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विशेष रिपोर्ट: जोड़ों के दर्द से राहत पाने के लिए डॉक्टरों ने बताए आसान घरेलू उपाय और जीवनशैली में बदलाव के तरीके
क्या है गठिया (Arthritis)?
गठिया यानी आर्थराइटिस (Arthritis) एक ऐसी बीमारी है जिसमें जोड़ों में दर्द, सूजन, जकड़न और अकड़न महसूस होती है। यह बीमारी किसी एक उम्र तक सीमित नहीं — बल्कि आजकल युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक सभी को प्रभावित कर रही है। भारत में हर पाँच में से एक व्यक्ति किसी न किसी प्रकार के गठिया से जूझ रहा है। इस बीमारी के 100 से अधिक प्रकार हैं, लेकिन मुख्यतः दो प्रकार अधिक आम हैं:
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ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis) – उम्र बढ़ने या जोड़ों के घिसने से होता है।
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रूमेटॉइड आर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis) – शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली के कारण होने वाला गठिया।
जोड़ों में दर्द बढ़ने पर चलना, उठना-बैठना और रोज़मर्रा के काम करना मुश्किल हो जाता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि डॉक्टरों के अनुसार कुछ सरल उपायों और जीवनशैली में बदलाव से इस दर्द पर काबू पाया जा सकता है।
गठिया क्यों होता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, गठिया के कई कारण हो सकते हैं:
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बढ़ती उम्र
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मोटापा और गलत खानपान
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चोट या संक्रमण
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आनुवंशिक कारण
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लंबे समय तक बैठकर काम करना
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शारीरिक गतिविधियों की कमी
जोड़ों की हड्डियों के बीच जो चिकनाहट वाला पदार्थ होता है (Synovial Fluid), वह धीरे-धीरे कम होने लगता है जिससे घर्षण और सूजन बढ़ती है। यही सूजन दर्द, अकड़न और सूजन का कारण बनती है।
डॉक्टर्स की बताई 7 ज़रूरी टिप्स — दर्द से राहत के लिए अपनाएं ये उपाय
वजन को नियंत्रित रखें
डॉक्टरों का पहला सुझाव है – अपने वजन पर नियंत्रण रखें। मोटापा जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव डालता है, खासकर घुटनों, टखनों और कमर के हिस्से पर।
अमेरिकन कॉलेज ऑफ रूमेटोलॉजी की एक रिपोर्ट के अनुसार — अगर कोई व्यक्ति अपने वजन का सिर्फ 5 किलो भी कम कर ले, तो घुटनों के दर्द में 40% तक राहत मिल सकती है।
क्या करें:
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तला-भुना और मीठा कम खाएं।
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रोज़ाना हल्की एक्सरसाइज़ या वॉक करें।
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हाई-कैलोरी फूड जैसे जंक फूड से परहेज करें।
फिजिकल एक्टिविटी को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं
गठिया के दर्द में चलना या एक्सरसाइज़ करना कठिन लगता है, लेकिन हल्की शारीरिक गतिविधियाँ वास्तव में फायदेमंद होती हैं। डॉ. आर.के. मेहरा, वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन बताते हैं — “हल्की एक्सरसाइज़ से जोड़ों में खून का प्रवाह बढ़ता है और सूजन घटने में मदद मिलती है।”
क्या करें:
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रोज़ 15-20 मिनट की वॉक या योगा करें।
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तैरना (Swimming) या साइकिल चलाना (Cycling) बेहतरीन विकल्प हैं।
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लंबे समय तक बैठे न रहें; हर घंटे कुछ मिनट खड़े होकर स्ट्रेचिंग करें।
संतुलित और पौष्टिक आहार लें
खानपान गठिया में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है। सही डाइट सूजन कम करने और हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करती है।
क्या खाएं:
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ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थ (जैसे मछली, अलसी के बीज, अखरोट)
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कैल्शियम और विटामिन D युक्त चीज़ें (जैसे दूध, दही, अंडा, सूरज की धूप)
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हरी पत्तेदार सब्जियाँ, फल, हल्दी और अदरक
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हल्का गर्म पानी पिएं, यह जोड़ों की सूजन कम करता है।
क्या न खाएं:
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जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक्स और बहुत ज़्यादा शुगर
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रेड मीट और अत्यधिक नमक
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तंबाकू और शराब
गर्म और ठंडी सिंकाई (Hot & Cold Therapy)
गठिया के दर्द से राहत पाने का सबसे आसान और पुराना उपाय है सिंकाई।
गर्म सिंकाई:
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यह मांसपेशियों को आराम देती है और खून का संचार बढ़ाती है।
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गर्म पानी की बोतल या हीट पैक से 10-15 मिनट तक सिंकाई करें।
ठंडी सिंकाई:
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सूजन या जलन वाले हिस्से पर बर्फ का प्रयोग करें।
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बर्फ को कपड़े में लपेटकर 10 मिनट तक लगाएं।
डॉक्टर्स की राय:
“दर्द के प्रकार के अनुसार गर्म या ठंडी सिंकाई की जा सकती है। अगर सूजन अधिक हो, तो ठंडी सिंकाई करें; यदि अकड़न और जकड़न हो, तो गर्म सेंक दें।”
जोड़ों को आराम दें लेकिन जकड़न से बचें
लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठना गठिया के दर्द को बढ़ाता है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि शरीर को आराम दें लेकिन पूरी तरह निष्क्रिय न रहें।
क्या करें:
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एक ही पोज़िशन में लंबे समय तक न बैठें।
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हर दो घंटे में थोड़ा-थोड़ा चलें या स्ट्रेच करें।
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ज़रूरत पड़े तो डॉक्टर की सलाह से नी-सपोर्ट बेल्ट या ऑर्थोपेडिक कुशन का उपयोग करें।
तनाव और नींद पर ध्यान दें
तनाव शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ाता है, जो सूजन को बढ़ाता है और गठिया के लक्षणों को बदतर कर सकता है। इसलिए मानसिक शांति बनाए रखना बहुत ज़रूरी है।
क्या करें:
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ध्यान (Meditation) और गहरी साँसों का अभ्यास करें।
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सोने से पहले इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का उपयोग न करें।
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हर दिन कम से कम 7-8 घंटे की नींद लें।
डॉ. अनीता गर्ग, रूमेटोलॉजिस्ट कहती हैं —
“तनाव घटाने से शरीर में सूजन कम होती है और गठिया की प्रगति धीमी पड़ जाती है।”
डॉक्टर से नियमित जांच कराएं
गठिया धीरे-धीरे बढ़ने वाली बीमारी है। शुरुआत में लक्षण हल्के होते हैं लेकिन इलाज न होने पर यह जोड़ों को स्थायी नुकसान पहुँचा सकती है।
क्या करें:
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डॉक्टर से नियमित जांच कराएं।
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एक्स-रे या ब्लड टेस्ट के जरिए स्थिति की निगरानी करें।
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जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से फिजियोथेरेपी या दवाएं लें।
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स्वयं दवा न लें और दर्द निवारक गोलियों का अधिक प्रयोग न करें।








