
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वच्छ भारत अभियान’ को एक दशक पूरा होने जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी चिंताजनक बनी हुई है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें रेलवे का एक कर्मचारी चलती ट्रेन से खुले में कचरा फेंकता हुआ दिखाई दे रहा है। यह वीडियो सामने आते ही सरकारी दावों और स्वच्छता अभियानों पर सवाल खड़े हो गए हैं।
रेल मंत्रालय ने तुरंत इस वीडियो पर संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, यह घटना उत्तर रेलवे के किसी जोन की बताई जा रही है। वीडियो में दिख रहा व्यक्ति रेलवे का संविदा कर्मचारी बताया जा रहा है, जो कोच की सफाई के दौरान प्लास्टिक की थैलियों और कचरे को सीधे पटरियों के किनारे फेंक देता है।
चलती ट्रेन से फेंका गया कचरा, यात्री ने बनाया वीडियो
सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो में एक यात्री ने ट्रेन के दरवाजे से यह पूरा दृश्य रिकॉर्ड किया। वीडियो में साफ दिखाई देता है कि कर्मचारी के पास कचरे से भरी बड़ी पॉलीथिन बैग है, जिसे वह सफाई के बाद ट्रेन से बाहर फेंक रहा है।
वीडियो पोस्ट करने वाले यात्री ने लिखा —
“सरकार स्वच्छता पर करोड़ों खर्च कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर हाल यही है। जब खुद कर्मचारी नियम तोड़ेंगे तो देश कैसे स्वच्छ बनेगा?”
कुछ ही घंटों में यह वीडियो लाखों व्यूज़ और हजारों शेयर बटोर चुका था। ट्विटर (अब एक्स) से लेकर फेसबुक और इंस्टाग्राम तक यह वीडियो ट्रेंड करने लगा, और लोगों ने रेलवे प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की।
रेलवे ने लिया संज्ञान, कर्मचारी को किया निलंबित
रेल मंत्रालय ने वीडियो वायरल होने के तुरंत बाद इस पर कार्रवाई करते हुए संबंधित जोन से रिपोर्ट मांगी।
रेलवे प्रवक्ता ने बयान जारी करते हुए कहा —
“वायरल वीडियो की जांच की जा रही है। यदि कर्मचारी का व्यवहार नियमों के खिलाफ पाया गया तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। रेलवे स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।”
बाद में मिली जानकारी के अनुसार, कर्मचारी की पहचान कर उसे निलंबित कर दिया गया है। विभाग ने बताया कि संबंधित सफाई ठेकेदार को भी नोटिस जारी किया गया है और भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई जा रही है।
स्वच्छ भारत मिशन की हकीकत पर सवाल
रेलवे में सफाई व्यवस्था पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में स्टेशन और कोचों की स्वच्छता के लिए कई नई पहलें की हैं, जिनमें शामिल हैं—
-
बायो टॉयलेट्स की स्थापना
-
ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग सर्विस (OBHS)
-
स्टेशन पर कचरा पृथक्करण प्रणाली
-
और “स्वच्छ रेल स्वच्छ भारत” अभियान
लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सफाई कर्मचारी और ठेकेदार अक्सर पुराने तौर-तरीकों पर ही चलते हैं। चलती ट्रेन से कचरा फेंकने जैसी घटनाएं स्वच्छता नीति को मजाक बना देती हैं।
रेलवे यूनियन के एक पूर्व अधिकारी ने कहा —
“सरकार के स्तर पर योजनाएं तो बनती हैं, लेकिन निगरानी की कमी सबसे बड़ी समस्या है। कई जगह पर ठेकेदारों की लापरवाही और कर्मचारियों की ट्रेनिंग की कमी साफ झलकती है।”
सोशल मीडिया पर उठे तीखे सवाल
वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स ने अपनी नाराजगी जाहिर की।
एक यूजर ने लिखा —
“कचरा फेंकने वाला अगर आम नागरिक होता तो जुर्माना लगता, लेकिन जब सरकारी कर्मचारी ही ऐसा करेगा तो जिम्मेदारी कौन लेगा?”
दूसरे यूजर ने तंज कसते हुए कहा —
“चलती ट्रेन से कचरा फेंकना अब नया ‘रेलवे नियम’ है क्या?”
कुछ लोगों ने तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री को टैग करते हुए लिखा कि “स्वच्छ भारत अभियान केवल स्लोगन बनकर न रह जाए”।
रेलवे ने जारी की नई गाइडलाइन
विवाद बढ़ने के बाद रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल अधिकारियों को नया निर्देश जारी किया है। इसके तहत:
-
सफाई कर्मचारियों को ट्रेनिंग के दौरान स्वच्छता के नियमों की विशेष जानकारी दी जाएगी।
-
ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग स्टाफ को यह सख्त निर्देश दिया गया है कि कोच का कचरा केवल निर्धारित डिस्पोजल पॉइंट पर ही फेंका जाए।
-
ठेकेदारों से काम करवा रहे जोनों को हर ट्रेन में एक सुपरवाइजर नियुक्त करने को कहा गया है।
-
यात्रियों से भी सहयोग की अपील की गई है कि वे इस तरह की घटनाओं की तुरंत शिकायत करें।
रेलवे ने यह भी कहा है कि रेल मदद हेल्पलाइन (139) और रेलवे शिकायत पोर्टल पर वीडियो या फोटो भेजकर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
विशेषज्ञों की राय — ‘जागरूकता और जवाबदेही दोनों जरूरी’
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि रेलवे जैसी बड़ी प्रणाली में सफाई तभी टिकाऊ हो सकती है जब सभी स्तरों पर जवाबदेही तय की जाए।
डॉ. प्रमोद भट्ट, पर्यावरण सलाहकार, ने कहा —
“कचरा फेंकना सिर्फ नियम तोड़ना नहीं, बल्कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाना है। ट्रेन के रास्तों पर फेंका गया कचरा पशुओं और मिट्टी दोनों के लिए हानिकारक है।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि स्वच्छता की असली सफलता तब होगी जब कर्मचारी खुद को ‘सफाई कर्मी’ नहीं, ‘स्वच्छता दूत’ मानने लगें।
‘स्वच्छ भारत’ के दस साल बाद भी चुनौतियां बरकरार
2014 में शुरू हुए स्वच्छ भारत अभियान का उद्देश्य देश को खुले में शौच मुक्त और साफ-सुथरा बनाना था। रेलवे को इस मिशन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया।
पिछले दस सालों में स्टेशन और ट्रेनों की स्वच्छता में सुधार तो हुआ है, लेकिन व्यवहारिक बदलाव अब भी अधूरा है।
नीति आयोग की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार,
“देश के लगभग 42% रेलवे स्टेशनों पर अब भी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।”
यह आंकड़ा बताता है कि योजनाएं चाहे कितनी भी बड़ी हों, जब तक जमीनी अमल और अनुशासन नहीं होगा, बदलाव संभव नहीं है।
रेलवे की सफाई का जिम्मा किसका?
कई यात्रियों ने इस घटना के बाद सवाल उठाया कि जब रेलवे ने सफाई के लिए निजी कंपनियों को अनुबंध पर रखा है, तो उनकी जवाबदेही तय क्यों नहीं होती।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इन ठेकेदारों को “स्वच्छता प्रदर्शन रिपोर्ट” हर महीने देनी होती है, लेकिन कई बार यह सिर्फ औपचारिकता बन जाती है।
एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा —
“सफाईकर्मी को हटाना आसान है, लेकिन ठेकेदारों पर सख्ती करना मुश्किल। भ्रष्टाचार और राजनीतिक दबाव भी इस व्यवस्था को कमजोर करते हैं।”









