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HQ Report
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में 8.77 लाख से अधिक किसानों ने कराया पंजीयन, धान के लिए सर्वाधिक 8,68,214 किसान पंजीकृत
भोपाल। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर कृषि उपज के उपार्जन के लिए किसान पंजीयन की प्रक्रिया के अंतर्गत 8.77 लाख से अधिक किसानों ने अपना पंजीयन कराया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार धान के लिए 8,68,214 किसानों का पंजीयन दर्ज किया गया है, जबकि ज्वार के लिए 2,039 और बाजरा के लिए 7,694 किसानों ने पंजीयन कराया है। ये आंकड़े खरीफ फसलों के समर्थन मूल्य पर उपार्जन की व्यवस्था में किसानों की भागीदारी को दर्शाते हैं। समर्थन मूल्य पर उपार्जन किसानों को उनकी कृषि उपज के विपणन के लिए एक निर्धारित सरकारी व्यवस्था उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम है। खेती में बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई, कृषि यंत्र, मजदूरी और परिवहन सहित अनेक प्रकार की लागतें आती हैं। ऐसे में फसल तैयार होने के बाद किसानों के लिए उचित बाजार और लाभकारी मूल्य प्राप्त करना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी की व्यवस्था का उद्देश्य निर्धारित फसलों के लिए घोषित समर्थन मूल्य पर सरकारी उपार्जन की व्यवस्था उपलब्ध कराना है, ताकि पात्र किसानों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपनी उपज बेचने का अवसर मिल सके। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए सामने आए पंजीयन आंकड़ों में धान के किसानों की संख्या सबसे अधिक है। धान राज्य के अनेक कृषि क्षेत्रों की प्रमुख खरीफ फसल है और बड़ी संख्या में किसान इसकी खेती पर निर्भर रहते हैं। इसलिए धान के लिए 8,68,214 किसानों का पंजीयन उपार्जन व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण है। ज्वार और बाजरा के लिए हुए पंजीयन से यह भी स्पष्ट होता है कि समर्थन मूल्य पर उपार्जन की व्यवस्था में अन्य अनाज फसलों के उत्पादकों की भागीदारी भी शामिल है। पंजीयन किसानों और उपार्जन व्यवस्था के बीच एक आवश्यक प्रारंभिक कड़ी है, क्योंकि इसके माध्यम से किसान की पहचान, फसल संबंधी विवरण और उपज के प्रस्तावित विपणन से जुड़ी जानकारी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दर्ज की जाती है। इससे उपार्जन व्यवस्था की योजना बनाने, संभावित किसानों की संख्या समझने और आगे की व्यवस्थाओं के लिए तैयारी करने में सहायता मिलती है। हालांकि, पंजीयन का अर्थ यह नहीं है कि सभी पंजीकृत किसान निश्चित रूप से पूरी उपज बेचेंगे या सभी की उपज का उपार्जन एक समान मात्रा में होगा। वास्तविक उपार्जन किसान की पात्रता, फसल के सत्यापित विवरण, निर्धारित गुणवत्ता मानकों, उपज की मात्रा, उपार्जन केंद्रों की व्यवस्था और लागू सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार होता है। इसीलिए पंजीयन के आंकड़ों को उपार्जन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण संकेतक मानते हुए आगे की कार्रवाई निर्धारित नियमों के अनुसार की जाती है। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में 8.77 लाख से अधिक किसानों के पंजीयन का आंकड़ा कृषि विपणन व्यवस्था, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सरकारी उपार्जन की तैयारियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। किसानों के लिए जरूरी है कि वे अपने पंजीयन से संबंधित जानकारी, बैंक खाते, भूमि तथा फसल के विवरण और अन्य आवश्यक अभिलेखों को सही रखें, ताकि उपार्जन के समय अनावश्यक कठिनाइयों से बचा जा सके। साथ ही, उपार्जन की प्रक्रिया में पारदर्शिता, समय पर सूचना, केंद्रों पर उचित व्यवस्था और किसानों की समस्याओं के समाधान पर ध्यान देना भी आवश्यक है। उपलब्ध जानकारी में पंजीयन की अंतिम तिथि, उपार्जन की शुरुआत, फसलवार समर्थन मूल्य, केंद्रों की संख्या अथवा भुगतान की समयसीमा का विवरण नहीं दिया गया है; इसलिए इन विषयों की पुष्टि संबंधित विभाग की आधिकारिक अधिसूचना से की जानी चाहिए।
धान, ज्वार और बाजरा के पंजीयन के आंकड़े उपार्जन व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण










