
मोतिहारी रैली में गृहमंत्री का सघन हमला, ‘मिशन बिहार’ को लेकर भाजपा में नया जोश
मोतिहारी (पूर्वी चम्पारण)। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के मतदान की तैयारियों के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मोतिहारी में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने रैली में जोरदार अंदाज में कहा कि “बिहार में अब शहाबुद्दीन नहीं पैदा हो सकते।” श्री शाह ने कहा कि बिहार को अब अपराध-शासन बदलेगा, माफिया खत्म होंगे, और विकास की नई लहर आएगी।
इस रैली में भाजपा-एनडीए द्वारा चलाये जा रहे ‘मिशन बिहार’ का संदेश उजागर हुआ। शाह ने कहा कि मतदाता अब “जंगल राज” या माफिया-शासन” को नहीं चाहेंगे और उन्होंने जल्द ही बिहार को सफलता की दिशा में ले जाने वाला राज्य बनने का वादा किया।
रैली-भाषण में क्या कहा गया?
श्री शाह ने अपने भाषण के दौरान कहा —
“उस दौर का अंत हो गया जिसमें शहाबुद्दीन जैसे माफिया किसानों, व्यापारियों और नौजवानों को डराते थे। अब बिहार का नया युग है—नए विकास के अवसरों, नए कामों और नए भारत का।”
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा-एनडीए सरकार ने पिछले वर्षों में बिहार के लिए ऐसी नींव डाली है जहाँ से आगे ‘विकास की गंगा’ बह सकती है। उन्होंने विपक्षी दलों को सीधे निशाने पर लेते हुए आरोप लगाया कि वे राज्य कीिरुद्ध थे।
रैली के दौरान श्री शाह ने बिहार के युवाओं, छात्र-प्रवासी मजदूरों, महिलाओं और मतदाताओं को “समय है जागने का, समय है वोट देने का” का सन्देश दिया। उन्होंने कहा कि 14 नवंबर को “चौथी दिवाली” मनाई जाएगी — एनडीए की भव्य जीत के संदर्भ में।
सिवान में निर्णायक संदेश
इस रैली का आयोजन सिवान जिले के समीप हुआ था जहाँ माफिया-शासन के दुष्प्रभाव विषय-वस्तु बने रहे। अमित शाह ने सिवान में कहा कि वहां “माफिया को सत्ता नहीं, शासन देना है”। उन्होंने प्रत्यक्ष रूप से यह कहा कि बिहार में अब उस तरह के बाहुबलियों और अपराधियों का राज नहीं चलेगा।
उच्च पदस्थ भाजपा नेताओं के अनुसार, यह रैली पार्टी के लिए मनोवैज्ञानिक मोड़ का अवसर है — जहाँ आदर्श एवं संदेश के स्तर पर विपक्ष को चुनौती दी जा रही है।
प्रमुख घोषणाएँ और वादे
श्री शाह ने इस अवसर पर कई योजनाओं का भी जिक्र किया — जिनमें कहा गया है कि
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बिहार में मेट्रो, AIIMS, और एयरपोर्ट जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रस्ताव प्राथमिकता से लाए जाएंगे।
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माफिया-शासन के खात्मे हेतु विशेष रूप से सख्त कानून व निगरानी लागू की जाएगी।
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मतदाताओं को याद दिलाया गया कि उनका फ़ैसला राज्य तथा उनकी अगली पीढ़ी के लिए निर्णायक होगा।
शाह ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे ग्राम-ग्राम दौड़ें, बूथ-स्तर पर मतदाता संपर्क करें और विकास एवं सुशासन के एजेंडे को जनता तक पहुंचाएँ।
अभियान-प्रसंग एवं राजनीतिक महत्व
इस रैली का समय-चयन चुनावी रणनीति के अनुरूप था — पहला मतदान 6 नवंबर को 121 विधानसभा क्षेत्रों में हो रहा है। भाजपा एवं एनडीए इसे निर्णायक मान रहे हैं, क्योंकि उनकी मंशा है कि विकास-वादा के साथ अपराध-नियंत्रण का संदेश भी देना है।
विश्लेषकों का कहना है कि शाह का भाषण दो-तरफ़ा प्रभाव रखता है — एक ओर माफिया-वर्चस्व को चुनौती, और दूसरी ओर भाजपाई विकास-वादा को मजबूती। यह आरंभ-रैली केवल भावनात्मक अपील नहीं, बल्कि संरचनात्मक बदलाव का एजेंडा प्रस्तुत करती दिखती है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया और माहौल
विपक्षी दलों ने शाह के भाषण पर तीखी प्रतिक्रियाएँ दी हैं। Rashtriya Janata Dal ने इसे “साम्प्रदायिक एवं भय-राज” की राजनीति बताया। उन्होंने कहा कि विकास व अपराध-नियंत्रण, दोनों को साथ लेकर चलना होगा। वहीं भाजपा कार्यकर्ता इसे बिहार में नए युग की शुरुआत मान रहे हैं।
मतदाता-मंच पर भी रैली का असर देखने को मिल रहा है — जहाँ युवाओं, महिलाओं और पहली बार मतदान करने वालों की बड़ी संख्या दिख रही है। यह संकेत देता है कि भाजपा-एनडीए अपने ‘सशक्त संदेश’ को जन-आशा में बदलने की कोशिश कर रही है।








