
मध्यप्रदेश सरकार की संवेदनशील पहल — दुर्लभ हृदय रोग से जूझ रही नवजात का मुंबई में होगा इलाज
भोपाल। तीन दिन की मासूम बच्ची, जिसका नन्हा-सा दिल सामान्य रूप से धड़क भी नहीं पा रहा था, अब नई जिंदगी की ओर बढ़ रही है। मध्यप्रदेश सरकार ने इस बच्ची के इलाज की पूरी जिम्मेदारी अपने हाथ में लेते हुए उसे एयर एम्बुलेंस से मुंबई के हृदय रोग विशेषज्ञ अस्पताल भेजा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत संज्ञान लेकर यह व्यवस्था की।
बच्ची की हालत जन्म के बाद से ही गंभीर थी। डॉक्टरों ने बताया कि उसके हृदय में एक दुर्लभ जन्मजात दोष (Congenital Heart Disease) है, जिसमें ऑक्सीजन युक्त और ऑक्सीजन रहित रक्त का मिश्रण होता है। ऐसे मामलों में हर मिनट की देरी जानलेवा साबित हो सकती है। इसलिए निर्णय लिया गया कि बच्ची को अत्याधुनिक उपचार के लिए मुंबई भेजा जाए, जहाँ एशिया के शीर्ष बाल हृदय विशेषज्ञों में शुमार डॉक्टरों की टीम उसका इलाज करेगी।
भोपाल में जन्म, पर पहले ही दिन से बढ़ी परेशानी
जानकारी के अनुसार, मासूम का जन्म भोपाल के हमीदिया अस्पताल में हुआ था। जन्म के कुछ घंटों बाद ही बच्ची को सांस लेने में तकलीफ़ होने लगी। अस्पताल की नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में भर्ती करने के बाद जांच में पता चला कि उसके हृदय की संरचना सामान्य नहीं है — डॉक्टरों के अनुसार यह स्थिति “ट्रांसपोज़िशन ऑफ ग्रेट आर्टरीज़” (TGA) जैसी गंभीर अवस्था हो सकती है।
डॉक्टरों ने बताया कि इस स्थिति में हृदय की दो प्रमुख रक्त वाहिकाएँ अपनी जगह बदल लेती हैं, जिससे शरीर को शुद्ध ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। बच्चे की त्वचा नीली पड़ने लगती है और उसका ऑक्सीजन स्तर तेजी से गिर जाता है। हमीदिया अस्पताल के विशेषज्ञों ने तत्काल राज्य स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर हुआ त्वरित निर्णय
स्वास्थ्य विभाग ने पूरी जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंचाई। मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता दिखाते हुए आदेश दिया कि बच्ची का संपूर्ण इलाज सरकारी खर्च पर कराया जाए और उसे तत्काल सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा दी जाए।
स्वास्थ्य आयुक्त डॉ. सुदाम खाडे ने बताया, “मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद, हमने बच्ची को एयरलिफ्ट करने की व्यवस्था की। भोपाल से मुंबई तक एयर एम्बुलेंस की व्यवस्था सिर्फ दो घंटे में की गई। बच्ची के साथ विशेष बाल-हृदय रोग विशेषज्ञों और नर्सिंग टीम को भेजा गया है।”
मुंबई के अस्पताल में विशेषज्ञों की टीम करेगी उपचार
मासूम को मुंबई के सर एच.एन. रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जो देश के अग्रणी बाल-हृदय उपचार केंद्रों में से एक है। यहाँ डॉक्टरों की एक टीम — जिसमें कार्डियक सर्जन, पेडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट और एनेस्थेटिस्ट शामिल हैं — ने बच्ची की प्रारंभिक जांच की।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, “बच्ची को जन्मजात हृदय दोष है, लेकिन उसकी स्थिति अब स्थिर है। फिलहाल दवाओं और ऑक्सीजन सपोर्ट से उसे नियंत्रित रखा गया है। दो-तीन दिनों में उसकी सर्जरी की संभावना है।”
मां ने कहा — ‘सरकार और डॉक्टरों ने हमारे बच्चे को दूसरा जन्म दिया’
बच्ची की मां ने भावुक होकर कहा, “हमें लगा कि हम अपनी बेटी को खो देंगे। लेकिन डॉक्टरों और सरकार ने चमत्कार कर दिया। जब हमें बताया गया कि बच्ची को मुंबई ले जाया जाएगा और सारा खर्च सरकार उठाएगी, तो हमें भगवान का आशीर्वाद महसूस हुआ।”
माता-पिता मूल रूप से विदिशा जिले के एक छोटे गांव के रहने वाले हैं। आर्थिक रूप से कमजोर इस परिवार के लिए निजी इलाज का खर्च उठाना संभव नहीं था। डॉक्टरों के अनुसार, इस तरह की हृदय सर्जरी का खर्च करीब 8 से 10 लाख रुपये तक आता है, जिसे अब सरकार वहन कर रही है।
सरकार की “जन-आरोग्य संवेदना” पहल का हिस्सा
राज्य सरकार ने हाल ही में “जन-आरोग्य संवेदना” नामक अभियान शुरू किया है, जिसके तहत ऐसे गंभीर रोगों से जूझ रहे गरीब और नवजात मरीजों को त्वरित और निशुल्क उपचार दिलाने की व्यवस्था है।
स्वास्थ्य मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगा ने बताया, “हमारी प्राथमिकता हर जीवन को बचाना है। यह बच्ची पूरे प्रदेश की बेटी है, और उसके इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। आगे भी किसी जरूरतमंद परिवार को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े, इसके लिए विशेष कोष बनाया जा रहा है।”
मेडिकल एक्सपर्ट्स ने दी राहत की उम्मीद
मुंबई के बाल-हृदय विशेषज्ञ डॉ. अरविंद कुलकर्णी ने बताया, “मासूम का मामला जटिल जरूर है, लेकिन सही समय पर इलाज मिलने से उसके बचने की संभावना बहुत अच्छी है। बच्चे का हृदय ऑपरेशन लगभग एक सप्ताह के भीतर किया जाएगा।”
उन्होंने बताया कि देश में हर वर्ष करीब 2 लाख नवजात ऐसे जन्म लेते हैं जिन्हें किसी न किसी प्रकार का जन्मजात हृदय दोष होता है, लेकिन केवल 25 प्रतिशत को ही समय पर इलाज मिल पाता है। मध्यप्रदेश सरकार का यह कदम अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायी है।
समाज से भी अपील: समय पर जांच और जागरूकता जरूरी
डॉक्टरों ने कहा कि नवजात बच्चों की प्रारंभिक स्वास्थ्य जांच में हृदय की धड़कन और ऑक्सीजन स्तर की मॉनिटरिंग अनिवार्य की जानी चाहिए। यदि बच्चे की त्वचा नीली दिखे, दूध पीने में परेशानी हो या सांस फूलती हो, तो तुरंत विशेषज्ञ को दिखाएँ।









