
भोपाल.. जल जीवन मिशन (JJM), जिसे “हर घर जल” के नाम से भी जाना जाता है, मध्य प्रदेश के ग्रामीण परिदृश्य को बदलने के लिए भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है। 15 अगस्त, 2019 को शुरू किए गए इस मिशन का मुख्य उद्देश्य राज्य के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल से सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है।
उद्देश्य और लक्ष्य
जल जीवन मिशन भारत सरकार देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को ‘कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन’ (FHTC) प्रदान करना है। इस मिशन के तहत प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 55 लीटर पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने देश के लोगों की जिंदगी को आसान बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाएं हैं। सरकार का विशेष फोकस देश के उन हिस्सों में रहा है, जहां पर दशकों से लोगों का जीवन कठिन रहा है। पिछले कुछ सालों में केंद्र सरकार ने मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने की दिशा में कई योजनाएं चलाई हैं।

इस बीच 5 साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘जल जीवन मिशन’ योजना की शुरुआत की थी। इस योजना ने महिलाओं के जीवन में खुशहाली लाई है। इस योजना के लॉन्च होने के बाद देश के ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर बदली है। इस योजना के तहत देश के करोड़ों ग्रामीण घरों में पानी पहुंच रहा है। सीधे नल से जल पहुंचने से लोगों का जीवन आसान हुआ है। इस योजना को लेकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ओर से एक रिसर्च की गई थी, जिसके आंकड़े आपको चौंका सकते हैं। जल जीवन मिशन योजना को 15 अगस्त 2019 को लॉन्च किया गया था। इस योजना का उद्देश्य भारत के 19.34 करोड़ घरों साल 2024 तक नल से जल पहुंचाने का कार्य किया है। हालांकि, लक्ष्य को प्राप्त करने की अवधि बढ़ाई जा सकती है। जिस समय इस योजना को लॉन्च किया गया था, उस वक्त भारत के ग्रामीण अंचल में केवल 3.23 करोड़ घरों तक नल से जल पहुंच सकता था। इस मिशन के तहत देश के 16.10 करोड़ घरों तक नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया, जिस पर पिछले 5 सालों में तेजी से काम हुए हैं। इस योजना में लगातार हुए काम के सुखद परिणाम भी सामने आए हैं।
धरातल पर मिली सफलता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर शानदार सफलता मिली है। जहां पांच साल पहले ग्रामीण इलाकों में केवल 3.23 करोड़ घरों तक नल से जल पहुंच रहा था, अब यह आंकड़ा 10 अक्टूबर 2024 तक 15.20 करोड़ घरों तक पहुंच गया है। वर्तमान में देश के 78.62 फीसद ग्रामीण इलाकों में नल से जल पहुंच रहा है। इस वजह से लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि इन लोगों को अब पानी के लिए चिंता नहीं करनी पड़ती है। पानी की लगातार उपलब्धता की वजह से खेतीबारी और पशुपालन से जुड़ी गतिविधिया आसानी से हो जाती हैं। योजना को धरातल पर उतारने के लिए केंद्र की हिस्सेदारी 2.08 लाख करोड़ है, जबकि राज्यों को 1.52 लाख करोड़ रुपये खर्च करना है. देशभर में घर से बाहर जाकर पानी लाने के मामलों में 8.3 फीसद तक की गिरावट दर्ज की गई है। इस योजना के धरातल पर उतरने के कारण खेतीबारी और उनसे जुड़ी गतिविधियों में महिलाओं की भागेदारी 7.4 प्रतिशत तक बढ़ी है। ये आंकड़े अपने आप में चौंकाने वाले हैं।

देश के कुछ राज्यों को छोड़ दिया जाए तो अन्य राज्यों में घर से बाहर जाकर पानी लाने वालों के मामलों में कमी आई है। जल जीवन मिशन की सफलता पर पीएम मोदी ने भी देश के लोगों को बधाई दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “जल जीवन मिशन किस तरह से महिला सशक्तिकरण को आगे बढ़ा रहा है, इस पर एक अच्छा दृष्टिकोण, खासकर हमारे ग्रामीण क्षेत्रों में। अपने घर के दरवाजे पर स्वच्छ पानी उपलब्ध होने से, महिलाएं अब कौशल विकास और आत्मनिर्भरता पर ध्यान केंद्रित कर सकती हैं।








