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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 25 अक्टूबर को ‘मन की बात’ के माध्यम से देशवासियों को करेंगे संबोधित

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सुबह 11 बजे प्रसारित होगा प्रधानमंत्री का मासिक रेडियो कार्यक्रम, देशभर के श्रोता जुड़ेंगे संवाद से
 नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 25 अक्टूबर 2026, रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के माध्यम से देशवासियों को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम का निर्धारित समय सुबह 11 बजे है। ‘मन की बात’ प्रधानमंत्री का ऐसा संवाद कार्यक्रम है, जिसके माध्यम से वे देश के नागरिकों से विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक, राष्ट्रीय और जनहित से जुड़े विषयों पर बातचीत करते हैं। इस कार्यक्रम में आम नागरिकों के प्रयासों, समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाली पहलों, स्थानीय उपलब्धियों, जनभागीदारी और राष्ट्र निर्माण में योगदान जैसे विषयों को स्थान मिलता रहा है। कार्यक्रम का व्यापक उद्देश्य देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे उल्लेखनीय कार्यों और प्रेरक अनुभवों को सामने लाना तथा नागरिकों को सामाजिक सरोकारों से जोड़ना है। 25 अक्टूबर को होने वाले प्रसारण को लेकर श्रोता निर्धारित समय पर कार्यक्रम से जुड़ सकते हैं। कार्यक्रम की आधिकारिक प्रसारण व्यवस्था और उपलब्ध माध्यमों की जानकारी के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय, प्रधानमंत्री की आधिकारिक वेबसाइट तथा संबंधित प्रसारण मंचों की सूचना देखी जा सकती है।
### 2. ‘मन की बात’ के 139वें संस्करण का प्रसारण, रेडियो के माध्यम से देशव्यापी संवाद
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ का 139वाँ संस्करण 25 अक्टूबर 2026 को सुबह 11 बजे प्रसारित होगा। आधिकारिक प्रधानमंत्री वेबकास्ट पोर्टल पर इस तारीख और समय की जानकारी उपलब्ध है। <Cite refs={[“turn328614search0″,”turn328614search5”]}/> यह कार्यक्रम रेडियो के पारंपरिक माध्यम को नागरिकों से संवाद स्थापित करने के लिए उपयोग में लाने का एक प्रमुख उदाहरण है। वर्ष 2014 में शुरू हुए इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रधानमंत्री समय-समय पर देशवासियों से विभिन्न विषयों पर अपने विचार साझा करते रहे हैं। कार्यक्रम में सामाजिक जागरूकता, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय नवाचार, सांस्कृतिक विरासत, खेल, शिक्षा और आम नागरिकों के प्रयासों जैसे विषयों को स्थान मिलता रहा है। इसका एक महत्त्वपूर्ण पक्ष यह है कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे व्यक्तियों और समुदायों के अनुभव राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं। भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में स्थानीय स्तर पर अनेक ऐसे प्रयास होते हैं, जिनकी जानकारी दूसरे क्षेत्रों के लोगों तक पहुँचने से प्रेरणा और अनुभवों का आदान-प्रदान संभव हो सकता है। ‘मन की बात’ इसी तरह के अनुभवों को व्यापक श्रोतावर्ग तक पहुँचाने का माध्यम रहा है। कार्यक्रम की विशेषता यह है कि रेडियो प्रसारण के साथ डिजिटल मंचों के माध्यम से भी इसे सुना और देखा जा सकता है। इससे ऐसे नागरिकों को भी जुड़ने का अवसर मिलता है, जो अलग-अलग माध्यमों का उपयोग करते हैं। कार्यक्रम के प्रत्येक संस्करण में किन विषयों पर चर्चा होगी, इसकी पुष्टि प्रसारण के दौरान या उसके बाद जारी आधिकारिक विवरण से ही की जानी चाहिए। 25 अक्टूबर के प्रसारण से पहले किसी विशेष घोषणा, योजना या विषय को प्रधानमंत्री के संबोधन का निश्चित हिस्सा बताना उचित नहीं होगा। फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक जानकारी कार्यक्रम के समय और संस्करण की पुष्टि करती है। नागरिक निर्धारित समय पर प्रसारण से जुड़कर प्रधानमंत्री के विचार सुन सकते हैं। इस अवसर पर कार्यक्रम के उद्देश्य को केवल संबोधन सुनने तक सीमित न रखते हुए, उसमें प्रस्तुत सामाजिक सरोकारों और जनभागीदारी से जुड़े संदेशों पर विचार करना भी उपयोगी हो सकता है। यदि कार्यक्रम में किसी व्यक्ति, संस्था या समुदाय के उल्लेखनीय प्रयास का उदाहरण सामने आता है, तो उससे स्थानीय स्तर पर ऐसे कार्यों की संभावनाओं को समझने का अवसर मिल सकता है। इसी प्रकार यदि किसी सार्वजनिक समस्या पर चर्चा होती है, तो नागरिक उस विषय की आधिकारिक जानकारी प्राप्त कर अपने क्षेत्र में उपलब्ध विकल्पों और संबंधित संस्थाओं की भूमिका को समझ सकते हैं। कार्यक्रम के प्रभाव का आकलन करते समय उसके संदेशों, नागरिकों की भागीदारी और प्रस्तुत उदाहरणों की वास्तविक उपयोगिता पर ध्यान देना आवश्यक है। ‘मन की बात’ का व्यापक स्वरूप संवाद और जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने से जुड़ा है, इसलिए इसकी चर्चा में नागरिकों के अनुभवों और स्थानीय स्तर पर किए जा रहे प्रयासों का महत्त्व भी बना रहता है।
3. आम नागरिकों के प्रयासों को राष्ट्रीय मंच देने की अवधारणा
‘मन की बात’ कार्यक्रम की एक उल्लेखनीय विशेषता आम नागरिकों और समुदायों के प्रयासों को सामने लाने की अवधारणा है। देश के विभिन्न हिस्सों में अनेक लोग अपने स्तर पर सामाजिक समस्याओं के समाधान, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य जागरूकता, स्थानीय कला, पारंपरिक ज्ञान और सामुदायिक विकास के लिए काम करते हैं। कई बार ऐसे प्रयास सीमित क्षेत्र तक ही पहचाने जाते हैं, जबकि उनके अनुभव दूसरे समुदायों के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं। राष्ट्रीय स्तर के संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से ऐसे उदाहरणों पर चर्चा होने से स्थानीय पहल की जानकारी व्यापक श्रोतावर्ग तक पहुँच सकती है। ‘मन की बात’ से संबंधित आधिकारिक मंच भी नागरिकों को आगामी कार्यक्रम के लिए विचार और सुझाव साझा करने का अवसर प्रदान करता रहा है। अक्टूबर 2026 के संस्करण के लिए MyGov पर नागरिकों से विषयों और सुझावों को आमंत्रित किया गया था। <Cite refs={[“turn328614search1″,”turn328614search6”]}/> यह व्यवस्था जनभागीदारी की अवधारणा से जुड़ी है, जिसमें नागरिक केवल श्रोता नहीं रहते, बल्कि अपने अनुभवों और विचारों के माध्यम से सार्वजनिक विमर्श में योगदान देने का अवसर भी प्राप्त करते हैं। स्थानीय स्तर पर किसी व्यक्ति द्वारा जल संरक्षण के लिए किए गए प्रयास, ग्रामीण समुदाय की ओर से विकसित की गई उपयोगी व्यवस्था, विद्यार्थियों का नवाचार, महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों की गतिविधियाँ या किसी क्षेत्र में सामाजिक सहयोग से मिली उपलब्धि—ऐसे उदाहरण सार्वजनिक चर्चा को व्यापक बना सकते हैं। हालांकि 25 अक्टूबर के संबोधन में किन व्यक्तियों या विषयों का उल्लेख होगा, यह प्रसारण से पहले निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता। इसलिए कार्यक्रम के विषयों के बारे में अटकल लगाने के बजाय आधिकारिक प्रसारण और बाद में जारी विवरण पर भरोसा करना चाहिए। नागरिकों की भागीदारी का अर्थ केवल सुझाव भेजना नहीं, बल्कि समाज में उपयोगी कार्यों की पहचान करना, उनसे सीखना और जहाँ संभव हो, उन्हें अपने क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार अपनाना भी है। किसी दूसरे क्षेत्र में सफल रही पहल को अपने क्षेत्र में लागू करने से पहले स्थानीय आवश्यकताओं, उपलब्ध संसाधनों और संबंधित नियमों का ध्यान रखना जरूरी है। इसी प्रकार किसी सामाजिक पहल को व्यापक रूप से अपनाने के लिए उसके परिणामों और सीमाओं का निष्पक्ष मूल्यांकन भी आवश्यक है। कार्यक्रम में प्रस्तुत अनुभव लोगों को यह सोचने का अवसर दे सकते हैं कि वे अपने समुदाय में कौन-से सकारात्मक कार्य कर सकते हैं। स्वच्छता, जल संरक्षण, पर्यावरण की रक्षा, शिक्षा में सहयोग, स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर नागरिक अपने स्तर पर योगदान दे सकते हैं। लेकिन इन प्रयासों को सरकार और संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारियों का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। नागरिक पहल और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच सहयोग से ही अनेक समस्याओं का टिकाऊ समाधान विकसित हो सकता है। ‘मन की बात’ जैसे संवाद कार्यक्रमों का महत्त्व इसी बात में भी है कि वे राष्ट्रीय चर्चा को स्थानीय अनुभवों से जोड़ने की संभावना पैदा करते हैं। जब किसी क्षेत्र की पहल दूसरे क्षेत्रों के लोगों तक पहुँचती है, तो ज्ञान और अनुभव का आदान-प्रदान बढ़ सकता है। ऐसे संवाद से प्रेरणा मिलना तभी अधिक उपयोगी होगा, जब प्रेरक उदाहरणों के साथ उनके व्यावहारिक पहलुओं, आवश्यक संसाधनों और वास्तविक परिणामों को भी समझा जाए। कार्यक्रम सुनने वाले नागरिकों के लिए यह अवसर है कि वे संबोधन में प्रस्तुत विषयों पर ध्यान दें और अपने क्षेत्र की जरूरतों के संदर्भ में विचार करें। इस प्रकार ‘मन की बात’ को जनसंवाद, सामाजिक सहभागिता और स्थानीय अनुभवों की व्यापक पहचान से जुड़े मंच के रूप में देखा जा सकता है।
4. रेडियो से डिजिटल मंचों तक: श्रोताओं के लिए प्रसारण के विभिन्न माध्यम
तकनीक के विस्तार के बावजूद रेडियो आज भी सूचना और जनसंवाद का उपयोगी माध्यम बना हुआ है। इसकी पहुँच उन क्षेत्रों और समुदायों तक भी हो सकती है, जहाँ इंटरनेट या अन्य डिजिटल सुविधाओं का उपयोग सीमित है। ‘मन की बात’ कार्यक्रम रेडियो प्रसारण की इसी व्यापक उपयोगिता के साथ डिजिटल माध्यमों से जुड़ने के विकल्प भी उपलब्ध कराता है। आधिकारिक प्रसारण जानकारी के अनुसार, कार्यक्रम को आकाशवाणी के नेटवर्क के साथ दूरदर्शन और संबंधित डिजिटल मंचों के माध्यम से भी प्रसारित किया जाता है। 25 अक्टूबर 2026 के 139वें संस्करण के लिए प्रधानमंत्री के आधिकारिक वेबकास्ट पोर्टल पर निर्धारित समय सुबह 11 बजे दिया गया है। <Cite refs={[“turn328614search0″,”turn328614search5”]}/> श्रोता प्रसारण से संबंधित नवीनतम जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइटों और संबंधित प्रसारण संस्थानों की घोषणाओं का अवलोकन कर सकते हैं। डिजिटल मंचों ने कार्यक्रम को बाद में देखने या सुनने की सुविधा भी बढ़ाई है। इससे ऐसे लोग भी संबोधन की सामग्री तक पहुँच सकते हैं, जो निर्धारित समय पर प्रसारण नहीं सुन पाते। कार्यक्रम के आधिकारिक अभिलेख उपलब्ध होने पर नागरिक संबंधित संस्करण को दोबारा देख सकते हैं और किसी विषय की जानकारी विस्तार से समझ सकते हैं। अलग-अलग माध्यमों के उपयोग से कार्यक्रम का संदेश व्यापक श्रोतावर्ग तक पहुँचने की संभावना बढ़ती है। हालांकि इंटरनेट पर प्रसारित सामग्री देखते समय आधिकारिक स्रोतों की पहचान करना महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि किसी संबोधन के नाम पर गलत उद्धरण, अधूरी जानकारी या संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत की गई सामग्री भी साझा की जा सकती है। इसलिए किसी विशेष घोषणा या कथन की पुष्टि प्रधानमंत्री कार्यालय, संबंधित मंत्रालय, आधिकारिक प्रसारण मंच या सरकारी सूचना स्रोत से करना उचित है। सार्वजनिक कार्यक्रमों की रिपोर्टिंग में भी तथ्य और अनुमान के बीच अंतर स्पष्ट रहना चाहिए। कार्यक्रम के प्रसारण से पहले केवल समय और संस्करण जैसी पुष्ट जानकारी दी जा सकती है, जबकि संबोधन में कही गई बातों का विस्तृत समाचार उसके प्रसारित होने के बाद तैयार किया जाना चाहिए। प्रसारण के बाद रिपोर्ट तैयार करते समय प्रमुख बिंदुओं को सही संदर्भ में प्रस्तुत करना, आवश्यक उद्धरणों की पुष्टि करना और संबंधित योजनाओं या संस्थाओं के बारे में जानकारी आधिकारिक स्रोतों से जाँचना आवश्यक है। रेडियो और डिजिटल मंचों का संयोजन नागरिकों के लिए सूचना प्राप्त करने के कई विकल्प उपलब्ध कराता है। गाँवों में रेडियो सुनने वाले नागरिक हों, शहरों में डिजिटल मंचों का उपयोग करने वाले श्रोता हों या विदेशों में रहने वाले भारतीय हों—आधिकारिक प्रसारण की उपलब्धता उन्हें कार्यक्रम से जुड़ने का अवसर प्रदान कर सकती है। कार्यक्रम सुनते समय श्रोता उसमें प्रस्तुत विषयों को समझने, आवश्यक जानकारी की पुष्टि करने और उपयोगी संदेशों पर विचार करने पर ध्यान दे सकते हैं। डिजिटल मंचों पर प्रतिक्रिया या चर्चा करते समय भी शिष्ट भाषा, तथ्यपरक जानकारी और दूसरे लोगों के विचारों के प्रति सम्मान बनाए रखना आवश्यक है। किसी कार्यक्रम से जुड़ी चर्चा तभी उपयोगी बनती है, जब उसमें सही जानकारी साझा की जाए और असत्यापित दावों से बचा जाए। इस दृष्टि से ‘मन की बात’ का प्रसारण केवल सुनने का अवसर नहीं, बल्कि सार्वजनिक संवाद और सूचना तक पहुँच के विभिन्न माध्यमों को समझने का अवसर भी है। नागरिक आधिकारिक प्रसारण के साथ संबंधित अभिलेख और विवरण का उपयोग कर कार्यक्रम में प्रस्तुत विषयों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
5. जनभागीदारी, सामाजिक सरोकार और नागरिक जिम्मेदारी का महत्त्व
जनभागीदारी किसी भी समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का महत्त्वपूर्ण आधार है। सार्वजनिक समस्याओं के समाधान में सरकार और प्रशासन की भूमिका आवश्यक है, लेकिन अनेक सामाजिक उद्देश्यों की प्राप्ति में नागरिकों, समुदायों, शैक्षणिक संस्थानों और स्वयंसेवी संगठनों का सहयोग भी उपयोगी होता है। ‘मन की बात’ जैसे संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक प्रयासों और नागरिकों के अनुभवों पर चर्चा होने से जनभागीदारी की अवधारणा को सार्वजनिक मंच मिल सकता है। इस संदर्भ में 25 अक्टूबर 2026 को होने वाला प्रसारण श्रोताओं के लिए यह समझने का अवसर है कि राष्ट्रीय संवाद में किन विषयों को स्थान दिया जाता है और उन विषयों का स्थानीय जीवन से क्या संबंध हो सकता है। हालांकि संबोधन के वास्तविक विषय प्रसारण के बाद ही निश्चित रूप से बताए जा सकते हैं। नागरिक अपने क्षेत्र की समस्याओं को पहचानकर, सही जानकारी प्राप्त करके और संबंधित संस्थाओं के साथ सहयोग करते हुए सकारात्मक पहल कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, जल संरक्षण के लिए स्थानीय जल स्रोतों की स्थिति पर ध्यान देना, स्वच्छता के लिए सामुदायिक सहयोग बढ़ाना, विद्यार्थियों को शिक्षा में मदद देना या सार्वजनिक स्थानों की देखभाल में भाग लेना उपयोगी कदम हो सकते हैं। ऐसे कार्यों में स्थानीय प्रशासन और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लेना आवश्यक हो सकता है, ताकि पहल व्यावहारिक और सुरक्षित रहे। सामाजिक संगठनों की भूमिका भी महत्त्वपूर्ण है। वे स्थानीय आवश्यकताओं की पहचान, जागरूकता कार्यक्रमों, नागरिकों को जानकारी उपलब्ध कराने और संबंधित विभागों के साथ संवाद स्थापित करने में योगदान दे सकते हैं। यदि किसी क्षेत्र में कोई सफल पहल विकसित होती है, तो उसके अनुभवों को दस्तावेजी रूप में साझा करने से दूसरे समुदायों को सीखने का अवसर मिल सकता है। इसके साथ ही किसी भी पहल की सफलता का मूल्यांकन उसके वास्तविक परिणामों के आधार पर होना चाहिए। केवल कार्यक्रम आयोजित करने, लोगों की उपस्थिति या प्रचार सामग्री तैयार करने से किसी सामाजिक समस्या के समाधान की पुष्टि नहीं होती। यह देखना आवश्यक है कि लोगों की जानकारी में क्या बदलाव आया, सुविधा या सेवा तक पहुँच कितनी बेहतर हुई और संबंधित समस्या में क्या सुधार हुआ। जनभागीदारी का एक महत्त्वपूर्ण पक्ष नागरिकों के सुझावों को गंभीरता से लेना भी है। सुझावों पर विचार करते समय उनकी व्यावहारिकता, कानूनी स्थिति, संसाधनों और सार्वजनिक हित का मूल्यांकन करना आवश्यक है। हर सुझाव को लागू करना संभव नहीं होता, लेकिन पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से यह समझाया जा सकता है कि किसी प्रस्ताव पर किस प्रकार विचार किया गया। ‘मन की बात’ के लिए नागरिकों से विचार आमंत्रित करने की आधिकारिक व्यवस्था इसी संवादपरक दृष्टिकोण का हिस्सा है। <Cite refs={[“turn328614search1″,”turn328614search6”]}/> इस तरह नागरिकों के अनुभव और विचार व्यापक सार्वजनिक चर्चा तक पहुँचने का अवसर प्राप्त कर सकते हैं। जनभागीदारी को मजबूत करने के लिए यह भी जरूरी है कि सूचना विश्वसनीय हो और नागरिक अपने अधिकारों तथा जिम्मेदारियों को समझें। सार्वजनिक सेवाओं से संबंधित जानकारी प्राप्त करने, समस्याओं की सूचना देने और संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने की प्रक्रिया स्पष्ट होनी चाहिए। इसी प्रकार नागरिकों को अफवाहों और अपुष्ट संदेशों को साझा करने से बचना चाहिए। डिजिटल माध्यमों पर किसी कथन या सूचना को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि करना जिम्मेदार नागरिक व्यवहार का हिस्सा है। समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए संवाद, तथ्य और सहयोग तीनों की आवश्यकता है। जब नागरिक स्थानीय जरूरतों को समझकर योगदान देते हैं और सार्वजनिक संस्थाएँ अपनी जिम्मेदारियाँ निभाती हैं, तो विकास के प्रयास अधिक प्रभावी हो सकते हैं। ‘मन की बात’ का व्यापक संदर्भ नागरिकों और राष्ट्र के बीच संवाद की अवधारणा से जुड़ा है। इस अवसर पर श्रोता कार्यक्रम सुनकर उसके वास्तविक संदेशों पर विचार कर सकते हैं और अपने समुदाय में उपयोगी कार्यों की संभावनाओं को समझ सकते हैं। किसी भी सामाजिक संदेश को अपनाते समय स्थानीय परिस्थितियों और उपलब्ध जानकारी को ध्यान में रखना चाहिए, ताकि प्रेरणा के साथ व्यावहारिकता भी बनी रहे।
6. निर्धारित समय पर सुनें ‘मन की बात’: आधिकारिक जानकारी के आधार पर कार्यक्रम से जुड़ें
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को सुबह 11 बजे प्रसारित होगा। यह इसका 139वाँ संस्करण है, जिसकी तारीख और समय की पुष्टि आधिकारिक प्रधानमंत्री वेबकास्ट पोर्टल तथा प्रसारण संबंधी समाचार सूचना से होती है। <Cite refs={[“turn328614search0″,”turn328614search5”]}/> नागरिक कार्यक्रम को उपलब्ध आधिकारिक प्रसारण माध्यमों के जरिए सुन सकते हैं। कार्यक्रम की सामग्री, प्रमुख विषयों और संबोधन में प्रस्तुत उदाहरणों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रसारण के बाद आधिकारिक स्रोतों पर देखी जा सकती है। समाचार रिपोर्ट तैयार करते समय यह ध्यान रखना आवश्यक है कि प्रसारण से पहले किसी विशिष्ट विषय, घोषणा या संदेश को प्रधानमंत्री के संबोधन का निश्चित हिस्सा न बताया जाए। इस प्रकार समाचार में तथ्यात्मक शुद्धता बनी रहती है और पाठकों को कार्यक्रम के बारे में सही जानकारी मिलती है। ‘मन की बात’ देश के नागरिकों से संवाद स्थापित करने का मासिक मंच है। इसके माध्यम से प्रस्तुत विषयों का उद्देश्य और प्रभाव समझने के लिए कार्यक्रम की वास्तविक सामग्री को सुनना तथा आवश्यकतानुसार आधिकारिक विवरण का अवलोकन करना उपयोगी है। श्रोताओं के लिए यह अवसर है कि वे अपने क्षेत्र और समाज से जुड़े मुद्दों के संदर्भ में संबोधन में प्रस्तुत बातों पर विचार करें। यदि कार्यक्रम में किसी स्थानीय पहल या सामाजिक प्रयास का उल्लेख होता है, तो उसकी जानकारी प्राप्त कर यह समझा जा सकता है कि संबंधित अनुभव किन परिस्थितियों में विकसित हुआ और उससे क्या सीख मिल सकती है। इसी तरह किसी सार्वजनिक विषय पर चर्चा होने पर नागरिक उसके बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने और अपनी समझ विकसित करने का प्रयास कर सकते हैं। कार्यक्रम के संबंध में पंजीयन, सुझाव या प्रसारण से जुड़ी किसी अतिरिक्त जानकारी की जरूरत होने पर प्रधानमंत्री की आधिकारिक वेबसाइट और MyGov के संबंधित पृष्ठ उपयोगी स्रोत हैं। प्रधानमंत्री के आधिकारिक कार्यक्रम पृष्ठ पर पिछले संस्करणों की सामग्री भी उपलब्ध रहती है, जिससे श्रोता पूर्व प्रसारणों का अवलोकन कर सकते हैं। <Cite refs={[“turn328614search10″,”turn328614search4”]}/> इस तरह कार्यक्रम को केवल एक बार सुनने के बजाय उसके विभिन्न संस्करणों और प्रस्तुत विषयों को समझने का अवसर भी मिलता है। नागरिकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि सोशल मीडिया पर साझा की जाने वाली सामग्री हमेशा पूर्ण या प्रमाणित नहीं होती, इसलिए महत्त्वपूर्ण दावों की पुष्टि आधिकारिक स्रोतों से करना उचित है। ‘मन की बात’ का उद्देश्य संवाद के माध्यम से नागरिकों तक पहुँचना और समाज में चल रहे विभिन्न प्रयासों को सामने लाना रहा है। इस कार्यक्रम को सुनने वाले लोग इसके संदेशों पर विचार करते हुए अपने समुदाय में सकारात्मक और जिम्मेदार भूमिका निभाने की संभावनाएँ तलाश सकते हैं। जनभागीदारी का अर्थ है सही जानकारी प्राप्त करना, सामाजिक जरूरतों को समझना और अपनी क्षमता के अनुसार उपयोगी योगदान देना। वहीं, सार्वजनिक संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि वे अपने दायित्वों का निर्वहन पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ करें। संवाद और सहभागिता के बीच यह संबंध सार्वजनिक जीवन को अधिक सक्रिय बनाने में मदद कर सकता है। 25 अक्टूबर के प्रसारण के बाद कार्यक्रम में प्रस्तुत प्रमुख विषयों के आधार पर विस्तृत समाचार तैयार किया जा सकता है। फिलहाल पुष्ट जानकारी यही है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सुबह 11 बजे ‘मन की बात’ के 139वें संस्करण के माध्यम से देशवासियों को संबोधित करेंगे।
कार्यक्रम संबंधी मुख्य जानकारी
  • कार्यक्रम: मन की बात
  • संबोधनकर्ता: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी
  • संस्करण: 139वाँ
  • तिथि: रविवार, 25 अक्टूबर 2026
  • समय: सुबह 11 बजे
  • आधिकारिक प्रसारण जानकारी: https://pmindiawebcast.nic.in/
  • कार्यक्रम एवं पुराने संस्करण: https://www.pmindia.gov.in/en/mann-ki-baat/
 ‘मन की बात’ देशवासियों से संवाद स्थापित करने और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों को सामने लाने का मासिक मंच है। 25 अक्टूबर 2026 को सुबह 11 बजे प्रसारित होने वाले इसके 139वें संस्करण को नागरिक आधिकारिक माध्यमों के जरिए सुन सकते हैं। कार्यक्रम में प्रस्तुत विषयों की सही जानकारी प्रसारण के बाद प्राप्त की जा सकती है। संवाद, विश्वसनीय सूचना और जनभागीदारी के माध्यम से नागरिक अपने आसपास के समाज और सार्वजनिक जीवन से जुड़े मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं।
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