
बिहार चुनावी दौरे में सीएम का तीखा हमला, राम-मां सीता के नाम पर विपक्ष पर साधा निशाना
सीतामढ़ी (बिहार)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिहार के सीतामढ़ी में शुक्रवार को जनसभा के दौरान बड़ी आक्रामक भाषा में कहा कि “जो राम का नहीं, वह हमारे काम का नहीं है”। उन्होंने कहा कि राम-मंदिर निर्माण, हिन्दू संस्कृति, सुरक्षा और विकास के सवाल पर किसी भी समझौते से पीछे नहीं हटेंगे।
योगी आदित्यनाथ इस समय बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा-एनडीए के पक्ष में अभियान चला रहे हैं। इस दौरान उन्होंने विपक्षी गठबंधन पर जमकर हमला किया, हिंदू प्रतीकों के नाम पर अपना रुख स्पष्ट किया और पिछले दौर में शासन में रहे दलों पर “माफिया राज” और “अवैध तंत्र” के आरोप लगाए।
भाषण में राम-मंदिर, मां सीता व सांस्कृतिक धरोहर का जिक्र
योगी ने अपने भाषण में राम लला के मंदिर निर्माण को हिंदू संस्कृति की विजय बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस-राजद ने कभी राम के अस्तित्व को स्वीकार नहीं किया और बिहार में सांस्कृतिक व राजनीतिक दुर्दशा का माहौल बनाया। उन्होंने कहा —
“जब हमारी मां सीता को सम्मान नहीं मिलेगा, तो बेटियों का भविष्य क्या होगा? जो राम का नहीं, वह हमारे काम का नहीं।”
उन्होंने उत्तर प्रदेश और बिहार की सांस्कृतिक कड़ी को भी उजागर किया और कहा कि ये दोनों राज्यों का रिश्ता ‘श्री राम-मां सीता’ जैसा पवित्र है।
विपक्ष पर सीधा हमला — ‘माफिया-राज’ से चेतावनी
कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी गठबंधन, विशेषकर Rashtriya Janata Dal और Indian National Congress पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ये वही दल हैं जिन्होंने बिहार को “माफिया राज, अपहरण, जातीय हिंसा” की फुंकार में लाया था।
उन्होंने संकेत दिया कि यूपी में उनके माफिया-खिलाफ बुलडोजर अभियान सफल रहा है और यही मॉडल बिहार में भी लागू होगा। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे इन दलों को “सत्ता का स्वाद” न चखने दें क्योंकि इसका भुगतान समाज को करना पड़ता है।
विकास और हिन्दू-विजन का एजेंडा
भाषण में विकास एजेंडा और हिन्दू-सांस्कृतिक मूल्यों को भी जोड़ते हुए योगी ने कहा कि बिहार एवं उत्तर प्रदेश दोनों ही अपना गौरव फिर लौटाएँगे।
उन्होंने कहा कि आज नौजवान, व्यापारी और महिलाएं सुरक्षित हैं, जबकि पिछली सरकारों ने एक जमाना ऐसा बनाया था कि “छोटे दुकानदार डरते थे, बेटियां सुरक्षित नहीं थीं”।
यूपी में किये गए ‘सस्ता रेस्टोरेंट’, ‘रसोई-मंदिर’ जैसे कार्यक्रमों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि बिहार में भी ऐसे ही जन-कल्याण योजनाएँ लाएँगे।
भविष्य की रणनीति और चुनावी संदेश
योगी आदित्यनाथ ने यह स्पष्ट किया कि भाजपा-एनडीए की आगामी रणनीति अब सिर्फ विकास-वादा तक सीमित नहीं, बल्कि सांस्कृतिक सुरक्षा, हिन्दू पहचान और माफिया-शून्य राज्य है। उन्होंने कहा कि
“अगर विकास होना है, अगर संस्कृति सुरक्षित रखना है, तो हमें राम-मंदिर, मां-सीता, बेटियों-भाइयों की सुरक्षा बढ़ानी होगी।”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस-राजद जैसे दल विकास नहीं बांटते, बल्कि बंटवारा करते हैं। उन्होंने युवाओं और व्यापारियों को सुरक्षित वातावरण देने की बात की और कहा कि इनका समर्थन एनडीए को देना चाहिए।
प्रतिक्रिया मिली-जुली
योगी के भाषण पर विपक्ष ने तीखा प्रतिकार किया। कांग्रेस प्रवक्ताओं ने कहा कि यह ‘हिन्दू-हिंदुत्व संरेखित राजनीति’ का हिस्सा है और इसे बिहार में लागू नहीं होने देंगे।
हालाँकि भाजपा कार्यकर्ताओं ने इसे ‘जन-उम्मीद जागरूकता संदेश’ बताया। भाजपा-सोसल मीडिया टीम ने #राम_का_काम_हमारा_काम टैग चलाया।
समापन
सारतः, सीतामढ़ी में योगी आदित्यनाथ का यह भाषण स्पष्ट था — विकास केवल इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं, बल्कि हिन्दू पहचान, संस्कृति और शासन-सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
अगर उनके शब्दों को संक्षिप्त करना हो, तो वे कह रहे हैं:
“जो राम-मां सीता के हैं, वही हमारे साथ हैं; और जो नहीं, वह हमारे काम की नहीं।”
यह बयान यह संकेत देता है कि चुनावी राजनीति में अब केवल मंच-वादा नहीं, बल्कि पहचान-वादा भी अहम भूमिका निभा रहा है।








