
एपीके फाइल डाउनलोड करते ही मोबाइल हैक, खाते से 4.44 लाख रुपये साफ
बाराबंकी (उत्तर प्रदेश)। साइबर ठगों ने आम लोगों को ठगने के लिए एक बार फिर नया और खतरनाक तरीका अपनाया है। इस बार ठगों ने व्हाट्सएप के जरिए सड़क हादसे की फर्जी फोटो भेजकर एक युवक को जाल में फंसा लिया। जैसे ही पीड़ित युवक ने फोटो समझकर भेजी गई एपीके फाइल को डाउनलोड किया, उसका मोबाइल पूरी तरह हैक हो गया और कुछ ही मिनटों में उसके बैंक खाते से 4 लाख 44 हजार रुपये निकल गए। घटना के बाद पीड़ित ने थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
यह मामला बाराबंकी जिले का बताया जा रहा है, जहां साइबर अपराधियों की इस नई चाल ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पुलिस और साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि यह ठगी का बेहद शातिर तरीका है, जिसमें भावनाओं और जिज्ञासा का फायदा उठाया जा रहा है।
व्हाट्सएप पर आई एक्सिडेंट की फोटो बनी ठगी की वजह
पीड़ित युवक के अनुसार, उसके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से व्हाट्सएप मैसेज आया। मैसेज में सड़क हादसे की एक फोटो दिखाई दे रही थी और साथ में लिखा था कि यह एक्सिडेंट किसी जानने वाले से जुड़ा हो सकता है, इसलिए तुरंत फोटो देखकर पहचान करें। फोटो के साथ एक एपीके फाइल भी भेजी गई थी, जिसे सामान्य फोटो समझकर युवक ने डाउनलोड कर लिया।
जैसे ही फाइल डाउनलोड हुई, मोबाइल में असामान्य गतिविधियां शुरू हो गईं। फोन अपने आप हैंग होने लगा, कई ऐप्स खुलने और बंद होने लगे और कुछ ही देर में बैंक से पैसे निकलने के मैसेज आने लगे। जब तक युवक कुछ समझ पाता, तब तक खाते से 4.44 लाख रुपये निकल चुके थे।
एपीके फाइल के जरिए मोबाइल पर पूरा नियंत्रण
साइबर जानकारों के अनुसार, एपीके फाइल एंड्रॉयड मोबाइल के लिए एक एप्लिकेशन फाइल होती है। यदि यह फाइल किसी अनजान स्रोत से आती है और डाउनलोड की जाती है, तो इसके जरिए ठग मोबाइल का पूरा कंट्रोल हासिल कर लेते हैं। इसके बाद वे ओटीपी, बैंकिंग ऐप्स, यूपीआई और अन्य संवेदनशील जानकारियों तक पहुंच बना लेते हैं।
इस मामले में भी ठगों ने पीड़ित के मोबाइल से बैंकिंग जानकारी चुराई और अलग-अलग ट्रांजैक्शन कर रकम निकाल ली। खास बात यह रही कि ठगों ने इतनी तेजी से रकम निकाली कि पीड़ित को बैंक जाकर खाता फ्रीज कराने का मौका तक नहीं मिला।
पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच शुरू
घटना की जानकारी मिलते ही पीड़ित ने स्थानीय थाने में तहरीर दी। पुलिस ने आईटी एक्ट और धोखाधड़ी से जुड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। साइबर सेल की टीम भी मामले की जांच में जुट गई है। पुलिस का कहना है कि ट्रांजैक्शन डिटेल, मोबाइल नंबर और आईपी एड्रेस के आधार पर ठगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि ठग किसी दूसरे राज्य से इस साइबर ठगी को अंजाम दे रहे हैं। जल्द ही संबंधित खातों और मोबाइल नंबरों को ट्रेस कर कार्रवाई की जाएगी।
बढ़ते साइबर अपराधों से बढ़ी चिंता
बाराबंकी सहित प्रदेश के अन्य जिलों में भी साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। कभी केवाईसी अपडेट के नाम पर, कभी लोन ऑफर के जरिए तो कभी ऐसे भावनात्मक मैसेज भेजकर ठगी की जा रही है। सड़क हादसे की फोटो भेजकर ठगी करना साइबर अपराधियों का नया हथकंडा माना जा रहा है, जिससे लोग आसानी से झांसे में आ जाते हैं।
पुलिस का कहना है कि अधिकतर मामलों में लोग जल्दबाजी या जानकारी के अभाव में अनजान लिंक और फाइल पर क्लिक कर देते हैं, जिसका फायदा ठग उठाते हैं।
पुलिस और प्रशासन की अपील: रहें सतर्क
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान नंबर से आए लिंक, फोटो या एपीके फाइल को डाउनलोड न करें। व्हाट्सएप या सोशल मीडिया पर यदि कोई संदिग्ध मैसेज आता है तो तुरंत उसे ब्लॉक करें और रिपोर्ट करें। किसी भी स्थिति में ओटीपी, बैंक डिटेल या व्यक्तिगत जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
साथ ही, यदि कोई साइबर ठगी का शिकार हो जाए तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत दर्ज कराएं या नजदीकी थाने में सूचना दें, ताकि समय रहते खाते को फ्रीज कराया जा सके और नुकसान को रोका जा सके।
सावधानी ही बचाव
विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराधों से बचने का सबसे बड़ा उपाय सतर्कता है। मोबाइल में अनजान स्रोतों से ऐप इंस्टॉल करने की अनुमति बंद रखें, समय-समय पर बैंक खातों की जांच करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई करें।
बाराबंकी की यह घटना एक बार फिर चेतावनी है कि साइबर ठग लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं और थोड़ी सी लापरवाही भारी नुकसान में बदल सकती है। ऐसे में जागरूक रहना और दूसरों को भी सतर्क करना बेहद जरूरी है।









