
प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में सुचारू परीक्षा संचालन हेतु की गई प्रशासनिक नियुक्तियाँ
भोपाल। प्रदेश में उच्च शिक्षा व्यवस्था को सुचारू और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लेते हुए राज्य के परंपरागत विश्वविद्यालयों में परीक्षा नियंत्रक के पदों पर प्रतिनियुक्ति के आदेश जारी किए गए हैं। विभाग ने यह आदेश सोमवार को जारी किए, जिसके तहत विभिन्न विश्वविद्यालयों में कार्यरत या संबद्ध अधिकारी अब नये कार्यस्थल पर परीक्षा नियंत्रक के रूप में दायित्व संभालेंगे।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और दक्षता पर जोर
उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रतिनियुक्त किए जा रहे अधिकारी अपने-अपने विश्वविद्यालयों में परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, समयबद्ध और त्रुटिरहित बनाने की दिशा में कार्य करेंगे। विभाग ने यह कदम आगामी सत्रों में परीक्षाओं के सुगम संचालन, परिणामों के समय पर प्रकाशन तथा परीक्षा संबंधी प्रशासनिक सुधारों के उद्देश्य से उठाया है।
आदेश के अनुसार, नियुक्त अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अपने नये कार्यस्थल पर कार्यभार ग्रहण करने और कार्यवाही की सूचना विभाग को प्रेषित करने के निर्देश दिए गए हैं।
विभागीय स्तर पर गहन समीक्षा के बाद हुआ निर्णय
सूत्रों के अनुसार, उच्च शिक्षा विभाग ने पिछले कुछ महीनों में प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में परीक्षा संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा की थी। कई विश्वविद्यालयों में परीक्षा नियंत्रक पद रिक्त रहने या अतिरिक्त प्रभार पर संचालित होने के कारण प्रशासनिक दिक्कतें सामने आ रही थीं।
इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए विभाग ने अनुभवशील और प्रशासनिक रूप से दक्ष अधिकारियों को विभिन्न विश्वविद्यालयों में परीक्षा नियंत्रक के पद पर प्रतिनियुक्त करने का निर्णय लिया। विभाग का मानना है कि इन नियुक्तियों से परीक्षा प्रबंधन प्रणाली को स्थिरता और निरंतरता मिलेगी।
राज्य के प्रमुख विश्वविद्यालयों में हुई नियुक्तियाँ
जारी आदेशों के तहत प्रदेश के परंपरागत विश्वविद्यालयों — जैसे बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (भोपाल), रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (जबलपुर), अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय (रीवा), विक्रम विश्वविद्यालय (उज्जैन), जीवाजी विश्वविद्यालय (ग्वालियर), हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय (सागर) आदि में संबंधित अधिकारियों को परीक्षा नियंत्रक पद का कार्यभार सौंपा गया है।
प्रत्येक अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि वे कार्यभार ग्रहण करते ही चल रही परीक्षा गतिविधियों की समीक्षा करें और परीक्षा कैलेंडर के अनुसार आगामी परीक्षाओं की रूपरेखा सुनिश्चित करें।
विभागीय सचिव ने दिए स्पष्ट निर्देश
उच्च शिक्षा विभाग के सचिव ने आदेश जारी करते हुए कहा कि परीक्षा नियंत्रक का पद विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक संरचना में अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि “यह पद न केवल परीक्षा संचालन का दायित्व निभाता है, बल्कि छात्रों के भविष्य और विश्वविद्यालय की विश्वसनीयता से भी सीधा जुड़ा है।”
सचिव ने यह भी कहा कि सभी प्रतिनियुक्त अधिकारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा और पारदर्शिता के साथ करें तथा परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता या विलंब की स्थिति न उत्पन्न हो।
विश्वविद्यालयों से अपेक्षित रिपोर्ट
विभाग ने समस्त कुलसचिवों को निर्देशित किया है कि नव-प्रतिनियुक्त परीक्षा नियंत्रकों के कार्यभार ग्रहण करने की सूचना तीन दिवस के भीतर विभाग को उपलब्ध कराई जाए। साथ ही परीक्षा संचालन से जुड़ी पूर्व की चुनौतियों, संसाधनों की स्थिति तथा मानवबल की आवश्यकता संबंधी रिपोर्ट भी प्रस्तुत की जाए।
इसके अतिरिक्त, प्रत्येक विश्वविद्यालय को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि परीक्षा परिणामों का प्रकाशन निर्धारित समयसीमा के भीतर किया जाए तथा उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो।
सुधार की दिशा में कदम
उच्च शिक्षा विभाग के इस निर्णय को प्रदेश में शैक्षणिक प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। हाल के वर्षों में कई विश्वविद्यालयों में परीक्षा परिणामों के विलंब और तकनीकी त्रुटियों की शिकायतें सामने आई थीं। विभाग का मानना है कि अनुभवी परीक्षा नियंत्रकों की नियुक्ति से ऐसी समस्याओं में काफी हद तक सुधार आएगा।
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि आगे चलकर परीक्षा प्रबंधन प्रणाली को पूरी तरह डिजिटाइज्ड और केंद्रीकृत प्लेटफ़ॉर्म पर लाने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है, ताकि पूरे प्रदेश में परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी और नियंत्रण और अधिक प्रभावी हो सके।








