
उम्मीदवारों ने रखे अपने मुद्दे — लेफ्ट यूनिटी बनाम ABVP में कांटे की टक्कर, छात्रों में जबरदस्त उत्साह
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में रविवार देर रात आयोजित हुई बहुप्रतीक्षित प्रेसिडेंशियल डिबेट ने छात्र राजनीति का माहौल पूरी तरह गरमा दिया। तीन घंटे तक चली इस बहस में सभी पैनलों के प्रत्याशियों ने शिक्षा, हॉस्टल, छात्र अधिकारों, अंतरराष्ट्रीय मुद्दों और विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े सवालों पर अपनी-अपनी बात रखी।
इस बहस के साथ ही चुनाव प्रचार का समापन हो गया और अब 5 नवंबर को मतदान होना है, जबकि 6 नवंबर को परिणाम घोषित किए जाएंगे।
मध्यरात्रि तक चला बहस का सिलसिला
JNU की यह प्रेसिडेंशियल डिबेट अपने ऐतिहासिक माहौल और जोश के लिए जानी जाती है। इस बार भी परिसर में हजारों छात्र रातभर उमड़े रहे।
कार्यक्रम का आधिकारिक समय रात 8 बजे तय था, पर वास्तविक शुरुआत करीब रात 12 बजे के बाद हुई। मंच पर उम्मीदवारों ने क्रमवार अपने विचार रखे और दर्शक दीर्घा में बैठे छात्र नारे, तालियाँ और पोस्टरों के साथ अपने पसंदीदा प्रत्याशी का समर्थन करते रहे।
यह डिबेट न केवल विचारों का आदान-प्रदान थी, बल्कि विश्वविद्यालय की लोकतांत्रिक परंपरा का भी प्रतीक बनी।
मुख्य मुद्दे: फीस, हॉस्टल, फंडिंग और आज़ादी पर बहस
चर्चा के केंद्र में विश्वविद्यालय की मौजूदा परिस्थितियाँ और छात्रों की वास्तविक समस्याएँ रहीं।
लेफ्ट यूनिटी की उम्मीदवार अदिति मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि “JNU सिर्फ़ शिक्षा का संस्थान नहीं, यह विचारों का प्रतीक है। हमें उन नीतियों के खिलाफ खड़ा होना है जो शिक्षा को महँगा बना रही हैं।” उन्होंने हॉस्टल फीस, स्कॉलरशिप में कटौती और शोध फंडिंग की समस्याओं को प्रमुख मुद्दा बताया।
दूसरी ओर ABVP के उम्मीदवार विकास पटेल ने लेफ्ट यूनिटी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि “JNU को विचारों का बाजार नहीं, राष्ट्र निर्माण का केंद्र बनना चाहिए। यहाँ की राजनीति को नारेबाज़ी से आगे बढ़ाना होगा।”
उन्होंने प्रशासन से बेहतर संवाद, विश्वविद्यालय में रोजगार उन्मुख कोर्स और पारदर्शी छात्र-नीतियों की मांग की।
अन्य संगठनों जैसे Birsa Ambedkar Phule Students’ Association (BAPSA) और Students’ Federation of India (SFI) के उम्मीदवारों ने सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और वंचित वर्गों की भागीदारी को चुनावी विमर्श के केंद्र में रखा।
अंतरराष्ट्रीय मुद्दों की गूंज
JNU की परंपरा के अनुसार, राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मुद्दे भी बहस का हिस्सा बने।
कई उम्मीदवारों ने फिलिस्तीन, कश्मीर और वैश्विक शांति जैसे विषयों पर अपने विचार रखे। लेफ्ट यूनिटी के पैनल ने फिलिस्तीन में जारी संघर्ष को लेकर एकजुटता जताई, वहीं कुछ उम्मीदवारों ने कहा कि “विदेश नीति पर छात्रों की राय जरूरी है, लेकिन विश्वविद्यालय की प्राथमिकता स्थानीय छात्र हितों पर होनी चाहिए।”
CPO मैनुअल और प्रशासन पर तीखी टिप्पणियाँ
चर्चा के दौरान कई उम्मीदवारों ने विश्वविद्यालय की Chief Proctor Office (CPO) Manual पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि यह दस्तावेज़ “छात्रों की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने का प्रतीक” है।
एक उम्मीदवार ने मंच पर ही CPO मैनुअल की कॉपी फाड़ते हुए कहा, “JNU हमेशा से सवाल पूछने की जगह रहा है, न कि खामोशी थोपने की।”
इस घटना पर दर्शकों ने जोरदार तालियाँ बजाईं और नारे लगे — “JNU बोलेगा!”
प्रचार समाप्त, अब छात्रों की बारी
डिबेट के बाद आधिकारिक रूप से चुनावी प्रचार बंद कर दिया गया। अब छात्र मतदान से पहले विचार कर अपने पसंदीदा प्रत्याशी को चुनेंगे।
इस बार लगभग 9,000 से अधिक छात्र मतदाता सूची में शामिल हैं। मतदान सुबह 9 बजे से शुरू होगा और शाम तक चलेगा।
चार प्रमुख पदों — अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव और संयुक्त सचिव — के लिए कुल 20 उम्मीदवार मैदान में हैं।
लेफ्ट यूनिटी बनाम ABVP: परंपरागत टक्कर
JNU चुनावों में इस बार भी मुख्य मुकाबला लेफ्ट यूनिटी (AISA, SFI, AISF, DSF) और ABVP के बीच है।
हालांकि, कुछ स्वतंत्र उम्मीदवारों और क्षेत्रीय छात्र संगठनों ने भी कैंपस राजनीति में नई ऊर्जा डाली है। विशेषज्ञों के मुताबिक़, “यह चुनाव न केवल संगठन की जीत-हार तय करेगा, बल्कि यह भी बताएगा कि छात्र राजनीति किस दिशा में जा रही है — विचारधारा आधारित या समाधान आधारित।”
छात्रों में दिखा लोकतंत्र के प्रति जोश
डिबेट के दौरान कई छात्रों ने कहा कि JNU का चुनाव सिर्फ़ राजनीति नहीं, बल्कि लोकतंत्र का उत्सव है।
एक शोध छात्रा ने कहा, “यह मंच हमें सोचने, सवाल करने और संवाद करने की ताकत देता है। यही JNU की असली पहचान है।”
रातभर चले कार्यक्रम में “Education for all”, “Azadi from fear”, और “JNU for justice” जैसे नारे गूंजते रहे।
आज 6 नवंबर को आएंगे नतीजे
मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद मतगणना आज 6 नवंबर को होगी और उसी दिन परिणाम घोषित किए जाएंगे।
चुनाव समिति ने इस बार परिणाम प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए लाइव स्ट्रीमिंग व्यवस्था भी की है।
चाहे परिणाम किसी भी संगठन के पक्ष में जाएं, JNU की यह डिबेट और चुनाव दोनों एक बार फिर साबित करते हैं कि विश्वविद्यालय अब भी भारत के छात्र राजनीति का सबसे सक्रिय, जागरूक और विचारशील केंद्र बना हुआ है।









