
केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर से करीब 4.5 किलो सोने के गायब होने का मामला पूरे राज्य में सनसनी का विषय बन गया है। भक्तों के चढ़ावे से जुड़ा यह सोना कहाँ गया, किसने निकाला, और इतने सख्त सुरक्षा घेरे में यह चोरी आखिर कैसे हुई — इन सवालों के जवाब अब तक किसी के पास नहीं हैं। यह मामला न केवल धार्मिक संस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है, बल्कि सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी की कमियों को भी उजागर करता है।
क्या हुआ था?
सबरीमाला मंदिर में द्वारपाल मूर्तियों (द्वारपालक) पर सोने की प्लेटें चढ़ाई गई थीं। 2019 में जब इन मूर्तियों की मरम्मत और पुनः स्वर्ण परत चढ़ाने का काम किया गया, तो जांच में पता चला कि लगभग 4.541 किलो सोना गायब है।
देवास्वोम बोर्ड (जो मंदिर का संचालन करता है) ने पहले इस अंतर को सामान्य मान लिया, लेकिन बाद में जब सोने की मात्रा में अंतर स्पष्ट हुआ, तो यह मामला जांच एजेंसियों और केरल हाई कोर्ट तक पहुँच गया।
जांच शुरू — कई एजेंसियाँ जुटीं
केरल सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित की है। SIT की रिपोर्ट में संकेत मिले हैं कि मंदिर की मरम्मत के दौरान सोने की चोरी सुनियोजित तरीके से की गई।
संदेह है कि कुछ कर्मचारियों या ठेकेदारों की मिलीभगत के बिना यह संभव नहीं था। अब तक एक पूर्व मंदिर अधिकारी और कुछ कर्मचारियों से पूछताछ की जा चुकी है।
इस मामले में अब एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) और क्राइम ब्रांच भी सक्रिय हैं, क्योंकि चोरी के बाद सोने की बिक्री और पैसों के लेन-देन के सुराग दूसरे राज्यों तक पहुँच रहे हैं।
मिला क्या?
जांच के दौरान कर्नाटक के बेल्लारी में एक ज्वेलर की दुकान से करीब 400 ग्राम सोना बरामद हुआ है। हालांकि यह मात्रा बहुत कम है, लेकिन इससे यह संकेत जरूर मिला कि चोरी हुआ सोना कई हिस्सों में बाँटकर बेचा गया होगा।
SIT ने उन सभी लोगों से पूछताछ शुरू की है जो उस समय मंदिर की मरम्मत और स्वर्ण परत चढ़ाने के काम से जुड़े थे।
राजनीतिक और धार्मिक विवाद भी बढ़ा
सबरीमाला सोना कांड अब राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने इस मामले में CBI जांच की माँग की है। वहीं, देवास्वोम बोर्ड और राज्य सरकार पर पारदर्शिता की कमी के आरोप लग रहे हैं।
मंदिर प्रशासन का कहना है कि वह जांच में पूरा सहयोग कर रहा है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
क्या है यह मामला?
सबरीमाला मंदिर देश के सबसे धनवान और पवित्र मंदिरों में से एक है। यहाँ हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं और करोड़ों रुपये का दान दिया जाता है। ऐसे में मंदिर की संपत्ति की सुरक्षा बेहद अहम है।
4.5 किलो सोने का गायब होना न सिर्फ आर्थिक नुकसान है, बल्कि धार्मिक आस्था पर भी चोट है।









