
नई दिल्ली। डिजिटल युग में किताबें पढ़ने का तरीका तेजी से बदल रहा है। मोबाइल, टैबलेट और ई-रीडर पर ई-बुक पढ़ना अब आम हो गया है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ई-बुक का अत्यधिक उपयोग सेहत और नींद पर नकारात्मक असर डाल सकता है। हालिया अध्ययनों और चिकित्सकीय अनुभवों के आधार पर डॉक्टरों ने इसे लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ई-बुक पढ़ने के दौरान स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट शरीर की जैविक घड़ी यानी सर्कैडियन रिदम को प्रभावित करती है। इससे नींद का हार्मोन मेलाटोनिन कम बनता है, जिसका सीधा असर नींद की गुणवत्ता पर पड़ता है। खासकर रात के समय ई-बुक पढ़ने से नींद आने में देरी, बार-बार नींद टूटना और अनिद्रा जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
आंखों पर बढ़ता दबाव
नेत्र रोग विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। ई-बुक पढ़ने से आंखों में जलन, सूखापन, धुंधलापन और सिरदर्द की शिकायत आम हो रही है। लगातार स्क्रीन देखने से डिजिटल आई स्ट्रेन (Digital Eye Strain) की समस्या भी बढ़ रही है, जो आगे चलकर दृष्टि पर असर डाल सकती है।
मानसिक थकान और तनाव
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, ई-बुक पढ़ते समय दिमाग लगातार सक्रिय रहता है, क्योंकि स्क्रीन से मिलने वाले विज़ुअल सिग्नल दिमाग को पूरी तरह आराम नहीं करने देते। इससे मानसिक थकान, चिड़चिड़ापन और तनाव बढ़ सकता है। विशेष रूप से बच्चों और युवाओं में इसका असर अधिक देखा जा रहा है।
बच्चों पर ज्यादा असर
बाल रोग विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों में ई-बुक और डिजिटल डिवाइस का अत्यधिक उपयोग नींद, एकाग्रता और व्यवहार पर असर डाल सकता है। स्क्रीन टाइम बढ़ने से बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि कम होना, आंखों की समस्या और नींद की कमी जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं।
प्रिंटेड किताबें क्यों बेहतर?
विशेषज्ञों का कहना है कि छपी हुई किताबें (प्रिंट बुक्स) ई-बुक की तुलना में सेहत के लिए अधिक सुरक्षित हैं। कागज़ की किताबें आंखों पर कम दबाव डालती हैं और पढ़ते समय दिमाग को स्वाभाविक आराम मिलता है। साथ ही, प्रिंट बुक्स से पढ़ने पर नींद की गुणवत्ता भी बेहतर रहती है।
बचाव के उपाय
डॉक्टरों ने ई-बुक पढ़ने वालों के लिए कुछ जरूरी सुझाव दिए हैं—
रात में सोने से कम से कम एक घंटे पहले स्क्रीन से दूरी बनाए रखें।
ब्लू लाइट फ़िल्टर या नाइट मोड का उपयोग करें।
हर 20–30 मिनट में आंखों को आराम दें।
संभव हो तो दिन के समय ही ई-बुक पढ़ें।
बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम सीमित रखें।
संतुलन जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि ई-बुक पूरी तरह से नुकसानदेह नहीं हैं, लेकिन अत्यधिक और गलत समय पर उपयोग सेहत और नींद के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। डिजिटल सुविधा और स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।
संक्षेप में, तकनीक के इस दौर में पढ़ने के साधन बदले हैं, लेकिन सेहत को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। इसलिए ई-बुक का उपयोग सोच-समझकर और सीमित समय के लिए करना ही बेहतर है।









