था से संपर्क करे। किसी भी घटना की जांच में कानून प्रवर्तन एजेंसियों को प्रमाण उपलब्ध कराना उपयोगी हो सकता है, लेकिन निजी जानकारी और संवेदनशील दस्तावेजों को अनधिकृत व्यक्तियों के साथ साझा नहीं करना चाहिए। साथ ही, सोशल मीडिया पर बिना सत्यापन के किसी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान या किसी घटना के बारे में दावे प्रसारित करने से बचना चाहिए। जागरूकता का अर्थ केवल दूसरों को चेतावनी देना नहीं, बल्कि स्वयं नियमों का पालन करना और जरूरत पड़ने पर सही जानकारी साझा करना भी है। जब परिवार, विद्यालय, कार्यालय, सामाजिक संगठन और आम नागरिक मिलकर सुरक्षित डिजिटल व्यवहार को अपनाते हैं, तो साइबर अपराध के प्रति समाज की सामूहिक तैयारी बेहतर होती है। इस दिशा में जागरूकता अभियान लोगों को तकनीक से दूर रहने के बजाय उसका सुरक्षित, जिम्मेदार और विवेकपूर्ण उपयोग करना सिखाते हैं।
जनहित में नागरिकों से अपील है कि डिजिटल दुनिया में भरोसा करने से पहले सत्यापन करें और किसी भी संदिग्ध कॉल, संदेश, फोटो, वीडियो या आवाज के आधार पर जल्दबाजी में निर्णय न लें। एआई तकनीक का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, व्यवसाय और अनेक अन्य क्षेत्रों में उपयोगी हो सकता है, लेकिन इसका दुरुपयोग रोकने के लिए जागरूकता तथा जिम्मेदार व्यवहार आवश्यक है। किसी व्यक्ति की आवाज परिचित लगने, वीडियो में उसका चेहरा दिखाई देने या संदेश में उसका नाम लिखा होने से यह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि संपर्क वास्तविक है। यदि कोई व्यक्ति तत्काल धनराशि भेजने, गोपनीय जानकारी देने या किसी लिंक पर क्लिक करने का दबाव बनाता है, तो पहले रुकें, स्थिति को समझें और स्वतंत्र माध्यम से पुष्टि करें। अपना ओटीपी, यूपीआई पिन, पासवर्ड, बैंक खाते की गोपनीय जानकारी या अन्य संवेदनशील विवरण किसी के साथ साझा न करें। सोशल मीडिया पर अपनी और अपने परिवार की निजी तस्वीरें तथा वीडियो साझा करते समय सावधानी बरतें। अनजान स्रोत से आए ऐप डाउनलोड करने, फोन का रिमोट एक्सेस देने या संदिग्ध क्यूआर कोड स्कैन करने से पहले उसकी विश्वसनीयता जांचें। यदि किसी परिचित के नाम से संदिग्ध संदेश प्राप्त हो, तो उसके पहले से उपलब्ध संपर
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