
नई दिल्ली। आज विश्वविद्यालय के परिसर में छात्रसंघ के लिए मतदान जारी है। इस बार का चुनाव विशेष रूप से गतिशील है क्योंकि पुरानी राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं और छात्र राजनीति में नई चुनौतियाँ सामने आई हैं। मतदान प्रक्रिया में लगभग 9,043 मतदाता छात्रों को शामिल किया गया है।
मुख्य उम्मीदवार एवं पैनल
इस वर्ष चुनाव में चार केंद्रीय पदों — अध्यक्ष (President), उपाध्यक्ष (Vice President), महासचिव (General Secretary) और संयुक्त सचिव (Joint Secretary) — के लिए 20 उम्मीदवार मैदान में हैं।
उनमें से प्रमुख चेहरे इस प्रकार हैं:
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Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad (ABVP) की ओर से:
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अध्यक्ष पद हेतु: Vikas Patel
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उपाध्यक्ष हेतु: Tanya Kumari
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महासचिव हेतु: Rajeshwar Kant Dubey
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संयुक्त सचिव हेतु: Anuj Damara
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बाएँ-गुट के पैनल (Left Alliance: All India Students’ Association-AISA, Students’ Federation of India-SFI, Democratic Students’ Federation-DSF) की ओर से:
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अध्यक्ष पद हेतु: Aditi Mishra
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उपाध्यक्ष हेतु: Gopika Babu
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महासचिव हेतु: Sunil Yadav
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संयुक्त सचिव हेतु: Danish Ali
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अन्य समूहों एवं स्वतंत्र उम्मीदवारों में भी प्रतिस्पर्धा है — जैसे Birsa Ambedkar Phule Students’ Association (BAPSA) ने अध्यक्ष पद के लिए Raj Ratan Rajoria को मैदान में उतारा है।
भारी-भरकम मुकाबला और बदलते समीकरण
इस चुनाव में परंपरागत बाएँ-गुट (United Left) की स्थिति चुनौती पर है। पिछले वर्षों में इस पैनल ने मजबूत पकड़ बनाई थी, लेकिन इस बार विभाजन भी देखा गया है।
वहीं, ABVP ने इस बार सक्रिय रणनीति अपनाई है और कुछ स्कूल/काउंसलर पदों पर भी अच्छी हिस्सेदारी दर्ज की है।
विश्लेषकों के अनुसार, इस बार चुनाव का स्वरूप “इसके पहले से अधिक खुला और प्रतिस्पर्धात्मक” है — जहाँ विचारधारा के साथ-साथ उम्मीदवारों की दिन-प्रतिदिन की सक्रियता, सोशल मीडिया उपस्थिति व校园 मुद्दों पर उनकी पकड़ मायने रख रही है।
मतदान का माहौल और छात्र-रुझान
आज सुबह से मतदान शुरू हो चुका है और छात्रों की कतारें मतदान केंद्रों पर जारी हैं। परिसर में प्रचार तो अब समाप्त हो चुका है, और ‘नो-प्रचार’ अवधि लागू हो चुकी है।
मतदान के दौरान सामने आए कुछ संकेत यह हैं:
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मतदान का प्रतिशत लगभग 67 % रहा है — यह पिछले वर्षों की तुलना में थोड़ा कम है।
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छात्रों ने स्कूल, हॉस्टल-संबंधित सुधार, शोध-अनुदान और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर ध्यान दिया है।
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विविध छात्र समूहों में “अधिक महिला प्रतिनिधित्व”, “सुरक्षा व हॉस्टल मुद्दे”, और “शिक्षा-नए पाठ्यक्रमों की मांग” प्रमुख विषय रहे।
किसका पलड़ा भारी?
अगर समीकरण देखें तो कुछ रुझान उभर कर सामने आ रहे हैं:
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बाएँ-गुट की ओर से Aditi Mishra जैसे नामों को बढ़त मिलती दिख रही है, क्योंकि उन्होंने पुराने पाठ्यक्रमों, हॉस्टल-फीस, शोध-वित्त जैसे मुद्दों को जोर से उठाया है।
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दूसरी ओर ABVP ने राष्ट्र-विमर्श, रोजगार-उन्मुख पाठ्यक्रम और संगठन-शक्ति पर जोर दिया है, जिससे उन्होंने नये समर्थकों को जोड़ने की कोशिश की है।
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विद्यार्थी समूहों के लिए यह चुनाव विचारधारा के साथ-साथ प्रभावी कार्यकर्ता-उम्मीदवारों को चुनने का मंच बन गया है — यानी यह अब सिर्फ़ राजनीति नहीं बल्कि “करने का काम” भी चिन्हित कर रहा है।
इसलिए यह निर्णय अभी स्थिर नहीं कहा जा सकता, लेकिन यह तय है कि परिणाम आने पर दोनों-मुखी संदेश सामने आएँगे — एक जहाँ पारंपरिक बाएँ-धारा बनी रही है, दूसरी जहाँ बदलाव-की चाह तेजी से दिख रही है।
आगे क्या होगा?
मतदान आज पूरी तरह समाप्त होगा और मतगणना की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। परिणाम की घोषणा 6 नवंबर को तय है।
निर्णय का यह पल विश्वविद्यालय की राजनीति के लिए अहम माना जा रहा है — क्योंकि यह तय करेगा कि आने वाले वर्ष में छात्र-संघ किस दिशा में कार्य करेगा और किस विचारधारा को छात्र-समुदाय ने समर्थन दिया है।









