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मध्यप्रदेश का पहला 132 के.वी. सबस्टेशन—ज्योति नगर, उज्जैन

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HQ Report

65 वर्ष पूरे: ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी आधुनिकीकरण और भविष्य की तैयारियों की प्रेरक कहानी

मध्यप्रदेश के ऊर्जा ढांचे में मील का पत्थर साबित हुआ ज्योति नगर 132 के.वी. सबस्टेशन इस वर्ष अपने 65 गौरवशाली वर्ष पूरे कर रहा है। यह सबस्टेशन न केवल प्रदेश का पहला 132 के.वी. ग्रिड था बल्कि उज्जैन सहित पूरे मालवा क्षेत्र की ऊर्जा व्यवस्था को स्थायी आधार देने वाला पहला तकनीकी केंद्र भी है।

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पांच-पांच सिंहस्थों (1961, 1973, 1982, 1992, 2016) में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के बाद यह स्टेशन अब सिंहस्थ 2028 के लिए भी पूरी तरह तैयार माना जा रहा है। उन्नतम तकनीक, आधुनिक नियंत्रण प्रणाली और बढ़ती क्षमता के साथ यह ग्रिड आज भी प्रदेश के ऊर्जा तंत्र की रीढ़ बना हुआ है।

इतिहास की नींव: 1959–60 में शुरू हुआ मध्यप्रदेश का ऊर्जा पुनर्गठन

उज्जैन का महत्व सदियों पुराना है, लेकिन आधुनिक समय में इसकी ऊर्जा आवश्यकताओं को व्यवस्थित रूप से पूरा करने की शुरुआत इसी सबस्टेशन से हुई।

जब 1950 के दशक के अंत में तेजी से बढ़ते उद्योगों, शिक्षा संस्थानों और धार्मिक गतिविधियों के लिए उच्च क्षमता वाले बिजली वितरण की आवश्यकता हुई, तब सरकार ने ज्योति नगर क्षेत्र में पहला हाई वोल्टेज ग्रिड स्थापित करने का निर्णय लिया।

  • उस समय 132 के.वी. का सबस्टेशन बनाना तकनीकी दृष्टि से एक बड़ा कदम था।

  • इंजीनियरिंग संसाधन सीमित थे, परंतु टीम ने चुनौती स्वीकार की।

  • 1960 में सबस्टेशन पहली बार फुल लोड मोड में संचालित हुआ।

आज 65 वर्ष बाद भी यह स्टेशन अपनी मूल संरचना के साथ मजबूती से कार्य कर रहा है, यद्यपि तकनीकी उपकरण अब पूरी तरह बदल चुके हैं।

उज्जैन की ऊर्जा व्यवस्था में इस सबस्टेशन की भूमिका

शहर के बिजली वितरण की मुख्य धुरी

उज्जैन के पुराने और नए लगभग 60% शहरी क्षेत्र की बिजली आपूर्ति आज भी इसी ग्रिड पर आधारित है।

  • फ्रीगंज

  • दीनदयाल कॉलोनी

  • इंदौर रोड

  • नानाखेड़ा

  • देवास रोड औद्योगिक क्षेत्र

ये सभी इस सबस्टेशन से संचालित लाइनों के माध्यम से विद्युत प्राप्त करते हैं।

धार्मिक आयोजनों में ऊर्जा सुरक्षा

उज्जैन में हर 12 साल पर होने वाला सिंहस्थ केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि एक बड़े पैमाने का ऊर्जा मैनेजमेंट ऑपरेशन भी है।

लाखों श्रद्धालुओं, प्रशासनिक गतिविधियों और अस्थायी नगर की बिजली आपूर्ति वर्षों से इसी सबस्टेशन के भरोसे रही है।

औद्योगिक विकास का आधार

देवास, उज्जैन और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों के शुरुआती विस्तार में इस स्टेशन की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

  • प्रारंभिक दौर में पावरटेक्स और कृषि आधारित उद्योगों को बिजली मिली

  • बाद में ट्रांसफॉर्मर ऑयल, इंजीनियरिंग यूनिट और फूड प्रोसेसिंग यूनिट जुड़े

इसलिए ऊर्जा विशेषज्ञ इसे “मालवा औद्योगिक विकास का पहला स्तंभ” बताते हैं।

तकनीकी उन्नयन: 65 वर्षों में आधुनिकता का सफर

यद्यपि सबस्टेशन की स्थापना 1960 के दशक में हुई, लेकिन पिछले दो दशकों में इसका पूरी तरह आधुनिकीकरण किया गया है।

🔧 प्रमुख तकनीकी सुधार:

SCADA सिस्टम का समावेश

आज यह सबस्टेशन रीयल टाइम मॉनिटरिंग और रिमोट ऑपरेशन की सुविधा से लैस है।
ऊर्जा लोड, फॉल्ट लोकेशन और आउटेज रिकवरी का समय 40% कम हुआ है।

GIS (Gas Insulated Switchgear) तकनीक

पुराने आयल सर्किट ब्रेकरों को हटाकर GIS बेस्ड तकनीक स्थापित की गई।
लाभ:

  • मेंटेनेंस कम

  • जगह की बचत

  • फॉल्ट की संभावना कम

आधुनिक संचार प्रणाली

फाइबर आधारित लिंक से नियंत्रण कक्ष प्रदेश के अन्य ग्रिड्स से कनेक्ट है।

नई 132/33 के.वी. ट्रांसफॉर्मर श्रृंखला

पुराने 20–25 MVA ट्रांसफॉर्मरों की जगह अब 40–63 MVA क्षमता वाले ट्रांसफॉर्मर लगाए जा चुके हैं।

फायर सेफ्टी और डिजास्टर मैनेजमेंट उन्नयन

नए सेंसर
ऑटोमैटिक फायर सप्रेशन
आपातकालीन शटडाउन तकनीक

ये सभी स्टेशन की सुरक्षा को मजबूत बनाते हैं।

सिंहस्थ 2028: इस बार तैयारियां पहले से दोगुनी मजबूत

वर्तमान सबस्टेशन ने पिछले 5 सिंहस्थों में कोई बड़ा आउटेज दर्ज नहीं किया, जो अपने आप में मिसाल है। लेकिन प्रशासन का मानना है कि 2028 में

  • भीड़

  • ऊर्जा मांग

  • अस्थायी टेंट सिटी

  • सड़क और घाट क्षेत्रों में लाइटिंग

इन सबकी बिजली आवश्यकता अब तक की तुलना में तीन गुना होगी।

इसलिए निम्न तैयारियां की गई हैं:

 1. अतिरिक्त 132 के.वी. फीडर लाइनें

नवीन बाईपास रोड और त्रिवेणी क्षेत्र में दो नई लाइनें प्रस्तावित हैं।

 2. लोड शिफ्टिंग प्लान

पीक लोड के दौरान वैकल्पिक ग्रिड से सप्लाई सुनिश्चित।

 3. 16 घंटे विशेष मॉनिटरिंग टीम

हर शिफ्ट में कम से कम 15 तकनीकी कर्मचारी तैनात होंगे।

 4. मोबाइल सबस्टेशन

आपात स्थिति के लिए 10–16 MVA की मोबाइल यूनिट उपलब्ध रहेगी।

शहर की ऊर्जा जरूरतें: बढ़ती मांग और भविष्य की योजना

उज्जैन की जनसंख्या लगातार बढ़ रही है।
धार्मिक, पर्यटन और शिक्षा केंद्रों की संख्या बढ़ने से आने वाले वर्षों में बिजली की मांग लगभग 18–20% वार्षिक दर से बढ़ने का अनुमान है।

आगामी परियोजनाएं:

✔ उज्जैन–दोपाड़ा हाई कैपेसिटी ट्रांसमिशन लाइन
✔ महाकाल लोक फेज–3 के लिए समर्पित फीडर
✔ स्मार्ट मीटर आधारित ऊर्जा प्रबंधन
✔ 220 के.वी. उपकेंद्र प्रस्तावित

ये परियोजनाएं आने वाले दशक में शहर की ऊर्जा प्रणाली को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगी।

132 के.वी. सबस्टेशन के 65 साल: उपलब्धियों का लेखा-जोखा

  1. 5 सिंहस्थों में 100% सफलता

  2. 15 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को परोक्ष लाभ

  3. 60% शहरी क्षेत्र की स्थायी बिजली आपूर्ति

  4. औद्योगिक निवेश को बढ़ावा

  5. तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र के रूप में उपयोग

  6. 24×7 नियंत्रण प्रणाली

  7. फॉल्ट रेट में 45% कमी

  8. लाइन लॉस कम होकर 8–9% तक पहुंचा

स्थानीय नागरिकों और उद्योगों की प्रतिक्रिया

व्यापारी संगठन

“बिजली कटौती बेहद कम हुई है। त्योहारों, आयोजनों और रात्री बाजारों में रोशनी लगातार बनी रहती है। यह शहर के व्यापार के लिए बड़ा सकारात्मक संकेत है।”

उद्योग संघ

“नए ट्रांसफॉर्मरों से उत्पादन क्षमता बढ़ी है। 2015 की तुलना में पावर फेल्योर 50% कम हुए।”

स्थानीय निवासी

“पुराने उज्जैन में पहले गर्मियों में बार-बार ट्रिपिंग होती थी। अब स्थिति बहुत बेहतर है।”

ऊर्जा इंजीनियरिंग का विश्वविद्यालय: सीखने का केंद्र बना उज्जैन ग्रिड

यह सबस्टेशन केवल बिजली का आधार नहीं बल्कि प्रदेश के तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रमों का मुख्य केंद्र भी है।

  • नई भर्ती इंजीनियरों का फील्ड ट्रेनिंग

  • डिजास्टर मैनेजमेंट एक्सरसाइज

  • लोड मैनेजमेंट वर्कशॉप

यहां आयोजित किए जाते हैं।

भविष्य की दिशा: ग्रीन एनर्जी और स्मार्ट ग्रिड की ओर

उज्जैन सबस्टेशन अब सौर ऊर्जा और पारंपरिक ऊर्जा के मिश्रण वाले हाइब्रिड पावर मॉडल की ओर बढ़ रहा है।

संभावित योजनाएं:

🌞 शहर के आसपास 50–75 MW सोलर पार्क से कनेक्टिविटी
📶 AI आधारित फॉल्ट एनालिसिस
💡 स्मार्ट ग्रिड ऑटोमेशन
🔋 बैटरी आधारित ऊर्जा भंडारण

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले 10 वर्षों में उज्जैन राष्ट्रीय ऊर्जा मॉडल के रूप में उभरेगा।

132 के.वी. ज्योति नगर सबस्टेशन केवल एक ऊर्जा केंद्र नहीं बल्कि उज्जैन की प्रगति, स्थिरता और विश्वास का प्रतीक बन चुका है।

65 वर्षों की सेवा के बाद भी इसकी चमक कम नहीं हुई, बल्कि तकनीकी उन्नयन और आधुनिकता के साथ यह और अधिक सक्षम हुआ है।

सिंहस्थ 2028 की तैयारियों से यह स्पष्ट है कि उज्जैन भविष्य की ऊर्जा चुनौतियों का मुकाबला पूरी मजबूत व्यवस्था के साथ करने को तैयार है।

इस स्टेशन की कहानी प्रदेश की उस ऊर्जा यात्रा का प्रतीक है, जो परंपरा और आधुनिकता दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ती है।

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