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नरेला विधानसभा 151 में निर्वाचन कार्य में लापरवाही उजागर, कलेक्टर ने छह कर्मचारियों को जारी किया कारण-बताओ नोटिस

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HQ Report

भोपाल। विशेष गहन पुनरीक्षण 2026 के तहत जारी मतदाता सूची अद्यतन कार्य में लापरवाही सामने आने के बाद भोपाल जिले की नरेला विधानसभा 151 में प्रशासनिक सक्रियता अचानक बढ़ गई है। जिला प्रशासन द्वारा की गई मैदानी समीक्षा के दौरान निर्धारित प्रगति अत्यंत कम पाई गई, साथ ही कई क्षेत्रों में रिपोर्टिंग में अनियमितताओं के प्रमाण भी मिले। इस पर कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए विधानसभा 151 नरेला के तीन बीएलओ सुपरवाइजर और तीन बीएलओ को कारण-बताओ नोटिस जारी किया। कलेक्टर ने कहा कि निर्वाचन कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता का संवैधानिक दायित्व है और इसमें किसी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी।

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सूत्रों के अनुसार, कलेक्टर द्वारा बीते दिनों नरेला क्षेत्र का विस्तृत निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत चल रहे मतदाता सत्यापन, विलोपन, संशोधन और नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया में अपेक्षित प्रगति नहीं हो रही है। कई मतदान केंद्र क्षेत्रों में बीएलओ द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर किए जाने वाले घर-घर सत्यापन कार्य को गंभीर रूप से उपेक्षित पाया गया। यही नहीं, जिन क्षेत्रों से बीएलओ द्वारा प्रगति रिपोर्ट भेजी गई, उनमें वास्तविक फील्ड स्थिति मेल नहीं खाती पाई गई। इस अनियमितता ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया और उसी आधार पर संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई का निर्णय लिया गया।

कलेक्टर सिंह ने समीक्षा बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग द्वारा जारी दिशानिर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता लोकतंत्र की बुनियाद है और इस प्रक्रिया में कोई भी लापरवाही सीधे नागरिकों के मतदान अधिकार को प्रभावित करती है। इसलिए बीएलओ और बीएलओ सुपरवाइजर की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और वे अपने कार्य को टालमटोल या औपचारिकता के रूप में नहीं ले सकते। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नोटिस के स्पष्ट उत्तर नहीं मिलते या संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया जाता, तो आगे प्रशासनिक कार्रवाई भी की जाएगी।

जिन बीएलओ सुपरवाइजरों को नोटिस जारी किया गया है, उनमें संजीव जौहरी, गोविंद ढाक्स्या और राधेश्याम साहनी शामिल हैं। प्रशासन ने पाया कि इन सुपरवाइजरों के अंतर्गत आने वाले मतदान क्षेत्रों में मतदाता पहचान, घर-घर सत्यापन तथा आवश्यक दस्तावेजों के संकलन में भारी देरी हुई है। कई मतदान केंद्रों में बीएलओ की उपस्थिति अनियमित थी, और निरीक्षण के दौरान चौकसी में कमी दिखाई दी। बीएलओ सुपरवाइजर होने के नाते इन अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी अपने अधीनस्थ बीएलओ के कार्य का नियमित पर्यवेक्षण करना होता है, जिसे वे पूरा करने में विफल रहे।

उधर, बीएलओ स्तर पर जिन कर्मचारियों को नोटिस जारी किया गया है, उनमें अजय तावड़े, अर्जुन पटेल और श्रीमती रंजना शर्मा का नाम शामिल है। प्रशासन का कहना है कि इन कर्मचारियों द्वारा अपने मतदाता क्षेत्रों में न्यूनतम कार्य प्रगति भी दर्ज नहीं की गई। घर-घर संपर्क और सत्यापन कार्य पर गंभीर प्रभाव पड़ा। समीक्षा के दौरान यह भी पाया गया कि कई फ़ॉर्म अपूर्ण थे और जिन नागरिकों ने मतदाता सूची में सुधार के लिए आवेदन किए थे, उनके प्रपत्र समय सीमा में अपलोड नहीं किए गए। कुछ स्थानों पर दस्तावेज़ों का मिलान अधूरा छोड़ा गया, जिससे निर्वाचन प्रक्रिया बाधित हुई।

कलेक्टर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण 2026 के दौरान प्रत्येक बीएलओ को प्रतिदिन की प्रगति रिपोर्ट बिना विलंब प्रस्तुत करनी है। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से वास्तविक समय में प्रगति की निगरानी की जा रही है, इसलिए किसी भी प्रकार की तथ्यहीन रिपोर्ट या अपूर्ण विवरण तत्काल पकड़े जा रहे हैं। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि सभी कर्मचारियों को मतदाता सूची से संबंधित सभी फ़ॉर्म — फ़ॉर्म 6, 7, 8 और 8A — का ज्ञान होना चाहिए और निर्दिष्ट समयसीमा में उनका निस्तारण कर रिपोर्टिंग करनी होगी।

प्रशासन का कहना है कि इस वर्ष विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया अत्यंत संवेदनशील और महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि 2026 में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी भी इसी अद्यतन मतदाता सूची पर निर्भर करेगी। आयोग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि कोई भी नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे, इसके लिए घर-घर सत्यापन सुनिश्चित किया जाए। कलेक्टर ने कहा कि इस लक्ष्य को पूरा करने में निष्क्रियता या असावधानी लोकतंत्र के लिए खतरा बन सकती है। उन्होंने समस्त अधिकारियों को चेताया कि पुनरीक्षण कार्य में शत-प्रतिशत पारदर्शिता और सटीकता होनी चाहिए।

निर्वाचन कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, नरेला क्षेत्र के कई इलाकों में नए आवासीय क्षेत्रों का तेजी से विस्तार हुआ है, जिसके कारण बड़ी संख्या में नए मतदाता सूची अपडेट की आवश्यकता है। कई स्थानों पर किरायेदारों और आवास बदलने वाले मतदाताओं की संख्या भी ज्यादा है। ऐसे में बीएलओ को अधिक सतर्कता और परिश्रम से कार्य करने की आवश्यकता है। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने पाया कि कई क्षेत्रों में नए मतदाता के रूप में युवाओं का पंजीकरण अभी भी अपर्याप्त है, जबकि आयोग की प्राथमिकता 18 वर्ष से अधिक आयु वाले प्रत्येक पात्र युवक-युवती का नाम मतदाता सूची में शामिल करना है।

इस कार्रवाई के बाद निर्वाचन कार्यालय सक्रिय मोड में आ गया है और पूरे जिले में निगरानी और सख्त कर दी गई है। बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में अन्य विधानसभा क्षेत्रों का भी औचक निरीक्षण किया जाएगा, ताकि मतदाता सूची अद्यतन कार्य को समय पर और गुणवत्तापूर्वक पूरा किया जा सके। कलेक्टर ने यह भी निर्देश दिया कि सभी बीएलओ अपने क्षेत्र के महत्वपूर्ण संस्थानों, कॉलेजों और सामाजिक संगठनों के साथ समन्वय स्थापित कर नए मतदाताओं को जागरूक करें। उन्होंने कहा कि युवाओं में जागरूकता अभियान चलाकर उन्हें मतदाता पंजीकरण के लिए प्रेरित किया जाए।

इस बीच, नरेला क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों और स्थानीय संगठनों ने भी प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई का स्वागत किया है। उनका मानना है कि समय पर मतदाता सूची का अद्यतन होना अत्यंत आवश्यक है, ताकि आगामी चुनाव प्रक्रिया सुचारू रहे। कई निवासियों ने कहा कि अक्सर बीएलओ घर पर मौजूद नहीं मिलते या पते के सही सत्यापन में लापरवाही बरतते हैं, जिससे नाम गलत छूटने या गलत रूप से दर्ज होने जैसी समस्याएँ सामने आती हैं। इस पर प्रशासन का ध्यान जाना सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

कलेक्टर सिंह ने सभी कर्मचारियों के लिए यह भी आवश्यक किया है कि वे अपने मोबाइल एप्लीकेशन, टेबलेट और फॉर्म भरने की प्रक्रिया पूरी तरह अपडेट रखें। तकनीकी रूप से दक्षता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि डेटा एंट्री में त्रुटियाँ न हों। उन्होंने कहा कि बीएलओ और सुपरवाइजर की भूमिका तकनीकी रूप से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि मतदाता सूची अब पूरी तरह डिजिटल हो चुकी है और किसी भी त्रुटि का असर व्यापक रूप से पड़ सकता है।

कुल मिलाकर नरेला विधानसभा क्षेत्र में की गई यह कार्रवाई निर्वाचन कार्य में जिम्मेदारी और पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रशासन के अनुसार बीएलओ और सुपरवाइजर को जारी नोटिस मात्र औपचारिक चेतावनी नहीं बल्कि एक सुधारात्मक कदम है, जिसका उद्देश्य पूरे निर्वाचन तंत्र को सक्रिय, जागरूक और जिम्मेदार बनाना है। अब सभी की निगाहें इस बात पर होंगी कि नोटिस के बाद संबंधित कर्मचारी अपने कार्य में कितनी सुधार लाते हैं और क्या आने वाले दिनों में निर्धारित लक्ष्य समय पर पूरे किए जाते हैं।

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