
पटना | बिहार की राजनीति में इस समय चुनावी सरगर्मी जोरों पर है। इसी बीच राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी अनुष्का यादव ने शुक्रवार को देवघर स्थित प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में पूजा-अर्चना कर सुर्खियां बटोरीं। उन्होंने बाबा भोलेनाथ से बिहार विधानसभा चुनाव में राजद गठबंधन की जीत की कामना की। मंदिर में पहुंची अनुष्का यादव ने विधि-विधान से पूजा की और जलाभिषेक के बाद पत्रकारों से संक्षिप्त बातचीत में कहा — “बाबा से यही प्रार्थना की है कि बिहार में गरीबों और किसानों की सरकार बने। जनता की सेवा करने वालों को सत्ता मिले।” उनकी यह यात्रा न केवल धार्मिक भावनाओं का प्रतीक बनी, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी इसे महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
भक्ति और राजनीति का संगम
देवघर का बाबा बैद्यनाथ धाम उत्तर भारत के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक है,
जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु जल अर्पित करने आते हैं।
चुनावी मौसम में नेताओं का यहां आना-जाना आम बात है,
लेकिन इस बार अनुष्का यादव की यात्रा ने खासा ध्यान खींचा है।
सादे सलवार-सूट और लाल चुनरी में सजी अनुष्का ने
बाबा के दरबार में पहुंचकर आरती की और जल चढ़ाया।
पूजा के बाद वे मंदिर परिसर में कुछ समय तक रुकीं
और श्रद्धालुओं से भी बातचीत की।
मंदिर प्रबंधन समिति के पुजारियों ने बताया कि
अनुष्का ने पूजा में “राज्य की शांति और समृद्धि” की कामना भी की।
उनके साथ कई स्थानीय राजद कार्यकर्ता और समर्थक भी मौजूद रहे।
सोशल मीडिया पर वायरल हुईं तस्वीरें
अनुष्का यादव की मंदिर में पूजा करते हुए तस्वीरें
सोशल मीडिया पर कुछ ही घंटों में वायरल हो गईं।
RJD के समर्थकों ने उन्हें “बाबा की दुलारी” बताते हुए
“अबकी बार लालू परिवार की सरकार” जैसे नारे लिखे।
इधर भाजपा और जदयू समर्थकों ने इसे
“चुनावी आस्था प्रदर्शन” बताते हुए तंज कसा। एक भाजपा नेता ने कहा — “चुनाव के वक्त अचानक आस्था जाग जाती है, जनता सब जानती है।”
हालांकि, राजद नेताओं ने ऐसे आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा — “लालू परिवार भगवान में आस्था रखता है, और अनुष्का यादव का यह दौरा निजी श्रद्धा का प्रतीक है।”
बिहार चुनाव की आहट और यादव परिवार की सक्रियता
बिहार में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं। राजनीतिक गलियारों में इस बार यह चर्चा तेज है कि लालू प्रसाद यादव की छोटी बेटी अनुष्का यादव अब राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकती हैं।तेजस्वी यादव पहले से ही विपक्ष के नेता हैं, और राबड़ी देवी पार्टी की वरिष्ठ नेता के रूप में मौजूद हैं। ऐसे में अनुष्का का सार्वजनिक रूप से धार्मिक स्थलों का दौरा राजनीतिक “इंट्रोडक्शन प्लान” के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. राजीव नयन झा का कहना है — “बिहार में धर्म और राजनीति का रिश्ता पुराना है। अनुष्का यादव का यह मंदिर दौरा पार्टी के भावी नेतृत्व के संकेतों में से एक माना जा सकता है।”
“बाबा सबका भला करें” — अनुष्का यादव
पूजा के बाद पत्रकारों से बात करते हुए अनुष्का ने कहा — “बाबा बैद्यनाथ बिहार की धरती के संरक्षक हैं। उनसे यही प्रार्थना की है कि प्रदेश में अमन-शांति बनी रहे,
बेरोजगारी और महंगाई दूर हो, और हर घर में खुशहाली आए।” उन्होंने आगे कहा कि लालू प्रसाद यादव हमेशा गरीबों की आवाज बने रहे, और अब युवा पीढ़ी उनकी नीतियों को आगे बढ़ाएगी। “मेरे पिता ने जो विरासत दी है, उसे हम निष्ठा और ईमानदारी से आगे ले जाएंगे।”
चुनावी रणनीति में धार्मिक स्थलों का बढ़ता महत्व
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार जैसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य में
धार्मिक स्थल चुनावी समीकरणों को भी प्रभावित करते हैं।
बीते कुछ वर्षों में लगभग सभी बड़े दलों के नेता
देवघर, गया, पावापुरी, पटना साहिब जैसे स्थानों पर दर्शन के लिए जाते रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषक अभय कुमार मिश्र कहते हैं —
“यह केवल आस्था नहीं, बल्कि ‘जनसंपर्क की रणनीति’ भी है।
जनता नेताओं को धर्मस्थलों पर देखकर
उन्हें ‘संवेदनशील’ और ‘अपना’ मानने लगती है।”परिवार की परंपरा और विरासत
लालू प्रसाद यादव के परिवार में धार्मिक आस्था की परंपरा नई नहीं है।
राबड़ी देवी अक्सर व्रत-पूजा करती देखी जाती हैं,
और तेजस्वी यादव भी समय-समय पर मंदिरों में दर्शन के लिए जाते रहे हैं।
अनुष्का यादव ने भी अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा — “बचपन से बाबा बैद्यनाथ के प्रति गहरी श्रद्धा रही है। जब भी देवघर आती हूं, मन को अद्भुत शांति मिलती है।” उन्होंने साथ ही यह भी लिखा कि
“राजनीति सेवा का माध्यम है, और सेवा तभी सार्थक है जब भक्ति हो।”
राजद कार्यकर्ताओं में उत्साह अनुष्का यादव की देवघर यात्रा ने राजद कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है।
पार्टी के युवा मोर्चा के नेता विक्रम यादव ने कहा — “लालू जी की बेटी जनता के बीच जा रही हैं, यह हमारे लिए गर्व की बात है। अनुष्का जी जैसे युवा नेतृत्व से पार्टी को नई दिशा मिलेगी।” देवघर और आसपास के जिलों में राजद समर्थकों ने पोस्टर लगाकर लिखा —
“बाबा की कृपा से लालू परिवार फिर करेगा राज।”
भाजपा-जदयू गठबंधन पर भी निगाह …. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि राजद की इस धार्मिक कूटनीति पर भाजपा-जदयू गठबंधन भी बारीकी से नजर रख रहा है। भाजपा पहले से ही धर्म और संस्कृति के एजेंडे को अपनी रणनीति का हिस्सा बनाती आई है, जबकि अब विपक्षी दल भी उसी दिशा में बढ़ता दिखाई दे रहा है।
पटना यूनिवर्सिटी के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. अमरेंद्र मिश्रा का कहना है — “बाबा बैद्यनाथ धाम जैसे स्थानों पर नेताओं का जाना अब चुनावी प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। यह जनभावनाओं को समझने और जोड़ने का एक तरीका है।”
आस्था या रणनीति — जनता तय करेगी
हालांकि जनता के बीच इस पर दो मत हैं। कुछ लोग इसे आस्था की स्वाभाविक अभिव्यक्ति मानते हैं, तो कुछ इसे चुनावी स्टंट बताते हैं।
देवघर के स्थानीय निवासी सुरेश ठाकुर का कहना है — “अगर नेता सच में भगवान से जनता की भलाई मांगते हैं, तो यह अच्छी बात है। लेकिन अगर सिर्फ कैमरे के लिए करते हैं, तो इसका कोई अर्थ नहीं।”
आस्था की राजनीति या राजनीति में आस्था
बिहार की राजनीति में लालू परिवार का प्रभाव हमेशा निर्णायक रहा है।
अनुष्का यादव का बाबा बैद्यनाथ धाम दौरा उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआती झलक माना जा रहा है। जहां एक ओर यह भक्ति और परंपरा का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर यह इस बात का संकेत भी है कि राजद अब युवा चेहरों और धार्मिक संवाद के सहारे जनता से सीधा जुड़ाव बनाने की तैयारी कर रहा है। चुनावी मौसम में “भक्ति” और “रणनीति” का संगम बिहार की राजनीति का नया अध्याय लिख सकता है।









