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हाई कोर्ट से झटका लगने के बाद अब डीईओ ने दिखाई सख्ती, ई-अटेंडेंस लागू न करने पर नहीं मिलेगा शिक्षकों को वेतन

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HQ Report

सतना/मैहर | मध्यप्रदेश में शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों की उपस्थिति और शैक्षणिक अनुशासन को लेकर चल रही कार्यवाही अब सख्त मोड़ पर पहुँच गई है। हाल ही में हाईकोर्ट से ई-अटेंडेंस प्रणाली को लेकर आए निर्देशों के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) सतना/मैहर ने सख्त आदेश जारी करते हुए कहा है कि अब किसी भी शिक्षक या शिक्षाकर्मी का वेतन तभी स्वीकृत किया जाएगा जब वह नियमित रूप से ई-अटेंडेंस (e-Attendance) पोर्टल पर अपनी उपस्थिति दर्ज करेगा।

31 अक्टूबर 2025 को जारी हुआ आदेश

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डीईओ कार्यालय, जिला शिक्षा अधिकारी सतना द्वारा 31 अक्टूबर 2025 को जारी आदेश (क्रमांक 280/ई-अटेंडेंस/2025) में सभी शासकीय उच्चतर माध्यमिक एवं उच्च विद्यालयों के प्राचार्यों को निर्देशित किया गया है कि उनके अधीनस्थ सभी शिक्षकों/कर्मचारियों की ई-अटेंडेंस प्रतिदिन अनिवार्य रूप से पोर्टल पर दर्ज की जाए।

यह आदेश लोक शिक्षण संचालनालय मध्यप्रदेश भोपाल के पत्र क्रमांक 2025/1523 दिनांक 22 अगस्त 2025** के संदर्भ में जारी किया गया है, जिसमें राज्य के सभी जिलों को ई-अटेंडेंस व्यवस्था को पूर्ण रूप से लागू करने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके थे।

हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद बढ़ी सख्ती

दरअसल, ई-अटेंडेंस को लेकर कई जिलों में अब तक शिथिलता बरती जा रही थी। कुछ स्कूलों में शिक्षक या प्राचार्य स्वयं उपस्थित रहते हुए भी उपस्थिति पोर्टल पर दर्ज नहीं कर रहे थे, जिसके चलते वास्तविक उपस्थिति का रिकॉर्ड सटीक नहीं बन पा रहा था।
सूत्रों के अनुसार, इसी विषय पर हाल ही में मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया था और कहा था कि सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता व जवाबदेही के लिए डिजिटल उपस्थिति प्रणाली को सख्ती से लागू किया जाए।

हाई कोर्ट के इन निर्देशों के बाद अब जिला शिक्षा अधिकारी सतना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि—

> “जिन शिक्षकों द्वारा ई-अटेंडेंस नहीं लगाई जा रही है, उनके विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी तथा उनका वेतन रोका जाएगा।”

अप्राप्त रिपोर्ट पर डीईओ ने जताई नाराजगी

आदेश में कहा गया है कि डीईओ कार्यालय को विभिन्न स्कूलों से प्राप्त रिपोर्ट में यह पाया गया कि अनेक शिक्षक अब भी नियमित रूप से ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं कर रहे हैं।
इसी वजह से यह निर्णय लिया गया कि संबंधित प्राचार्यों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा और भविष्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता पाए जाने पर उनसे स्पष्टीकरण (explanation) माँगा जाएगा।

डीईओ ने लिखा है कि —

> “जिन विद्यालयों के प्राचार्य, लोक सेवक या अध्यापक ई-अटेंडेंस नहीं लगा रहे हैं, उनके वेतन भुगतान को तत्काल प्रभाव से रोका जाए। बिना ई-अटेंडेंस की स्थिति में वेतन आहरण नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित संस्थान प्रमुख स्वयं उत्तरदायी होंगे।”

लोक शिक्षण संचालक के निर्देशों के अनुरूप कार्यवाही

यह आदेश सीधे लोक शिक्षण संचालनालय मध्यप्रदेश, भोपाल के निर्देशों के अनुरूप है।
संचालनालय ने पहले ही सभी जिलों को आदेशित किया था कि ई-अटेंडेंस प्रणाली को पूरी पारदर्शिता के साथ लागू किया जाए, ताकि शिक्षकों की वास्तविक उपस्थिति का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से उपलब्ध हो सके।

संचालनालय का यह भी कहना है कि —

> “राज्य सरकार ने ई-अटेंडेंस प्रणाली को पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किया है। इसका पालन न करने वाले शिक्षकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।”

आदेश की प्रतिलिपि कई अधिकारियों को भेजी गई

जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी इस आदेश की प्रतिलिपि कई वरिष्ठ अधिकारियों को भी प्रेषित की गई है, जिनमें शामिल हैं—

1. आयुक्त, लोक शिक्षण, मध्यप्रदेश भोपाल

2. कलेक्टर, जिला मैहर/सतना

3. मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत सतना

4. संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण संभाग रीवा

5. सहायक संचालक, सूचना एवं प्रकाशन विभाग, मैहर

6. सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारी, जिला मैहर

7. सभी संस्था प्रमुख (प्राचार्य)

 

इन सभी को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि उनके क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आने वाले सभी शासकीय विद्यालयों में ई-अटेंडेंस प्रणाली का पालन शत-प्रतिशत हो।

ई-अटेंडेंस क्या है और क्यों जरूरी है

ई-अटेंडेंस एक डिजिटल उपस्थिति प्रणाली है, जिसमें प्रत्येक शिक्षक या सरकारी कर्मचारी अपनी उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज करता है।
यह प्रणाली राज्य सरकार की डिजिटल पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य कार्यस्थलों पर पारदर्शिता बढ़ाना और फर्जी उपस्थिति पर रोक लगाना है।
इससे न केवल प्रशासनिक नियंत्रण में आसानी होती है, बल्कि स्कूलों की जवाबदेही भी बढ़ती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में यह प्रणाली शिक्षण कार्य की गुणवत्ता बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी।
अब यह आवश्यक हो गया है कि सभी शिक्षक विद्यालय समय पर पहुँचें और निर्धारित अवधि तक कार्य करें, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर सकारात्मक प्रभाव पड़े।

शिक्षक समुदाय में हलचल

डीईओ के इस आदेश के बाद शिक्षा जगत में हलचल मच गई है।
कई शिक्षक संगठनों का कहना है कि ई-अटेंडेंस व्यवस्था अच्छी पहल है, लेकिन ग्रामीण अंचलों में नेटवर्क समस्या और तकनीकी दिक्कतों के कारण कई बार उपस्थिति दर्ज करने में कठिनाई आती है।
कुछ शिक्षकों ने यह भी सुझाव दिया है कि जहाँ नेटवर्क समस्या है, वहाँ के लिए वैकल्पिक व्यवस्था या समयसीमा बढ़ाने की आवश्यकता है।

हालांकि, शिक्षा विभाग का कहना है कि इस प्रणाली को लेकर किसी भी तरह की तकनीकी अड़चन दूर करने के लिए सहायता टीमें तैयार की गई हैं, ताकि किसी को कोई परेशानी न हो।

डीईओ का स्पष्ट संदेश — “काम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं”

जिला शिक्षा अधिकारी ने साफ कहा है कि विभाग का लक्ष्य स्कूलों में शैक्षणिक अनुशासन को पुनर्स्थापित करना है।
उन्होंने कहा —

> “हमारा उद्देश्य किसी को दंडित करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि विद्यालयों में शिक्षक समय पर उपस्थित हों और विद्यार्थी लाभान्वित हों। जो कर्मचारी या शिक्षक नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”

 

इस आदेश को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी ने सभी प्राचार्यों को चेताया है कि अब कोई भी बहाना स्वीकार्य नहीं होगा। सभी शिक्षण संस्थाओं को ई-अटेंडेंस व्यवस्था के तहत प्रतिदिन उपस्थिति दर्ज करनी होगी।

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